मुरादाबाद

 मुरादाबाद से एक हैरान कर देने वाली खबर सामने आई है। यहां 200 से ज्यादा मरीजों में एड्स का संक्रमण मिला है। एचआईवी एड्स के संक्रमण की गिरफ्त में बच्चे भी तेजी के साथ आ रहे हैं। मुरादाबाद के जिला अस्पताल स्थित एंटीरेटरोवायरल ट्रीटमेंट (एआरटी)) सेंटर पर एड्स का इलाज शुरू कराने वाले बच्चों की संख्या दो सौ के पार पहुंच गई है। मुरादाबाद में एड्स की चपेट में आए बच्चों की यह संख्या मेरठ मेडिकल कॉलेज में उपचार करा रहे एड्स पीड़ित बच्चों से अधिक दर्ज की गई है।

एंटीरेटरोवायरल ट्रीटमेंट सेंटर पर एड्स से पीड़ित जिन बच्चों का इलाज चल रहा है उनमें सौ से अधिक बच्चे दस साल से कम उम्र के हैं। कुछ ही समय पहले नौ महीने की एक बच्ची एड्स से संक्रमित पाई गई थी जिसका इलाज एआरटी सेंटर पर चल रहा है। मुरादाबाद में एड्स की बीमारी से पीड़ित मिले ऐसे बच्चों की संख्या अधिक है जिनके माता-पिता इस बीमारी से संक्रमित हैं। कुछ बच्चे ऐसे हैं जिनके माता या पिता में से कोई एक एड्स का मरीज है जबकि कुछ बच्चे ऐसे भी हैं जिनके माता-पिता में से कोई इस गंभीर बीमारी का शिकार नहीं हुआ है।

अनुमान है कि ऐसे बच्चे झोलाछापों से इलाज के दौरान संक्रमित खून चढ़ाए जाने के कारण इस बीमारी का शिकार हुए। एआरटी सेंटर के परामर्शदाता रत्नेश शर्मा ने बताया कि एड्स पीड़ित सभी बच्चों का निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुरूप इलाज किया जा रहा है। एड्स पीड़ित बच्चों के साथ उनके माता पिता की भी नियमित रूप से काउंसलिंग की जा रही है।

एड्स मरीजों की दवा का संकट, अब लोकल होगी खरीद

एंटीरेटरोवायरल ट्रीटमेंट सेंटर जहां एचआईवी एड्स के मरीजों का इलाज किया जा रहा है वहां उनके लिए कई जरूरी दवाओं का संकट पैदा हो गया है। प्रदेश के लगभग सभी एंटीरेटरोवायरल ट्रीटमेंट सेंटरों पर दवा की किल्लत है। कई सेंटरों पर एड्स पीड़ित छोटे बच्चों को दिया जाने वाला सीरप भी उपलब्ध नहीं हो  पा रहा है। इसके कारण गोलियों को पीसकर ही बच्चों को दिया जा रहा है। इस किल्लत को देखते हुए ही यूपी एड्स कंट्रोल सोसाइटी ने सेंटरों को जरूरी दवाओं की लोकल स्तर पर खरीद के लिए बजट आवंटित किया है। अभी तक, सेंटरों पर एड्स कंट्रोल सोसाइटी ही दवाओं की आपूर्ति कर रही थी।