धर्मशाला
उत्तर प्रदेश से लापता नाबालिग को खुला आश्रय ने उसके स्वजनों से मिलवाया। अपने बच्चे को सही सलामत पाकर स्वजनों ने राहत की सांस ली है। खुला आश्रय संस्थान को बच्चे को उसके स्वजनों से मिलवाने के लिए काफी मेहनत करनी पड़ी। उनकी मेहनत का यह असर रहा कि स्वजनों का खोया हुआ बेटा आज उनके साथ है। कांगड़ा पुलिस ने इस बच्चे को खुला आश्रम धर्मशाला पहुंचाया था। खुला आश्रय के स्टाफ ने बच्चे द्वारा बताए गांव के नाम के आधार पर लगातार इंटरनेट सर्चिंग की, जिस पर प्रधान से बात हुई तो प्रधान को बच्चे के बारे में बताया गया। चाइल्ड वेल्फेयर कमेटी की अनुमति से बच्चे को उत्तर से आए स्वजनों के हवाले कर दिया गया। खुला आश्रय का संचालन उत्थान संस्था के तहत किया जा रहा है।

जानकारी के अनुसार उत्तर प्रदेश के गांव का एक बच्चा 13 मई से लापता था, घर वालों ने बहुत ढूंढा। लेकिन कोई सुराग नहीं लग पाया। जिस पर परिजनों ने संबंधित पुलिस थाना में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करवाई थी। पांच जून को कांगड़ा पुलिस की टीम एक बच्चे को धर्मशाला स्थित खुला आश्रय धर्मशाला छोड़ गई। खुला आश्रय की टीम ने जब बच्चे से बातचीत करके जानकारी हासिल करनी चाही तो बच्चे को मात्र अपने गांव का नाम याद था। जिस पर खुला आश्रय की टीम को बच्चे के स्वजनों से संपर्क करने में खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।

यह बोले स्वास्तिक मस्ताना
उत्थान संस्था के निदेशक एवं खुला आश्रय के समन्वयक स्वास्तिक मस्ताना ने बताया कि जब से बच्चा उनके पास आया था और जो गांव का नाम उसने बताया था, उसे वह लगातार इंटरनेट पर सर्च कर रहे थे। जैसे-तैसे बच्चे के गांव नौहरना के प्रधान बारे पता चला। प्रधान से बातचीत की तो उसने बताया कि उनके गांव का ही बच्चा है, जो कि 13 मई से लापता है। प्रधान ने बच्चे के स्वजनों को जानकारी दी। स्वास्तिक ने बताया कि स्वजनों को धर्मशाला आने बारे जानकारी दी गई, क्योंकि वह पहले कभी धर्मशाला नहीं आए थे। बकौल स्वास्तिक खुला आश्रय में किसी भी बच्चे को रखने व उसके स्वजनों को सौंपने के लिए चाइल्ड वेल्फेयर कमेटी की अनुमति जरूरी होती है, कमेटी की मंजूरी पर ही बच्चे को यहां रखा गया था और कमेटी की अनुमति पर ही बच्चे को उसके स्वजनों के हवाले किया गया है।

बच्चे के पिता ने यह कहा
उधर बच्चे के पिता अत्तर सिंह निवासी नौराहन गजाना, अमरोहा जिला उतर प्रदेश ने बताया कि उनका बच्चा 13 मई से गायब था, जिसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट स्थानीय थाना में दर्ज करवाई गई थी। बच्चे को हर जगह ढूंढा, लेकिन कोई सुराग नहीं लग पाया था। अब उनका बच्चा मिल गया है, वह बेहद खुश हैं। बच्चा यहां कैसे पहुंचा, कुछ नहीं कहा जा सकता। उन्होंने अपने बेटे को उनसे मिलाने के लिए खुला आश्रय का आभार प्रकट किया है।