चंडीगढ़
कोरोना संक्रमण के कारण लगे लाकडाउन के कारण देशभर में लोगों को सामाजिक कार्यक्रम कैंसिल करने पड़े थे। इस दौरान लोगों की होटलों व मैरिज पैलेसों की दी गई एडवांस राशि फंस गई। पंचकूला के एक ऐसे ही मामले में उपभोक्ता फोरम में महत्वपूर्ण फैसला दिया है।  दरअसल, एडवोकेट अभय गर्ग ने अपनी शादी के कार्यक्रम के लिए पंचकूला स्थित होटल नार्थ पार्क में बुकिंग की, लेकिन लाकडाउन लगने की वजह से शिकायतकर्ता की शादी का कार्यक्रम रद हो गया। शादी के कार्यक्रम के लिए एडवांस में डेढ़ लाख रुपये होटल प्रबंधन को दे दिए थे, लेकिन कार्यक्रम रद होने की वजह से एडवांस राशि वापस मांगने पर होटल प्रबंधक ने राशि देने से साफ मना कर दिया।

इस बात को लेकर एडवोकेट अभय गर्ग ने पंचकूला उपभोक्ता आयोग में शिकायत दी, जिस पर सुनवाई करते हुए आयोग ने होटल प्रबंधक को नौ फीसद प्रति वर्ष ब्याज के साथ डेढ़ लाख रुपये वापस करने का आदेश दिया।इसके अलावा शिकायतकर्ता को मानसिक रूप से परेशान करने के लिए दस हजार रुपये हर्जाना भी लगाया। एडवोकेट अभय ने अपना केस स्वयं लड़ा और उन्हाेंने बताया कि शादी के लिए दो दिनों के कार्यक्रम का खर्च 6 लाख 45 हजार रुपये बताया गया। इसके बाद उन्होंने होटल प्रबंधक को डेढ़ लाख रुपये एडवांस दिए। जब पैसे वापस मांगे तो होटल प्रबंधक का बर्ताव बहुत ही शर्मनाक रहा। उन्होंने डेढ़ लाख रुपये वापस देने से साफ मना कर दिया। उन्होंने कहा कि अगर होटल प्रबंधक का एक एडवोकेट के साथ ऐसा बर्ताव रहा तो दूसरे लोगों के साथ यह किस प्रकार का व्यवहार करते होंगे। होटल प्रबंधक को उन्होंने दो अप्रैल को अपने नंबर से वाट्सएप से मैसेज कर कार्यक्रम रद होने की जानकारी दी थी।

होटल प्रबंधक का कहना था नान रिफंडेबल है राशि
अभय ने बताया कि होटल के बुकिंग इंचार्ज और मैनेजर ने उनका फोन उठाना बंद कर दिया। वह उन्हें मैसेज भेजते रहे, लेकिन उन्होंने उसका भी जवाब नहीं दिया। इसके अलावा होटल प्रबंधक ने शिकायतकर्ता को कार्यों के लिए कोई सेवा देने से भी इन्कार किया और बुकिंग राशि डेढ़ लाख रुपये भी नहीं दी। इस बात को लेकर शिकायतकर्ता होटल के कार्यालय गए, लेकिन होटल प्रबंधन ने उन्हें परिसर में प्रवेश करने की अनुमति नहीं दी।

लीगल नोटिस का भी नहीं दिया जवाब
शिकायतकर्ता ने होटल प्रबंधन को दो लीगल नोटिस भेजे थे, लेकिन उन्होंने एक नोटिस का भी जवाब नहीं दिया।उनके इस शर्मनाक बर्ताव की वजह से एडवोकेट गर्ग कई बार उनको काल करके राशि वापस मांगने से भी कतराने लगे। जब होटल प्रबंधन की ओर से कोई भी संतोषजनक जवाब नहीं मिला ताे उन्होंने आयोग में शिकायत दर्ज की।