नई दिल्ली।
 
देश में बड़े पैमाने पर निर्मित ड्रोन का सेना ने तकनीकी आंतरिक परीक्षण शुरू कर दिया है। इन्हें लद्दाख के ऊंचाई वाले इलाकों में परखा जा रहा है। परीक्षण में खरे उतरने वाले ड्रोन को सेनाओं में सैन्य एवं गैर सैन्य कार्य के लिए उपयोग की मंजूरी मिलने का रास्ता साफ हो जाएगा। सेना निगरानी के साथ-साथ विभिन्न प्रकार की सामग्री भेजने के लिए भी ड्रोन का इस्तेमाल करने की इच्छुक है।

सेना से जुड़े सूत्रों के अनुसार, आर्मी डिजाइन ब्यूरो ने देश के सभी ड्रोन उत्पादकों से कहा है कि वे परीक्षण के लिए अपने ड्रोन लेकर लद्दाख आएं। ब्यूरो के विशेषज्ञों की टीम द्वारा लद्दाख के ऊंचे इलाकों में इनका परीक्षण किया जा रहा है, जो आगामी 31 जुलाई तक जारी रहेगा। यदि देश में निर्मित ड्रोन इस परीक्षण में खरे उतरते हैं तो सेना बड़े पैमाने पर ऊंचे इलाकों में रसद और अन्य सामग्री पहुंचाने के लिए उनका इस्तेमाल कर सकती है। जबकि निगरानी के उद्देश्य से भी डीआरडीओ समेत कुछ कंपनियों के ड्रोन की जांच की जा रही है। इसमें यह देखा जा रहा है कि ऊंची पहाड़ियों और सर्द मौसम, तेज हवाओं के बीच ये ड्रोन कितनी सफलतापूर्वक और कितने समय तक उड़ान भर सकते हैं।
 
क्या है ड्रोन नीति?
बता दें कि केंद्र सरकार द्वारा पिछले साल घोषित ड्रोन नीति के तहत 500 किग्रा तक का सामान ड्रोन के जरिये ले जाया जा सकता है। स्वास्थ्य, कृषि समेत कई क्षेत्रों में ड्रोन के इस्तेमाल की मंजूरी भी प्रदान की गई है। देश में ड्रोन के डिजाइन और निर्माण के क्षेत्र में हाल के कुछ वर्षों में खासी प्रगति हुई है। दर्जनों स्टार्टअप समेत करीब 100 से अधिक कंपनियां ड्रोन के निर्माण से जुड़े कार्य में लगी हैं।

तेजी से निवेश कर रहीं कंपनियां
एक अध्ययन के अनुसार, 2021 में ड्रोन की ब्रिक्री महज 60 करोड़ की थी, लेकिन जिस प्रकार से आने वाले दिनों में इसका इस्तेमाल बढ़ेगा, उसके मद्देनजर 2024 तक ड्रोन का 900 करोड़ और 2026 तक 15 हजार करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है। ड्रोन के क्षेत्र में एक तरफ जहां स्टार्टअप महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं, वहीं अडानी इंटरप्राइजेज जैसी कंपनियां इसमें तेजी से निवेश कर रही हैं।