नई दिल्‍ली
भारत और चीन के बीच सीमा पर जारी गतिरोध को खत्‍म करने को लेकर वार्ता की पहल एकबार फ‍िर दोनों देशों की ओर से शुरू हो गई है। भारत और चीन पूर्वी लद्दाख में जारी तनाव के बीच 17 जुलाई को कोर कमांडर स्तर की 16वें दौर की वार्ता कर सकते हैं। इस बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व लेफ्टिनेंट जनरल ए. सेनगुप्ता करेंगे। समाचार एजेंसी एएनआइ की रिपोर्ट के मुताबिक इस बैठक में पूर्वी लद्दाख में एलएसी से सटे टकराव के बिंदुओं से टुकड़‍ियों की वापसी को लेकर चर्चा होगी। मालूम हो कि दोनों देशों की सेनाओं के बीच अब तक 15 दौर तक की बातचीत हो चुकी है लेकिन इन बातचीत का कोई ठोस और मुकम्‍मल नतीता नहीं निकल पाया है। हालां‍कि दोनों देशों के सेनाओं की ओर से कोर कमांडर स्‍तर की इन वार्ताओं को बेहद सकारात्मक और रचनात्मक करार दिया गया है। दोनों पक्ष पहले ही साफ कर चुके हैं कि वे इस मसले पर किसी तीसरे पक्ष की दखलंदाजी सहन नहीं करेंगे। पिछली वार्ता में दोनों पक्ष सैन्य एवं राजनयिक चैनलों के जरिए बातचीत जारी रखने पर सहमत हुए थे।  

15वें दौर की कोर कमांडर स्तर की वार्ता (military commanders level talks) के दौरान भारत और चीन दोनों ही पक्ष पश्चिमी क्षेत्र में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर सुरक्षा और स्थिरता बनाए रखने पर सहमत हुए थे। दोनों देशों के बीच पिछली बैठक 11 मार्च 2022 को भारत की ओर चुशुल मोल्दो में हुई थी। अब तक हुई सैन्‍य वार्ताओं का सबसे बेहतर नतीजा यह निकला है कि पैंगोंग झील, गलवान और गोगरा हाट स्प्रिंग क्षेत्रों के उत्तर और दक्षिण बैंक में तनाव कुछ हद तक कम हुआ है। भारत लगातार देपसांग और देमचोक में लंबित मुद्दों को सुलझाने समेत गतिरोध के बाकी स्थलों से सेनाओं की वापसी पर जोर दे रहा है। भारत पहले ही साफ कर चुका है कि वह सीमा पर किया गया कोई भौतिक बदलाव सहन नहीं करेगा। मालूम हो कि 14वें दौर की कोर कमांडर स्तर की वार्ता 12 जनवरी को हुई थी। इस वार्ता में भी गतिरोध के बाकी स्थलों के समाधान की दिशा में कोई उल्लेखनीय प्रगति नहीं हुई थी। चीन के मंसूबों को भांपते हुए भारतीय सेनाएं भी मोर्चे पर मुस्‍तैद हैं।