रायपुर
पूरे छत्तीसगढ़ में पेट्रोल व डीजल की किल्लत पिछले दस बारह दिनों से बनी हुई है। आॅयल कंपनियां अलग-अलग बहानों से तेल की आपूर्ति रोक रहीं हैं। हालात ऐसे हैं कि डीलरों की ओर से अग्रिम भुगतान के बाद भी तेल की खेप नहीं पहुंच रही है। इन सबके बीच प्रशासन अब तक लगभग लाचार है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने केंद्र सरकार से पूछा है कि क्या हम श्रीलंका जैसे हालात की ओर बढ़ रहे हैं?इधर डीलर भी पूछने लगे हैं कि अगर सब ठीक है तो तेल मिल क्यों नहीं रहा?

अब तक जो बातें सामने आई है कि पेट्रोल-डीजल के जो नए रेट आए हैं उनसे उनको नुकसान हो रहा है। वहीं कंपनी ने भुगतान की नीति बदली है। अब एडवांस पेमेंट मिलने पर ही टैंकर रवाना किया जा रहा है। जो डीलर एडवांस पेमेंट नहीं कर रहे, उनके यहां तेल की खेप पहुंचने में दिक्कत हो सकती है। जिला प्रशासन के पूछने पर कंपनी के क्षेत्रीय कार्यकारी अधिकारियों ने बताया था कि रिफाइनरी में तकनीकी दिक्कत की वजह से आपूर्ति प्रभावित हुई है।

छत्तीसगढ़ पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अखिल धगट का कहना है कि भुगतान की कोई समस्या ही नहीं है। पहले आॅर्डर पर कंपनी ट्रक रवाना कर देती थी, उसकी मांग यही रहती थी कि उसी दिन शाम तक उसका भुगतान उनको मिल जाए। ऐसा होता भी था। बाद में कंपनियों ने अग्रिम भुगतान का सिस्टम शुरू किया। शुरू में कुछ लोगों ने लापरवाही की, लेकिन लंबे समय से अग्रिम भुगतान पर तेल मंगाना चल रहा था। पिछले कुछ दिनों से ऐसा हुआ कि अग्रिम भुगतान के चार-पांच दिन बाद भी तेल की खेप नहीं पहुंच रही है।यहां डीलर और ग्राहक किल्लत से जूझ रहा है। केंद्र सरकार का कहना है कि कहीं कोई किल्लत नहीं है। सब सामान्य है। उनके बाद तीनों कंपनियों, इंडियन आॅयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम के प्रमुख भी कह रहे हैं कि सब ठीक है। अब सवाल उठने लगा हैं कि अगर सब ठीक है तो तेल मिल क्यों नहीं रहा?

मुख्यमंत्री बोले, स्थिति स्पष्ट क्यों नहीं करती केंद्र सरकार
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने पेट्रोल-डीजल की किल्लत को आर्थिक संकट से जोड़ दिया है। मुख्यमंत्री ने कहा, पूरे देश में आपूर्ति घटाई जा रही है। क्या हम लोग श्रीलंका की जो स्थिति है उस दिशा में जा रहे हैं। वहां सबसे पहले पेट्रोल-डीजल मिलना ही बंद हुआ था। केंद्र सरकार को यह मामला स्पष्ट करना चाहिए।