नई दिल्ली
दिल्ली उच्च न्यायालय ने कथित चीनी वीजा घोटाले के मामले में मंगलवार को कांग्रेस सांसद कार्ति पी चिदम्बरम की अग्रिम जमानत अर्जी को 18 अगस्त को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया।न्यायमूर्ति पूनम ए बंबा ने मंगलवार को इस अर्जी पर सुनवाई तब टाल दी जब मामले की जांच कर रहे प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के वकील ने अदालत से कहा कि अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस वी राजू उपलब्ध नहीं हैं।

जांच एजेंसी (ईडी) ने मौखिक रूप से यह भी कहा कि कार्ति के विरूद्ध दंडात्मक कार्रवाई न करने को लेकर उसने जो आश्वासन दिया था, उसपर वह अगली तारीख तक कायम रहेगी।कार्ति ने अग्रिम जमानत के लिए उच्च न्यायालय का रूख किया था, क्योंकि उससे पहले तीन जून को उनकी एवं दो अन्य की अग्रिम जमानत याचिका निचली अदालत ने इस आधार पर खारिज कर दी थी कि अपराध गंभीर किस्म का है।

ईडी ने इस कथित घोटाले के सिलसिले में कार्ति एवं अन्य के विरूद्ध धनशोधन का मामला दर्ज किया था। यह कथित घोटाला 2011 में 263 चीनी नागरिकों को वीजा जारी करने से जुड़ा है जब कार्ति के पिता पी चिदम्बरम गृहमंत्री थे।ईडी ने कहा है कि इस मामले में शोधित कालेधन की मात्रा का अभी जांच में निर्धारण किया जाना बाकी है तथा सीबीआई मामले में उल्लेखित 50 लाख रुपये की रिश्वत को इस मामले का आधार नहीं माना/समझा जा सकता है ।

उसने इस मामले में सीबीआई की प्राथमिकी का संज्ञान लेते हुए धनशोधन निवारण अधिनियम के प्रावधानों के तहत अपना मामला दर्ज किया है।

पिछले महीने छुट्टियों के दौरान जब इस मामले की सुनवाई चल रही थी तब ईडी ने यह कहते हुए अग्रिम जमानत का विरोध किया था कि कार्ति महज उस कल्पना पर आवेदन नहीं दे सकते जिसमें उनकी गिरफ्तारी की कोई असली आशंका दिखती भी नहीं है।ईडी ने कहा था कि आवेदन जल्दबाजी में दिया गया है क्योंकि मामले की अबतक जांच भी शुरू नहीं हुई है और कार्ति को अबतक समन भी नहीं भेजा गया है।