ग्वालियर
नगर सरकार के चुनाव में कांग्रेस ने जहां 57 साल का रिकॉर्ड तोड़कर इतिहास रच दिया है, वहीं सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी अपने तमाम दिग्गजों को प्रचार में उतारकर भी अपना किला नहीं बचा पाई। हाल ये है कि सूबे की सरकार में बीजेपी के दो-दो स्थानीय मंत्री भी अपने गढ़ बचाने में नाकाम रहे, जिससे पार्टी को अप्रत्याशित रूप से पराजय का मुंह देखना पड़ा। इस चुनाव में कांग्रेस ने न केवल नगर निगम चुनाव में अब तक का बेहतरीन प्रदर्शन किया है बल्कि महापौर बनी शोभा सिकरवार ने अपनी जीत के साथ-साथ परिषद में पार्टी के वजन को भी ढाई गुना से अधिक बढ़ाने के दमदार परफॉर्मेंस के साथ कांग्रेस के लिए भविष्य की राजनीति के द्वार खोल दिए हैं। कांग्रेस ने इस बार 26 वार्डों पर सीधी जीत दर्ज की है। साथ ही एक-दो निर्दलीय भी अभी से उसके पाले में खड़े हैं, जबकि विगत नगर निगम चुनाव (2014) में वह केवल 10 वार्डोें में ही जीती थी।

मंत्रियों के गढ़ में आधा दर्जन वार्ड फिसले
तमाम दिग्गज नेताओं के जरिए चुनाव में ताकत झौंकने के बावजूद जिले से भाजपा के दोनों मंत्रियों के विधानसभा क्षेत्रों में पार्टी के हाथ से आधा दर्जन वार्ड फिसल गए। यहां मिली हार को भाजपा के लिए नगर सरकार की सत्ता से बाहर होने का बड़ा कारण माना जा रहा है। ऊर्जा मंत्री की ग्वालियर विधानसभा में कांग्रेस की झोली में इस बार 9 वार्ड आए हैं जबकि उनका एक बागी भी पार्टी के  साथ है। इस तरह पिछली बार के 5 से आगे बढ़कर वह 10 वार्ड लेकर मजबूती खड़ी है। वहीं बीते चुनाव में भारत सिंह कुशवाह की ग्वालियर ग्रामीण विधानसभा के सभी 6 वार्डों पर काबिज रहीं भाजपा इस बार केवल दो वार्डों में ही सिमटकर रह गई और कांग्रेस वहां खाता खोलने में कामयाब रही है।

तब 91 हजार वोटों से हारी कांग्रेस अब 28 हजार से जीती
नगर निगम परिषद की सत्ता में कांग्रेस का 57 साल का वनवास खत्म करते हुए शोभा सिकरवार 28805 वोटों से विजयी हुई हैं। उन्हें 2,35,154 मत मिले जबकि भाजपा की सुमन शर्मा को 2,06,349 वोट मिले। वहीं 2014 में हुए नगर निगम चुनाव में बीजेपी ने 91004 मतों से विजय हासिल करते हुए प्रदेश में सबसे बड़ी जीत का रिकॉर्ड बनाया था। उस चुनाव में भाजपा के विवेक शेजवलकर को 2,64,250 और कांग्रेस के डॉ. दर्शन सिंह को 1,73,246 वोट मिले थे।