भारत सरकार ने अपने कर्मचारियों को Google ड्राइव और ड्रॉपबॉक्स जैसे थर्ड-पार्टी और गैर-सरकारी क्लाउड प्लेटफ़ॉर्म का उपयोग करने से बैन कर दिया है। सरकारी कर्मचारियों को भी वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क (VPN) सेवाओं का उपयोग करने से बैन कर दिया गया है। यह कदम देश की नई वीपीएन नीति की घोषणा के बाद आया है। कई मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, यह आदेश राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) द्वारा पारित किया गया है और सभी मंत्रालयों और विभागों को प्रसारित किया गया है। अधिकारियों ने सभी सरकारी कर्मचारियों से निर्देश का पालन करने को कहा है।

सरकार ने वीपीएन और क्लाउड सर्विस पर लगाई रोक
सरकार द्वारा नई वीपीएन नीति की घोषणा करने के कुछ ही हफ्तों बाद यह कदम लागू होता है, जिसके लिए वीपीएन सेवा प्रदाताओं और डेटा सेंटर कंपनियों को यूजर डेटा को पांच साल तक स्टोर करने की आवश्यकता होती है। नई नीति वीपीएन के मूल विचार के खिलाफ जाती है। गैजेट्स360 की रिपोर्ट के अनुसार, वीपीएन और क्लाउड सर्विस के अलावा, भारत सरकार ने कर्मचारियों को टीमव्यूअर, एनीडेस्क और एमी एडमिन जैसे "अनधिकृत रिमोट एडमिनिस्ट्रेशन टूल्स" का उपयोग न करने का भी निर्देश दिया है।

सरकारी कर्मचारियों को दिए गए हैं सख्त निर्देश
भारत सरकार ने अपने कर्मचारियों को "आंतरिक सरकारी दस्तावेजों को स्कैन करने के लिए" किसी भी बाहरी मोबाइल ऐप-आधारित स्कैनर सेवाओं "का उपयोग नहीं करने का निर्देश दिया है। आपको बता दें कि सबसे लोकप्रिय दस्तावेज़ स्कैनर ऐप में से एक, कैमस्कैनर, टिक्कॉक के साथ भारत में बैन कर दिया गया था और 2020 में पबजी मोबाइल को भी बैन कर दिया था। प्रकाशन से पता चला कि भारत सरकार ने कर्मचारियों को अपने मोबाइल फोन को "जेलब्रेक" या "रूट" नहीं करने का भी निर्देश दिया है। कर्मचारियों को अपने डिवाइस के लिए हार्ड पासवर्ड का इस्तेमाल करने के साथ-साथ 45 दिनों में एक बार पासवर्ड अपडेट करने के लिए भी कहा गया है।