भोपाल
नगरीय निकाय और पंचायत चुनाव की आचार संहिता के बीच मुख्यमंत्री जनकल्याण (संबल-2.0) योजना के लिए पंजीयन कराने के निर्देश श्रम विभाग ने दिए हैं। यह योजना 16 मई 2022 से परिवर्तित रूप में प्रारंभ की गई है। इसके लिए ग्रामीण क्षेत्र में मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत, नगरीय निकाय के लिए आयुक्त नगर निगम तथा सीएमओ नगरपालिका, नगर परिषद अधिकारी होंगे। विभाग ने कहा है कि पंजीयन कराने के लिए आवेदन एमपी आॅनलाईन/कॉमन सर्विस सेन्टर/लोक सेवा केन्द्रों के माध्यम से किए जा सकेंगे। संबंधित अधिकारी सात दिन में आवेदन की जांच कर रिपोर्ट देंगे।

विभाग द्वारा जारी निर्देशों में कहा गया है कि ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायत इंस्पेक्टर, एडीईओ, पंचायत समन्वयक अधिकारी तथा शहरी क्षेत्र में जोनल अधिकारी/वार्ड प्रभारी जांच अधिकारी होंगे। ये अधिकारी आॅनलाइन रिपोर्ट पदाभिहित अधिकारी को भेजेंगे जिसके आधार पर पंजीयन संबंधी निर्णय लेते हुए पदाभिहित अधिकारी पंजीयन जारी या निरस्त कर सकेगा। इसमें यह भी कहा गया है कि पंजीयन की स्वीकृति संबंधी निर्णय लोक सेवा गांरटी अधिनियम के अंतर्गत सम्मिलित किए जाने के कारण समय-सीमा में कार्यवाही पूर्ण किया जाना आवश्यक है।

विभाग ने कलेक्टरों को दिए निर्देश में कहा है कि वर्तमान में त्रि-स्तरीय ग्रांम पंचायत और नगरीय निकाय चुनावों की आदर्श आचार संहिता प्रभावशील है। इसलिए नए हितग्राहियों को योजना में शामिल नही किया जा सकता किन्तु प्राप्त आवेदनों पर जांच कार्यवाही पूर्ण कर निर्णय की स्थिति तक आवेदन को अपडेट किया जा सकता है जिसकी व्यवस्था पोर्टल पर उपलब्ध है। इसलिए कलेक्टरों को यह काम कराना होगा।

 प्रमुख सचिव श्रम ने सभी कलेक्टरों से कहा है कि जिले के संबंधित निकायवार प्राप्त आवेदन जो कि संबंधित निकायों की लॉगिन पर प्रदर्शित हो रहे है, उससे संबंधित अधिकारियों को कार्यवाही कर प्रक्रिया पूर्ण कराएं ताकि 18 जुलाई के बाद कार्यवाही पूरी की जा सके।

लुभाने की कोशिश पर लगे रोक
श्रम विभाग के इस फैसले की जानकारी के बाद बसपा और कांग्रेस के नेताओं ने सरकार के इस आदेश का विरोध किया है। इनका कहना है कि शहरी और ग्रामीण इलाकों में मजदूरों को संबल योजना में लाभ दिलाने का झांसा दिलाकर फार्म भराए जा रहे हैं। सरकार इस तरीके से वोटरों को लुभाने की कोशिश कर रही है। विभागों के मैदानी अमले के जरिये वोटर को बहकाने की कोशिश हो रही है जिस पर राज्य निर्वाचन आयोग को रोक लगानी चाहिए और चुनाव बाद ही इसके काम करने देना चाहिए।