लखनऊ
 केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर के मरीज को सरकारी वेंटिलेटर से लैस एम्बुलेंस कर्मचारियों ने निजी अस्पताल को बेच दिया। आरोप है कि केजीएमयू से रेफर मरीज को सरकारी एम्बुलेंस से बलरामपुर अस्पताल गेट तक लाया गया। कागजी कार्रवाई कर मरीज को कर्मचारियों ने दलाल से साठगांठ कर निजी एम्बुलेंस में रख दिया। परिजनों को किफायती इलाज का लालच दिया जिससे उन्होंने विरोध नहीं किया।

बंगला बाजार निवासी 28 वर्षीय शोएब हादसे में जख्मी हो गए। गंभीर हालत में परिजन सरकारी एम्बुलेंस से केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर लेकर पहुंचे। यहां डॉक्टरों ने वेंटिलेटर की जरूरत बताई। ट्रॉमा में वेंटिलेटर नहीं होने पर डॉक्टरों ने मरीज को प्राथमिक इलाज देकर वेंटिलेटर सपोर्ट के लिए बलरामपुर अस्पताल रेफर कर दिया। परिजन मरीज को सरकारी एम्बुलेंस से बलरामपुर अस्पताल पहुंचे, जहां गेट के पास कर्मचारियों ने एम्बुलेंस रोक दी और मरीज को निजी अस्पताल में वेंटिलेटर दिलाने का वादा किया। झांसे में आए परिजनों के हामी भरते कर्मचारियों ने तुरंत निजी अस्पताल को फोन किया। दस मिनट में निजी अस्पताल की एम्बुलेंस आ गई और कर्मचारियों ने मरीज को निजी एम्बुलेंस में रखकर रवाना कर दिया।

कैमरों की पहुंच से दूर एंबुलेंस खड़ी कर शिफ्टिंग
बलरामपुर अस्पताल गेट के पास सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। सरकारी एम्बुलेंस के कर्मचारी ने शातिर तरीके से एम्बुलेंस अस्पताल के पास ऐसे खड़ी की, जिससे वह सीसीटीवी की नजर से दूर रहे। बलरामपुर के सीएमएस डॉ. जीपी गुप्ता ने बताया कि सरकारी एम्बुलेंस परिसर में नहीं आई। निजी एम्बुलेंस की निगरानी हो रही है।