महासमुंद
यह बात वैश्विक महामारी कोरोना काल के चरम की है। इस महामारी में उस दौरान हर तरफ कहर ढाया, रोज कमानें वालें लोगों को रोजी-रोटी की समस्या भी हुई। महासमुन्द के रोज कमानें वालें लोग भी इससे अछूते नहीं रहें। उनमें फुटकर आलू-प्याज विक्रेता राजकुमार टण्डन को भी कोरोना कोविड-19 की मार छेलनी पड़ी। दुकान बंद और बिक्री भी कम थी। स्थानीय व्यापारी भी उधारी में आलू-प्याज देनें में आनाकानी कर रहें थे। मॉ और दो बेटों का भार भी उसी के कंधों पर था। उनकी पत्नी की मृत्यु लगभग 16 साल पहले हो गई थी। चार लोगों के जीवन-यापन का साधन, बच्चों की शिक्षा-दीक्षा, मॉ की ईलाज आदि का खर्चा उठाने में काफी दिक्कत हो रही थी। इस काल में उसके दु:खों पर मरहम लगाने वाला कोई नहीं था। कभी शून्य को ताकता तो कभी सूनी गलियों को निहारता। कोरोना संक्रमण के चलते उसकी सब्जी की दुकान भी प्रभावित हुई। रोजी-रोटी की समस्या भी उत्पन्न होने लगी। राज्य शासन द्वारा कराए जा रहें राशन का ही सहारा था। उसी से गुजर-बसर हो रही थी।

शासन की पथ विक्रेताओं के लिए चलाए जा रही योजना राजकुमार के लिए इस विपत्ति में सहारा बनी। स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि योजना के तहत् राजकुमार ने नगरपालिका महासमुन्द जाकर आॅनलाईन फॉर्म भरा एवं उसे एसबीआई से 10000 रुपए का ऋण मिला। राशि मिलते ही उन्होंने अपनी आलू-प्याज की दुकान पुन: शुरू की और अब उनकी दुकान आलू-प्याज की पर्याप्त मात्रा है। वह प्रतिदिन सेल कर 300 से 400 रूपए की मुनाफा कमा लेते है। राज्य और केन्द्र शासन की योजनाओं से उन्हें पुन: जीवनदान मिला। अब वह बचत राशि के साथ-साथ अपनी मॉ का इलाज कराने में भी सझम हो गए है। राजकुमार समय पर बैंक की किस्त भी अदा कर रहें है। अब वह समय के साथ आगे बढ़ रहें हैं। योजनाओं के अन्य लाभ जैसे ग्राहकों की सुविधा के लिए उनकी आलू-प्याज की दुकान में पेटीएम, गूगल पे डिजीटल भुगतान आदि की सुविधा भी ले रखी है।