दिल्ली

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने झारखंड की पूर्व खनन सचिव पूजा सिंघल के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग केस में चार्जशीट दाखिल कर दिया है. करीब 5 हजार पन्नों की इस चार्जशीट में कई खुलासे किए गए हैं. 2000 बैच की आईएएस अफसर पूजा सिंघल को मनरेगा फंड के गबन और संदिग्ध वित्तीय लेनदेन के मामले में गिरफ्तार किया गया है.

44 वर्षीय नौकरशाह पूजा सिंघल को झारखंड सरकार ने गिरफ्तारी के तुरंत बाद निलंबित कर दिया था. वह उद्योग सचिव के रूप में तैनात थीं और राज्य खनन और भूविज्ञान विभाग के सचिव का अतिरिक्त प्रभार संभाल रही थीं. इसके अलावा सुमन कुमार को भी गिरफ्तार कर लिया गया है. ये दोनों न्यायिक हिरासत में हैं.

ईडी ने 6 मई को रांची में सिंघल, उनके व्यवसायी पति अभिषेक झा और चार्टर्ड अकाउंटेंट के परिसरों पर सबसे पहले छापेमारी की थी. एजेंसी ने दावा किया था कि उसने सुमेर कुमार के आवास और कार्यालय परिसर से 17.79 करोड़ रुपये नकद जब्त किए. इन गिरफ्तारियों के बाद ईडी ने राज्य सरकार के कई अधिकारियों से भी पूछताछ की थी.

ईडी ने अदालत को बताया था कि रांची में अधिकारी पूजा सिंघल और उनके परिवार के स्वामित्व वाले एक मल्टी-स्पेशियलिटी अस्पताल का कथित तौर पर नौकरशाह द्वारा इस्तेमाल किया जा रहा था ताकि ब्लैक मनी को व्हाइट किया जा सके. पूजा सिंघल ने पल्स सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के निर्माण और प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी.

न्यूज एजेंसी की खबर के मुताबिक ईडी का दावा है, 'चार्टर्ड अकाउंटेंट ने खुलासा किया कि पूजा सिंघल के निर्देश पर, उसने पल्स अस्पताल की जमीन खरीदने के लिए एक प्रसिद्ध बिल्डर को 3 करोड़ रुपये नकद दिए थे.' इस मामले में पूर्व कनिष्ठ अभियंता राम बिनोद प्रसाद सिन्हा को एजेंसी ने 17 जून, 2020 को पश्चिम बंगाल से गिरफ्तार किया था.

मनरेगा के 18.06 करोड़ के घोटाले को लेकर ईडी ने जेई राम बिनोद सिन्हा पर चार्जशीट किया था. रामविनोद सिन्हा ने इस मामले में बताया था कि वह डीसी कार्यायल में पांच प्रतिशत कट मनी पहुंचाते थे. जांच एजेंसी ने दावा किया कि पूजा सिंघल ने 2007 और 2013 के बीच चतरा, खूंटी और पलामू के उपायुक्त / जिला मजिस्ट्रेट के रूप में कार्य किया था.

ईडी ने एक गवाह के बयान का हवाला देते हुए कहा कि वह सिन्हा द्वारा नौकरशाह पूजा सिंघल के लिए दिए गए पैसे को 'बंद बैग' में रखता था और बाद में इसे सिंघल को सौंप दिया करता था.