शहडोल
हमारे रिपोर्टर ने बताया कि ज्ञात हो कि लगातार सुर्खियों में चला आ रहा बहुचर्चित हायर सेकेंडरी जोधपुर का मामला जहां पर प्रभारी प्राचार्य राकेश श्रीवास्तव के द्वारा लगातार आतंक मचाया जा रहा है। आए दिन साहब के नए-नए किससे हम आपको वाकिफ कराते आ रहे हैं। प्रभारी प्रचार राकेश श्रीवास्तव जो कि संलग्न करण के आधार पर हायर सेकेंडरी जोधपुर में अपना खूंटा गाड़े हुए हैं। जबकि इनका मूल स्थान गोडरू  है  और आज भी साहब की वेतन वहीं से निकलती है ।

जोधपुर में नहीं हो रहा शासन के नियमों का पालन
जैसा की विधित है की राज्य स्तरीय परियोजना परीक्षण समिति में यह निर्णय लिया गया था कि समस्त प्राथमिक एवं माध्यमिक शालाओं में पदस्थ प्रधानाध्यापक एवं समस्त हाई स्कूल और हर सेकेंडरी स्कूलों में पदस्थ सभी प्राचार्य नियमित रूप से अपने विद्यालय में न्यूनतम दो काल खंडों में आवश्यक रूप से शैक्षणिक कार्य करें । एवं यह सुनिश्चित किया था की सभी प्रधानाध्यापक एवं प्राचार्य अपने विषय के दो कालखंड आवंटित करें और इसके साथ ही साथ अध्यापन वाली कक्षा एवं विषय का परीक्षा परिणाम भी प्रधानाध्यापक और प्रचार के नाम से दर्ज किया जावे।

यह आदेश लोक शिक्षण संचनालय भोपाल द्वारा 02/06/2016 को जारी किया गया।
जिसका पालन लगभग सभी विद्यालयों एवं शैक्षिक संस्थानों में किया गया किंतु हायर सेकेंडरी जोधपुर में प्रभारी प्राचार्य इतना ज्यादा हावी हो गए हैं कि यह अपने नियम स्वयं बनाते हैं शासन के किसी भी नियम का पालन इनके द्वारा नहीं किया जाता है नियमों को दरकिनार कर इनके द्वारा विद्यालय में अपने विषय के अतिथि शिक्षकों को रखे हुए हैं जोकि इनके विषय का अध्ययन कक्षा में कराते हैं। देखने में तो ऐसा लगता है कि प्रभारी प्राचार्य राकेश श्रीवास्तव को ना जाने ऐसा कौन सा संरक्षण शिक्षा विभाग द्वारा दिया जा रहा है जिसके चलते वह पूरे विद्यालय में अराजकता का माहौल बनाए हुए हैं अगर हाल ऐसा ही रहा तो आने वाले समय में जोधपुर हर सेकेंडरी में केवल और केवल राकेश श्रीवास्तव ही रह जाएंगे ।

क्या शिक्षा विभाग दे रहा राकेश श्रीवास्तव को संरक्षण………….?
अगर बात की जाए शिक्षा विभाग की तो आए दिन कई मामले इस विभाग के सामने आते हैं और समय-समय पर शासन प्रशासन के द्वारा इन पर कार्यवाही की जाती है। किंतु इस बार राकेश श्रीवास्तव प्रभारी प्राचार्य का मामला साफ होता नहीं दिखाई पड़ रहा ना जाने शिक्षा विभाग के अधिकारी और प्रशासन की कलम कहां अटक रही है आखिर क्यों नहीं राकेश श्रीवास्तव पर कोई कार्यवाही की जा रही। अब तो ऐसा प्रतीत होता है कि कहीं ना कहीं शिक्षा विभाग के आला अधिकारियों का खुला संरक्षण साहब को दिया जा रहा है पर वह कहते हैं ना कि सत्य परेशान हो सकता है किंतु पराजित नहीं।