भोपाल
 शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत प्रदेश के 26 हजार निजी स्कूलों में दो लाख 78 हजार सीटों के लिए पहले चरण की लाटरी निकाली गई। इसमें एक लाख 39 हजार आवेदकों को सीटें आवंटित की गई थीं। इसमें से एक लाख 20 हजार बच्चों ने प्रवेश लिया, जबकि 19 हजार ने प्रवेश नहीं लिया। अब इन्हें दूसरी लाटरी प्रक्रिया में शामिल किया जाएगा। पहले चरण में आवंटित सीटों पर प्रवेश लेने की अंतिम दिन था। अधिकारियों का कहना है कि अभिभावकों को आवंटित स्कूल पसंद नहीं आए होंगे। इस कारण प्रवेश नहीं लिया होगा। आरटीई के तहत हर साल प्रवेशित विद्यार्थियों की संख्या में कमी आ रही है। इसका कारण यह है कि बड़े स्कूल आरटीई के दायरे से बाहर हैं। वहीं छोटे निजी स्कूल पोर्टल पर प्रदर्शित हो रहे हैं। पोर्टल पर बड़े निजी स्कूलों का नाम नहीं होने के कारण अभिभावक अपने बच्चों को प्रवेश दिलाने से बच रहे हैं। हर साल करीब एक से डेढ़ लाख ही बच्चे आरटीई के तहत प्रवेश ले रहे हैं, जबकि स्कूलों में लगभग ढाई से तीन लाख सीटें आवंटित की जाती है। बता दें, कि पिछले वर्ष दो लाख 84 हजार सीटों के लिए एक लाख 99 हजार आवेदन आए थे, जबकि एक लाख 29 हजार प्रवेश हुए थे।

बड़े शहरों में कम हुए प्रवेश

भोपाल में 10,539 बच्चों को सीटें आवंटित की गई है। इसमें से 8,320 ने प्रवेश लिया है। इसमें 2219 आवेदकों ने पसंदीदा स्कूल नहीं मिलने से प्रवेश नहीं लिया है। वहीं इंदौर में 6872 आवंटित सीटों में से 4947 ने प्रवेश लिया, जबकि 1925 वंचित रह गए। ग्वालियर में 3532 अावंटित सीटों में से 2655 प्रवेश हुए और 877 आवेदकों ने नहीं लिया। जबलपुर में 4006 आवेदकों में से 3379 ने प्रवेश नहीं लिया, जबकि 627 ने प्रवेश नहीं लिया।