मुंबई
 
महाराष्ट्र में सियासी घमासान के बीच डिप्टी स्पीकर नरहरि जिरवाल भी चर्चा में थे। दरअसल शिंदे गुट के विधायकों ने उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस भेजा था लेकिन उन्होंने इसे खुद ही खारिज कर लिया। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त होते हुए कहा था कि अपने खिलाफ अर्जी पर आप खुद ही जज कैसे बन गए? कोर्ट ने उनसे इस मामले में दो हफ्ते के अंदर जवाब देने को कहा था। साथ ही यह भी पूछा था कि डिप्टी स्पीकर ने कितने विधायकों को अयोग्य ठहराने का नोटिस भेजा था।

डिप्टी स्पीकर नरहरि ने सुप्रीम कोर्ट में जवाब दाखिल करते हुए कहा कि उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का मेल उसकी आईडी से आया था जो कि विधानसभा का सदस्य नहीं था। जिरवाल ने कहा कि असत्यापाति ईमेल आईडी से संदेश मिलने की वजह से उन्होंने इसे खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि उनको 39 विधायकों की तरफ से मेल मिला था। जिरवाल ने सुप्रीम कोर्ट में शिंदे गुट की याचिका का विरोध किया है और कहा है कि अयोग्यता कार्रवाई पूरी होने तक उन्हें सदन में प्रवेश करने की इजाजत न दी जाए। उन्होंने कहा कि डिप्टी स्पीकर को हटाने का नोटिस तभी दिया जा सकता है जब सत्र चल रहा हो। इसलिए यह अनुच्छेद 179 (C) के तहत वैध नोटिस नहीं था।
 
विधानसभा अध्यक्ष का पद था खाली
विधानसभा में लगभग एक साल से विधानसभा अध्यक्ष नहीं थे। कांग्रेस नेता नाना पटोले के पार्टी में महाराष्ट्र इकाई के अध्यक्ष बनने के बाद 2021 से यह पद खाली था। इसीलिए डिप्टी स्पीकर जिरवाल अहम फैसले ले रहे थे। उन्होंने  एकनाथ शिंदे को चीफ व्हिप पद से हटाकर अजय चौधरी को शिवसेना का चीफ व्हिप बनाने को मंजूरी दे दी थी। इसके अलावा उन्होंने शिंदे गुट के विधायकों को पार्टी छोड़ने का नोटिस भेज दिया था। डिप्टी स्पीकर की तरफ से पहले सुप्रीम कोर्ट में कहा गया था कि उन्हं पद से हटाने को कोई नोटिस नहीं मिला था। सुप्रीम कोर्ट में पहले भी कहा गया था कि नोटिस किसी वकील के ईमेल से आया था।