बेंगलुरु
सांसदों और विधायकों से जुड़े आपराधिक मामलों की सुनवाई करने वाली एक विशेष अदालत ने भ्रष्टाचार के एक मामले में कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री बी एस येदियुरप्पा को जमानत दे दी है। न्यायाधीश बी जयंत कुमार ने शनिवार को येदियुरप्पा को जमानत दी। इससे पहले, दर्ज कराई गई आपत्तियों में शिकायतकर्ता के वकील ने कहा कि उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता को जमानत दिये जाने का विरोध नहीं किया है। हालांकि, शिकायतकर्ता के वकील केवी धनंजय ने दलील दी कि उन्होंने आरोपी द्वारा दिये गये सिर्फ कुछ आधार पर आपत्ति जताई थी। आपत्तियों में कहा गया था कि येदियुरप्पा की जमानत अर्जी कांग्रेस नेता आर वी देशपांडे और अन्य आरोपियों के खिलाफ दर्ज मामले का उल्लेख करती है, जिनके विरूद्ध मूल शिकायत दायर की गई थी। लेकिन अब मामला सिर्फ भाजपा नेता के खिलाफ है और अन्य का जिक्र करना अनुचित है।

सुनवाई 16 जुलाई के लिए स्थगित
आपत्तियों में कहा गया है, 'अपनी जमानत अर्जी में, आरोपी बी एस येदियुरप्पा ने उस अपराध से इनकार किया है जिसके लिए उन्हें समन किया गया और अपने उन कृत्यों का बचाव करने की कोशिश की जो इस आपराधिक कार्यवाही का विषय है।' अदालत ने कहा कि येदियुरप्पा को जमानत दी जाती है और सुनवाई 16 जुलाई के लिए स्थगित की जाती है।  विशेष अदालत ने 2013 में वासुदेव रेड्डी नाम के एक व्यक्ति द्वारा दायर एक शिकायत में येदियुरप्पा (79) को समन जारी किया था।
 
क्या है आरोप?
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि येदियुरप्पा ने 2006 में उप मुख्यमंत्री रहने के दौरान बेंगलुरु के बेल्लंदुर और देवराबीसनहल्ली में 15 एकड़ 30 गुंटा जमीन अवैध रूप से गैर अधिसूचित कर दी, जो एक आईटी पार्क के लिए ली गई थी। पूर्व उद्योग मंत्री आर वी देशपांडे मूल शिकायत में मुख्य आरोपी थे, लेकिन कर्नाटक हाई कोर्ट ने 2015 में उनके खिलाफ मामला रद्द कर दिया था। येदियुरप्पा, मामले में एक मात्र आरोपी बच गए हैं और उनपर भ्रष्टाचार रोकथाम अधिनियम के तहत आरोप लगाया गया है।