काठमांडू
पूरी दुनिया पर वर्चस्व स्थापित करने के लिए चीन छोटे देशों की अर्थव्यवस्था को किस तरह से कंट्रोल करना चाहता है, इसका खुलासा नेपाल के साथ हुए एमओयू से हुआ है। बीजिंग की महत्वाकांक्षी बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) परियोजनाओं पर चीन और नेपाल के बीच हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन (एमओयू) की एक एक्सेस कॉपी से पता चला है कि, कैसे चीन इन परियोजनाओं के माध्यम से नेपाल में आर्थिक आधिपत्य चाहता है।
नेपाल पर कंट्रोल चाहता है ड्रैगन
 एमओयू पर हस्ताक्षर करने के इतने सालों के बाद भी नेपाल में बीआरआई प्रोजेक्ट पर काम आगे नहीं बढ़ा है, लेकिन नेपाल की स्थानीय मीडिया ने दोनों देशों के बीच बीआरई प्रोजेक्ट को लेकर किए गये समझौते की एक कॉपी हासिल की है, जिससे पता चलता है कि, चीन, नेपाल की अर्थव्यवस्था पर अपनी मुद्रा और मुक्त व्यापार प्रावधानों के साथ हावी होने का प्रयास कर रहा है। नेपाली मीडिया ने एमओयू का पर्दाफाश किया है। आपको बता दें कि, चीन किसी भी देश के साथ बीआरआई प्रोजेक्ट के तहत जब एमओयू साइन करता है, तो उसकी पहली शर्त ये होती है, कि उसकी शर्तें किसी भी हाल में जनता के बीच नहीं आनी चाहिए।

मई 2017 में किया गया था समझौता
चीन और नेपाल के बीच मई 2017 में बीआरई प्रोजेक्ट को लेकर एक समझौता यानि एमओयू किया गया था, लेकिन इन पांच सालों में न तो नेपाल और न ही चीन ने दस्तावेज़ को सार्वजनिक किया। इस बीच, खबरहुब ने दोनों देशों के बीच व्यापक रूप से चर्चित बीआरआई पर एमओयू की एक प्रति प्राप्त की है। नेपाल के स्थानीय मीडिया आउटलेट द्वारा एमओयू की सामग्री के विश्लेषण के अनुसार, चीन ने अपने बीआरआई समझौते के माध्यम से मुक्त व्यापार कनेक्टिविटी के नाम पर नेपाल में अपने आर्थिक आधिपत्य, शर्तों और निहित स्वार्थ को थोपने का प्रयास किया है।