भोपाल
मुख्यमंत्री श्रमिक प्रसूति सहायता योजना में सरकार ने बड़ा बदलाव किया है। अब जिलों के अधिकृत अशासकीय चिकित्सालय में प्रसव होंने की स्थिति पर भी इस योजना का लाभ प्रदान किया जाएगा।

स्वास्थ्य विभाग ने योजना में बदलाव किया है। पहले इसके तहत गर्भावस्था की चार जांच निर्धारित अवधि में कराए जाने के बाद प्रथम किश्त की राशि प्रदान की जाती थी। इसे अब परिवर्तित करते हुए संशोधित योजना में प्रथम किश्त गर्भधारण का पंजीयन गर्भावस्था के प्रथम त्रैमास में एनएनएम के माध्यम से अथवा शासकीय संस्था से कराए जाने पर प्रदान किया जाएगा। जिससे गर्भवती महिलाएं गर्भधारण का शीघ्र पंजीयन कराए जाने हेतु प्रोत्साहित हो सकेंगी।

उन्हें पोषण आहार हेतु तत्काल राशि प्राप्त हो सकेगी। उन्हें निर्धारित चार प्रसव पूर्व सेवाओं का लाभ देने में सहायता होगी एवं हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं का प्रबंधन कराने में आसानी होगी। संशोधित योजना में श्रमिक संवर्ग के पंजीकृत पात्र हितग्राही को दूसरी किश्त का भुगतान अब आयुष्मान भारत निरामयम योजना अंतर्गत गर्भावस्था एवं प्रसव संबंधी हाई रिस्क पैकेज हेतु प्रदेश के चिन्हित जिलों के अधिकृत अशासकीय चिकित्सालय में भी प्रसव होंने की स्थिति पर भी प्रदान किया जाएगा।

पहली किश्त में चार हजार की सहायता
योजना के तहत पहली किश्त के रूप में 4 हजार रुपए गर्भावस्था का पंजीयन प्रथम त्रैमास में कराने पर दिए जाएंगे। इसमें तीन हजार रुपए महिला को मातृ वंदना योजना के अनुसार और एक हजार महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा एवं प्रसूति सहायता योजना के अंतर्गत एक हजार रुपए की राशि स्वास्थ्य विभाग द्वारा प्रदान की जाएगी। किसी कारणवश पहली तिमाही में पंजीयन नहीं हो पाता है तो खंड चिकित्सा अधिकारी इसमें एक माह की वृद्धि कर सकेंगे।

दूसरी किश्त के रूप में बारह हजार रुपए शासकीय चिकित्सालय या आयुष्मान भारत निरामय कार्यक्रम अंतर्गत गर्भावस्था एवं प्रसव संबंधी हाई रिस्क पैकेज हेतु चिन्हित प्रदेश के अधिकृत अशासकीय चिकित्सालय में प्रसव होने पर मिलेंगे। नवजात शिशु का संस्थागत जन्म उपरांत पंजीयन कराने, शिशु को शीघ्र स्तनपान कराने, शिशु को शून्य डोज, बीसीजी, ओपीवी और हेप बी टीकाकरण कराने पर दिए जाएंगे। इस तरह सोलह हजार रुपए की सहायता इस योजना में मिलेगी।