चंडीगढ़
शहर में टीकाकरण को लेकर लोगों के बीच रुझान कम होता नजर आ रहा है। यही वजह है कि बीते 15 दिन से शहर में पाजिटिविटी रेट 7 फीसद के ऊपर पहुंच गया है। शहर में मात्र 12 प्रतिशत लोग ऐसे हैं जिन्होंने अब तक कोरोना वैक्सीन की बूस्टर डोज लगवाई है। जबकि केंद्र सरकार के आंकड़ों की मानें तो 8 लाख 43 हजार लोगों को बूस्टर डोज लगनी है। शहर में अब तक 53,161 लोगों ने ही बूस्टर डोज लगवाई है। शहर में बूस्टर डोज कम लगवाने के एक बड़ा कारण यह भी है कि 18 से 60 साल तक के लोगों को टीका लगवाने के लिए जेब से पैसे खर्च करना पड़ रहे हैं। क्योंकि चंडीगढ़ में 60 साल से ऊपर के लोगों को ही बूस्टर डोज फ्री कर रखे हैं और 18 से 60 साल तक के लोगों को इसके लिए कीमत चुकानी पड़ेगी। शहर के प्राइवेट अस्पतालों में भी बूस्टर डोज लगवा सकते हैं। इसके लिए 375 रुपये तय किए गए हैं।

वहीं, 12 से 14 साल के बच्चों के टीकाकरण की अगर बात करें तो 74.55 फीसद यानी 33548 बच्चों को वैक्सीन की पहली डोज लगी है। वहीं 41.76 फीसद यानी 18791 बच्चों को वैक्सीन की दूसरी डोज लग चुकी है। 15 से 18 साल के 102.33 फीसद यानी 73676 किशोरों को वैक्सीन की पहली डोज और 69.27 फीसद यानी 49,873 किशोरों को दोनों टीके लग चुके हैं।  चंडीगढ़ की स्वास्थ्य निदेशक डा. सुमन सिंह ने कहा कि उनका पहला प्रयास है कि बच्चों और किशोरों का जल्द से जल्द शत-प्रतिशत टीकाकरण सुनिश्चित किया जा सके, ताकि बच्चों और किशोरों को संक्रमण की चपेट में आने से बचाए जा सके। इसके अलावा यह भी सुनिश्चित किया जा रहा है कि सभी लोगों को कोविड वैक्सीन की दोनों  डोज लगी हों। वहीं निर्धारित समय में उन्हें बूस्टर डोज लगाकर संक्रमण से सुरक्षित करने की कोशिश की जा रही है। बता दे शहर में रोजाना 60 से 80 नए संक्रमित मामले दर्ज किए जा रहे हैं। ऐसे में शहर में कोरोना एक्टिव मरीजों की संख्या 568 तक पहुंच चुकी है, जिससे प्रशासन की चिंता बढ़ गई है। राहत की बात यह है कि कोरोना महामारी की तीसरी लहर के बाद शहर में अब तक कोरोना से किसी मरीज की मौत नहीं हुई है।