चंदाैली
जिले में 96 हजार हेक्टेअर क्षेत्रफल में फैला काशी वन्य जीव प्रभाग का चंद्रप्रभा अभयारण्‍य आधे दशक में दस गुना तक शहरों को चुनौती देने वाला हो गया है। जी हां, वर्ष 2016 में वन्य जीवों की गणना में बंदरों की संख्या मात्र 445 थी जो मई 2022 की गणना में बढ़कर 4560 तक जा पहुंचे। अब वाराणसी, मीरजापुर सहित सोनभद्र के औद्योगिक क्षेत्रों में चिंता बढ़ गई है कि बंदर कहीं वन्‍य क्षेत्र से बाहर आकर शहरों में ठिकाना बनाकर आतंक न मचाना शुरू कर दें।  चंद्रप्रभा अभयारण्य में बंदरों का कुनबा खूब फल फूल रहा है। पिछले छह वर्षों में इनकी संख्या में बेतहाशा इजाफा हुआ है। वर्ष 2016 में वन विभाग की ओर से कराई गई वन्य जीवों की गणना में इनकी संख्या 445 थी। मई 2022 की गणना में इनका परिवार बढ़कर 4560 हो गया है। हालांकि अभयारण्य में बीते वर्षों की तुलना में फलदार वृक्षों में कमी आई है। बावजूद इसके बंदरों का कुनबा बढ़ता ही चला गया है।

विंध्य पर्वत मालाओं की गोद में बसा चंद्रप्रभा अभयारण्य 96 हजार हेक्टेअर क्षेत्रफल में फैला हुआ है। मीलों फैले जंगल में राजा को छोड़ अन्य प्रकार के वन्य जीवों की भरमार है। इनमें गुलदार यानि तेंदुआ, चिंकारा, घड़रोज , सांभर , भालू , सुअर , बंदर , लंगूर , मगर, भेड़िया , लकड़बग्घा , लोमड़ी , सियार आदि वन्य जीव वन क्षेत्र में विचरण करते रहते हैं। हालांकि हाल के वर्षों में वनों के दोहन के कारण वन्य जीवों के आहार में कमी आई है। शाकाहारी वन्य जीवों के लिए जंगल में फलदार वृक्षों में तेन, पियार, आंवला, बेर आदि की संख्या घटी है। बावजूद इसके वन्य जीव विपरीत परिस्थितियों में भी अपने को बचाए हुए हैं। वैसे इनकी संख्या में इजाफा बनारस के बंदरों को यहां लाकर छोड़ने को भी बताया जा रहा है।

वर्ष 2016 की गणना में वन्य जीवों की संख्या : वर्ष 2016 में वन विभाग की ओर से कराई वन्य जीवों की गणना में गुलदार तेंदुआ 3, चिंकारा 123, घड़रोज 174, सांभर 101, भालू 104 , सुअर 266, बंदर 445, लंगूर 335, मगरमच्‍छ तीन, भेड़िया तीन, लकड़बग्घा 55, लोमड़ी 102, सियार 175, मोर 150 शाही की संख्या 68 थी। वर्ष 2022 की गणना में वन्य जीवों की संख्या : वन विभाग की ओर से 9 से 23 मई तक वन्य जीवों की गणना कराई गई। इसमें सुअर 1633, लंगूर 1919, मोर 686 के साथ बंदरों की संख्या 4560 है।