Category: उत्तर प्रदेश

  • वाराणसी में जायका रेस्टोरेंट पर चला VDA का बुलडोजर, अवैध निर्माण पर कार्रवाई

    वाराणसी में जायका रेस्टोरेंट पर चला VDA का बुलडोजर, अवैध निर्माण पर कार्रवाई

    वाराणसी
    उत्तर प्रदेश के वाराणसी में अवैध निर्माण के खिलाफ VDA ने बुलडोजर कार्रवाई शुरू की है. कैंट थाना क्षेत्र के कचहरी चौराहे पर स्थित जायका रेस्टोरेंट में यह कार्रवाई की जा रही है. VDA ने रेस्टोरेंट के निर्माण को अवैध बताते हुए पहले ही नोटिस जारी किया था.

    जायका रेस्टोरेंट का आरोप है कि नोटिस के बावजूद निर्माण खुद से नहीं हटाया गया. इसके बाद VDA की टीम मौके पर पहुंची और बुलडोजर से कार्रवाई शुरू की.

    कार्रवाई के दौरान मौके पर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है. VDA की टीम अवैध बताए जा रहे निर्माण को हटाने में जुटी है. पुलिस की मौजूदगी में कार्रवाई की जा रही है. इलाके में सुरक्षा व्यवस्था भी बढ़ा दी गई है.

    दरअसल, जायका रेस्टोरेंट एक मुस्लिम व्यापारी का बताया जा रहा है. VDA की ओर से पहले ही निर्माण को लेकर नोटिस दिया गया था. नोटिस में निर्माण हटाने के लिए कहा गया था. निर्माण नहीं हटाए जाने के बाद अब प्राधिकरण ने बुलडोजर चलाया है.

    कचहरी से संदहा चौराहे तक होना है चौड़ीकरण
    यह कार्रवाई कचहरी चौराहे के आसपास सड़क चौड़ीकरण की योजना से भी जुड़ी है. कचहरी से संदहा चौराहे तक सड़क का चौड़ीकरण होना है. इसी के तहत रास्ते में आने वाले निर्माण को लेकर कार्रवाई की जा रही है.

    VDA की टीम मौके पर मौजूद है. बुलडोजर की मदद से निर्माण हटाया जा रहा है. कार्रवाई के दौरान किसी तरह की स्थिति न बिगड़े, इसके लिए पुलिस बल तैनात किया गया है.

    फिलहाल मौके पर VDA की कार्रवाई जारी है. प्राधिकरण की ओर से पहले जारी किए गए नोटिस और उसके बाद की कार्रवाई को लेकर टीम निर्माण से जुड़े दस्तावेज भी देख रही है. प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद इलाके में हलचल बढ़ गई है.
     

  • कब्जामुक्त कराएं जमीन, दबंगों को सिखाएं कानूनी सबक: मुख्यमंत्री

    कब्जामुक्त कराएं जमीन, दबंगों को सिखाएं कानूनी सबक: मुख्यमंत्री

    कब्जामुक्त कराएं जमीन, दबंगों को सिखाएं कानूनी सबक: मुख्यमंत्री

    बारिश के बावजूद सीएम योगी आदित्यनाथ ने किया जनता दर्शन

    गोरखनाथ मंदिर में मुख्यमंत्री ने करीब 200 लोगों से मुलाकात कर सुनीं समस्याएं

    जनता से बोले सीएम – घबराइए मत, सबकी समस्या का होगा समाधान

    गोरखपुर
     जनता की सेवा को सर्वोपरि रखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार सुबह बारिश होने के बावजूद ‘जनता दर्शन’ किया। दूरदराज से आए लोगों से उन्होंने गोरखनाथ मंदिर में मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं। समस्या लेकर आए लोगों को मुख्यमंत्री ने समाधान का भरोसा दिया। इस अवसर पर अवैध कब्जे की शिकायतों पर उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि जमीन कब्जामुक्त कराने के साथ जबरन कब्जा करने वालों को कड़ा कानूनी सबक सिखाया जाए। 

    बारिश की वजह से मुख्यमंत्री के निर्देश पर लोगों की सुविधा के लिए जनता दर्शन का आयोजन गोरखनाथ मंदिर परिसर के महंत दिग्विजयनाथ स्मृति भवन सभागार में किया गया। इस दौरान सीएम योगी ने करीब 200 लोगों की समस्याएं सुनीं और अधिकारियों को उनका समाधान करने का निर्देश दिया। कुर्सियों पर बैठाए गए लोगों तक पहुंचकर मुख्यमंत्री ने उनकी पीड़ा जानी और आश्वस्त किया कि सभी की समस्याओं का समाधान सुनिश्चित किया जाएगा। जनता दर्शन में मुख्यमंत्री ने वहां मौजूद अधिकारियों को निर्देशित किया कि हर पीड़ित व्यक्ति की समस्या पर संवेदनशीलता से ध्यान दें और तत्परता से उसका समयबद्ध व पारदर्शी निस्तारण कराएं। 

    इस दौरान कुछ महिलाओं ने उनकी जमीन जबरन कब्जा कर लिए जाने की शिकायत की। इस पर मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि यदि किसी दबंग ने किसी गरीब की जमीन हड़पी है तो उसके खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए। जमीन अवैध या जबरन कब्जे से मुक्त होनी चाहिए। 

    हर बार की तरह जनता दर्शन में कुछ लोग गंभीर बीमारियों के इलाज में आर्थिक मदद की गुहार लेकर पहुंचे थे। ऐसे मामलों में सीएम योगी ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि इलाज में अस्पताल के एस्टीमेट की प्रक्रिया को जल्द पूर्ण कराकर शासन में भेजें। मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से इलाज के लिए पर्याप्त राशि दी जाएगी।

  • प्रयागराज संगम पर अमेरिका से होगा ऑनलाइन पिंडदान, पितृ पक्ष की तैयारियां तेज

    प्रयागराज संगम पर अमेरिका से होगा ऑनलाइन पिंडदान, पितृ पक्ष की तैयारियां तेज

     प्रयागराज

    पितृ पक्ष के दिन पास आने के साथ ही संगम नगरी प्रयागराज में पितरों के तर्पण और पिंडदान को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं. पितरों की आत्मा की शांति और मोक्ष की कामना के लिए देश ही नहीं, विदेशों से भी बड़ी संख्या में लोग प्रयागराज पहुंचते हैं. इस बार भी पितृ पक्ष के दौरान संगम क्षेत्र में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटने की उम्मीद है. खास बात यह है कि जो लोग किसी कारणवश प्रयागराज नहीं पहुंच पा रहे हैं, उनके लिए ऑनलाइन पिंडदान की तैयारी भी शुरू हो चुकी है। 

    इस बार पितृ पक्ष 26 सितंबर से शुरू होकर 10 अक्टूबर तक रहेगा. इस दौरान अपने पितरों के निमित्त लोग प्रयागराज पहुंचकर भी तर्पण और पिंडदान करते हैं. श्रद्धालुओं के लिए यह समय अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और धार्मिक आस्था व्यक्त करने का महत्वपूर्ण अवसर माना जाता है. तीर्थ पुरोहितों के अनुसार पितृ पक्ष के दौरान देश-विदेश से लोग अपने पितरों को मोक्ष दिलाने और उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रयागराज पहुंचते हैं. संगम पर पिंडदान और तर्पण करने के बाद श्रद्धालु आगे की धार्मिक यात्रा भी पूरी करते हैं। 

    प्रदीप पांडे तीर्थ पुरोहित, प्रयागराज बताते हैं कि धार्मिक मान्यता के अनुसार पिंडदान की परंपरा में प्रयागराज, काशी और गया का विशेष महत्व बताया जाता है. लोग प्रयागराज से इसकी शुरुआत करते हैं, इसके बाद काशी होते हुए गया पहुंचकर पिंडदान की प्रक्रिया को पूरा करते हैं. इसी वजह से पितृ पक्ष के दौरान प्रयागराज में देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो जाता है. संगम क्षेत्र में पितृ पक्ष के दौरान सुबह से ही श्रद्धालु अपने पितरों के निमित्त धार्मिक अनुष्ठान करते नजर आते हैं. जैसे-जैसे पितृ पक्ष आगे बढ़ेगा, वैसे-वैसे संगम क्षेत्र में लोगों की संख्या भी बढ़ने लगेगी। 

    अमेरिका से 28 सितंबर को होगा पिंडदान
    प्रदीप पांडे बताते हैं कि इस बार पितृ पक्ष के दौरान विदेश में बैठे लोग भी प्रयागराज की धार्मिक परंपरा से जुड़ रहे हैं. जानकारी के मुताबिक अमेरिका से एक श्रद्धालु 28 सितंबर को प्रयागराज में पिंडदान करेगा. इसके लिए ऑनलाइन व्यवस्था का सहारा लिया जाएगा. पिछले दो-तीन वर्षों से ऑनलाइन पिंडदान की व्यवस्था भी शुरू हुई है. इसका लाभ ऐसे लोग उठा रहे हैं जो किसी कारणवश प्रयागराज नहीं आ पाते. किसी को यात्रा में परेशानी है तो किसी के पास समय या दूसरी तरह की समस्या है. ऐसे में वे ऑनलाइन माध्यम से अपने पितरों के लिए पिंडदान की प्रक्रिया पूरी करा रहे हैं. इस व्यवस्था के जरिए विदेशों में रहने वाले लोगों को भी अपने पितरों के प्रति धार्मिक जिम्मेदारी निभाने का अवसर मिल रहा है. अमेरिका से 28 सितंबर को होने वाला पिंडदान इसी व्यवस्था का एक उदाहरण है. प्रदीप पांडेय बताते हैं कि ऑनलाइन पिंडदान की सुविधा का इस्तेमाल केवल विदेश में रहने वाले लोग ही नहीं कर रहे हैं. गांव और देहात में रहने वाले ऐसे लोग भी इस व्यवस्था का लाभ उठा रहे हैं, जो किसी कारण से प्रयागराज आने में असमर्थ हैं. कई परिवारों के सामने यात्रा से जुड़ी परेशानी होती है. कुछ लोगों के लिए लंबी दूरी तय करना मुश्किल होता है. ऐसे में ऑनलाइन व्यवस्था उनके लिए अपने पितरों के निमित्त पिंडदान कराने का माध्यम बन रही है। 

    तीर्थ पुरोहितों का कहना है कि लोगों की आस्था और अपने पितरों के प्रति श्रद्धा आज भी उतनी ही मजबूत है. परिस्थितियां भले बदल गई हों, लेकिन लोग किसी न किसी तरीके से अपने पितरों के लिए धार्मिक कर्मकांड पूरा करना चाहते हैं। 

    युवा पीढ़ी भी निभा रही परंपरा
    प्रदीप पांडे तीर्थ पुरोहित, प्रयागराज बताते हैं कि पितृ पक्ष के दौरान एक और खास बात देखने को मिल रही है. आज की युवा पीढ़ी भी सनातन धर्म की परंपराओं और पितरों से जुड़े कर्मकांडों को लेकर रुचि दिखा रही है. लोग अपने पितरों को मोक्ष दिलाने के लिए उपलब्ध व्यवस्थाओं का सहारा ले रहे हैं. जो संगम तक पहुंच सकते हैं, वे स्वयं आकर पिंडदान और तर्पण करते हैं और जो नहीं आ सकते, वे ऑनलाइन व्यवस्था के जरिए इससे जुड़ रहे हैं. तीर्थ पुरोहितों के मुताबिक यह बात महत्वपूर्ण है कि आधुनिक दौर में भी युवा अपने परिवार और पूर्वजों से जुड़ी परंपराओं को निभाने के लिए आगे आ रहे हैं। 

    पीले वस्त्रों में नजर आएंगे श्रद्धालु
    प्रदीप पांडे के मुताबिक पितृ पक्ष के दौरान संगम क्षेत्र में श्रद्धालुओं की वेशभूषा भी अलग दिखाई देती है. पितरों के निमित्त पिंडदान और तर्पण करने के लिए आने वाले कई श्रद्धालु पीले वस्त्र पहनकर आते हैं. जिस तरह भगवा रंग की अपनी अलग धार्मिक पहचान है, उसी तरह पितृ पक्ष के दौरान पीले वस्त्र पहनकर आने की परंपरा भी श्रद्धालुओं के बीच देखने को मिलती है. संगम क्षेत्र में पितृ पक्ष के दौरान बड़ी संख्या में लोग पीले वस्त्रों में दिखाई देंगे. तीर्थ पुरोहितों के अनुसार जो श्रद्धालु इस परंपरा का पालन करते हैं, वे पिंडदान के दौरान निर्धारित वेशभूषा का भी ध्यान रखते हैं. यही वजह है कि पितृ पक्ष में संगम क्षेत्र का दृश्य सामान्य दिनों से काफी अलग नजर आता है। 

    26 सितंबर के बाद बढ़ेगी श्रद्धालुओं की संख्या
    पितृ पक्ष की शुरुआत के साथ ही प्रयागराज में श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला तेज हो रहा है. अभी से लोग धीरे-धीरे पहुंचने लगे हैं. माना जा रहा है कि 26 सितंबर के बाद संगम क्षेत्र में श्रद्धालुओं की संख्या काफी बढ़ जाएगी. पितरों के प्रति श्रद्धा रखने वाले परिवार देश के अलग-अलग हिस्सों से प्रयागराज पहुंचेंगे. कोई अपने माता-पिता के लिए पिंडदान करेगा तो कोई अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण करेगा. संगम की धरती पर पितरों के निमित्त होने वाले इन धार्मिक अनुष्ठानों के दौरान बड़ी संख्या में तीर्थ पुरोहित भी श्रद्धालुओं को विधि-विधान से कर्मकांड कराने में जुटेंगे। 

  • MBBS प्रवेश पर दिव्यांग अभ्यर्थियों को हाईकोर्ट की राहत, मेडिकल बोर्ड प्रतिशत नहीं घटा सकता

    MBBS प्रवेश पर दिव्यांग अभ्यर्थियों को हाईकोर्ट की राहत, मेडिकल बोर्ड प्रतिशत नहीं घटा सकता

    लखनऊ
    इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने दिव्यांग अभ्यर्थियों के एमबीबीएस प्रवेश से संबंधित एक मामले में दिशा स्पष्ट की है। कहा कि सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी वैध दिव्यांगता प्रमाण पत्र में दर्ज दिव्यांगता के प्रतिशत को एनएमसी (नेशनल मेडिकल कमीशन) के मेडिकल असेसमेंट बोर्ड द्वारा दोबारा निर्धारित नहीं किया जा सकता। बोर्ड को सिर्फ इतना जांचने का अधिकार है कि अभ्यर्थी उचित सुविधा और सहायक तकनीक के साथ एमबीबीएस पाठ्यक्रम पूरा करने में सक्षम है अथवा नहीं।

    न्यायमूर्ति शेखर बी. सराफ और न्यायमूर्ति अबधेश कुमार चौधरी की खंडपीठ ने शुभम मिश्रा, सौरभ राणा और गुलफाम अहमद की ओर से दाखिल तीन अलग-अलग याचिकाओं पर एक साथ सुनवायी करते हुए, यह निर्णय दिया है। न्यायालय ने मेडिकल असेसमेंट बोर्ड और अपीलीय मेडिकल असेसमेंट बोर्ड द्वारा जारी उन निष्कर्षों को रद्द कर दिया, जिनमें अभ्यर्थियों को पीडब्ल्यूबीडी (पर्सन विद बेंचमार्क डिसबिल्टीज) आरक्षण के लिए अयोग्य बताया गया था। न्यायालय ने याचियों को नीट-यूजी 2026 की शेष काउंसलिंग में पीडब्ल्यूबीडी आरक्षित श्रेणी के योग्य अभ्यर्थी के रूप में शामिल करने का निर्देश दिया है।

    याची शुभम मिश्रा को मुख्य चिकित्सा अधिकारी, सुलतानपुर ने 45 प्रतिशत स्थायी दिव्यांगता का प्रमाण पत्र जारी किया था। हालांकि, मेडिकल असेसमेंट बोर्ड ने 11 अगस्त 2026 के प्रमाण पत्र में उनकी दिव्यांगता को 45 प्रतिशत से घटाकर 20 प्रतिशत कर दिया और उन्हें पीडब्ल्यूबीडी आरक्षण के लिए अयोग्य बताया। अपीलीय मेडिकल बोर्ड ने भी असेसमेंट बोर्ड के फैसले को बरकरार रखा।

    दर्ज दिव्यांगता प्रतिशत सभी के लिए बाध्यकारी
    इसी प्रकार अन्य याचियों सौरभ राणा व गुलफाम अहमद के दिव्यांगता प्रतिशत को घटा दिया गया। अपने निर्णय में कोर्ट कहा कि आरपीडब्ल्यूडी एक्ट की धारा 57 के तहत सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी और वैध दिव्यांगता प्रमाण पत्र, जब तक सक्षम न्यायिक या वैधानिक मंच द्वारा निरस्त नहीं किया जाता, उसमें दर्ज दिव्यांगता प्रतिशत सभी के लिए बाध्यकारी है। कहा कि मेडिकल बोर्ड को यह देखना है कि अभ्यर्थी अपनी प्रमाणित दिव्यांगता के बावजूद उचित सुविधा और सहायक तकनीक के साथ एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी करने में सक्षम है या नहीं लेकिन यह प्रक्रिया दिव्यांगता के प्रतिशत को दोबारा तय करने के लिए नहीं है।

  • ‘जाति का जहर घोलने निकले हैं अखिलेश, 100 यात्राएं भी नहीं बचा पाएंगी सपा को’: अनिल राजभर

    ‘जाति का जहर घोलने निकले हैं अखिलेश, 100 यात्राएं भी नहीं बचा पाएंगी सपा को’: अनिल राजभर

    'जाति का जहर घोलने निकले हैं अखिलेश, 100 यात्राएं भी नहीं बचा पाएंगी सपा को': अनिल राजभर

    पीडीए रथ यात्रा पूरी तरह फर्जी, दलित और मजदूर वर्ग सपा के असली चेहरे से परिचिति: अनिल राजभर

    दिनेश प्रताप सिंह ने अखिलेश को घेरा, बोले- पीडीए मतलब 'परमानेंटली डिवाइडेड अलायंस'

    लखनऊ
     समाजवादी पार्टी की पीडीए रथ यात्रा को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री अनिल राजभर ने अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी हर मोर्चे पर विफल होने के बाद अब जाति का जहर घोलने की राजनीति कर रही है, लेकिन उसे इसमें कोई सफलता मिलने वाली नहीं है। उन्होंने कहा कि सपा चाहे एक यात्रा निकाले या 100 यात्राएं, जनता अब उसके बहकावे में आने वाली नहीं है।

    पीडीए रथ यात्रा पूरी तरह फर्जी

    अनिल राजभर ने कहा कि पीडीए रथ यात्रा पूरी तरह फर्जी यात्रा है। उत्तर प्रदेश का पिछड़ा, दलित, कमजोर और मजदूर वर्ग समाजवादी पार्टी के असली चेहरे से भलीभांति परिचित है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब सपा सत्ता में रहती है तो उसे गरीबों की याद नहीं आती और पूरा सैफई परिवार प्रदेश की गाढ़ी कमाई को लूटने में लगा रहता है। आज वही लोग चोला बदलकर पिछड़ों और दलितों को ठगने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन जनता सब समझती है।

    पीडीए की परिभाषा तय करे सपा

    उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी पहले पीडीए की परिभाषा ही तय कर ले। पार्टी के नेता खुद ही पीडीए को लेकर भ्रमित हैं और रोज इसकी नई परिभाषा बताते हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह की राजनीतिक तिकड़मों से कोई फर्क पड़ने वाला नहीं है। चुनाव आने पर समाजवादी पार्टी का कहीं नामोनिशान नहीं दिखाई देगा।

    इस दौरान नए वोटर फॉर्म में सर्विलांस से जुड़ी जानकारी जोड़े जाने और दो चुनाव आयुक्तों की आपत्ति के सवाल पर अनिल राजभर ने कहा कि हाल में सामने आए घटनाक्रम से स्पष्ट है कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से हुई है। चुनाव आयोग किसी भी विषय पर नियमों और परंपराओं के अनुसार आपसी राय-मशविरा और विस्तृत विचार-विमर्श के बाद ही निर्णय लेता है। अलग-अलग राय लोकतांत्रिक निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा होती है।

    स्वर्गीय कल्याण सिंह के परिवार से कब मिलेंगे अखिलेश?

    वहीं, भाजपा के मुख्य प्रवक्ता दिनेश प्रताप सिंह ने भी अखिलेश यादव और उनकी पीडीए राजनीति पर निशाना साधा। रायबरेली में सपा विधायक राहुल लोधी के आवास पर अखिलेश यादव के प्रस्तावित दौरे को लेकर उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव को अपने नेताओं के घर जरूर जाना चाहिए, लेकिन उन्हें यह भी बताना चाहिए कि उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व राज्यपाल स्वर्गीय कल्याण सिंह के परिवार के पास वे आज तक क्यों नहीं गए।

    दिनेश प्रताप सिंह ने कहा कि एक मुख्यमंत्री को दूसरे मुख्यमंत्री के परिवार के प्रति शिष्टाचार और संवेदना दिखानी चाहिए थी। यदि अखिलेश यादव कल्याण सिंह के परिवार के पास जाकर श्रद्धांजलि और संवेदना व्यक्त करते, तो यह राजनीतिक नहीं बल्कि मानवीय और संवैधानिक मर्यादा का परिचय होता। उन्होंने कहा कि अब जब वे लोध समाज के बीच जा रहे हैं तो उन्हें अपने पुराने व्यवहार का भी जवाब देना चाहिए।

    पीडीए मतलब परमानेंटली डिवाइडेड अलायंस

    पीडीए रथ यात्रा पर हमला बोलते हुए भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि पीडीए का वास्तविक अर्थ 'परमानेंटली डिवाइडेड अलायंस' है। उन्होंने दावा किया कि आज न पिछड़ा समाज, न दलित समाज और न ही अल्पसंख्यक समाज समाजवादी पार्टी के साथ है। उन्होंने कहा कि पिछड़ा समाज पूरी मजबूती के साथ एनडीए के साथ खड़ा है।

    दिनेश प्रताप सिंह ने आरोप लगाया कि प्रदेशभर में ऐसे पोस्टर और बैनर लगाए जा रहे हैं जिनमें अखिलेश यादव से पूछा जा रहा है कि दलितों पर अत्याचार कब रुकेंगे। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी चाहे जितना नया चोला पहन ले, उत्तर प्रदेश की जनता उसके असली चरित्र को पहचान चुकी है। जनता अब भ्रमित होने वाली नहीं है और समय आने पर अपना जवाब देगी।

  • दिल्ली SIR में 33 लाख वोटरों को राहत, 20 दिन में सुलझेंगे नोटिस; मामूली गलती पर नहीं होगी परेशानी

    दिल्ली SIR में 33 लाख वोटरों को राहत, 20 दिन में सुलझेंगे नोटिस; मामूली गलती पर नहीं होगी परेशानी

    नई दिल्ली
    दिल्ली में SIR प्रक्रिया के तहत 33 लाख वोटरों को थमाए गए नोटिस के मामले में अब मतदाताओं को टेंशन लेने की कोई जरूरत नहीं है। अगर वह भारत का नागरिक है, 18 साल का है और जिंदा है, तो निश्चिंत रहिए। हर सूरत में उनका नाम वोटर लिस्ट में जुड़ जाएगा। इसके लिए चुनाव आयोग ने 20 दिन का एक मास्टर प्लान बनाया है। जिसमें इस दौरान वोटरों को दिए गए सभी तरह के नोटिसों का समाधान कर दिया जाएगा।

    • चुनाव आयोग के सूत्रों ने बताया कि इस समस्या को जल्द से जल्द समाधान करने के लिए दो अलग-अलग सिस्टम बनाए गए हैं।
    • पहला, लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी के नाम पर जिस भी किसी वोटर के नाम में थोड़ी-बहुत असमानता (गड़बड़ी) रह गई है।
    • उसे 10 दिनों के अंदर मामूली दस्तावेजी प्रक्रिया के तहत दूर कर दिया जाएगा। इसके लिए बीएलओ को कहा गया है कि वह इसमें बहुत अधिक गहराई में ना जाते हुए बस उसके लेटेस्ट नाम के बारे में जानकारी कन्फर्म कर लें।
    • उदाहरण के तौर पर अगर 2003 एसआईआर में उसका नाम केवल सुरेश था और अब इस नाम के पीछे सरनेम में अग्रवाल, शर्मा, कुमार, झा, चटर्जी या बनर्जी या अन्य कुछ जोड़ा गया है तो ऐसे मामलों को बहुत अधिक गंभीर ना माना जाए।
    • अगर वोटर की उम्र, डेट ऑफ बर्थ, फादर नेम और उसके भारतीय होने में कोई संदेह नहीं है तो उसे किसी भी मान्य दस्तावेज के आधार पर ओके कर दिया जाए।
    • ऐसा नहीं कि छोटी-छोटी क्लेरिकल मिस्टेक या फिर कमियों के रहते हुए वोटर को परेशान किया जाए।
    • इससे 33 लाख में से करीब 15 लाख वोटरों की समस्या का समाधान हो जाएगा। जिसमें बीएलओ और चुनाव आयोग को बहुत कुछ अलग से करने की जरूरत नहीं होगी।

    पुराने SIR से मैपिंग न होने पर भी दस्तावेज के आधार पर जुड़ सकेगा नाम
    बाकी बचे 18 लाख वोटरों में से जिस किसी के पुराने एसआईआर से मैपिंग नहीं हो रही है या फिर अन्य किसी तरह की बड़ी समस्या लग रही है। तो ऐसे मामलों में भी वोटर से डिक्लेरेशन कराते हुए कोई भी मान्य दस्तावेज के आधार पर इसे वोटर लिस्ट में ऐड कर लिया जाएगा। सूत्रों का कहना है कि ऐसे किसी भी मामले में अगर किसी वोटर का नाम पुराने एसआईआर में नहीं भी था तो भी अब चल रही एसआईआर प्रक्रिया में ऐसे किसी वोटर का नाम डिलीट नहीं किया जा सकता। सेंटरों पर भी जो हियरिंग चल रही हैं। उनमें भी वोटरों को बहुत अधिक उलझाने की कोई जरूरत नहीं है।

    जुड़वा बच्चों और कम उम्र के माता-पिता वाले मामलों में बीएलओ खुद करें पुष्टि
    ऐसे भी किसी मामले में जिनके दो बच्चे हैं और उनके डेट ऑफ बर्थ में सेम डेट आ रही है। ऐसे में अगर वोटर कहता है कि यह उनके जुड़वा बच्चे हैं तो उससे बीएलओ अपने स्तर पर कन्फर्म करके ऐसे मामलों को ओके कर दें। इसी तरह से किसी वोटर और उसके माता-पिता की उम्र में 15-16 साल का ही अंतर है तो भी बीएलओ और एईआरओ अपने स्तर पर कन्फर्म करके ऐसे मामलों का जल्द से जल्द निपटारा कर दें। सूत्रों का कहना है कि अब पुरानी वोटर लिस्ट और एसआईआर में दी गई फोटो के भी मिलान करने शुरू कर दिए गए हैं। इस मसले को 23 सितंबर को एनबीटी ने प्रमुखता से उठाया था।

    समस्या दूर होते ही वोटरों को मैसेज, ऑनलाइन भी अपडेट होगी जानकारी
    इसके अलावा इस अभियान में एक और काम करने की कोशिश की जा रही है। वह यह कि जिस-जिस भी वोटर की प्रॉब्लम दूर होती जाएगी। उसके पास मैसेज भेजने की भी योजना बनाई जा रही है। ताकि उस वोटर को पता लग जाए कि अब उसे सेंटर में जाने की कोई जरूरत नहीं है और उसको मिले नोटिस की समस्या दूर हो चुकी है। ऐसे वोटरों की ऑनलाइन जारी की गई लिस्ट के आगे भी समस्या समाधान लिखा जाएगा। ताकि सभी को ऑनलाइन भी यह जानकारी अपडेट हो सके।

  • अब चालान पर होगी जिले में सुनवाई, 30 दिन में फैसला जरूरी; अफसरों पर भी लगेगा जुर्माना

    अब चालान पर होगी जिले में सुनवाई, 30 दिन में फैसला जरूरी; अफसरों पर भी लगेगा जुर्माना

    लखनऊ
    केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय ने वाहनों के चालान को और सख्त बनाया है। वाहन के जुर्माने पर हर जिले में सुनवाई कराने के लिए न्याय निर्णायक प्राधिकारी नियुक्त होगा व अपील करने की भी सुविधा मिलेगी। सुनवाई, अपील की 30-30 दिन में सुनवाई करके निर्णय देना होगा। ऐसा न होने पर प्राधिकारी व अपील अधिकारी पर भी पांच से 10 हजार रुपये जुर्माना लगेगा।

    इसका नेक्स्ट जेन ई-चालान मोबाइल एप व पोर्टल बुधवार मध्यरात्रि से प्रभावी हो गया है। दैनिक जागरण ने 28 जुलाई को अब वाहन चालान के जुर्माने पर हर जिले में होगी सुनवाई शीर्षक से खबर प्रकाशित किया था। केंद्रीय मंत्रालय मोटर वाहन अधिनियम 1988 की धारा 167-ख में वाहनों के चालान के जुर्माने का निर्णय करने का नियम बनाया। इसमें प्रदेश सरकार हर जिले में जुर्माने का फैसला करने के लिए न्याय निर्णायक प्राधिकारी नियुक्त करेगी।

    यह प्राधिकारी ऑनलाइन व इलेक्ट्रानिक माध्यम से 30 दिनों में सुनवाई करके निर्णय देगा। यदि निर्णय से कोई व्यक्ति संतुष्ट नहीं है तो आदेश मिलने के 30 दिनों के भीतर अपर जिला मजिस्ट्रेट (एडीएम) या समकक्ष अपीलीय प्राधिकारी के पास अपील कर सकता है। अपीलीय प्राधिकारी को 30 दिनों के भीतर निस्तारण करना होगा। यदि किसी आदेश के 30 दिन निकल जाएं और उचित कारण हो तो 30 दिन अपील स्वीकार की जा सकती है।

    सुनवाई व अपील अधिकारी यदि 30 दिन में निर्णय नहीं देता तो उस अधिकारी पर 5000 से 10,000 तक का जुर्माना भी लगेगा।यदि किसी वाहन ई-चालान हो गया व वाहन स्वामी चालान का भुगतान नहीं करता है या कोर्ट व अधिकारी की ओर से तय जुर्माना भरने का आदेश होने के बाद भी भुगतान नहीं करता है तो जब तक चालान का निपटारा नहीं हो जाता, तब तक वाहन से संबंधित अधिकांश सेवाएं जैसे रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट का ट्रांसफर, एनओसी, डुप्लीकेट आरसी आदि जारी नहीं होंगी।

    वाहन पोर्टल पर संबंधित वाहन के कालम में लेनदेन न करने योग्य लिख दिया जाएगा। ऐसे वाहन स्वामी को चालान जमा करने की सूचना आनलाइन भेजी जाएगी। वहीं, यदि चालान का मामला अभी कोर्ट या सक्षम प्राधिकारी के पास विचाराधीन है तो उस दौरान यह प्रतिबंध लागू नहीं होंगे। उल्लेखनीय है कि अभी तक वाहन का चालान होने पर 90 दिन बाद प्रकरण को संबंधित कोर्ट में भेजने का नियम रहा है।

    यूपी में इस तरह हुए चालानप्रदेशभर में 2024-25 में 27 लाख एक हजार 786 ई-चालान जारी हुए थे। इनमें चार पहिया वाहन आधे से अधिक हैं। इनमें 2,79,296 वाहन ऐसे हैं जिन पर कई तरह के चालान लंबित है। 2025-26 में प्रदेशभर में 30 लाख से अधिक वाहनों का चालान हुआ था।

  • लखनऊ में दो बड़ी टाउनशिप योजनाओं का शुभारंभ, 4526 प्लॉट का खुलेगा रजिस्ट्रेशन

    लखनऊ में दो बड़ी टाउनशिप योजनाओं का शुभारंभ, 4526 प्लॉट का खुलेगा रजिस्ट्रेशन

    लखनऊ
    लखनऊ विकास प्राधिकरण की नैमिष नगर और वरुण विहार योजनाओं का शुभारंभ बुधवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ करेंगे। शाम चार बजे मुख्यमंत्री दोनों महत्वाकांक्षी टाउनशिप योजनाओं का भूमि पूजन करेंगे और भूखंडों के पंजीकरण की प्रक्रिया शुरू कराएंगे। साथ ही एलडीए की पांच अपार्टमेंट परियोजनाओं का भी शिलान्यास होगा। दोनों योजनाओं में कुल 4526 आवासीय भूखंडों के लिए पंजीकरण खोला जा रहा है। पंजीकरण की प्रक्रिया 24 सितंबर से 24 अक्तूबर तक एक माह के लिए खुली रहेगी।

    वरुण विहार के भूखंड 2800 रुपये वर्गफुट
    आगरा एक्सप्रेसवे क्षेत्र के निकट विकसित की जा रही वरुण विहार योजना में 112.5 वर्ग मीटर से लेकर 450 वर्ग मीटर तक के 2847 भूखंड उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इनकी कीमत 2800 रुपये प्रति वर्ग फुट निर्धारित की है।

    नैमिष नगर के भूखंड 3800 रुपये प्रति वर्गफुट
    सीतापुर रोड र नैमिष नगर योजना में 1679 भूखंड उपलब्ध होंगे। योजना में 72 वर्ग मीटर के 197, 112.5 वर्ग मीटर के 524, 162.5 वर्ग मीटर के 520, 200 वर्ग मीटर के 299, 288 वर्ग मीटर के 103 तथा 450 वर्ग मीटर के 30 भूखंड शामिल हैं। भूखंडों की कीमत 3800 रुपये प्रति वर्ग फुट निर्धारित की गई है। नैमिष नगर व वरुण विहार को 12,600 एकड़ में विकसित किया जा रहा है।

    आगरा एक्सप्रेसवे से जुड़ेगा वरुण विहार
    एलडीए ने आगरा एक्सप्रेसवे से वरुण विहार को सीधे जोड़ने के लिए यूपीडा और शासन को प्रस्ताव भेजा है। प्रस्ताव के तहत एक्सप्रेसवे से वरुण विहार योजना में उतरने के लिए एक विशेष रैंप बनाया जाएगा। वर्तमान में वरुण विहार योजना तक पहुंचने के लिए आगरा एक्सप्रेसवे की सर्विस रोड का सहारा लेना पड़ता है।

    प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार रैंप केवल योजना में प्रवेश के लिए होगा। यानी लखनऊ या अन्य दिशा से आने वाले वाहन सीधे वरुण विहार में उतर सकेंगे। हालांकि वापसी के दौरान लोगों को पहले की तरह सर्विस रोड का उपयोग करना होगा। एलडीए के एक अधिकारी के अनुसार इस संबंध में यूपीडा और शासन को पत्र भेज दिया गया है। चूंकि एक्सप्रेसवे यूपीडा के अधिकार क्षेत्र में आता है।

    आयोजन को लेकर आज रूट डायवर्जन
    ● आगरा एक्सप्रेस वे अंडरपास से वाहन घुरघुरी तालाब मोहान रोड या मलिहाबाद होकर गुजर सकेंगे।

    ● खुशहालगंज किसानपथ अंडरपास से वाहन बबुरियाखेड़ा किसानपथ अंडरपास के बजाय घुरघुरी तालाब मोहान रोड या बुद्धेश्वर से जाएंगे।

    ● मौंदा चौराहा से वाहन घुरघुरी तालाब मोहान रोड या बुद्धेश्वर होकर जाएंगे।

    ● बबुरियाखेड़ा किसानपथ अंडरपास से वाहन बबुरियाखेड़ा किसानपथ अंडरपास से यू-टर्न से होकर जाएंगे।

    ● बड़ागांव आगरा एक्सप्रेस वे अंडरपास से वाहन मोहान रोड या बबुरियाखेड़ा किसानपथ अंडरपास होकर जाएंगे।

    ● कठहिंगरा आगरा एक्सप्रेस वे अंडरपास से वाहन कठहिंगरा गांव से घुरघुरी तालाब मोहान रोड होकर गुजर सकेंगे।

    ● भलिया आगरा एक्सप्रेस वे अंडरपास से वाहन मोहान रोड घुरघुरी तालाब होकर गुजर सकेंगे।

    ● झलियामऊ आगरा एक्सप्रेस वे अंडरपास से वाहन कठहिंगरा अंडरपास होकर गुजर सकेंगे।

  • यमुना एक्सप्रेसवे पर स्लीपर बस में लगी आग, 9 यात्रियों की मौत

    यमुना एक्सप्रेसवे पर स्लीपर बस में लगी आग, 9 यात्रियों की मौत

    ग्रेटर नोएडा
     ग्रेटर नोएडा में यमुना एक्सप्रेसवे पर बुधवार देर रात एक यात्री बस में आग लगने से 9 लोगों की मौत हो गई है। यह बस दिल्ली से महोबा जा रही थी। यह भीषण हादसा दयानतपुर गांव के पास हुआ। हादसे के समय बस में करीब 35 लोग सवार थे।

    घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया
    बताया जा रहा कि रात करीब 11 बजे गौतमबुद्ध नगर के जेवर टोल के पास शॉर्ट सर्किट के चलते बस में आग लग गई। ड्राइवर ने आग लगने के बाद बस को एक्सप्रेसवे के किनारे रोक दिया था। लेकिन भीषण आग के चलते बस में अफरातफरी मच गई। हादसे के समय कुछ यात्री तो बस से निकलने में कामयाब हो गए। लेकिन कुछ यात्रियों की बस के अंदर जलने से मौत हो गई। यह बस राज कल्पना ट्रैवल्स की बताई जा रही है। घायलों को नजदीकी कैलाश अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस बस में आग लगने के कारणों की जांच कर रही है।

    सीएम योगी ने हादसे का लिया संज्ञान
    ग्रेटर नोएडा में हुए सड़क हादसे का मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संज्ञान लिया है. मुख्यमंत्री ने मृतकों के शोक संतप्त परिजन के प्रति संवेदना व्यक्त की है. मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को घायलों का समुचित उपचार करवाने के निर्देश दिए हैं. मुख्यमंत्री ने मृतकों के परिजनों से संवाद कर हर संभव सहायता उपलब्ध करवाने का भी निर्देश दिया है। 

    आग लगने के बाद बस में भर गया था धुआं
    इस हादसे में कई बच्चों और बुजुर्गों की मौत की भी खबर है। हादसे वाली बस का नंबर BR32 PA8647 है। बस में यात्रा कर रहे एक चश्मदीद ने बताया कि जब मैं सो गया था, तो किसी ने मुझे जगाकर बताया कि बस में आग लग गई है और हम सब बाहर निकलने के लिए हड़बड़ी में भागे। बस से निकलना आसान नहीं था। बहुत ज़्यादा धुआं था। घबराहट के बीच हम किसी तरह बाहर निकल पाए। बस यात्रियों से खचाखच भरी हुई थी।

    सीएम योगी ने मुआवजे का किया ऐलान
    ग्रेटर नोएडा बस हादसे पर सीएम योगी ने मुआवजे का ऐलान किया है. मृतकों के परिजनों को 2-2 लाख रुपए व घायलों को 50-50 हजार रुपए को आर्थिक मदद का सीएम ने किया ऐलान. बस हादसे में 30 लोगों को पुलिस व बचाव दल ने सुरक्षित बचाया। 

    पुलिस अधिकारी ने बस हादसे की दी जानकारी
    साथ ही सीएम योगी ने घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की है. यह घटना यमुना एक्सप्रेसवे के जीरो पॉइंट से करीब 32 किलोमीटर आगे हुई, जो जेवर थाना क्षेत्र में आता है. ज्वाइंट सीपी राजीव नारायण मिश्रा ने बताया कि आग लगते ही बस में सवार यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई और लोगों ने अपनी जान बचाने के लिए बस से कूदना शुरू कर दिया. हादसे में 9 लोगों की मौत हो गई. देखते ही देखते आग ने पूरी बस को अपने चपेट में ले लिया। 

    अभी भी फंसे हो सकते हैं कुछ और लोग
    आग की सूचना मिलते ही फायर विभाग की टीम तुरंत मौके पर पहुंची और आग बुझाने का काम शुरू किया. काफी मशक्कत के बाद फायर टीम ने आग पर काबू पा लिया. चिंता की बात यह है कि कुछ लोगों के अभी भी बस में फंसे होने की आशंका जताई जा रही है. फायर विभाग के मुताबिक जब तक कूलडाउन की प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती, तबतक बस के अंदर तलाशी नहीं ली जा सकेगी। 

    बस ड्राइवर से की जा रही पूछताछ
    प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि दुर्घटनाग्रस्त बस के सभी प्रपत्र (फिटनेस, परमिट आदि) वैध पाए गए हैं। गौतमबुद्ध नगर पुलिस बस चालक को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है। यात्रियों को तत्काल वैकल्पिक वाहनों की व्यवस्था कर उनके गंतव्य स्थानों पर भेजा जा रहा है।

  • NO PUC NO Fuel: 1 अक्टूबर से बिना वैध PUC नहीं मिलेगा पेट्रोल-डीजल

    NO PUC NO Fuel: 1 अक्टूबर से बिना वैध PUC नहीं मिलेगा पेट्रोल-डीजल

     नई दिल्ली
    No Valid PUCC No Fuel Rule: अगर आप दिल्ली-एनसीआर में रहते हैं और आपका आना-जाना गाजियाबाद-दिल्ली के बीच होता रहता है तो ये ख़बर आपके लिए बेहद जरूरी है. गाजियाबाद में वाहन चालकों के लिए एक अक्टूबर से फ्यूल खरीदने के नियम में बड़ा बदलाव होने जा रहा है. अब बिना वैलिड पॉल्यूशन अंडरकंट्रोल सर्टिफिकेट (PUCC) वाले वाहनों को पेट्रोल और डीजल नहीं दिया जाएगा. जिला पूर्ति विभाग ने इसकी तैयारी शुरू कर दी है। 

    वाहन मालिकों से कहा गया है कि वे 30 सितंबर से पहले अपने वाहनों के प्रदूषण प्रमाणपत्र की वैधता जांच लें और प्रमाणपत्र समाप्त हो चुका है या जल्द समाप्त होने वाला है तो समय रहते उसे रिन्यू करा लें. जिला पूर्ति अधिकारी अमित कुमार तिवारी ने बताया कि एक अक्टूबर से व्यवस्था लागू होने के बाद पेट्रोल पंप पर फ्यूल देने से पहले वाहन के प्रदूषण प्रमाणपत्र की वैधता की जांच की जाएगी। 

    इसके लिए जिले के पेट्रोल पंपों पर विशेष ऐप की व्यवस्था की गई है. वाहन का नंबर स्कैन या दर्ज करने के बाद ऐप के माध्यम से तत्काल पता चल सकेगा कि संबंधित वाहन का प्रदूषण प्रमाणपत्र वैध है या नहीं. वैध प्रमाणपत्र होने पर ही फ्यूल दिया जाएगा.  उन्होंने बताया कि विभाग की ओर से फिलहाल व्यवस्था को लेकर पेट्रोल पंपों पर परीक्षण भी किया जा रहा है, ताकि एक अक्टूबर से इसे लागू करने में तकनीकी दिक्कत न आए. पेट्रोल पंप संचालकों को भी निर्देश दिए गए हैं कि निर्धारित तिथि से बिना वैध प्रदूषण प्रमाणपत्र वाले वाहनों को ईंधन उपलब्ध न कराया जाए। 

    वाहन चालकों को पहले से जानकारी देने पर जोर
    नई व्यवस्था को लेकर वाहन चालकों के बीच जागरूकता बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है. अधिकारियों का कहना है कि वाहन मालिक आखिरी समय का इंतजार करने के बजाय 30 सितंबर तक अपने दस्तावेज जांच लें. खासतौर पर ऐसे वाहन जिनका PUCC पहले ही समाप्त हो चुका है या उसकी अवधि खत्म होने वाली है, वे समय रहते प्रमाणपत्र बनवा लें। 

    हालांकि, ट्रायल के दौरान यह भी सामने आया कि कई वाहन चालकों को अभी तक इस व्यवस्था की जानकारी नहीं है. कुछ वाहन मालिकों ने प्रमाणपत्र की अनिवार्यता और फ्यूल लेने से पहले उसकी जांच को लेकर जानकारी की कमी की बात कही. वहीं, कुछ वाहन चालकों ने प्रदूषण जांच को जरूरी बताते हुए व्यवस्था का समर्थन भी किया. दूसरी ओर, इसे लागू करने के तरीके को लेकर यह सवाल भी उठ रहे हैं कि आपात स्थिति में फ्यूल की जरूरत पड़ने पर क्या होगा और पेट्रोल पंपों पर जांच के कारण भीड़ या अव्यवस्था की स्थिति न बने, इसके लिए क्या व्यवस्था होगी। 

    जिला पूर्ति अधिकारी अमित कुमार तिवारी ने स्पष्ट किया कि बिना वैलिड PUCC वाहन चलाने पर केवल पेट्रोल-डीजल मिलने में परेशानी नहीं होगी, बल्कि नियमों के तहत चालान की कार्रवाई भी की जा सकती है. इसके लिए संबंधित स्तर पर आवश्यक व्यवस्था की जा रही है. विभाग का कहना है कि नई व्यवस्था का उद्देश्य वाहन चालकों को परेशान करना नहीं, बल्कि वाहनों से होने वाले प्रदूषण पर नियंत्रण के साथ लोगों को समय से प्रदूषण प्रमाणपत्र बनवाने के लिए प्रेरित करना है।