रायपुर

 छत्तीसगढ़ की राजनीति से एक बड़ी खबर आई है. वरिष्ठ नेता टीएस सिंहदेव ने पंचायत मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है. अब उनके पास केवल स्वास्थ्य विभाग है. बता दें कि सिंहदेव 2008 से अंबिकापुर (जिला सरगुजा) से छत्तीसगढ़ विधानसभा के निर्वाचित सदस्य हैं. उन्होंने 17 दिसंबर 2018 को पंचायत और ग्रामीण विकास का कार्यभार संभाला था.  

कैबिनेट मंत्री के रूप में बने रहेंगे.स्वास्थ्य मंत्री के पास अब लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, चिकित्सा शिक्षा, बीससूत्रीय, वाणिज्यिक कर (जीएसटी) का प्रभार हैं। बता दें कि सिंहदेव 2008 से अंबिकापुर (जिला सरगुजा) से छत्तीसगढ़ विधानसभा के निर्वाचित सदस्य हैं. उन्होंने 17 दिसंबर 2018 को पंचायत और ग्रामीण विकास का कार्यभार संभाला था.

धान के बोनस को लेकर थी नाराजगी

सूत्रों के अनुसार सिंह देव ने चुनावी घोषणापत्र तैयार किया था जिसमें रमन सिंह के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार द्वारा दिए जा रहे 1750 + 300 (बोनस) के मुकाबले किसानों को 2,500 रुपये प्रति क्विंटल चावल देने का वादा किया गया था।इसी वादे के चलते दिसंबर 2018 के राज्य चुनावों में कांग्रेस की बंपर जीत हुई थी, जब उसने 90 विधानसभा सीटों में से 67 पर जीत हासिल की थी।लेकिन यह वादा पूरा नहीं होने पर उन्होंने इस्तीफा दे दिया है

कौन हैं टीएस सिंहदेव: राज परिवार में जन्मे सिंहदेव ने भोपाल के हमीदिया कॉलेज से इतिहास विषय में एमए (MA in History) किया है. सरगुजा रियासत (princely state) के महाराजा टीएस सिंहदेव के राजनीतिक जीवन की शुरुआत साल 1983 में अंबिकापुर नगर पालिका परिषद के अध्यक्ष (President of Municipal Council) चुने जाने के साथ हुई. वह 10 साल तक इस पद पर बने रहे. मौजूदा दौर में सिंहदेव अंबिकापुर विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं. सिंहदेव 2008 से लगातार अंबिकापुर से जीतते हुए आ रहे हैं. 2013 विधानसभा चुनावों में वह सबसे अमीर उम्मीदवार थे. सिंहदेव करीब 500 करोड़ से अधिक संपत्ति के मालिक हैं. साल 2018 के विधानसभा चुनाव में टीएस सिंहदेव ने छत्तीसगढ़ कांग्रेस की तरफ से घोषणा पत्र बनाने का काम किया था. उन्हें छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की घोषणा पत्र कमेटी का चेयरमैन बनाया गया था.

छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव 2018 के बाद सिंहदेव को स्वास्थ्य मंत्री बनाया गया: प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनी लेकिन सिंहदेव मुख्यमंत्री नहीं बन सके. पार्टी ने भूपेश बघेल को सीएम की कुर्सी सौंप दी और टीएस सिंहदेव मंत्री बनाए गए. छत्तीसगढ़ की सियासत में यह मुद्दा काफी चर्चा में रहा है. ढाई-ढाई के सीएम के फॉर्मूले की बात ने भी बीच में काफी जोर पकड़ा. नौबत यहां तक पहुंच गई कि छत्तीसगढ़ के विधायकों की दिल्ली परेड तक हो चुकी है. एक वक्त तो यह भी लगने लगा था कि अब छत्तीसगढ़ की कमान सिंहदेव के हाथ में सौंप दी जाएगी. लेकिन फिर यह मामला ठंडे बस्ते में चला गया. गाहे-बगाहे सिंहदेव के नाराज होने की खबरें अब भी आते रहती हैं. सिंहदेव का इस्तीफे को भी इसी मसले से जोड़कर देखा जा रहा है.