भोपाल
शहर का क्षेत्रफल लगातार  बढ़ रहा है और राजधानी स्मार्ट सिटी बन रही है, लेकिन इतना सब होने के बाद भी शहर में मृत पशु-पक्षियों को डिस्पोज करने की कोई आधुनिक व्यवस्था नहीं है। मजबूरी में इन्हें जमीन में
गड्ढा खोदकर गाड़ दिया जाता है।

शहर में पशु-पक्षी आदि के मार जाने के बाद उनको दफना दिया जा रहा है। जबकि इन मारे हुए जानवरों को दफनाने के बजाए डिस्पोज किया जाना चाहिए, लेकिन भोपाल नगर निगम बीएमसी के पास मरे हुए जानवरों को डिस्पोज करने का कोई सिस्टम नहीं है। इस कारण नगर निगम के एएचओ मरे हुए जानवरों को यहां-वहां फिंकवा देते हैं या फिर आदमपुर छावनी में दफनाने के लिए भेज देते हैं। अहम बात यह है कि अब तक नगर निगम ने मरे हुए जानवरों के डिस्पोज करने के लिए कोई व्यवस्था नहीं की। इससे निगम की लापरवाही साफ झलक रही है। इस संबंध में अपर आयुक्त एमपी सिंह का कहना है कि आदमपुर छावनी में एक एनिमल करकस बनाया जा रहा। जिसके बाद पशु-पक्षियों को दफनाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

4 करोड़ की लागत से बन रहा ऐनिमल करकस
आदमपुर छावनी में 4 करोड़ की लागत से ऐनिमल करकस बनाया जा रहा है। एक एकड़ जमीन में इसका निर्माण किया जा रहा है। इसको बनने में लगभग 3 महीने का समय लगेगा। मरे हुए जानवरों को यहां लगाकर डिस्पोज किया जाएगा।  

नमक डालकर पशुओं को दफना रहे कर्मचारी
आदमपुर छावनी में आने वाले मरे हुए जानवरों को डिस्पोज करने के लिए गड्डा करके नमक डालकर दफना दिया जाता है। जानकारी के अनुसार शहर से रोजाना 8-10 बड़े जानवरों को दफनाने के लिए आदमपुर छावनी भेजा जा रहा है। हालांकि इससे अधिक मरे हुए जानवरों को एएचओ यहां-वहां सुनसान जगह पर फिकवा देते हैं। जिन्हें अन्य जानवर नोच-नोच कर खाते हैं। खासतौर पर शहर के आवारा कुत्ते मरे हुए जानवरों को खाने के कारण ही खुंखार हुए हैं।