नई दिल्ली

देश की महान एथलीट पीटी उषा को राज्यसभा के लिए नामित किया गया। पीटी के साथ फिल्म कंपोजन और संगीतकार इलैयाराजा, वीरेंद्र हेगड़े और वी. विजयेंद्र प्रसाद को राज्यसभा भेजा जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर इसकी जानकारी दी। पीएम मोदी ने कहा कि पीटी उषा को खेलों में उनकी उपलब्धियों के लिए जाना जाता है। पिछले कई सालों में नए एथलीटों का मार्गदर्शन करने के लिए उनका काम उतना ही सराहनीय है। उन्हें राज्यसभा के लिए मनोनीत किए जाने पर शुभकामनाएं।

इन चारों चेहरों में जो एक बात कॉमन है वो है- इन सभी का साउथ इंडिया से होना। इस तरह राज्यसभा के लिए मनोनयन के बहाने बीजेपी ने अपने 'मिशन साउथ' को और भी धार देने की कोशिश की है।

पीटी ऊषा केरल से हैं। इलैयाराजा तमिलनाडु से हैं और दलित समुदाय से आते हैं। हेगड़े कर्नाटक के प्रसिद्ध धर्मस्थल टेंपल के प्रमुख हैं। बात अगर वी. विजयेंद्र प्रसाद आंध्र प्रदेश से आते हैं। वह 'बाहुबली' सीरीज, 'आरआरआर', 'बजरंगी भाईजान' जैसी सुपर-डूपर फिल्मों की वजह से जाने जाते हैं। चारों ही अपने-अपने क्षेत्र की धुरंधर और प्रभावशाली शख्सियत हैं। इनके सहारे बीजेपी दक्षिण के 5 राज्यों- कर्नाटक, केरल, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और तेलंगाना को साधना चाहती है।

इन पांचों राज्यों में लोकसभा की 129 सीटें हैं। पिछले लोकसभा चुनाव में बीजेपी इनमें से महज 30 सीटों पर ही जीत हासिल कर पाई थी। इन 30 में से भी 26 सीटें (बीजेपी समर्थित एक निर्दलीय सांसद समेत) अकेले कर्नाटक से हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव में इन राज्यों की भूमिका काफी अहम होगी। बीजेपी की कोशिश यहां अपना जनाधार बढ़ाने में है।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बीजेपी अध्यक्ष रहते हुए बीजेपी के 'मिशन साउथ' की रणनीति तैयार की थी। अब उसी रणनीति को जेपी नड्डा अमलीजामा पहना रहे हैं। बीजेपी दक्षिण में पैर पसारने को लेकर कितनी गंभीर है, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा 'मिशन साउथ' को लीड कर रहे हैं। हाल में हैदराबाद में हुई बीजेपी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक भी पार्टी के इसी मिशन को धार देने की कोशिश थी।

दरअसल, 1980 में अपने गठन के साथ ही बीजेपी लगातार दक्षिण में पैठ बढ़ाने की कोशिश कर रही है। उसकी निरंतर कोशिशों का ही नतीजा है कि कर्नाटक अब बीजेपी के मजबूत गढ़ में शुमार हो चुका है। कर्नाटक इकलौता ऐसा दक्षिणी राज्य है जहां बीजेपी सत्ता का स्वाद चख चुकी है और फिलहाल वहां उसी की सरकार है। कर्नाटक में लोकसभा की 28 सीटें हैं, जिनमें से 26 पर बीजेपी+ का कब्जा है। वैसे केंद्रशासित प्रदेश पुदुचेरी में भी कमल खिल चुका है और अब इस यूटी में बीजेपी की सरकार है।

बीजेपी अपनी लाख कोशिशों के बावजूद केरल, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और तमिलनाडु में कुछ खास नहीं कर पाई है। कर्नाटक और तेलंगाना में 2023 में विधानसभा होने हैं। बीजेपी की कोशिश कर्नाटक की तरह ही तेलंगाना में भी सत्ता का स्वाद चखने की है। इसीलिए बीजेपी तेलंगाना में अपनी पूरी ताकत झोंकी हुई है। 17 लोकसभा सीटों वाली तेलंगाना में 2019 के चुनाव में बीजेपी ने 4 सीटों पर जीत का परचम लहराया था। पार्टी की कोशिश 2024 में इस आंकड़े को बढ़ाने और उससे पहले 2023 के विधानसभा चुनाव में यहां की सत्ता पर काबिज होने की है। नड्डा और शाह लगातार तेलंगाना के दौरे कर रहे हैं। बीजेपी महासचिव बीएल संतोष भी इस दक्षिणी राज्य को पार्टी के लिए उर्बर जमीन बनाने में डटे हुए हैं। तेलंगाना में मुख्य मुकाबला सत्ताधारी टीआरएस और बीजेपी के ही बीच है। यही वजह है कि पीएम मोदी ने हैदराबाद में 3 जुलाई की विजय संकल्प रैली और 26 मई की रैली में भी राज्य की टीआरएस सरकार और मुख्यमंत्री केसीआर पर बेहद तीखे हमले किए थे।

आंध्र प्रदेश में लोकसभा की कुल सीटें 25 हैं। 2019 के चुनाव में बीजेपी यहां खाता तक खोलने में नाकाम रही थी। हालांकि, 2014 में उसे आंध्र प्रदेश की 2 सीटों पर जीत हासिल हुई थी। बीजेपी यहां खुद को जगनमोहन रेड्डी की वाईएसआर कांग्रेस के विकल्प के तौर पर पेश करने की कोशिश कर रही है।

केरल और तमिलनाडु में 2026 में विधानसभा चुनाव होने हैं। इन दोनों राज्यों में बीजेपी अपनी ताकत झोंकी हुई है। 2024 में पार्टी की नजर केरल में खाता खोलने पर होगी। केरल में लोकसभा की कुल 20 सीटें हैं। यहां धीरे-धीरे बीजेपी अपना वोटशेयर तो बढ़ाने में कामयाब हो रही है लेकिन अभी तक जीत का सूखा खत्म नहीं कर पाई है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी केरल की ही वायनाड सीट से सांसद हैं। लिहाजा बीजेपी यहां अपने जनाधार को बढ़ाकर न सिर्फ राहुल गांधी को घेरने की कोशिश में है बल्कि सत्ताधारी लेफ्ट फ्रंट के लिए भी मजबूत चुनौती बनना चाहती है।

तमिलनाडु में लोकसभा की 39 सीटें हैं। पिछले चुनाव में बीजेपी यहां एक भी सीट नहीं जीत पाई। हालांकि, प्रदेश बीजेपी की कमान संभाले युवा नेता के अन्नामलाई से पार्टी को काफी उम्मीदें हैं। कर्नाटक काडर के आईपीएस अफसर रहे अन्नामलाई ने नौकरी से इस्तीफा देकर सियासत में एंट्री की। 38 साल का ये पूर्व तेजतर्रार आईपीएस ऑफिसर तमिलनाडु में बीजेपी का मजबूत काडर बेस तैयार करने की कोशिश में है। इलैयाराजा को राज्यसभा भेजकर बीजेपी तमिलनाडु को ही साधने की कोशिश की है।