मुंबई।
 
शिवसेना के 40 और एकनाथ शिंदे समेत 10 निर्दलीय विधायकों के विद्रोह के बाद उद्धव ठाकरे को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था। महाराष्ट्र में महा विकास अघाड़ी की सरकार गिरते ही एकनाथ शिंदे ने मुख्यमंत्री और देवेंद्र फडणवीस ने उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। अब लोगों को मंत्रिमंडल विस्तार का इंताजर है।

क्या वाकई उद्धव ठाकरे फिर जाएंगे बीजेपी के साथ? महाराष्ट्र में इन दिनों यह सवाल हर कोई पूछ रहा है। इसी बीच एक अहम खबर सामने आई है। शिवसेना नेता दीपाली सैयद के एक ट्वीट के बाद चर्चा शुरू हो गई है कि राज्य में आने वाले दिनों में नए और बड़े राजनीतिक घटनाक्रम होंगे।

दीपाली सैयद ने अपने ट्वीट में कहा, 'यह सुनकर बहुत अच्छा लगा है कि अगले दो दिनों में आदरणीय उद्धव साहब और आदरणीय शिंदे साहब शिवसैनिकों की भावनाओं पर चर्चा करने के लिए पहली बार मिलेंगे। साफ है कि शिंदे साहब शिवसैनिकों की तड़प को समझते थे और उद्धव साहब ने परिवार के मुखिया की भूमिका बड़े दिल से निभाई थी। इसमें मध्यस्थता में मदद करने के लिए भाजपा नेताओं को धन्यवाद। एक हॉट स्पॉट इंतज़ार कर रहा होगा।' दीपाली सैयद के इस ट्वीट के बाद कई चर्चाएं शुरू हो गई हैं। क्या शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे बीजेपी के साथ जाने को तैयार होंगे? यह सवाल अब उठता है। दीपाली सैयद ने उल्लेख किया है कि भाजपा ने भी दोनों के बीच बैठक की व्यवस्था करने में मदद की है।

एक दिन पहले दीपाली सैयद ने एक और ट्वीट किया था। इसमें उन्होंने कहा था कि 'माननीय आदित्य साहब जल्द ही कैबिनेट में आएं। मातोश्री पर शिवसेना के 50 विधायक पेश हों। आदरणीय उद्धव साहब और आदरणीय शिंदे साहब एक हो जाएं। शिवसेना कोई गुट नहीं हिंदुत्व का गढ़ है। उस पर हमेशा भगवा लहराता रहेगा।' आपको बता दें कि उद्धव ठाकरे ने इस्तीफा देने से पहले कई बार बागी विधायकों से बात करने और उन्हें मनाने की कोशिश की। हालांकि, बागी एनसीपी और कांग्रेस के साथ मिलकर सरकार नहीं बनाने पर अड़े थे। उन्होंने कहा था कि शिवसेना का भाजपा के साथ स्वाभाविक गठबंधन है।