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  • पहले सेल्फी, फिर सात फेरे… ट्रेड शो में योजनाओं को बताने का मनभावन अंदाज

    पहले सेल्फी, फिर सात फेरे… ट्रेड शो में योजनाओं को बताने का मनभावन अंदाज

    ग्रेटर नोएडा

    इंटरनेशनल ट्रेड शो घूमने पहुंचे लोग जब समाज कल्याण विभाग के आउटलेट में कदम रखते हैं तो एक-एक कर अलग-अलग दृश्य उनका ध्यान खींचते हैं। सामने डिजिटल सेल्फी प्वाइंट है, कुछ कदम आगे विवाह मंडप में दूल्हा-दुल्हन फेरे लेते नजर आते हैं। आगे बढ़ने पर सिलाई केंद्र और किराना स्टोर के मॉडल ग्रामीण परिवारों की बदलती तस्वीर दिखाते हैं। यानी सरकारी योजनाओं की जानकारी यहां पढ़ने के बजाय देखने और महसूस करने का अनुभव देती है।

    क्लिक होते ही खुद मोबाइल तक पहुंच रही सेल्फी

    आउटलेट के प्रवेश हिस्से में बनाया गया डिजिटल सेल्फी प्वाइंट युवाओं और परिवारों को रोक रहा है। यहां क्यूसेक मशीन के माध्यम से सेल्फी लेने की सुविधा है। फोटो लेने के बाद तस्वीर सीधे संबंधित व्यक्ति के मोबाइल फोन पर पहुंच जाती है। सेल्फी लेने के बाद लोग आसपास लगी योजनाओं की प्रदर्शनी देखने के लिए आगे बढ़ रहे हैं। इसके बाद कन्या विवाह योजना का मॉडल सामने आता है। दो सजे विवाह मंडपों में कटआउट के जरिए दूल्हा-दुल्हन को फेरे लेते हुए दिखाया गया है। मंडप में इलेक्ट्रॉनिक हवन कुंड भी लगाया गया है। पूरा दृश्य विवाह समारोह का आभास कराता है और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की बेटियों के विवाह के लिए संचालित योजना को आसानी से समझने का माध्यम बनता है।

    कुछ कदम आगे अभ्युदय कोचिंग योजना का प्रदर्शन है। कटआउट और डिस्प्ले के जरिए आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी दी गई है। समाज कल्याण विभाग की दूसरी कल्याणकारी योजनाओं को भी अलग-अलग मॉडल के माध्यम से प्रदर्शित किया गया है।

    ज्योति टेलर से दीपक किराना स्टोर तक दिखा आत्मनिर्भरता का रास्ता

    महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की पहल 'ज्योति टेलर' काउंटर पर दिखाई देती है। ग्रामीण परिवेश की महिला को घर से सिलाई का काम करते हुए दिखाकर यह समझाने का प्रयास किया गया है कि सरकारी योजनाओं से जुड़कर महिलाएं अपने हुनर को आय के साधन में बदल सकती हैं। पास ही दीपक किराना स्टोर का मॉडल छोटे कारोबार के जरिए परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने की तस्वीर सामने रखता है। आउटलेट में ग्रामीण महिलाओं द्वारा तैयार हस्तनिर्मित उत्पादों की भी प्रदर्शनी लगाई गई है। उत्पादों की जानकारी लेने के साथ ट्रेड शो में आने वाले लोग उनकी खरीदारी भी कर रहे हैं। मंच की ओर बढ़ते ही दृश्य बदल जाता है। यहां अनुसूचित जनजाति क्षेत्रों की लोककलाओं और लोकनृत्यों की प्रस्तुतियां हो रही हैं। कलाकारों की प्रस्तुतियों के दौरान दर्शकों की भीड़ जुटती है और मोबाइल कैमरे निकल आते हैं। कोई वीडियो बनाता है तो कोई कलाकारों के साथ सेल्फी लेता है।

    योगी सरकार की कल्याणकारी योजनाओं को आम लोगों तक पहुंचाने के लिए तैयार किया गया यह आउटलेट सहायता से लेकर शिक्षा, महिला सशक्तीकरण, रोजगार और संस्कृति तक की तस्वीर एक ही परिसर में पेश कर रहा है। योजनाओं को मॉडल और प्रत्यक्ष प्रदर्शन से जोड़ने के कारण यह आउटलेट ट्रेड शो में महज सूचना केंद्र न रहकर लोगों के लिए अनुभव और संवाद का केंद्र बन गया है।

  • समर्थन मूल्य पर धान, ज्वार एवं बाजरा उपार्जन के लिये 46 हजार से अधिक किसानों ने कराया पंजीयन : मंत्री  राजपूत

    समर्थन मूल्य पर धान, ज्वार एवं बाजरा उपार्जन के लिये 46 हजार से अधिक किसानों ने कराया पंजीयन : मंत्री राजपूत

    भोपाल 

    खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में समर्थन मूल्य पर धान, ज्वार एवं बाजरा उपार्जन के लिये पंजीयन प्रक्रिया जारी है। अभी तक 46 हजार 454 किसानों ने पंजीयन कराया है। किसान 10 अक्टूबर तक पंजीयन करा सकते हैं। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री  गोविंद सिंह राजपूत ने किसानों से आग्रह किया है कि निर्धारित समय में पंजीयन करा लें, जिससे किसी भी प्रकार की असुविधा नहीं हो। उन्होंने बताया है कि किसान पंजीयन की व्यवस्था को सहज और सुगम बनाया गया है। प्रदेश में 1100 से अधिक पंजीयन केन्द्र बनाये गये हैं।

    जबलपुर संभाग में 21 हजार 333, नर्मदापुरम में 5 हजार 167, भोपाल में 2 हजार 272, रीवा में 10 हजार 939, शहडोल में 4 हजार 552 और सागर संभाग में 2 हजार 166 किसानों ने पंजीयन कराया है।

    पंजीयन की नि:शुल्क व्यवस्था

    पंजीयन की निःशुल्क व्यवस्था ग्राम पंचायत और जनपद पंचायत एवं तहसील कार्यालयों में स्थापित सुविधा केन्द्र पर और सहकारी समितियों एवं सहकारी विपणन संस्थाओं द्वारा संचालित पंजीयन केन्द्र पर की गई है।

    पंजीयन की सशुल्क व्यवस्था

    पंजीयन की सशुल्क व्यवस्था एम.पी. ऑनलाईन कियोस्क, कॉमन सर्विस सेन्टर कियोस्क, लोक सेवा केन्द्र और निजी व्यक्तियों द्वारा संचालित साइबर कैफे पर की गई है। प्रति पंजीयन के लिये 50 रूपये से अधिक शुल्क नहीं लिया जाएगा। किसान पंजीयन के लिए भूमि संबंधी दस्तावेज़ एवं किसान के आधार कार्ड एवं अन्य फोटो पहचान पत्रों का समुचित परीक्षण कर उनका रिकार्ड रखा जाना अनिवार्य होगा।

    सिकमी/बटाईदार/कोटवार एवं वन पट्टाधारी किसान के पंजीयन की सुविधा केवल सहकारी समिति एवं सहकारी विपणन सहकारी संस्था ‌द्वारा संचालित पंजीयन केन्द्रों पर उपलब्ध होगी। इस श्रेणी के शत-प्रतिशत किसानों का सत्यापन राजस्व विभाग द्वारा किया जाएगा।

    उपार्जित फसल के भुगतान के लिये बैंक खाता

    किसान द्वारा समर्थन मूल्य पर विक्रय उपज का भुगतान प्राथमिकता के आधार पर किसान के आधार लिंक बैंक खाते में किया जाएगा। किसान के आधार लिंक बैंक खाते में भुगतान करने में किसी कारण से समस्या उत्पन्न होने पर किसान ‌द्वारा पंजीयन में उपलब्ध कराये गए बैंक खाते में भुगतान किया जा सकेगा। किसान पंजीयन के समय किसान को बैंक खाता नंबर और IFSC कोड की जानकारी उपलब्ध करानी होगी। अक्रियाशील बैंक खाते, संयुक्त बैंक खाते एवं फिनो, एयरटेल, पेटीएम, बैंक खाते पंजीयन में मान्य नहीं होंगे। पंजीयन व्यवस्था में बेहतर सेवा प्राप्त करने के लिए यह जरूरी होगा कि किसान अपने आधार नंबर से बैंक खाता और मोबाईल नंबर को लिंक कराकर उसे अपडेट रखें।

    सभी जिला कलेक्टर्स को निर्देशित किया गया है कि जिला और तहसील स्तर पर स्थापित आधार पंजीयन केन्द्रों को क्रियाशील रखा जाए जिससे किसान वहां जाकर आसानी से अपना मोबाईल नंबर एवं बायोमेट्रिक अपडेट करा सके। इस कार्य के लिए पोस्ट ऑफिस में संचालित आधार सुविधा केन्द्र का भी उपयोग किया जा सकता है। आधार नंबर से बैंक खाता लिंक कराने के लिए बैंकों के साथ भी समन्वय आवश्यक होगा। किसान के आधार लिंक बैंक खाते के सत्यापन के लिये पंजीयन के दौरान ही एक रूपये का ट्रांजेक्शन मध्यप्रदेश राज्य आपूर्ति निगम द्वारा ई-उपार्जन/जेआईटी पोर्टल के माध्यम से कराया जाएगा।

    आधार नंबर का वेरिफिकेशन

    पंजीयन कराने और फसल बेचने के लिए आधार नंबर का वेरिफिकेशन कराना अनिवार्य होगा। वेरीफिकेशन आधार नंबर से लिंक मोबाईल नंबर पर प्राप्त ओटीपी से या बायोमेट्रिक डिवाईस से किया जा सकेगा। किसान का पंजीयन केवल उसी स्थिति में हो सकेगा जबकि किसान के भू-अभिलेख के खाते एवं खसरे में दर्ज नाम का मिलान आधार कार्ड में दर्ज नाम से होगा। भू-अभिलेख और आधार कार्ड में दर्ज नाम में विसंगति होने पर पंजीयन का सत्यापन तहसील कार्यालय से कराया जाएगा। सत्यापन होने की स्थिति में ही उक्त पंजीयन मान्य होगा।

    किसानों को करें एसएमएस

    विगत रबी एवं खरीफ के पंजीयन में जिन किसानों के मोबाइल नंबर उपलब्ध हैं, उन्हें एसएमएस से सूचित करने के निर्देश दिये गये हैं। गांव में डोडी पिटवाकर ग्राम पंचायतों के सूचना पटल पर पंजीयन सूचना प्रदर्शित कराने तथा समिति/ मंडी स्तर पर बैनर लगवाने के निर्देश भी दिये गये हैं। किसान पंजीयन की सभी प्रक्रियाएँ समय-सीमा में पूर्ण करने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिये गये हैं।

     

  • उज्जैन  में मस्जिद के खिलाफ याचिका हाईकोर्ट से खारिज, हटाने की कार्रवाई के दौरान पथराव-लाठीचार्ज

    उज्जैन में मस्जिद के खिलाफ याचिका हाईकोर्ट से खारिज, हटाने की कार्रवाई के दौरान पथराव-लाठीचार्ज

    उज्जैन

    कंठाल चौराहा से गोपाल मंदिर तक मार्ग चौड़ीकरण के लिए शाही मस्जिद (Shahi Masjid Ujjain) का करीब 10 फीट बाधक हिस्सा हटाया जा रहा है। सोमवार सुबह प्रशासन और‌ मुस्लिम समाज के बीच बातचीत के बाद समाजजन खुद बाधक हिस्सा हटाने पहुंचे। इस दौरान नारेबाजी हुई और कुछ समाजजन ने कार्रवाई का विरोध भी किया।

    उपद्रव करने की कोशिश कर रहे लोगों पर पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े। कार्रवाई के विरोध में मुस्लिम समाज का एक तबका आगर नाके पर जमा हो गया। दोपहर करीब 12 बजे उपद्रवियों ने फिर पत्थर फेंके। पुलिस ने लाठी चार्ज किया। 10 पर एफआईआर दर्ज कर ली गई है। दोपहर तक लाठीचार्ज के बाद स्थिति नियंत्रण में हुई। मस्जिद के बाधक हिस्से को मस्जिद कमेटी तोड़ रही है।

    मस्जिद पक्ष की अपील हाई कोर्ट ने की निरस्त

    इसके साथ ही शाही मस्जिद मामले में मस्जिद पक्ष की ओर से प्रस्तुत अपील हाई कोर्ट ने की निरस्त, न्यायमूर्ति सुबोध अभ्यंकर और न्यायमूर्ति जय कुमार पिल्लैई की युगलपीठ ने भोजनावकाश के बाद की मामले में सुनवाई। विस्तृत आदेश देर शाम तक जारी होगा।

    उल्लेखनीय है कि उज्जैन मास्टर प्लान 2035 के तहत कंठाल चौराहा से गोपाल मंदिर तक 15 मीटर चौड़ा मार्ग प्रस्तावित है। शाही मस्जिद का कुछ हिस्सा इस सड़क की निर्धारित सीमा में बाधक बन रहा था। इसी हिस्से को हटाने के लिए कार्रवाई की जा रही है।

    शहर काजी ने कहा- मस्जिद का मसला हल हो चुका है, अफवाहों पर ध्यान न दें

    उज्जैन में शादी मस्जिद का हिस्सा हटाने को लेकर उज्जैन शहर काजी खली कुर्रे रहमान ने कहा कि मस्जिद का मसला रात में ही हल हो चुका है। समाज के लोग अफवाहों पर ध्यान न दें। बिना वजह बाजार में न खड़े हो और वहां न जाएं। ऐसी कोई बात नहीं है जिसके पीछे हम वहां जाएं। जिस बात के लिए वादा हुआ है वो काम पूरा होना है। वो लोग अपने काम को कर रहे हैं। अफवाहों पर बिल्कुल ध्यान न दें। अफवाहों की वजह से घर से बाहर न निकलें।

        उज्जैन शहर काजी खली कुर्रे रहमान ने कहा- शाही मस्जिद का मामला रात में ही आपसी सहमति से सुलझ गया था। किसी भी प्रकार की अफवाह पर ध्यान न दें और अफवाहों के कारण घर से बाहर निकलकर अनावश्यक रूप से मौके पर न जाएं। 

    उज्जैन प्रशासन और शहर काजी ने भी आम जनता से अपील की है कि वे किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न दें। इसे लेकर उज्जैन कलेक्टर रोशन सिंह ने कहा कि 2028 में सिंहस्थ महाकुंभ का आयोजन होना है। बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए निर्माण कार्य चल रहे हैं, मास्टर प्लान के हिसाब से मार्गों का चौड़ीकरण चल रहा है। इसमें अच्छी बात यह है कि सभी धर्म-समुदाय के लोग स्वतः इसमें अपना योगदान दे रहे हैं।

     उज्जैन कलेक्टर रोशन सिंह ने कहा कि छत्री चौक पर शाही मस्जिद का हिस्सा समुदाय द्वारा स्वतः हटाया जा रहा है। मैं सभी से अपील करता हूं कि किसी भी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान न दें और शांति व्यवस्था बनाए रखें। https://t.co/3uv9WlGE7E#Ujjain 

    उनके मकान, धर्मस्थल जो भी बीच में आ रहे हैं, उन्हें वे स्वतः हटा रहे हैं। इसी क्रम में छत्री चौक पर आज शाही मस्जिद का हिस्सा समुदाय द्वारा स्वतः हटाया जा रहा है। मैं सभी से अपील करता हूं कि किसी भी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान न दें और शांति व्यवस्था बनाए रखें।

    उपद्रवियों ने पत्थर फेंके। क्राइम ब्रांच की महिला टीआई पुष्पा पांचाल को चोट लगी।

    यह मार्ग महाकालेश्वर मंदिर, गोपाल मंदिर और शिप्रा तट को जोड़ता है। सिंहस्थ 2028 और धार्मिक आयोजनों के दौरान श्रद्धालुओं की आवाजाही सुगम बनाने के लिए मार्ग चौड़ीकरण किया जा रहा है।

    शाही मस्जिद के भीतर की तोड़ाई चल रही है। समाजजन खुद इसे हटा रहे हैं।
    हाईकोर्ट भी पहुंचा मामला, आज सुनवाई

    शादी मस्जिद के हिस्से को हटाने के विरोध में मस्जिद कमेटी मध्य प्रदेश हाईकोर्ट पहुंची थी। उन्होंने दावा किया था कि यह मस्जिद 100 साल से भी ज्यादा पुरानी है और इसके ऐतिहासिक दस्तावेज भी हैं।

    आगर नाके पर विरोध-प्रदर्शन करने पहुंचे लोग।

    एकलपीठ में याचिका निरस्त होने के बाद इसे फिर से युगलपीठ के सामने प्रस्तुत किया गया था। उन्होंने दावा किया था कि 1975 में यातायात के लिए मस्जिद की ओर से जमीन दी गई थी। उसी जमीन पर 40 फीट चौड़ी सड़क है।

    शाही मस्जिद को हटाने की प्रशासनिक तैयारी के बीच मस्जिद पक्ष की याचिका पर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर युगल पीठ में सोमवार को सुनवाई होगी। एकल पीठ याचिका को 15 दिन पहले निरस्त कर चुकी है, अब सबकी नजरें युगल पीठ की सुनवाई पर लगी हुई हैं।

    शाही मस्जिद का कुछ हिस्सा (एक तरफ से चार फीट और दूसरी तरफ से नौ फीट) हटाया जा रहा है। इमाम मोहम्मद इब्राहिम मस्जिद द्वारा मस्जिद 636 साल पुरानी होने का दावा करते कहा जा रहा है कि भवन का हिस्सा तोड़े जाने से पूरी संरचना को नुकसान पहुंचेगा और पूरी इमारत प्रभावित हो सकती है।

    वहीं, मस्जिद को हटाने की संभावित कार्रवाई को देखते हुए शनिवार रात से ही बड़ी संख्या में मुस्लिम समाज के लोग शाही मस्जिद के भीतर और बाहर एकत्रित रहे थे। रविवार को भी विरोध और नारेबाजी जारी रही थी। प्रशासन ने स्थिति को देखते हुए मस्जिद के सामने बैरिकेड लगाए और पुलिस बल और आरएएफ की तैनाती की गई।

    औवेसी ने जताया विरोध

    उधर, एआईएमआइएम प्रमुख और सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने शाही मस्जिद को हटाने के मामले में सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया में केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा है कि वक्फ कानून में संशोधन इसीलिए किए गए ताकि कलेक्टर्स और राज्य सरकार को मस्जिदों, दरगाहों, खानकाहों, कब्रिस्तानों को मुसलमानों से छीन लिया जाए।

  • सहकारी क्षेत्र की पहली अत्याधुनिक राज्य स्तरीय डेयरी परीक्षण प्रयोगशाला बनकर तैयार

    सहकारी क्षेत्र की पहली अत्याधुनिक राज्य स्तरीय डेयरी परीक्षण प्रयोगशाला बनकर तैयार

    भोपाल

    प्रदेशवासियों के लिए एक अच्छी खबर है। यदि आपको घर में आने वाले दूध या दुग्ध उत्पादों में मिलावट की आशंका है, तो अब जांच के लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा। मध्यप्रदेश में सहकारिता क्षेत्र की पहली अत्याधुनिक राज्य स्तरीय डेयरी परीक्षण प्रयोगशाला बनकर तैयार हो गई है। मध्यप्रदेश स्टेट को-ऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन, भोपाल परिसर में स्थापित इस प्रयोगशाला में आम उपभोक्ताओं के साथ देश एवं प्रदेश की खाद्य उत्पादक संस्थाएं भी दूध और दुग्ध उत्पादों का परीक्षण करा सकेंगी।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश सरकार मिलावटी खाद्य पदार्थों पर लगाम लगाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। इसी क्रम में प्रदेश में सहकारी क्षेत्र की पहली अत्याधुनिक राज्य स्तरीय डेयरी परीक्षण प्रयोगशाला बनवाई गई है।

    शुद्ध और गुणवत्तापूर्ण दुग्ध उत्पाद उपलब्ध कराना मुख्य उद्देश्य

    परियोजना का मुख्य उद्देश्य उपभोक्ताओं की अपेक्षाओं के अनुरूप खाद्य सुरक्षा मानकों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करना है। प्रदेश में अब तक दूध और दुग्ध उत्पादों की सटीक जांच एक बड़ी चुनौती रही है, जिसे दूर करने के लिए यह अत्याधुनिक प्रयोगशाला स्थापित की गई है।

    12.40 करोड़ की लागत, NABL और FSSAI से मिलेगी मान्यता

    यह प्रयोगशाला केंद्र सरकार के पशुपालन एवं डेयरी विभाग की ‘नेशनल प्रोग्राम फॉर डेयरी डेवलपमेंट' (NPDD) योजना के अंतर्गत वित्तीय सहयोग एवं मार्गदर्शन से बनाई गई है। इसके निर्माण के लिए भारत सरकार द्वारा 12 करोड़ 40 लाख रुपये का अनुदान दिया गया है। प्रयोगशाला को नेशनल एक्रिडिटेशन बोर्ड फॉर टेस्टिंग एंड कैलिब्रेशन लेबोरेटरीज और भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण से मान्यता प्राप्त होगी।

    100 से अधिक मानकों पर होगी जांच

    प्रयोगशाला में अत्याधुनिक मशीनें स्थापित की जा चुकी हैं और जल्द ही जांच की सुविधा भी मिलनी शुरू हो जाएगी। राज्य स्तरीय केन्द्रीय प्रयोगशाला में अत्याधुनिक उपकरणों के माध्यम से दूध एवं दुग्ध पदार्थों की 100 से अधिक मानकों पर जांच की जाएगी। इसमें पेस्टिसाइड्स, एंटीबायोटिक्स, हेवी मेटल्स, अफ्लाटॉक्सिन, वसा की शुद्धता, प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट के साथ-साथ यूरिया, आयोडीन, माल्टोज, शुगर, नमक एवं अन्य प्रकार की मिलावटों की जांच शामिल होगी।

    आमजन और खाद्य उत्पादक संस्थाओं को सीधा लाभ

    इस सुविधा का सीधा फायदा आम नागरिकों के साथ खाद्य उत्पादक संस्थाओं को मिलेगा। प्रयोगशाला के संचालन से राज्य में दूध और दुग्ध उत्पादों की समग्र गुणवत्ता में सुधार आएगा, शुद्धता के प्रति जन-जागरूकता बढ़ेगी और प्रदेशवासियों के स्वास्थ्य पर इसका अत्यंत सकारात्मक प्रभाव देखने को मिलेगा।

     

  • उत्तर पूर्वी पुलिस अकादमी के प्रशिक्षु पुलिस अधिकारियों ने की पुलिस महानिदेशक से भेंट

    उत्तर पूर्वी पुलिस अकादमी के प्रशिक्षु पुलिस अधिकारियों ने की पुलिस महानिदेशक से भेंट

    भोपाल 

    पुलिस मुख्यालय के कांफ्रेंस हॉल में उत्तर पूर्वी पुलिस अकादमी के प्रशिक्षु पुलिस अधिकारियों ने मध्यप्रदेश के पुलिस महानिदेशक  कैलाश मकवाणा से भेंट कर पुलिसिंग के विभिन्न पहलुओं पर मार्गदर्शन प्राप्त किया। इस अवसर पर डीजीपी  मकवाणा ने मध्यप्रदेश पुलिस की कार्यप्रणाली, पुलिसिंग में तकनीक के बढ़ते उपयोग, सामुदायिक पुलिसिंग, साइबर अपराध नियंत्रण, नक्सल समस्या के समाधान तथा कानून-व्यवस्था एवं प्रबंधन से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर प्रशिक्षुओं से संवाद किया।डीजीपी  मकवाणा ने मध्यप्रदेश पुलिस के पूर्व पुलिस महानिदेशक  के.एफ. रुस्तमजी के योगदान को स्मरण करते हुए उनके कार्यकाल के महत्वपूर्ण प्रसंगों पर चर्चा की। उन्होंने चंबल क्षेत्र में डकैती की समस्या तथा उसे समाप्त करने के लिए किए गए पुलिस प्रयासों की जानकारी भी प्रशिक्षुओं से साझा की।

    नक्सल समस्या से निपटने से लेकर कानून-व्यवस्था प्रबंधन तक दी जानकारी

    डीजीपी  मकवाणा ने बताया कि मध्यप्रदेश ने नक्सल समस्या के उन्मूलन की दिशा में महत्वपूर्ण कार्य किया है। उन्होंने प्रदेश को नक्सलमुक्त बनाने के लिए अपनाई गई पुलिसिंग और रणनीति के बारे में प्रशिक्षुओं को जानकारी दी। सांप्रदायिक रूप से संवेदनशील जिलों में कानून एवं शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक पुलिसिंग तथा संवेदनशील परिस्थितियों में प्रभावी ढंग से कार्य करने के संबंध में भी मार्गदर्शन दिया।उन्होंने सिंहस्थ-2028 की तैयारियों का उल्लेख करते हुए बताया कि इसके लिए प्रशिक्षण एवं अधोसंरचना से संबंधित कार्य किए जा रहे हैं। साथ ही नए आपराधिक कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन, ई-समन जैसी तकनीकी व्यवस्थाओं और पुलिसिंग को आधुनिक एवं अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में किए जा रहे कार्यों की जानकारी दी।

    साइबर अपराध और नशे के विरुद्ध जागरूकता अभियानों से कराया परिचित

    डीजीपी ने बताया कि नशा मुक्त भारत-2029 के लक्ष्य की दिशा में मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा व्यापक स्तर पर जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। उन्होंने साइबर अपराधों की रोकथाम के लिए पुलिस द्वारा किए जा रहे प्रयासों की भी जानकारी दी।  उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा सामुदायिक पुलिसिंग के अंतर्गत विभिन्न अभियान संचालित किए जा रहे हैं, जिनका उद्देश्य पुलिस और आमजन के बीच विश्वास एवं संवाद को और मजबूत करना है।

    तकनीक के माध्यम से पुलिसिंग को बनाया जा रहा आधुनिक

    डीजीपी  मकवाणा ने पुलिसिंग में तकनीक के बढ़ते उपयोग की जानकारी देते हुए बताया कि डायल-112 एवं एफआरवी व्यवस्था, सीसीटीएनएस, आईसीजेएस सहित विभिन्न तकनीकी प्रणालियों के माध्यम से पुलिस कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी और त्वरित बनाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि ई-ऑफिस के माध्यम से पुलिस कार्यालयों को पेपरलेस बनाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। वहीं ईएचआरएमएस में लगभग एक लाख पुलिसकर्मियों का रिकॉर्ड ऑनलाइन किया जा चुका है।उन्होंने पुलिस बल की कार्यक्षमता और कल्याण से जुड़े प्रयासों की जानकारी देते हुए बताया कि तनाव प्रबंधन के लिए पिछले वर्ष हार्टफुलनेस संस्था के साथ एमओयू किया गया है और इसके माध्यम से पुलिसकर्मियों के स्ट्रेस मैनेजमेंट पर कार्य किया जा रहा है।

    पुलिस अधिकारी संवेदनशील रहें, जनता की जरूरत के समय मदद करें : डीजीपी

    डीजीपी  कैलाश मकवाणा ने प्रशिक्षु पुलिस अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि पुलिस अधिकारी का व्यवहार अच्छा और संवेदनशील होना चाहिए। जनता को जब पुलिस से मदद की आवश्यकता हो, तब उनकी सहायता के लिए तत्पर रहना पुलिस की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।  कार्यक्रम के प्रारंभ में डॉ. विनीत कपूर, पीएसओ टू डीजीपी ने प्रशिक्षु अधिकारियों को डीजीपी  कैलाश मकवाणा के कार्यों एवं पुलिस सेवा के अनुभवों से परिचित कराया। इस अवसर पर सहायक पुलिस महानिरीक्षक  रामजी वास्तव ने प्रशिक्षु पुलिस अधिकारियों को मध्यप्रदेश पुलिस की मूलभूत जानकारी एवं पुलिस व्यवस्था से परिचित कराया।  प्रशिक्षु पुलिस अधिकारियों को मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा संचालित ‘नशे से दूरी है जरूरी 2.0’ जागरूकता अभियान तथा ‘सेफ क्लिक’ साइबर जागरूकता अभियान पर आधारित वीडियो प्रस्तुतियां दिखाई गईं।

    कार्यक्रम के दौरान उत्तर पूर्वी पुलिस अकादमी के प्रशिक्षु पुलिस अधिकारियों ने भोपाल में अपने प्रशिक्षण एवं भ्रमण के अनुभव भी साझा किए और मध्यप्रदेश पुलिस की कार्यप्रणाली एवं पुलिसिंग के विभिन्न नवाचारों के संबंध में अपनी जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया। कार्यक्रम में विशेष पुलिस महानिदेशक प्रशिक्षण  रवि कुमार गुप्‍ता, अतिरिक्‍त पुलिस महानिदेशक प्रशिक्षण  एन.बी. वायंगणकर, उप पुलिस महानिरीक्षक प्रशिक्षण  मनीष अग्रवाल, एस.ओ. टू डीजीपी  मलय जैन एवं सहायक पुलिस महानिरीक्षक  अंकित सोनी उपस्थित रहें। 

  • बस्तर के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचे मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय, प्रभावित परिवारों से मिलकर जाना हाल

    बस्तर के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचे मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, प्रभावित परिवारों से मिलकर जाना हाल

    रायपुर

    मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने आज बस्तर जिले के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर जमीनी स्थिति का जायजा लिया। मुख्यमंत्री  साय जगदलपुर नगर निगम क्षेत्र के डोंगाघाट पहुंचे और बाढ़ से प्रभावित परिवारों से आत्मीयतापूर्वक मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं। उन्होंने प्रभावित लोगों को आश्वस्त किया कि संकट की इस घड़ी में राज्य सरकार उनके साथ पूरी संवेदनशीलता और तत्परता से खड़ी है तथा प्रत्येक प्रभावित परिवार को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।

    मुख्यमंत्री  साय ने बाढ़ प्रभावित परिवारों को बड़ी राहत देते हुए शासन के प्रावधानों के तहत मिलने वाली सहायता के अतिरिक्त प्रत्येक प्रभावित परिवार को मुख्यमंत्री राहत कोष से ₹10-10 हजार की सहायता राशि प्रदान करने की घोषणा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि बाढ़ से हुई क्षति का सर्वे और आकलन तेजी से पूरा कर पात्र परिवारों तक शासन की सहायता शीघ्र पहुंचाई जाए।

    मुख्यमंत्री  साय ने डोंगाघाट में बाढ़ प्रभावित परिवारों से मुलाकात की। उन्होंने प्रभावितों से बाढ़ के दौरान उत्पन्न परिस्थितियों, मकानों एवं घरेलू सामान को हुए नुकसान तथा वर्तमान में उपलब्ध कराई जा रही राहत के संबंध में जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रभावित परिवारों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए हर जरूरी सहायता उपलब्ध कराएगी।

    मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि राहत कार्यों में किसी प्रकार की शिथिलता न हो। भोजन, स्वच्छ पेयजल, दवाइयां और अन्य आवश्यक सामग्री प्रभावित लोगों तक समय पर पहुंचाई जाए। विशेष रूप से बच्चों, बुजुर्गों, महिलाओं तथा जरूरतमंद लोगों की आवश्यकताओं का ध्यान रखते हुए राहत व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

    इंद्रावती के जलस्तर और प्रभावित इलाकों का किया अवलोकन

    मुख्यमंत्री  साय ने इंद्रावती पुल पहुंचकर नदी के जलस्तर तथा आसपास के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का अवलोकन किया। उन्होंने विभागीय अधिकारियों से जिले में बारिश एवं बाढ़ की स्थिति, प्रभावित गांवों और शहरी क्षेत्रों, राहत एवं बचाव कार्यों तथा प्रभावित परिवारों के लिए की गई व्यवस्थाओं की जानकारी ली।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि जलस्तर में बदलाव और मौसम की स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जाए। निचले एवं संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरती जाए तथा आवश्यकता पड़ने पर राहत एवं बचाव दलों को तत्काल सक्रिय किया जाए। उन्होंने कहा कि लोगों की सुरक्षा सर्वोपरि है और किसी भी आपात स्थिति में सहायता पहुंचाने की व्यवस्था पूरी तरह तैयार रहनी चाहिए।

    बाढ़ का पानी उतरने के बाद स्वास्थ्य और स्वच्छता पर विशेष ध्यान

    मुख्यमंत्री  साय ने अधिकारियों से कहा कि बाढ़ का पानी कम होने के बाद प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य एवं स्वच्छता से जुड़ी चुनौतियों पर विशेष ध्यान दिया जाए। लोगों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराना सुनिश्चित किया जाए। जलस्रोतों की सफाई एवं आवश्यक उपचार के साथ जलजनित बीमारियों की रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग की टीमों को सक्रिय रखा जाए।

    उन्होंने प्रभावित क्षेत्रों में आवश्यकतानुसार स्वास्थ्य शिविर लगाने, दवाइयों की पर्याप्त उपलब्धता रखने और बीमारी के किसी भी संभावित प्रकोप पर तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि राहत कार्य केवल बाढ़ का पानी उतरने तक सीमित न रहें, बल्कि प्रभावित परिवारों के जीवन को सामान्य बनाने तक आवश्यक व्यवस्थाएं प्रभावी रूप से जारी रहें।

    मकान, फसल और पशुधन की क्षति का शीघ्र हो आकलन

    मुख्यमंत्री  साय ने अधिकारियों को बाढ़ से क्षतिग्रस्त मकानों, फसलों, पशुधन और अन्य संपत्तियों का संवेदनशीलता एवं पारदर्शिता के साथ सर्वे करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि नुकसान का वास्तविक आकलन कर संबंधित परिवारों को शासन के प्रावधानों के अनुसार सहायता शीघ्र उपलब्ध कराई जाए। कोई भी पात्र प्रभावित परिवार सहायता से वंचित नहीं रहना चाहिए।

    मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से राहत शिविरों और प्रभावित बस्तियों में नियमित रूप से पहुंचकर लोगों की जरूरतों की जानकारी लेने को कहा। उन्होंने निर्देश दिए कि राहत कार्यों में मानवीय संवेदनशीलता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए और प्रत्येक प्रभावित व्यक्ति तक आवश्यक मदद समय पर पहुंचे।

    हर प्रभावित परिवार के साथ खड़ी है सरकार : मुख्यमंत्री  साय

    मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्राकृतिक आपदा की इस कठिन घड़ी में राज्य सरकार बाढ़ प्रभावित भाई-बहनों के साथ मजबूती से खड़ी है। प्रभावित लोगों की सुरक्षा, राहत और उनके जीवन को जल्द से जल्द सामान्य बनाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि आवश्यक संसाधनों की कोई कमी नहीं होने दी जाएगी और प्रभावित परिवारों को शासन की ओर से हरसंभव सहयोग प्रदान किया जाएगा।

    मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्य संचालित किए जा रहे हैं। प्रभावित परिवारों की आवश्यकताओं के अनुरूप भोजन, पेयजल, स्वास्थ्य सुविधाएं और अन्य जरूरी सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। स्थिति की लगातार निगरानी करते हुए आवश्यकता के अनुरूप त्वरित कदम उठाए जा रहे हैं।

    इस अवसर पर महापौर  संजय पाण्डेय, नगर निगम सभापति  खेमसिंह देवांगन,   कमलचंद्र भंजदेव सहित अन्य जनप्रतिनिधि तथा कमिश्नर बस्तर  डोमन सिंह, आईजी  बी.एन. मीणा, कलेक्टर  आकाश छिकारा, पुलिस अधीक्षक  शलभ सिन्हा सहित संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।

  • PM आवास की मांग पर शिवपुरी में हंगामा, मासूम संग पानी की टंकी पर चढ़ा परिवार; अफसरों के आश्वासन से माने

     शिवपुरी

    शहर के मनीयर में सोमवार को उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब सरकारी जमीन पर पक्का निर्माण रोकने से नाराज एक युवक अपने पूरे परिवार और नौ माह के दुधमुंहे बच्चे को लेकर 70 फीट ऊंची पानी की टंकी पर चढ़ गया।

    करीब दो घंटे तक चले हाईवोल्टेज ड्रामे में नीचे खड़ी पुलिस-प्रशासन की सांसें अटकी रहीं। युवक टंकी से ही परिवार सहित कूदकर जान देने की धमकी देता रहा। अंत में तहसीलदार सिद्धार्थ शर्मा और कोतवाली टीआई रोहित दुबे ने मौके पर पहुंचकर उसे पीएम आवास दिलाने का आश्वासन दिया, तब जाकर वह नीचे उतरा।

    क्या है पूरा मामला?

    मनीयर में सर्वे नंबर 454 की सरकारी जमीन पर पवन जाटव पिछले 25-30 साल से झोपड़ी बनाकर रह रहा है। नगर पालिका द्वारा सड़क बनवाने के बाद उसकी झोपड़ी सड़क से नीची हो गई, जिसमें बारिश का पानी भरने लगा।

    परेशान होकर पवन ने उसी जगह बुनियाद भरकर दो पक्के कमरे बनाना शुरू कर दिया। इस पर पड़ोस में रहने वाले महेश धाकड़, बाबू धाकड़ सहित अन्य लोगों ने कोतवाली में शिकायत कर दी कि सरकारी जमीन पर जबरन पक्का कब्जा किया जा रहा है।

    शिकायत पर पुलिस पवन के घर पहुंची और जमीन के दस्तावेज मांगे। दस्तावेज न होने पर पुलिस पूछताछ के लिए उसके मामा रामभजन को थाने ले गई। इससे आक्रोशित होकर पवन अपनी मां रामश्री जाटव, पत्नी सपना जाटव और नौ माह के बेटे इशांक को लेकर मनीयर टोल टैक्स के पास बनी जलावर्धन योजना की टंकी पर चढ़ गया।
    फोन पर चली दो घंटे बात, फिर माना प्रशासन का आश्वासन

    सूचना मिलते ही तहसीलदार सिद्धार्थ शर्मा और टीआई रोहित दुबे टीम के साथ मौके पर पहुंचे। नीचे से फोन पर पवन को समझाने का दौर शुरू हुआ। पवन का एक ही कहना था कि, "मैं 30 साल से यहीं रह रहा हूं, मुझे यहीं घर बनाने दो, नहीं तो न्याय नहीं मिला तो मैं मर जाऊंगा।"

    करीब दो घंटे की मशक्कत के बाद प्रशासन ने उसे भरोसा दिलाया कि उसे अवैध कब्जे की जगह वैध मकान दिलाया जाएगा, तब कहीं जाकर वह नीचे उतरकर आया।
     

    पीएम आवास की कॉलोनी में करवाएंगे आवेदन

    तहसीलदार सिद्धार्थ शर्मा ने बताया, "पवन जाटव सर्वे नंबर 454 की शासकीय भूमि पर अतिक्रमित है। उसे समझाया गया है कि वह जितना पैसा यहां कच्चे-पक्के निर्माण में लगाएगा, उतने में मेडिकल कॉलेज के पीछे बनी पीएम आवास कॉलोनी में उसे पात्रता के अनुसार पक्का मकान मिल जाएगा। वह बीपीएल श्रेणी का है, उसके पास रहने की व्यवस्था नहीं है। कल उसका आवेदन करवा रहे हैं।"
    टंकियां क्यों बनीं आत्मघाती अड्डा?

    यह कोई पहली घटना नहीं है। शहर में जलावर्धन योजना के तहत 8 से 10 बड़ी पानी की टंकियां बनी हैं, लेकिन एक पर भी सुरक्षा के इंतजाम नहीं हैं। किसी भी टंकी की सीढ़ियों पर लोहे का गेट या ताला नहीं है। चेतावनी बोर्ड, सीसीटीवी कैमरा और चौकीदार का कोई अता-पता नहीं।

    इसी का परिणाम है कि, शाम होते ही इन टंकियों पर नशेड़ी और आवारा तत्वों की महफिल सजती है। जब जिसके मन में आता है, वह टंकी पर चढ़कर प्रशासन को ब्लैकमेल करता है।

    नगर पालिका की जिम्मेदारी क्या है?

    मध्यप्रदेश म्युनिसिपल एक्ट और जल प्रदाय मैनुअल साफ कहता है कि, हर जल संरचना पर लोहे का गेट, ताला, खतरे का बोर्ड, सीसीटीवी और 24 घंटे कर्मचारी की तैनाती अनिवार्य है। इसका उद्देश्य पानी को दूषित होने से बचाना और आत्महत्या जैसी घटनाओं को रोकना है। लापरवाही पर सीएमओ और जल शाखा प्रभारी पर आपराधिक मामला तक दर्ज हो सकता है। शिवपुरी नपा में इन नियमों का खुलेआम उल्लंघन हो रहा है।

  • Singapore-India Network for Growth Forum 2026 में छत्तीसगढ़ का चयन, CM साय करेंगे नेतृत्व

    Singapore-India Network for Growth Forum 2026 में छत्तीसगढ़ का चयन, CM साय करेंगे नेतृत्व

    रायपुर.

    विदेश मंत्रालय, भारत सरकार के नामांकन पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय 3 से 6 अक्टूबर 2026 तक सिंगापुर दौरे पर रहेंगे। जहां वे छत्तीसगढ़ के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे। इस दौरान मुख्यमंत्री 5 अक्टूबर को होने वाले सिंगापुर-इंडिया नेटवर्क फॉर ग्रोथ (SING) फोरम 2026 में शामिल होंगे।

    यह फोरम सिंगापुर बिजनेस फेडरेशन (SBF) की ओर से आयोजित किया जा रहा है और इसका यह पहला संस्करण है। फोरम में सिंगापुर और भारत के वरिष्ठ सरकारी प्रतिनिधियों के साथ उद्योग जगत के प्रमुख, निवेशक और उद्यमी शामिल होंगे। इसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और कारोबारी साझेदारी के अवसरों को बढ़ावा देना है। कार्यक्रम में विभिन्न भारतीय राज्यों की आर्थिक प्राथमिकताओं और निवेश अवसरों को भी सामने रखा जाएगा।

    एमएसएमई और स्टार्टअप की संभावनाएं रखेंगे
    मुख्यमंत्री साय फोरम में छत्तीसगढ़ में एमएसएमई, स्टार्टअप और रोजगारपरक क्षेत्रों में निवेश की संभावनाओं पर राज्य का पक्ष रखेंगे। इसके जरिए राज्य की उपलब्धियों और कारोबारी अवसरों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा। दौरे के दौरान प्रतिनिधिमंडल सिंगापुर के स्किल सेंटर, मंडई वाइल्डलाइफ रिजर्व और गार्डन्स बाय द बे के साथ भी बैठकें करेगा। इन बैठकों में कौशल विकास, वन्यजीव संरक्षण, उद्यानिकी और हरित विकास से जुड़े क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि सिंगापुर यात्रा छत्तीसगढ़ को वैश्विक साझेदारों से जोड़ने और राज्य के विकास के लिए नए सहयोग के अवसर तलाशने का माध्यम बनेगी।

    ये अधिकारी भी रहेंगे प्रतिनिधिमंडल में
    मुख्यमंत्री के साथ प्रतिनिधिमंडल में मुख्य सचिव विकास शील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध सिंह, वाणिज्य एवं उद्योग विभाग के सचिव रजत कुमार, सीएसआईडीसी के प्रबंध संचालक विश्वेश कुमार और मुख्यमंत्री के विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी (ओएसडी) उमेश अग्रवाल शामिल रहेंगे।

  • विश्व पर्यटन दिवस पर जीपीएम जिले को मिला ‘सर्वश्रेष्ठ जिला प्रमोशन अवॉर्ड’

    विश्व पर्यटन दिवस पर जीपीएम जिले को मिला ‘सर्वश्रेष्ठ जिला प्रमोशन अवॉर्ड’

    विश्व पर्यटन दिवस पर जीपीएम जिले को मिला ‘सर्वश्रेष्ठ जिला प्रमोशन अवॉर्ड’

    पुरातात्विक धरोहर धनपुर पर आधारित कॉफी टेबल बुक का विमोचन

    जिले की समृद्ध प्राकृतिक, सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक विरासत को मिली नई पहचान

    रायपुर
     गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले ने पर्यटन के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। जिले में पर्यटन को बढ़ावा देने तथा यहां की समृद्ध प्राकृतिक, ऐतिहासिक, पुरातात्विक एवं सांस्कृतिक विरासत को प्रभावी ढंग से देश-दुनिया के सामने प्रस्तुत करने के उल्लेखनीय प्रयासों के लिए छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड द्वारा जीपीएम जिले को ‘सर्वश्रेष्ठ जिला प्रमोशन अवॉर्ड’ से सम्मानित किया गया।

    राजधानी रायपुर में 27 सितंबर को विश्व पर्यटन दिवस के अवसर पर छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड एवं ‘छत्तीसगढ़ ट्रैवल ट्रेड एसोसिएशन’ (सीजीटीटीए) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित ‘सेंट्रल इंडिया कनेक्ट मार्केटप्लेस’ के दौरान जिले को यह प्रतिष्ठित सम्मान प्रदान किया गया। इस अवसर पर जिले की महत्वपूर्ण पुरातात्विक एवं सांस्कृतिक धरोहर ‘धनपुर’ पर आधारित आकर्षक कॉफी टेबल बुक का भी विमोचन किया गया।

    कॉफी टेबल बुक का विमोचन पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल, छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के अध्यक्ष श्री नीलू शर्मा, पर्यटन विभाग के सचिव डॉ. एस. भारतीदासन, छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के प्रबंध संचालक श्री सौमिल रंजन चौबे, कलेक्टर जीपीएम श्री विजय दयाराम के. तथा जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री मुकेश रावटे द्वारा किया गया।

    धनपुर की पुरातात्विक एवं सांस्कृतिक विशेषताओं को समर्पित इस कॉफी टेबल बुक में क्षेत्र के ऐतिहासिक महत्व, पुरातात्विक धरोहर और पर्यटन संभावनाओं को आकर्षक एवं प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया है। यह पहल धनपुर को प्रदेश और देश के पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान दिलाने के साथ ही जीपीएम जिले की अन्य पर्यटन एवं सांस्कृतिक धरोहरों के प्रति पर्यटकों की रुचि बढ़ाने में भी सहायक होगी।

    उल्लेखनीय है कि गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिला प्राकृतिक सौंदर्य के साथ-साथ पुरातात्विक, धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत से भी समृद्ध है। जिले में पर्यटन स्थलों की पहचान, संरक्षण, प्रचार-प्रसार तथा पर्यटन की संभावनाओं के विकास के लिए जिला प्रशासन द्वारा निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। ‘सर्वश्रेष्ठ जिला प्रमोशन अवॉर्ड’ जिले के इन्हीं प्रयासों को मिली महत्वपूर्ण पहचान है। यह सम्मान जीपीएम को एक प्रमुख पर्यटन गंतव्य के रूप में विकसित करने के प्रयासों को नई ऊर्जा प्रदान करेगा।

  • मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की घोषणा पर अमल, कुनकुरी में 1.01 करोड़ रुपये के दो विकास कार्यों को मिली स्वीकृति

    मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की घोषणा पर अमल, कुनकुरी में 1.01 करोड़ रुपये के दो विकास कार्यों को मिली स्वीकृति

    मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की घोषणा पर अमल, कुनकुरी में 1.01 करोड़ रुपये के दो विकास कार्यों को मिली स्वीकृति

    सूर्य नमस्कार चौक के लिए 76.81 लाख और सामुदायिक भवन के लिए 24.83 लाख रुपये स्वीकृत

    कुनकुरी में अधोसंरचना और नागरिक सुविधाओं के विस्तार को मिलेगी गति, नगरवासियों ने मुख्यमंत्री का जताया आभार

    रायपुर
     मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की घोषणा के अनुरूप जशपुर जिले के कुनकुरी नगर में दो महत्वपूर्ण विकास कार्यों के लिए कुल 1 करोड़ 1 लाख 64 हजार रुपये की अंतिम स्वीकृति प्रदान की गई है। इनमें सूर्य नमस्कार चौक और सामुदायिक भवन का निर्माण शामिल है। दोनों कार्यों की स्वीकृति मिलने से कुनकुरी में अधोसंरचना विकास और नागरिक सुविधाओं के विस्तार को नई गति मिलेगी।

    मुख्यमंत्री साय ने ग्राम कलिबा में नवनिर्मित कलिबेश्वर महादेव मंदिर के प्राण-प्रतिष्ठा कार्यक्रम के दौरान इन दोनों विकास कार्यों की घोषणा की थी। मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुरूप अब दोनों कार्यों को अंतिम स्वीकृति मिलने के साथ ही इनके निर्माण का मार्ग प्रशस्त हो गया है।

    76.81 लाख रुपये से विकसित होगा सूर्य नमस्कार चौक

    कुनकुरी के वार्ड क्रमांक 06 में हनुमान टेकड़ी के पास सूर्य नमस्कार चौक का निर्माण किया जाएगा। इसके लिए 76.81 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की गई है। चौक के विकसित होने से नगर को एक आकर्षक और व्यवस्थित सार्वजनिक स्थल मिलेगा। यह नगर की पहचान को नया स्वरूप देने के साथ नागरिकों के लिए उपयोगी सार्वजनिक स्थल के रूप में विकसित होगा।

    24.83 लाख रुपये से बनेगा सामुदायिक भवन

    वार्ड क्रमांक 06 में हनुमान टेकड़ी के पास ही सामुदायिक भवन का निर्माण भी किया जाएगा। इसके लिए 24.83 लाख रुपये की अंतिम स्वीकृति प्रदान की गई है। सामुदायिक भवन बनने से स्थानीय नागरिकों को सामाजिक, सांस्कृतिक एवं अन्य सामुदायिक आयोजनों के लिए सुविधाजनक स्थान उपलब्ध होगा।

    मुख्यमंत्री की घोषणा पूरी होने पर नगरवासियों में खुशी

    मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की घोषणा के अनुरूप दोनों विकास कार्यों को स्वीकृति मिलने पर कुनकुरी नगरवासियों ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री के प्रति आभार जताया है। नगरवासियों का कहना है कि इन कार्यों के पूरा होने से स्थानीय स्तर पर नागरिक सुविधाएं बढ़ेंगी और कुनकुरी के विकास को नई गति मिलेगी।