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  • भारतीय अर्थव्यवस्था में बदलाव की आंधी, जेपी नड्डा बोले – विकास की रफ्तार ऐतिहासिक

    भारतीय अर्थव्यवस्था में बदलाव की आंधी, जेपी नड्डा बोले – विकास की रफ्तार ऐतिहासिक

    नई दिल्ली
    राज्यसभा में बोलते हुए नेता सदन जेपी नड्डा ने कहा कि विकसित भारत 2047 तक पहुंचने के लिए आज 2026 में क्या करना है और अगले पांच सालों में क्या कार्रवाई की जाएगी, इसके रोड मैप को राष्ट्रपति के अभिभाषण में इंगित किया गया है। वह बुधवार को राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर बोल रहे थे। उन्होंने पिछले कुछ दिनों का जिक्र करते हुए कहा कि एक तरीके से आर्थिक जगत में क्रांति पर क्रांति आती चली गई है। पहले यूरोपीय यूनियन के साथ हमारा समझौता, फिर आर्थिक सर्वे, उसके बाद क्रांतिकारी बजट और फिर इंडो-यूएस डील। एक के बाद एक श्रृंखला में हमको ऐसा देखने को मिला है। जेपी नड्डा ने कहा कि आर्थिक सर्वे की बात करूं तो इसमें बड़े स्पष्ट शब्दों में कहा गया है कि यह सबसे तेजी से आगे बढ़ती हुई प्रमुख अर्थव्यवस्था बनी है। उन्होंने कहा कि वर्ल्ड इकनॉमिक फोरम के चीफ ने कहा है कि भारत ग्लोबल ग्रोथ में 20 प्रतिशत का योगदान देगा। उन्होंने कहा कि यह हम नहीं कह रहे हैं बल्कि वर्ल्ड इकनॉमिक फोरम के चीफ ने कहा है।
    उन्होंने कहा कि हमारा यूरोपीय यूनियन के साथ ट्रेड एग्रीमेंट हुआ है। यह एग्रीमेंट भारतीय व्यवसायियों, कारीगरों, उद्यमियों और आईटी सेक्टर से जुड़े लोगों के लिए नए दरवाजे खोलने वाला है। यह एग्रीमेंट भारतीय लोगों के लिए 27 देशों का दरवाजा खोलने वाला है। इस समझौते को 'मदर ऑफ ऑल डील' कहा गया है। उन्होंने इसे रोजगार बढ़ाने वाला कदम बताया।
    जेपी नड्डा ने सदन में इंडिया और ओमान के बीच हुए समझौते का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि यह समझौता मध्यपूर्व रणनीतिक ऊर्जा और व्यापार के एक कॉरिडोर के रूप में हासिल किया गया है। उन्होंने बताया कि हमने लिंक वेस्ट नीति को और मजबूत किया है। यहां उन्होंने इंडिया-न्यूजीलैंड फ्री ट्रेड एग्रीमेंट का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यह हमारे किसानों के लिए लाभकारी है। यह हमारे उद्यमियों को नई दिशा देगा। छात्रों के लिए नए गंतव्य खोलेगा। यह महिलाओं के विकास में सहायक होगा और नई संभावनाओं को तलाशेगा।
    जेपी नड्डा ने इंग्लैंड के साथ हुए फ्री ट्रेड समझौते का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यह भारत के इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी सेक्टर से जुड़े लोगों के लिए और उद्यमियों के लिए बहुत महत्वपूर्ण होगा। उन्होंने विपक्ष पर तंज करते हुए कहा कि आप कहते थे गरीबी हटाओ, लेकिन यह नारा देते-देते आपने मिडिल मैन पैदा किए और मिडिल मैन के माध्यम से भ्रष्टाचार हुआ है।
    उन्होंने विपक्ष से कहा कि आपने गरीबों को वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल किया। न उनको घर दिया, न उनके रहने की व्यवस्था की, न उनके लिए बैंक खाते खुलवाए, न गैस की व्यवस्था की। यह सब व्यवस्था नरेंद्र मोदी सरकार ने की है। आज देश में 25 करोड़ लोग गरीबी की रेखा से ऊपर आ चुके हैं। हमने गरीब लोगों का आज सुदृढ़ीकरण किया। उनके लिए पक्के घर बनाएं। अभी तीन करोड़ घर और बनाए जाएंगे। साढ़े 12 करोड़ लोगों को पेयजल का कनेक्शन दिया, 10 करोड़ को गैस कनेक्शन दिया।
    उन्होंने कहा कि आज देशभर में 95 करोड़ लोगों को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाया गया है। नड्डा ने बताया कि 6 लाख 75 हजार करोड़ रुपए डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर से लोगों के खातों में ट्रांसफर किए गए हैं। उन्होंने बताया कि भारत आज दुनिया का सबसे बड़ा हेल्थ कवरेज देश बन चुका है। 62 करोड़ लोगों को आज हम गंभीर बीमारियों से लड़ने के लिए 5 लाख रुपए तक का बीमा देते हैं। गरीब आदमी अब आयुष्मान कार्ड लेकर अस्पताल में जाता है और अपनी बीमारियों का निशुल्क उपचार करवाता है।
    उन्होंने कहा कि पहले हालात यह थे कि बुजुर्ग आर्थिक तंगी के कारण अपना उपचार तक नहीं करवा पाते थे, लेकिन आज बुजुर्ग निश्चिंत होकर अपना उपचार करवाते हैं। एक रिपोर्ट बताती है कि आज कैंसर का पता लगने पर 90 प्रतिशत लोगों का उपचार तीस दिन के भीतर शुरू हो जाता है।

  • सीएम योगी का ‘बाल स्नेह मॉडल’ – एडमिशन से इलाज तक, जरूरतमंद बच्चों को तुरंत आर्थिक मदद

    सीएम योगी का ‘बाल स्नेह मॉडल’ – एडमिशन से इलाज तक, जरूरतमंद बच्चों को तुरंत आर्थिक मदद

    लखनऊ
    नर्सरी में एडमिशन कराने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पास पहुंची मासूम बच्ची की जिद हो या चॉकलेट की मांग करने वाले बच्चों की हठ। जिन मुख्यमंत्री का नाम सुनकर अपराधी कांप उठते हैं, बच्चे उन्हीं से मिलकर सहजता से अपनी जिद मनवा लेते हैं। कहते हैं, 'बच्चे मन के सच्चे', वे अपने दिल की भावना को अत्यंत निश्छलता से प्रकट कर देते हैं, यही भाव उस समय सामने आया, जब सीएम योगी आदित्यनाथ को देखते ही एक छोटी बच्ची ने उन्हें सैल्यूट किया। सीएम ने भी मुस्कुराते हुए बच्ची को खूब मन लगाकर पढ़ने के लिए कहा। उनका यह बाल प्रेम उनके कोमल हृदय व सर्वसुलभ होने के साथ-साथ जनसेवा, संवेदना व सुशासन की जीवंत तस्वीर प्रस्तुत करता है। मुख्यमंत्री के बच्चों से जुड़ाव और उनके साथ भावनात्मक संवाद के कई दृश्य समय-समय पर सामने आते रहते हैं। विगत सोमवार को ‘जनता दर्शन’ में मां के साथ आई बच्ची अनाबी अली से सीएम का संवाद इन दिनों चर्चा में है। अपने एडमिशन के लिए जिद, फिर एबीसीडी व कविता सुनाकर अनाबी ने सीएम का दिल जीत लिया।
    मकर संक्रांति पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का गोरखनाथ मंदिर में एक बच्चे से “और क्या चाहिए” पूछना और उसका मासूम जवाब सुनकर खिलखिलाकर हंसना भी उनके बालप्रेम को प्रकट करता है। बच्चों से अत्यंत आत्मीयता से संवाद और उनके भविष्य को लेकर त्वरित निर्णय मुख्यमंत्री की संवेदनशीलता को प्रदर्शित करते हैं।
    बीते दिनों ‘जनता दर्शन’ में दो साल की अनन्या से संवाद भी लोगों के मन को छू गया। इसी तरह 31 दिसंबर को मेजर की बेटी अंजना भट्ट ने मुख्यमंत्री से मुलाकात कर अपने मकान पर कब्जे की शिकायत की, जिस पर मुख्यमंत्री ने 24 घंटे के भीतर न सिर्फ मकान को कब्जा मुक्त कराया, बल्कि आरोपियों पर एफआईआर व तत्काल गिरफ्तारी भी कराई। यह मामला सीएम की जन समस्याओं के प्रति गंभीरता को प्रकट करते हुए स्पष्ट संदेश देता है कि वे कानून व्यवस्था, बच्चों, महिलाओं और कमजोर वर्गों से जुड़े मामलों का समाधान कराने में तनिक भी विलंब नहीं करते।
    कानपुर की मूक-बधिर युवती खुशी गुप्ता की कहानी भी इन दिनों हर किसी की जुबां पर है। मुख्यमंत्री से मिलने की उसकी जिद और अकेले पैदल चलकर लखनऊ पहुंचने की जानकारी जब सीएम योगी आदित्यनाथ को मिली तो उन्होंने उसे बुलाकर उसके बनाए चित्रों को स्वीकार किया और उसके शिक्षित-सुरक्षित भविष्य का आश्वासन दिया। मुख्यमंत्री के अपनत्व से भाव-विभोर खुशी की ‘अनकही भावनाओं’ ने 25 करोड़ प्रदेशवासियों के बीच मुख्यमंत्री की ‘प्रदेश ही परिवार’ धारणा की विश्वसनीय तस्वीर पेश की।
    ‘जनता दर्शन’ के जरिए लखनऊ की अनाबी अली, कानपुर की मायरा, गोरखपुर की पंखुड़ी और मुरादाबाद की वाची का स्कूल में एडमिशन कराना भी सीएम योगी की संवेदनशीलता का हिस्सा है। कानपुर की नन्ही मायरा ने कहा था कि मैं बड़ी होकर डॉक्टर बनना चाहती हूं। इस पर सीएम ने तत्काल उसका प्रवेश कराने का निर्देश दिया। वाची ने कहा कि मैं पढ़ना चाहती हूं, सीएम ने उसका भी प्रवेश कराया। गोरखपुर की पंखुड़ी की फीस माफ कराने के साथ ही उसे पुनः विद्यालय भेजना भी सुनिश्चित कराया।
    26 जनवरी को गणतंत्र दिवस परेड में आए बच्चे सीधे सीएम योगी के पास पहुंच गए। सभी ने सीएम के साथ फोटो खिंचवाई, उनसे बातचीत की। सीएम ने उन्हें दुलारा और एक नन्ही बच्ची को गोद में लेकर अपना वात्सल्य भाव प्रकट किया।
    बीते सितंबर में ‘जनता दर्शन’ में कानपुर की रायपुरवा निवासी एक वृद्ध मां अपने कैंसर पीड़ित बेटे का दर्द लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पास पहुंची थीं। उनकी तकलीफ देखकर सीएम द्रवित हो गए और कैंसर पीड़ित बेटे को एंबुलेंस से सीधे कल्याण सिंह सुपर स्पेशियिलिटी कैंसर इंस्टीट्यूट भिजवाकर उसका इलाज प्रारंभ कराया। ऐसे अनेक उदाहरण हैं, जो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बाल प्रेम, जनसेवा, संवेदना व सुशासन की जीवंत तस्वीर प्रस्तुत करते हैं।

  • भाजपा का कांग्रेस पर तीखा हमला: ‘राहुल गांधी ने लोकतंत्र को किया शर्मसार’

    भाजपा का कांग्रेस पर तीखा हमला: ‘राहुल गांधी ने लोकतंत्र को किया शर्मसार’

    नई दिल्ली
    भाजपा सांसदों ने कांग्रेस पर सदन में शोर करने और कार्यवाही बाधित करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने लोकतंत्र को शर्मसार करने वाला काम सदन के अंदर किया है। केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा, "लोकतंत्र को शर्मसार करने वाला काम सदन के अंदर हुआ। राहुल गांधी ने समझ लिया कि ये कांग्रेस पार्टी का दफ्तर है। देश के खिलाफ बोलना कभी सकारात्मक सोच का काम नहीं है। राहुल गांधी के नेतृत्व में देश के खिलाफ एक साजिश के तहत ये हुआ है।" उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी नाटक करने वालों का अड्डा बन गई है। जैसे नाटक में झूठ और भ्रम फैलाए जाते हैं, वही काम राहुल गांधी कर रहे हैं। यह एक ऐसा काम है, जो लोकतंत्र को शर्मसार करता है। राहुल गांधी सोचते हैं कि संसद कांग्रेस पार्टी का ऑफिस है और इस बिल्डिंग में हमारे अलावा कोई और राज नहीं कर सकता है।

    केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के उस लेटर पर निशाना साधा, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि उन्हें लोकसभा में बोलने नहीं दिया गया। मंत्री रिजिजू ने कहा, "मैंने इसका जवाब दे दिया है। उन्होंने कहा था कि वह नियमों के बाहर बोलेंगे। हमने दो दिन इंतजार किया, लेकिन दूसरों को भी बोलने का मौका मिलना चाहिए। वह मनमाने ढंग से नहीं बोल सकते। यह भारत की संसद है, यहां नियमों के अनुसार ही बोलना पड़ता है।"

    भाजपा सांसद अरुण गोविल ने विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा, "उनके व्यवहार की जितनी निंदा की जाए कम है। इस तरह का व्यवहार अगर एक सांसद करे तो बहुत शर्मनाक है। राहुल गांधी सदन में क्या बोलते हैं और कैसे व्यवहार करते हैं, उनको खुद नहीं पता होता है।"

    भाजपा सांसद शशांक मणि ने 8 विपक्षी सांसदों के निलंबन पर कहा, "उनके खिलाफ कार्रवाई इसलिए की गई क्योंकि उन्होंने संसद की मर्यादा का हनन किया। जो उन पर कार्रवाई की गई है, वो सही है। इस प्रकार से कोई और भी हंगामा करेगा तो मुझे पूरा विश्वास है कि अध्यक्ष इस प्रकार की कार्रवाई करेंगे।" भाजपा सांसद दर्शन सिंह चौधरी ने कहा, "कांग्रेस के आरोप बेबुनियाद हैं। जिस तरह से राहुल गांधी और उनके समर्थक गठबंधन ने बर्ताव किया, वह एक ऐसा काम है, जो संसद की गरिमा को ठेस पहुंचाता है।"

  • ज़हर परोस रही मिलावट! राज्यसभा में गरजे राघव चड्ढा, बोले– लोगों की सेहत से हो रहा खिलवाड़

    ज़हर परोस रही मिलावट! राज्यसभा में गरजे राघव चड्ढा, बोले– लोगों की सेहत से हो रहा खिलवाड़

    नई दिल्ली
    आम आदमी पार्टी (आप) के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने बुधवार को सदन में देश में खाने में मिलावट जैसे गंभीर मुद्दे को उठाया। उन्होंने इसे एक बड़ा स्वास्थ्य संकट बताया जो खासकर बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं के लिए गंभीर खतरा पैदा करता जा रहा है। आप सांसद राघव चड्ढा ने संसद में बोलते हुए कंपनियों पर सेहतमंद और एनर्जी बढ़ाने वाले झूठे दावों के तहत हानिकारक उत्पाद बेचने का आरोप लगाया।

    उन्होंने विस्तार से बताया कि कैसे रोजमर्रा की जरूरी चीजों में खतरनाक पदार्थ मिलाए जाते हैं। उन्होंने बताया कि दूध खरीदिए, उसमें यूरिया मिलता है, सब्जियों में ऑक्सीटोसिन है, पनीर में स्टार्च और कास्टिक सोडा होता है, आइसक्रीम में डिटर्जेंट पाउडर मिलता है, फलों के जूस में सिंथेटिक फ्लेवर और आर्टिफिशियल रंग होते हैं, खाने के तेल में मशीन का तेल मिलाया जाता है, मसालों में ईंट का पाउडर और लकड़ी का बुरादा होता है, चाय में सिंथेटिक रंग मिलाए जाते हैं और पोल्ट्री उत्पादों में एनाबॉलिक स्टेरॉयड मिलाए जाते हैं। यहां तक ​​कि देशी घी में जो मिठाइयां बनानी चाहिए, वो भी वनस्पति तेल और डालडा से बनाया जाता है।

    आप सांसद राघव चड्ढा ने आगे बताया कि एक मां अपने बच्चे को दूध का गिलास देती है, ये सोचकर कि उसके सेहत के लिए कैल्शियम और प्रोटीन मिलेगा और मेरा बच्चा दुरुस्त बनेगा। लेकिन उसे इस बात का जरा भी अंदाजा नहीं है कि वह अपने बच्चे को यूरिया और डिटर्जेंट मिला हुआ दूध पिला रही है। उन्होंने एक रिसर्च स्टडी का हवाला दिया, जिसमें दिखाया गया कि दूध के सैंपल में 71 प्रतिशत यूरिया और 64 प्रतिशत में न्यूट्रलाइजर जैसे सोडियम बाइकार्बोनेट पाए गए।

    उन्होंने कहा कि देश में दूध का इतना उत्पादन नहीं है, जितना बेचा जा रहा है। सब्जियां जिन्हें हम सेहत का खजाना समझकर खरीदते हैं, उनमें ऑक्सीटोसिन का इंजेक्शन लगाकर फ्रेश करके बेचा जाता है। ऑक्सीटोसिन वह खतरनाक केमिकल है, जिससे चक्कर आना, सिरदर्द, हार्ट फेलियर, बांझपन और कैंसर जैसी बीमारियां होती हैं। उन्होंने बताया कि 2014-15 और 2025-26 के बीच जितने भी सैंपल की जांच हुई, उनमें से 25 प्रतिशत सैंपल में मिलावट पाई गई, जिसका मतलब है कि हर चार में से एक सैंपल में मिलावट पाई गई। उन्होंने आगे कहा कि जो प्रोडक्ट भारत में बनते हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बैन हो गए हैं, दो बड़ी भारतीय मसाला कंपनियों के उत्पादों पर कैंसर पैदा करने वाले कीटनाशकों के कारण यूके और पूरे यूरोप में बैन लगा दिया गया था, फिर भी वही उत्पाद भारत में खुलेआम बेचे जा रहे हैं।

    उन्होंने दुख जताया कि जो चीजें विदेशों में पालतू जानवरों के लिए भी ठीक नहीं हैं, उनका यहां बिना सोचे-समझे सेवन किया जा रहा है। उन्होंने भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) को पर्याप्त कर्मचारियों और प्रयोगशाला सुविधाओं के साथ मजबूत करने, उल्लंघन करने वालों पर वित्तीय जुर्माना बढ़ाने, मिलावटी उत्पादों का नाम बताने और उन्हें शर्मिंदा करने के लिए एक सार्वजनिक रिकॉल सिस्टम शुरू करने और विज्ञापनों में गुमराह करने वाले स्वास्थ्य दावों पर बैन लगाने का प्रस्ताव दिया।

  • मणिपुर में खत्म हुआ राष्ट्रपति शासन, गृह मंत्रालय के नोटिफिकेशन से बहाल हुई सरकार

    मणिपुर में खत्म हुआ राष्ट्रपति शासन, गृह मंत्रालय के नोटिफिकेशन से बहाल हुई सरकार

    नई दिल्ली
    मणिपुर में राष्ट्रपति शासन समाप्त कर दिया गया है। गृह मंत्रालय ने इस संबंध में मंगलवार को आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी कर इसकी घोषणा की। यह फैसला 4 फरवरी 2026 से प्रभावी होगा। नोटिफिकेशन के अनुसार, संविधान के अनुच्छेद 356 के खंड (2) के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मणिपुर राज्य में 13 फरवरी 2022 को लागू की गई राष्ट्रपति शासन की उद्घोषणा को वापस ले लिया है। इस आदेश के साथ ही राज्य में केंद्रीय शासन की व्यवस्था समाप्त हो गई है।

  • पीएम मोदी की मलेशिया यात्रा इस हफ्ते, व्यापार-सुरक्षा समेत कई बड़े मुद्दों पर होगी अहम बातचीत

    पीएम मोदी की मलेशिया यात्रा इस हफ्ते, व्यापार-सुरक्षा समेत कई बड़े मुद्दों पर होगी अहम बातचीत

    नई दिल्ली
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 7-8 फरवरी 2026 को मलेशिया की आधिकारिक यात्रा पर जाएंगे। इस दौरान वह मलेशिया के प्रधानमंत्री के साथ कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर बातचीत करेंगे। भारतीय विदेश मंत्रालय के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मलेशिया के प्रधानमंत्री दातो सेरी अनवर इब्राहिम ने आमंत्रित किया है। यह प्रधानमंत्री की मलेशिया की तीसरी यात्रा होगी और अगस्त 2024 में भारत-मलेशिया द्विपक्षीय संबंधों को 'व्यापक रणनीतिक साझेदारी' का दर्जा दिए जाने के बाद पहली यात्रा होगी।
    इस यात्रा के दौरान, प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम के साथ द्विपक्षीय चर्चा करेंगे। प्रधानमंत्री भारतीय समुदाय के सदस्यों के साथ-साथ उद्योग और व्यापार प्रतिनिधियों से भी बातचीत करेंगे। प्रधानमंत्री की यात्रा के साथ ही 10वां भारत-मलेशिया सीईओ फोरम भी आयोजित किया जाएगा।
    भारत और मलेशिया ऐतिहासिक, सभ्यतागत और सांस्कृतिक संबंधों पर आधारित दीर्घकालिक मित्रता साझा करते हैं। मलेशिया में 29 लाख से अधिक भारतीय प्रवासी समुदाय की उपस्थिति से यह संबंध और भी मजबूत होता है, जो विश्व में तीसरा सबसे बड़ा है।
    भारत-मलेशिया संबंध बहुआयामी और विकसित हो रहे हैं। प्रधानमंत्री की आगामी यात्रा दोनों नेताओं के लिए व्यापार और निवेश, रक्षा, सुरक्षा और समुद्री सहयोग से लेकर डिजिटल और वित्तीय प्रौद्योगिकी, ऊर्जा, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, संस्कृति, पर्यटन, और जन-संबंधों तक फैले द्विपक्षीय सहयोग के संपूर्ण दायरे की समीक्षा करने का अवसर प्रदान करती है। साथ ही पारस्परिक लाभ के लिए भविष्य में होने वाले सहयोग की रूपरेखा तैयार करने का भी अवसर देती है।

  • 5 फरवरी के बाद दुनिया ज्यादा असुरक्षित? खत्म हो रही NEW START संधि, परमाणु हथियारों की दौड़ का खतरा बढ़ा

    5 फरवरी के बाद दुनिया ज्यादा असुरक्षित? खत्म हो रही NEW START संधि, परमाणु हथियारों की दौड़ का खतरा बढ़ा

    नई दिल्ली
    अमेरिका और रूस के बीच परमाणु हथियारों पर लगी जो आखिरी बड़ी पाबंदी थी, वह 5 फरवरी को खत्म होने वाली है। ऐसा पहली बार होगा जब दुनिया के दो सबसे बड़े परमाणु शक्ति संपन्न देशों पर कोई कानूनी लगाम नहीं रहेगी। ऐसे में ये जानना जरूरी है कि आखिर यह न्यू स्टार्ट संधि क्या है, जिसकी वजह से दुनिया फिर से परमाणु हथियारों की खतरनाक दौड़ में फंसती दिख रही है। चलिए जानते हैं कि इस समझौते पर किसने हस्ताक्षर किए थे और इसमें क्या-क्या प्रावधान हैं।
     
    न्यू स्टार्ट संधि पर 2010 में अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा और रूसी राष्ट्रपति दिमित्री मेदवेदेव (जो उस समय व्लादिमीर पुतिन के सहयोगी थे और रूस के राष्ट्रपति का एक कार्यकाल पूरा कर चुके) ने हस्ताक्षर किए थे। उस समय दोनों देशों के बीच संबंधों में नई शुरुआत हो रही थी। यह संधि 2011 में लागू हुई। इस समझौते में सामरिक परमाणु हथियारों ( Strategic Nuclear Weapons) पर सख्त सीमाएं तय की गईं। ये वे हथियार हैं जो परमाणु युद्ध में दोनों पक्ष एक-दूसरे के महत्वपूर्ण राजनीतिक, सैन्य और औद्योगिक केंद्रों पर हमला करने के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं।

    संधि में शॉर्ट नोटिस पर मौके पर निरीक्षण ( On Site Inspections) की व्यवस्था है, ताकि दोनों पक्ष यह सुनिश्चित कर सकें कि दूसरा पक्ष संधि का पालन कर रहा है। लेकिन 2023 में यूक्रेन युद्ध में अमेरिका के समर्थन के कारण रूस ने अपनी भागीदारी निलंबित कर दी। इससे निरीक्षण रुक गए, और दोनों पक्षों को एक-दूसरे की गतिविधियों के बारे में केवल अपने खुफिया आकलन पर निर्भर रहना पड़ा। हालांकि, दोनों ने कहा कि वे संधि की संख्यात्मक सीमाओं का पालन जारी रखेंगे, जो अब तक लागू हैं।

    संधि की अवधि क्यों नहीं बढ़ाई जा रही?
    संधि में स्पष्ट है कि इसे केवल एक बार बढ़ाया जा सकता है (5 साल के लिए) और यह बढ़ोतरी 2021 में जो बाइडेन के राष्ट्रपति बनते ही हो चुकी है। संधि अब 5 फरवरी 2026 को समाप्त हो रही है। पिछले साल सितंबर में पुतिन ने प्रस्ताव दिया था कि दोनों पक्ष अनौपचारिक रूप से एक और साल के लिए युद्धक हथियारों की सीमा का पालन करें। लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार तक कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं दी थी। हालांकि उन्होंने इसे अच्छा विचार बताया था, लेकिन बाद में कहा कि अगर खत्म होती है तो खत्म हो जाए।

    अमेरिका में इस पर मतभेद क्यों?
    अब सवाल उठता है कि अमेरिका में इस पर मतभेद क्यों है। दरअसल, कुछ लोग मानते हैं कि समझौता स्वीकार करने से हथियारों की होड़ रुक सकती है और आगे बातचीत के लिए समय मिलेगा। वहीं, अन्य का कहना है कि चीन के तेजी से बढ़ते परमाणु हथियारों को देखते हुए अमेरिका को अब इन सीमाओं से मुक्त हो जाना चाहिए, ताकि अपना शस्त्रागार मजबूत कर सके; वरना कमजोरी का संकेत जाएगा।

    संधि खत्म होने से क्या फर्क पड़ेगा?
    अगर मॉस्को और वाशिंगटन लंबी दूरी के परमाणु हथियारों पर आपसी सीमाओं का पालन बंद कर देते हैं, तो आधे से अधिक सदी पुराना हथियार नियंत्रण का दौर खत्म हो जाएगा। कोई उत्तराधिकारी संधि नहीं बनी है, जिससे खालीपन पैदा हो गया है। विशेषज्ञ चिंतित हैं कि इससे परमाणु जोखिम बढ़ सकता है, खासकर यूक्रेन और मध्य पूर्व के युद्धों के कारण बढ़े तनाव में। संधियां सिर्फ संख्याएं सीमित नहीं करतीं, बल्कि हथियारों की अनियंत्रित दौड़ रोकने के लिए पारदर्शी ढांचा भी प्रदान करती हैं।

    संधि न होने पर दोनों पक्ष क्या कर सकते हैं?
    दोनों को अपनी मिसाइलों की संख्या बढ़ाने और सैकड़ों अतिरिक्त रणनीतिक युद्धक हथियार तैनात करने की आजादी मिल जाएगी। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि तकनीकी और रसद चुनौतियों के कारण यह रातोंरात नहीं होगा, बड़े बदलाव में कम से कम एक साल लग सकता है। लंबे समय में चिंता यह है कि अनियंत्रित हथियारों की दौड़ शुरू हो जाएगी, जहां दोनों पक्ष दूसरे की योजनाओं के सबसे खराब परिदृश्य पर आधारित हथियार बढ़ाते रहेंगे।

    नई संधि के लिए क्या शर्तें होंगी?
    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कहते हैं कि उन्हें एक नई, बेहतर संधि चाहिए, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि यह लंबी और जटिल प्रक्रिया होगी। नई संधि में अल्प और मध्यम दूरी के हथियार, रूस की नई प्रणालियां (जैसे बुरेवेस्तनिक क्रूज मिसाइल और पोसाइडन टॉरपीडो) को भी शामिल करना पड़ सकता है। इसके अलावा, इसमें कौन शामिल होगा, इस पर सहमति नहीं है। ट्रंप रूस और चीन दोनों के साथ निरस्त्रीकरण चाहते हैं, लेकिन चीन कहता है कि उनके शस्त्रागार रूस से कई गुना छोटे हैं, इसलिए बातचीत अवास्तविक है। रूस ब्रिटेन और फ्रांस (नाटो सदस्य) की परमाणु शक्तियों को भी शामिल करने की मांग करता है, जिसे वे ठुकराते हैं।

     

  • पिछड़ा वर्ग तथा अल्पसंख्यक कल्याण एवं अनुसूचित जाति विकास विभाग की हुई समीक्षा

    पिछड़ा वर्ग तथा अल्पसंख्यक कल्याण एवं अनुसूचित जाति विकास विभाग की हुई समीक्षा

    भोपाल.

    पिछड़ा वर्ग तथा अल्पसंख्यक कल्याण एवं अनुसूचित जाति विकास विभाग के प्रमुख सचिव डॉ. ई. रमेश कुमार ने बुधवार को वल्लभ भवन में विभागीय कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि वर्ष 2025-26 की पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति 15 दिनों में शत-प्रतिशत वितरित करना सुनिश्चित किया जाए। प्रमुख सचिव डॉ. कुमार ने बैठक में अनुकंपा नियुक्ति से संबंधित प्रकरण तत्काल निराकृत कर नियुक्ति की प्रक्रिया पूर्ण करने के अधिकारियों को निर्देशित किया। उन्होंने विधानसभा के प्रश्नों और कैबिनेट संक्षेपिका को लेकर भी अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

    बैठक में अपर सचिव श्री अनुराग चौधरी, आयुक्‍त श्री सौरभ कुमार सुमन समेत वरिष्ठ अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे।

     

  • उप मुख्यमंत्री  देवड़ा ने किया ओलावृष्टि प्रभावित फसलों का निरीक्षण

    उप मुख्यमंत्री देवड़ा ने किया ओलावृष्टि प्रभावित फसलों का निरीक्षण

    भोपाल.

    उप मुख्यमंत्री श्री जगदीश देवड़ा ने बुधवार को मंदसौर जिले के मल्हारगढ़ विधानसभा क्षेत्र के ग्राम कित्तुखेड़ी, गोपालपुरा, लोहाखेड़ा, झारड़ा एवं अड़मालिया में ओलावृष्टि से प्रभावित फसलों का निरीक्षण किया और किसानों से संवाद किया। उन्होंने कहा कि इस कठिन समय में राज्य सरकार पूरी संवेदना के साथ किसानों के साथ खड़ी है और हर संभव सहायता के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी के नेतृत्व में फसल नुकसान का शीघ्र सर्वे कराकर राहत प्रदान की जाएगी।

    निरीक्षण के दौरान उप मुख्यमंत्री श्री देवड़ा ने किसानों से कहा कि सरकार सभी प्रभावित क्षेत्रों के हर खेत पर जाकर सर्वे किया जाएगा, इसके लिए अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश जारी कर दिए गए। उन्होंने कहा कि अधिकारी खेतों तक पहुँच कर वास्तविक स्थिति का आंकलन कर रहे हैं अफीम खेती के संबंध में नारकोटिस विभाग भी मौके पर जाकर खेतों का निरीक्षण करेंगे। साथ ही केन्द्र सरकार से चर्चा कर आवश्यक कार्यवाही की जाएगी। फसल बीमा के मामले में भी किसानों को फसल का पूरा लाभ प्रदान किया जाएगा।

    उप मुख्यमंत्री श्री देवड़ा ने कहा कि इस प्राकृतिक आपदा की इस कठिन घड़ी में सरकार किसानों की हर चिंता और दुख में इनके साथ है। निरीक्षण दौरान जिला योजना समिति के सदस्य श्री राजेश दीक्षित सहित अधिकारी एवं बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।

     

  • उच्च शिक्षा उत्कृष्टता संस्थान और दत्तोपंत ठेंगड़ी शोध संस्थान के बीच हुआ एमओयू

    उच्च शिक्षा उत्कृष्टता संस्थान और दत्तोपंत ठेंगड़ी शोध संस्थान के बीच हुआ एमओयू

    भोपाल.

    भारतीय ज्ञान परंपरा (Indian Knowledge System – IKS) के संरक्षण, संवर्धन एवं शैक्षणिक अनुसंधान को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से उच्च शिक्षा उत्कृष्टता संस्थान, भोपाल तथा दत्तोपंत ठेंगड़ी शोध संस्थान, भोपाल के मध्य एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) संपन्न हुआ।

    उक्त समझौता ज्ञापन पर दत्तोपंत ठेंगड़ी शोध संस्थान के निदेशक श्री मुकेश कुमार मिश्रा तथा उच्च शिक्षा उत्कृष्टता संस्थान, भोपाल के संचालक डॉ. प्रज्ञेश कुमार अग्रवाल द्वारा विधिवत हस्ताक्षर किए गए। इस एमओयू के माध्यम से दोनों संस्थानों के मध्य भारतीय ज्ञान परंपरा से संबंधित अनुसंधान, अकादमिक गतिविधियों, संगोष्ठियों, कार्यशालाओं, व्याख्यानों एवं अन्य शैक्षणिक कार्यक्रमों के संचालन हेतु परस्पर सहयोग स्थापित किया जाएगा।

    समझौता ज्ञापन के अंतर्गत भारतीय दर्शन, संस्कृति, साहित्य, परंपरागत विज्ञान एवं ज्ञान-विरासत से जुड़े विषयों पर अनुसंधान को प्रोत्साहित किया जाएगा तथा विद्यार्थियों, शोधार्थियों एवं शिक्षकों को भारतीय ज्ञान प्रणाली के विविध आयामों से परिचित कराने हेतु संयुक्त प्रयास किए जाएंगे। यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप भारतीय ज्ञान परंपरा को उच्च शिक्षा में समाहित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

    इस अवसर पर उच्च शिक्षा उत्कृष्टता संस्थान, भोपाल से प्रोफेसर एवं प्रशासनिक अधिकारी डॉ. महेंद्र सिंघई, भारतीय ज्ञान परंपरा (आईकेएस) प्रभारी एवं ग्रंथपाल डॉ. प्रज्ञा नायक, तथा सहायक प्राध्यापक अमर प्रकाश पांडेय उपस्थित रहे। वहीं दत्तोपंत ठेंगड़ी शोध संस्थान, भोपाल की सह सचिव डॉ. अल्पना त्रिवेदी एवं सहायक प्राध्यापक डॉ. प्रभाकर पांडेय की गरिमामयी उपस्थिति रही।

    कार्यक्रम के दौरान सभी गणमान्य अतिथियों ने इस सहयोग को भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण एवं अकादमिक उन्नयन की दिशा में मील का पत्थर बताया तथा यह आशा व्यक्त की कि यह समझौता भविष्य में उच्च शिक्षा एवं अनुसंधान के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान प्रदान करेगा।