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  • तेल के मुद्दे पर रूस ने किया बड़ा बयान, ‘भारतीय दोस्त नहीं बदलेंगे’

    तेल के मुद्दे पर रूस ने किया बड़ा बयान, ‘भारतीय दोस्त नहीं बदलेंगे’

    नई दिल्ली

    रूस ने कहा है कि इस बात पर भरोसे की कोई वजह नहीं है कि 'दोस्त' भारत अपना रुख बदल सकता है। यह बयान ऐसे समय पर आया है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ऐलान किया है कि भारत रूस से तेल की खरीद बंद कर देगा। इससे पहले रूस ने कहा था कि भारत किसी भी देश से तेल खरीदने के लिए स्वतंत्र है। ट्रंप ने कहा है कि भारत अब अमेरिका और संभावित रूप से वेनेजुएला से तेल खरीदेगा।

    रूस के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया झाकारोवा ने कहा कि इस बात पर भरोसा करने का कोई कारण नहीं है कि भारत ऐसा कदम उठाएगा। उन्होंने कहा, 'अमेरिका के राष्ट्रपति का किसी स्वतंत्र देश को यह बताना कि वह किसके साथ व्यापार कर सकता है, कोई नई बात नहीं है। रूस के पास इस बात को मानने का कोई कारण नहीं है कि हमारे भारतीय मित्रों ने अपना रुख बदल लिया है।'

    उन्होंने कहा, 'हम इस बात से सहमत है कि भारत का रूसी हाइड्रोकार्बन खरीदना दोनों देशों के लिए फायदेमंद है और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में स्थिरता बनाए रखने में मदद करता है। हम भारत में हमारे साझेदारों के साथ इस क्षेत्र में करीबी सहयोग को जारी रखने के लिए तैयार हैं।'
    रूस बोला- भारत स्वतंत्र है

    क्रेमलिन ने  कहा कि भारत किसी भी देश से कच्चा तेल खरीदने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र है और विविधता लाने के उसके फैसले में कुछ भी नया नहीं है। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने एक सवाल के जवाब में कहा, 'हम और अन्य अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा विशेषज्ञ इस बात से भली-भांति परिचित हैं कि रूस, भारत को तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति करने वाला एकमात्र देश नहीं है। भारत हमेशा से अन्य देशों से भी ये उत्पाद खरीदता रहा है, इसलिए हमें इसमें कुछ भी नया नजर नहीं आता।'

    इससे एक दिन पहले पेसकोव ने स्पष्ट किया था कि रूस को भारत की ओर से रूसी तेल की खरीद बंद करने के संबंध में अब तक कोई आधिकारिक बयान या सूचना प्राप्त नहीं हुई है। रूस के नेशनल एनर्जी सिक्योरिटी फंड के प्रमुख विशेषज्ञ इगोर युशकोव ने कहा कि भारतीय तेल शोधन संयंत्र रूसी कच्चे तेल का आयात पूरी तरह बंद नहीं कर सकते।

    उन्होंने तकनीकी कारण बताते हुए कहा, 'अमेरिका जिस 'शेल ऑयल' का निर्यात करता है, वह हल्के श्रेणी का होता है। इसके विपरीत, रूस भारी और सल्फर युक्त 'यूराल्स' तेल की आपूर्ति करता है। भारतीय तेल शोधन संयंत्रों के ढांचे के अनुसार, उन्हें अमेरिकी तेल को अन्य श्रेणी के साथ मिलाना होगा, जिससे अतिरिक्त लागत आएगी। ऐसे में रूस के तेल को पूरी तरह अमेरिका से बदलना संभव नहीं होगा।'

  • प्रभात  मिश्रा बने छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के अध्यक्ष, राज्य शासन ने जारी किया आदेश

    प्रभात मिश्रा बने छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के अध्यक्ष, राज्य शासन ने जारी किया आदेश

    रायपुर.

    प्रभात मिश्रा बने छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के अध्यक्ष, राज्य शासन ने जारी किया आदेश

    छत्तीसगढ़ शासन ने राज्य की राजभाषा को और ज्यादा सशक्त और प्रभावी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। शासन की ओर से प्रभात मिश्रा को छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। इसे लेकर संस्कृति विभाग की ओर से आदेश भी जारी कर दिया गया है। जारी आदेश के मुताबिक राज्य शासन ने अपने निहित अधिकारों का प्रयोग करते हुए प्रभात मिश्रा को उनके कार्यभार ग्रहण करने की तिथि से आगामी आदेश तक अस्थायी रूप से छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के अध्यक्ष पद पर नियुक्त किया है। 

    शासन के इस फैसले को राजभाषा के प्रचार-प्रसार और शासकीय कार्यों में हिंदी के प्रभावी उपयोग को बढ़ावा देने की दिशा में अहम माना जा रहा है। नवनियुक्त अध्यक्ष प्रभात मिश्रा रायपुर जिले के टिकरापारा स्थित नंदी चौक क्षेत्र के रहने वाले हैं। प्रशासनिक और सामाजिक क्षेत्र में उनके अनुभव को देखते हुए शासन ने उन्हें यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी है।

  • सिद्धारमैया और DK की खींचतान के बीच कांग्रेस में खुला तीसरा मोर्चा, विधायक कर रहे बैठकें

    सिद्धारमैया और DK की खींचतान के बीच कांग्रेस में खुला तीसरा मोर्चा, विधायक कर रहे बैठकें

    बेंगलुरु

    कर्नाटक में मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार के खेमों के बीच रस्साकशी करीब एक साल से चल रही है। शिवकुमार गुट का कहना है कि सिद्धारमैया ने सीएम बनने से पहले आधे कार्यकाल को लेकर वादा किया था और बाद में वह कुर्सी छोड़ने वाले थे। लेकिन सिद्धारमैया गुट इससे इनकार करता रहा है। इसे लेकर मामला हाईकमान तक भी पहुंच चुका है और हालात संभालने के कई बार प्रयास हो चुके हैं। यही नहीं कई बार ऐसी चर्चाएं भी छिड़ी हैं कि सिद्धारमैया अपने किसी करीबी नेता को मुख्यमंत्री बनाकर हट सकते हैं। इस बीच कांग्रेस में सत्ता के लिए तीसरा मोर्चा खुलता दिख रहा है।

    बेंगलुरु में एससी, एसटी और लिंगायत समुदाय के विधायकों की बैठकें हुई हैं। इन लोगों की इच्छा है कि उनके समुदाय के किसी नेता को सीएम का पद मिले या फिर कैबिनेट में फेरबदल की स्थिति में ज्यादा से ज्यादा मंत्री पद मिल जाएं। लिंगायत विधायकों की बैठक सोमवार रात को उद्योग मंत्री एमबी पाटिल की लीडरशिप में हुई। इसके अलावा एससी-एसटी वर्ग के विधायकों की बैठक होम मिनिस्टर जी. परमेश्वर के घर पर मंगलवार की शाम को हुई। नवंबर और दिसंबर में सिद्धारमैया एवं शिवकुमार खेमे के बीच कई बैठकें हुई थीं। तब से फिलहाल स्थिति जस की तस थी, लेकिन विधायकों की फिर से शुरू हुई बैठकों ने हलचल मचा दी है।

    कुछ सूत्रों का कहना है कि ये मीटिंगें इसलिए हुई हैं ताकि अपने समुदाय की ताकत दिखाकर हाईकमान को दबाव में लाया जा सके। वहीं कांग्रेस के ही कुछ सूत्रों का कहना है कि एमबी पाटिल और जी. परमेश्वर दोनों ही सिद्धारमैया खेमे के ही हैं। ऐसी स्थिति में यह बैठकें शायद शिवकुमार खेमे को जवाब के तौर पर भी हो सकती हैं ताकि उनके दबाव को कम किया जा सके। दरअसल शिवकुमार वोक्कालिगा समुदाय के नेता हैं, जो राज्य की दूसरी सबसे बड़ी आबादी है। लेकिन सबसे बड़ी संख्या लिंगायतों की है और एक समूह के तौर पर देखा जाए तो एससी और एसटी समुदाय की भी अच्छी संख्या है। ऐसे में इन दोनों वर्गों के विधायकों की बैठकें करके शिवकुमार को बैकफुट पर लाने की कोशिश है।

    एमबी पाटिल ने कहा कि हमारी यह बैठक किसी मकसद से नहीं थी बल्कि रूटीन बैठक थी। उन्होंने कहा कि इस बैठक का मतलब सत्ता परिवर्तन या फिर पर्सनल एजेंडा नहीं था। उन्होंने कहा कि लिंगायत तो राज्य का सबसे बड़ा वर्ग हैं। उनके 34 विधायक हैं। विधायकों का कहना था कि सरकार में लिंगायत समुदाय को उचित प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। चर्चाएं इस बात की भी तेज हैं कि सिद्धारमैया खुद हटने की स्थिति में अपने किसी करीबी को कमान देना चाहते हैं। ऐसे में ये बैठकें उसके लिए शक्ति प्रदर्शन या फिर सहमति बनाने की कोशिश है।

  • ग्राउंड से ग्रोथ तक: छत्तीसगढ़ में साय सरकार का सुशासन मॉडल

    ग्राउंड से ग्रोथ तक: छत्तीसगढ़ में साय सरकार का सुशासन मॉडल

    रायपुर.

    ग्राउंड से ग्रोथ तक: छत्तीसगढ़ में साय सरकार का सुशासन मॉडल

    छत्तीसगढ़ आज ग्रामीण विकास के उस मुकाम पर खड़ा है, जहाँ नीतियाँ केवल कागज़ों तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि ज़मीन पर ठोस बदलाव का माध्यम बन चुकी हैं। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ने सुशासन को केवल एक सिद्धांत नहीं, बल्कि कार्यशैली के रूप में अपनाया है। प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण), महात्मा गांधी नरेगा, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन और प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना जैसी योजनाओं के प्रभावी और पारदर्शी क्रियान्वयन ने छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय स्तर पर ग्रामीण विकास का एक उभरता मॉडल बना दिया है।

    प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के अंतर्गत बीते दो वर्षों में छत्तीसगढ़ में 8 लाख से अधिक पक्के आवासों का निर्माण पूर्ण होना, देश में सर्वाधिक है। यह उपलब्धि केवल आंकड़ों की कहानी नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय और गरिमापूर्ण जीवन की दिशा में एक बड़ा कदम है। मुख्यमंत्री  साय का मानना है कि आवास केवल छत नहीं, बल्कि सुरक्षा, स्थिरता और आत्मसम्मान का आधार है। यही कारण है कि राज्य सरकार ने आवास योजना को आजीविका से जोड़ा है। आवास हितग्राहियों को सेंटरिंग प्लेट एवं अन्य निर्माण की आपूर्ति कर 8 हजार से अधिक महिलाएँ ‘लखपति दीदी’ बन सकीं।

    छत्तीसगढ़ की सबसे बड़ी चुनौती रहे नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सरकार ने सुरक्षा के साथ-साथ विकास और विश्वास को समान महत्व दिया है। कौशल प्रशिक्षण और पुनर्वास योजनाओं के माध्यम से युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ा जा रहा है। आर-सेटी एवं प्रोजेक्ट उन्नति के जरिए आत्मसमर्पित नक्सलियों सहित 5 हजार से अधिक हितग्राहियों को राजमिस्त्री का प्रशिक्षण दिया गया है। वहीं, 3416 आत्मसमर्पित नक्सलियों और नक्सल पीड़ित परिवारों को आवास की स्वीकृति दी गई है। पीएम-जनमन आवास योजना के अंतर्गत विशेष पिछड़ी जनजातियों के लिए 33 हजार से अधिक आवासों की स्वीकृति इस दिशा में एक ऐतिहासिक पहल मानी जा रही है।

    साय सरकार ने योजनाओं की निगरानी में आम नागरिक को सहभागी बनाकर पारदर्शिता को नई परिभाषा दी है। टोल-फ्री हेल्पलाइन, पंचायत स्तर पर क्यूआर कोड और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से कोई भी व्यक्ति विकास कार्यों की जानकारी सीधे प्राप्त कर सकता है। प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राहियों को मनरेगा, उज्ज्वला, स्वच्छ भारत मिशन, जल जीवन मिशन और पीएम सूर्यघर जैसी योजनाओं से अभिसरण के माध्यम से जोड़ा गया है, जिससे समग्र लाभ सुनिश्चित हो रहा है।

    ‘मोर गांव मोर पानी’ महाभियान छत्तीसगढ़ की जल संरक्षण नीति का प्रतीक बनकर उभरा है। नरेगा के तहत दो वर्षों में 20 करोड़ से अधिक मानव दिवसों का सृजन हुआ है। जल संरक्षण के लिए 35 हजार से अधिक कार्य और 10 हजार से अधिक आजीविका डबरियों की स्वीकृति ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती दी है। युक्तधारा पोर्टल के माध्यम से जीआईएस आधारित योजना निर्माण में छत्तीसगढ़ ने देश के अग्रणी राज्यों में स्थान बनाया है।

    राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत 2.82 लाख से अधिक स्व-सहायता समूहों से लगभग 30 लाख महिलाएँ जुड़ी हैं। ‘लखपति दीदी’ अभियान के माध्यम से अब तक 4.94 लाख महिलाएँ आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन चुकी हैं। महिलाओं की आवाज़ को मंच देने के लिए ‘दीदी के गोठ’ रेडियो कार्यक्रम और उनके उत्पादों के विपणन हेतु ‘छत्तीसकला’ ब्रांड राज्य सरकार के नवाचारों के प्रमाण हैं।

    प्रधानमंत्री जनमन योजना के अंतर्गत 2902 किलोमीटर सड़कों की स्वीकृति और 1064 किलोमीटर सड़कों का निर्माण पूर्ण होना, दूरस्थ और जनजातीय अंचलों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में बड़ा कदम है। प्रधानमंत्री जनमन योजना के अंतर्गत स्वीकृत सड़कों के निर्माण में छत्तीसगढ़ देश में अग्रणी राज्य है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के विभिन्न चरणों में नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में दशकों से अधूरी पड़ी 43 सड़कों को पूरा कर सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि विकास अब किसी क्षेत्र या वर्ग तक सीमित नहीं रहेगा।

    मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय का कहना है कि शासन का वास्तविक उद्देश्य आम नागरिक के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाना है। आवास, रोजगार, महिला सशक्तिकरण, जल संरक्षण और अधोसंरचना के समन्वित प्रयासों से छत्तीसगढ़ आज समावेशी और आत्मनिर्भर विकास की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। पारदर्शी, नवाचारी और जनोन्मुखी कार्यप्रणाली के कारण छत्तीसगढ़ अब केवल एक राज्य नहीं, बल्कि ग्रामीण विकास का राष्ट्रीय मॉडल बन रहा है।

  • महिला शक्ति के दम पर वनोपज से आर्थिक मजबूती, हरिबोल समूह की सफलता

    महिला शक्ति के दम पर वनोपज से आर्थिक मजबूती, हरिबोल समूह की सफलता

    रायपुर.

    बढ़ती मांग, मजबूत बाजारः स्थानीय से प्रदेश स्तर तक वनौषधियों की निरंतर आपूर्ति

    ग्रामीण अंचलों में वनोपज पर आधारित आजीविका सदियों से महिलाओं के जीवन और आर्थिक संरचना का अभिन्न हिस्सा रही है। जंगलों से प्राप्त वनोषधि एवं अन्य वनोपज न केवल पारंपरिक ज्ञान का प्रतीक हैं, बल्कि आज के समय में महिला स्वावलंबन, स्वास्थ्य और सतत रोजगार का मजबूत आधार भी बन रहे हैं। जब संगठित प्रयास, प्रशिक्षण और बाजार से जुड़ाव मिलता है, तब यही वनोपज ग्रामीण महिलाओं के जीवन में आत्मनिर्भरता और सम्मान का नया अध्याय रचते हैं। इसी सोच को साकार करता हुआ एक सशक्त उदाहरण है कोरबा जिले के ग्राम डोंगानाला का हरिबोल स्व सहायता समूह है, वर्ष 2006-07 में यूरोपियन कमीशन परियोजना के अंतर्गत स्वीकृत इस पहल के माध्यम से गठित हरिबोल स्व सहायता समूह ने आज महिला सशक्तिकरण की एक सफल मिसाल कायम की है। 12 महिला सदस्यों से युक्त यह समूह वनौषधि प्रसंस्करण केंद्र, डोंगानाला का सफल संचालन कर रहा है, जहां कच्ची वनौषधियों का संग्रहण, वैज्ञानिक पद्धति से प्रसंस्करण एवं विपणन किया जाता है। समूह की महिलाएं स्वयं जंगलों से कच्ची वनौषधि एकत्र कर, निर्धारित घटक मात्रा के अनुसार प्रसंस्करण कार्य करती हैं।

    प्रसंस्करित वनौषधियों की मांग स्थानीय स्तर के साथ-साथ प्रदेश स्तर पर भी निरंतर बनी हुई है। समूह द्वारा उत्पादित वनौषधियों का विक्रय एन.डब्ल्यू.एफ.पी. मार्ट बिलासपुर, रायपुर, दुर्ग, कांकेर, अंबिकापुर, जगदलपुर सहित संजीवनी केंद्र केवची (कटघोरा) एवं कोरबा में किया जा रहा है। इसके साथ ही प्रसंस्करण केंद्र में नियुक्त वैद्य द्वारा स्थानीय एवं आसपास के क्षेत्रों के 1500 से अधिक मरीजों का सफल उपचार किया जा चुका है। समूह की महिलाओं द्वारा हिंगवाष्टक चूर्ण, अजमोदादि चूर्ण, अश्वगंधादि चूर्ण, सितोपलादि चूर्ण, अविपत्तिकर चूर्ण, बिल्वादि चूर्ण, पुष्यानुग चूर्ण, त्रिफला चूर्ण, पंचसम चूर्ण, शतावरी चूर्ण, आमलकी चूर्ण, पायोकिल (दंतमंजन), सर्दी-खांसी नाशक चूर्ण, हर्बल कॉफी चूर्ण, महिला मित्र चूर्ण, हर्बल मधुमेह नाशक चूर्ण, हर्बल फेसपैक चूर्ण तथा हर्बल केशपाल चूर्ण का निर्माण किया जा रहा है।

    आर्थिक दृष्टि से हरिबोल स्व सहायता समूह ने उल्लेखनीय प्रगति की है। वर्तमान में समूह द्वारा 20 लाख 52 हजार रुपये की वार्षिक आय अर्जित की जा रही है तथा प्रतिवर्ष लगभग 50 लाख रुपये की वनौषधियों का विक्रय किया जाता है। इससे प्रत्येक सदस्य को औसतन 1.71 लाख रुपये प्रति वर्ष की आमदनी प्राप्त हो रही है। बीते दो वर्षों में समूह का विक्रय एवं लाभ दोनों दोगुने हुए हैं, जहां पूर्व में वार्षिक लाभ 10.68 लाख रुपये था, जो वर्तमान में बढ़कर 20.52 लाख रुपये हो गया है।

    वन मंडलाधिकारी कटघोरा ने बताया कि यह वनौषधि प्रसंस्करण केंद्र समूह से जुड़ी महिलाओं को स्थायी रोजगार, आत्मनिर्भरता और आर्थिक सुरक्षा प्रदान कर रहा है। महिलाएं अपनी आय से बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य उपचार, घरेलू आवश्यकताओं एवं त्यौहारों के खर्चों को सहजता से पूरा कर रही हैं। समूह की महिलाएं मासिक अंशदान के माध्यम से आपसी सहयोग, ऋण व्यवस्था और सामाजिक सहभागिता को भी मजबूत कर रही हैं।

    हरिबोल स्व सहायता समूह की उपलब्धियों को राष्ट्रीय स्तर पर भी सराहा गया है। वर्ष 2008 में फिलिप्स बहादुरी पुरस्कार प्राप्त करने के साथ ही भारतीय जनजातीय सहकारी विपणन संघ (ट्राइफेड), भारत सरकार द्वारा वर्ष 2020-21 में वनधन विकास केंद्र, डोंगानाला को राष्ट्रीय स्तर पर अधिकतम प्रकार के वनोत्पाद निर्माण एवं विपणन हेतु प्रथम पुरस्कार तथा अधिकतम विक्रय हेतु द्वितीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया, केंद्रीय मंत्री  अर्जुन मुंडा द्वारा प्रदान किया गया।

    हरिबोल स्व सहायता समूह की यह सफलता इस बात का सशक्त प्रमाण है कि जब महिलाओं की पारंपरिक जानकारी को आधुनिक प्रसंस्करण और विपणन से जोड़ा जाता है, तब वनोपज न केवल आजीविका का साधन बनते हैं, बल्कि ग्रामीण विकास और महिला सशक्तिकरण की मजबूत नींव भी तैयार करते हैं।

  • Volkswagen Tayron R-Line की प्री-बुकिंग शुरू, जानें कब होगी लॉन्च

    Volkswagen Tayron R-Line की प्री-बुकिंग शुरू, जानें कब होगी लॉन्च

    मुंबई 

    कार निर्माता कंपनी Volkswagen India ने अपनी आने वाली फ्लैगशिप SUV Volkswagen Tayron R-Line के लिए प्री-बुकिंग शुरू कर दी है. इस नई 3-पंक्ति वाली SUV को Tiguan Allspace के सक्सेसर के तौर पर लॉन्च किया जाएगा, जो Tiguan का 7-सीटर वर्जन है और पहले से ही भारत में R-Line वेरिएंट में बिक्री के लिए उपलब्ध है.

    Volkswagen Tiguan की तरह, आने वाली नई VW Tayron R-Line भी एक फुली लोडेड वेरिएंट में पेश की जाएगी. संभावित ग्राहक इस SUV को 51,000 रुपये की टोकन राशि के साथ प्री-बुक कर सकते हैं, हालांकि इसकी कीमत की घोषणा फरवरी 2026 में बाद में की जाएगी.

    इसके बारे में जानकारी देते हुए Volkswagen India के ब्रांड डायरेक्टर नितिन कोहली ने कहा कि, "हम, भारत के सबसे पसंदीदा, जर्मन कार ब्रांड के तौर पर, अपने कस्टमर्स के लिए सबसे वर्सेटाइल, एडवांस्ड और मज़ेदार लग्ज़री SUV पेश करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं, ताकि उनकी सभी लाइफस्टाइल ज़रूरतों को पूरा किया जा सके."

    उन्होंने आगे कहा कि, "प्रीमियम 7-सीटर SUV मार्केट में समझदार खरीदार होते हैं, इसलिए ऐसा प्रोडक्ट होना ज़रूरी है, जो स्टाइल और सब्सटेंस के साथ-साथ फंक्शनैलिटी भी दे."

    दिलचस्प बात यह है कि Volkswagen Tiguan R-Line के उलट, आने वाली VW Tayron R-Line को कंपनी के महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर प्लांट में ही असेंबल किया जाएगा. इसका मतलब है कि VW Tayron R-Line असल में Tiguan R-Line के काफी करीब हो सकती है, जिससे यह भारत में खरीदारों के लिए ज़्यादा आसानी से उपलब्ध होगी.

    Volkswagen Tayron R-Line का आर्किटेक्चर और इंजन
    जानकारी के अनुसार, नई Tayron R-Line, VW Tiguan के जैसे ही MQB Evo आर्किटेक्चर पर ही बनाई गई है, ऐसे में इसमें कुछ समानताएं देखने को मिलेंगी. खासकर, कंपनी की EA888 फैमिली का 2.0-लीटर TSI EVO पेट्रोल इंजन इसमें देखने को मिलेगा.

    दुनिया भर में, यह कई अलग-अलग ट्यूनिंग में मिलती है, लेकिन भारत में यह इंजन 200 bhp की पावर और 320 Nm का पीक टॉर्क देने के लिए ट्यून किया जाएगा. इंजन से पावर चारों व्हील्स तक 7-स्पीड DSG ऑटोमैटिक और Volkswagen के 4Motion AWD के ज़रिए पहुंचती है.

    Volkswagen Tayron R-Line का एक्सटीरियर
    डिजाइन की बात करें तो यह एक ही फैमिली की गाड़ी लगेगी, जो प्रॉपर यूरोपियन SUV स्टाइलिंग को दिखाती है. इस कार में LED DRLs वाली LED हेडलाइट्स, कनेक्टेड LED टेललैंप्स, और स्पोर्टी डुअल-टोन अलॉय व्हील्स का इस्तेमाल किया जाएगा.

    इस SUV का प्रोफाइल सिल्हूट चेक रिपब्लिक की इसकी राइवल-सिबलिंग Skoda Kodiaq से मिलता-जुलता लगता है. आकार की बात करें तो इस कार की लंबाई 4,792 मिमी और चौड़ाई 1,866 मिमी है, जबकि इसका व्हीलबेस 2,789 मिमी रखा गया है. यह कार Skoda Kodiaq से थोड़ी बड़ी है.

    Volkswagen Tayron R-Line का इंटीरियर
    केबिन की बात करें तो इसका डैशबोर्ड VW Tiguan R-Line जैसा ही देखने को मिलता है, जिसमें वही 15-इंच का टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम, 10.25-इंच का डिजिटल कॉकपिट और पैनोरमिक सनरूफ मिलता है. कंपनी इसमें ऑगमेंटेड रियलिटी हेड-अप डिस्प्ले (AR HUD), 30 तरह की एम्बिएंट लाइटिंग और 12-वे पावर-एडजस्टेबल फ्रंट सीट्स भी दे रही है. अच्छी बात यह है कि VW Tiguan R-Line के मुकाबले, इसमें आपको वेंटिलेशन फंक्शन भी मिलता है.

    Volkswagen Tayron R-Line के सेफ्टी फीचर्स
    अन्य फीचर्स पर नजर डालें तो इसमें 3-ज़ोन क्लाइमेट कंट्रोल, जेस्चर कंट्रोल पावर्ड टेलगेट और हरमन कार्डन सराउंड साउंड सिस्टम शामिल हैं. सेफ्टी फीचर्स के तौर पर इस कार में नौ एयरबैग, EBD के साथ ABS, इलेक्ट्रॉनिक स्टेबिलिटी कंट्रोल (ESC) और चढ़ाई और ढलान के लिए हिल असिस्ट कंट्रोल मिलता है.

  • सद्भावना और निस्वार्थ सेवा से ही समाज में वास्तविक परिवर्तन संभव : राज्यपाल पटेल

    सद्भावना और निस्वार्थ सेवा से ही समाज में वास्तविक परिवर्तन संभव : राज्यपाल पटेल

    भोपाल.

    राज्यपाल  मंगुभाई पटेल ने कहा है कि आत्मीय सद्भावना के साथ जरूरतमंद की मदद सच्ची समाज सेवा है। सेवा का भाव सबकी अंतरात्मा में निहित है। उसे अच्छे संस्कारों और मूल्यों से उभारने की जरूरत है। उन्होंने राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयंसेवकों से कहा कि आपके कार्यों से लोगों को खुशी मिले। किसी को दुख नहीं हो। हर दिन के अंत में चिंतन करें, क्योंकि समाज बदलने के लिए स्वयं को बदलना आवश्यक है। सबके लिए सद्भावना और निस्वार्थ सेवा से ही आत्मिक आनंद की प्राप्ति होती है। धन से क्षणिक सुख तो प्राप्त किया जा सकता है, किन्तु वास्तविक सुख संस्कारित आचरण से ही मिलता है।राज्यपाल  पटेल गुरुवार को लोकभवन में आयोजित राष्ट्रीय स्वयंसेवक सम्मान समारोह को संबोधित कर रहे थे।

    राज्यपाल  पटेल ने कहा कि राष्ट्रीय सेवा योजना का ‘कैंपस टू कम्यूनिटी’ सफर ‘शिक्षा द्वारा समाज सेवा’ और ‘समाज सेवा द्वारा शिक्षा’ के महान लक्ष्य को प्राप्त करने का संकल्प है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सेवा योजना केवल प्रमाण-पत्र प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि “स्वयं से पहले सेवा” के जीवन-मंत्र को अपनाने की साधना है। राज्यपाल  पटेल ने कहा कि राष्ट्रीय सेवा योजना के युवा केवल विद्यार्थी नहीं, बल्कि राष्ट्र सेवा के समर्पित सिपाही हैं। उनका प्रत्येक कदम समाज की प्रगति, जागरूकता और संवेदनशीलता की दिशा में आगे बढ़ता है।

    राज्यपाल  पटेल ने कहा कि राष्ट्रपति के समक्ष सलामी देना बड़ी उपलब्धि है, लेकिन असली सार्थकता तब है, जब स्वयंसेवक अपनी निस्वार्थ सेवा और अटूट संकल्प से वंचित और जरूरतमंद लोगों के जीवन में वास्तविक सुधार लाएँ। उन्होंने कहा कि समाज सेवा में सद्भाव होगा तभी वंचितों के जीवन में खुशहाली आएगी। उन्होंने कहा कि कर्तव्य पथ पर युवाओं की अनुशासित और प्रभावशाली कदमताल ने प्रदेशवासियों का दिल जीता है। साथ ही यह संदेश दिया कि मध्यप्रदेश का युवा हर क्षेत्र में अग्रणी है। राज्यपाल  पटेल ने गणतंत्र दिवस 2026 की राष्ट्रीय परेड में प्रदेश का गौरव बढ़ाने वाले स्वयंसेवकों और पुरस्कार प्राप्त युवाओं का लोकभवन में हार्दिक स्वागत किया। उनको उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएँ दी।

    राज्यपाल  पटेल का कार्यक्रम में पुष्पगुच्छ और अंगवस्त्रम भेंट कर स्वागत और स्मृति चिन्ह भेंट कर अभिनंदन किया गया। स्वागत उद्बोधन अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा  अनुपम राजन ने दिया और आभार प्रदर्शन आयुक्त उच्च शिक्षा  प्रबल सिपाहा ने किया। कार्यक्रम में राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी, क्षेत्रीय निदेशक राष्ट्रीय सेवा योजना सहित अधिकारी और राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयंसेवक उपस्थित थे।

    राज्यपाल  पटेल को MY भारत राष्ट्रीय सेवा योजना पुरस्कार प्राप्त करने वाले छात्रा आयुषी सिन्हा और सोमित दुबे ने पुरस्कार का अवलोकन कराया। पुरस्कार के संबंध में जानकारी दी। छात्रा रिमी शर्मा और संजय कुमार रजक ने एक माह के शिविर की गतिविधियों के संबंध में छायाचित्रों के माध्यम से जानकारी प्रस्तुत की। छात्रा प्रज्ञा सक्सेना और छात्र विनोद कुमार सेन ने शिविर की गतिविधियों और अनुभवों को साझा किया।

    राज्यपाल  पटेल ने नई दिल्ली में गणतंत्र दिवस 2026 की राष्ट्रीय परेड में शामिल राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयंसेवकों को पुरस्कार और मेडल प्रदान किए। पुरस्कार और पदक प्राप्त करने वालों में आयुषी सिन्हा, सोमित दुबे, प्रज्ञा सक्सेना, विनोद कुमार सेन, आशा वरकड़े, रिमी शर्मा, अंतरा चौहान, आदित्य गौर, महेश चौहान और संजय कुमार रजक शामिल थे।

    इस अवसर पर राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयंसेवकों ने समवेद स्वर में गीतों की उत्कृष्ट सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से कार्यक्रम को सजाया। उन्होंने ‘स्वयं सजें वसुंधरा, सवार दें’ और ‘गूंजे गगन में, महकें पवन में, हर एक मन में सद्भावना’ जैसे गीतों के माध्यम से सामाजिक चेतना और देशभक्ति का संदेश सभी उपस्थित जनों तक पहुँचाया।

     

  • ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएँ सरकार की प्राथमिकता: मंत्री श्री वर्मा

    ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएँ सरकार की प्राथमिकता: मंत्री श्री वर्मा

    भोपाल.

    राजस्व मंत्री  करण सिंह वर्मा ने कहा है कि ग्रामीण स्तर पर बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएँ उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है, जिससे लोगों को उपचार के लिये सुविधाएँ सहज और सुलभ रूप से उपलब्ध हो सकें। प्रदेश सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ और आमजन के लिए सुलभ बनाने के उद्देश्य से निरंतर कार्य कर रही है। मंत्री  वर्मा सीहोर के ग्राम नापलाखेड़ी एवं ग्राम धामंदा में आयोजित लोकार्पण कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।

    मंत्री  वर्मा ने ग्राम नापलाखेड़ी में 56.09 लाख रुपये की लागत से निर्मित उप स्वास्थ्य केंद्र और ग्राम धामंदा में 65 लाख रुपये की लागत से निर्मित आयुष्मान आरोग्य मंदिर का लोकार्पण किया। उन्होंने कहा कि नवीन उप स्वास्थ्य केंद्र एवं आयुष्मान आरोग्य मंदिर प्रारंभ होने से क्षेत्रीय नागरिकों को प्राथमिक उपचार, मातृ-शिशु स्वास्थ्य सेवाएँ, टीकाकरण सहित विभिन्न जांच एवं परामर्श सुविधाएँ स्थानीय स्तर पर ही उपलब्ध हो सकेंगी। आयुष्मान भारत योजना के माध्यम से पात्र हितग्राहियों को निःशुल्क उपचार की सुविधा प्रदान की जा रही है, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को बड़ी राहत मिली है।

    मंत्री  वर्मा ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य केवल उपचार उपलब्ध कराना ही नहीं, बल्कि नागरिकों को बीमारियों की रोकथाम के प्रति जागरूक करना भी है। नियमित स्वास्थ्य परीक्षण, संतुलित आहार, स्वच्छ पेयजल एवं साफ-सफाई की आदतें अपनाकर अनेक गंभीर बीमारियों से बचा जा सकता है। प्रदेश सरकार स्वास्थ्य अधोसंरचना के विस्तार के लिए निरंतर कार्य कर रही है। इसके लिए नए स्वास्थ्य केंद्रों की स्थापना, पुराने भवनों का उन्नयन, आधुनिक उपकरणों की उपलब्धता एवं विशेषज्ञ चिकित्सकों की पदस्थापना सुनिश्चित की जा रही है।

    कार्यक्रम में विद्यार्थियों द्वारा आकर्षक सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ दी गईं। इस अवसर पर जनप्रतिनिधियों सहित स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे।

     

  • विंध्य की गोद में बसा खिवनी अभयारण्य, बन रहा इको-टूरिज्म का आकर्षण केंद्र

    विंध्य की गोद में बसा खिवनी अभयारण्य, बन रहा इको-टूरिज्म का आकर्षण केंद्र

    भोपाल.

    विंध्य पर्वतमालाओं की गोद में स्थित खिवनी अभयारण्य मध्यप्रदेश के उभरते हुए इको-टूरिज्म स्थलों में अपनी विशिष्ट पहचान बना रहा है। देवास और सीहोर जिलों की सीमा पर फैला लगभग 134 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल वाला यह अभयारण्य प्रकृति प्रेमियों, वन्यजीव शोधकर्ताओं और पर्यटकों को समान रूप से आकर्षित कर रहा है। घने जंगल, पर्वत घाटियां, बहते नदी-नाले और समृद्ध जैव विविधता इसे एक अनूठा प्राकृतिक स्थल बनाते हैं। ईको-पर्यटन विकास बोर्ड के माध्यम से स्थानीय युवाओं को रोजगार से जोड़ा गया है। सफारी संचालन, भोजन व्यवस्था, आवास प्रबंधन तथा लघु उद्योगों के माध्यम से स्थानीय युवाओं, महिलाओं और कारीगरों की आय में वृद्धि हो रही है। अभयारण्य में https://mpforest.gov.in/ecotourism/ecobooking/destination.aspx के माध्यम से बुकिंग की जा सकती है।

    देवास जिले में स्थित इस अभयारण्य का लगभग 89.9 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र देवास तथा 44.8 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र सीहोर जिले में आता है। खिवनी अभयारण्य में वन्यजीव संरक्षण और पर्यटन के बीच संतुलन का सुंदर उदाहरण देखने को मिलता है। यहां ऊंचे-ऊंचे पहाड़ों के साथ अनेक औषधीय पौधों की प्रजातियां भी पाई जाती हैं, जो इसकी प्राकृतिक समृद्धि को दर्शाती हैं। अभयारण्य में पर्यटकों के ठहरने के लिये सर्व-सुविधायुक्त टूरिस्ट कैंपस विकसित किया गया है, जिसमें कॉटेज, टेंट, वॉच टावर, पैगोडा और भोजन की व्यवस्था उपलब्ध है।

    वन्यजीव और जैव विविधता की समृद्ध धरोहर

    खिवनी अभयारण्य में मांसाहारी वन्यजीवों में बाघ, तेंदुआ, भालू, लकड़बग्घा, सोनकुत्ता, जंगल कैट, गोल्डन जैकाल, एशियन पाम सिवेट सहित अनेक प्रजातियां पाई जाती हैं, वहीं शाकाहारी जीवों में चीतल, सांभर, नीलगाय, चौसिंगा, कृष्णमृग, जंगली सूअर और खरहा प्रमुख हैं। पक्षियों की लगभग 170 प्रजातियां तथा तितलियों की करीब 65 प्रजातियां इस अभयारण्य की जैव विविधता को और समृद्ध बनाती हैं।

    प्रमुख दर्शनीय स्थल

    अभयारण्य में बाल गंगा मंदिर, कलम तलई सनसेट पॉइंट, ईको व्यू पॉइंट, गोल कोठी, खिवनी मिडो, शंकर खो एवं भदभदा झरने, भूरी घाटी और दौलतपुर घाटी जैसे अनेक आकर्षक स्थल हैं। विशेषकर वर्षाकाल में झरनों, हरियाली और पर्वत श्रृंखलाओं का दृश्य पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर देता है।

    पर्यटन मानचित्र पर लाने के प्रयास

    खिवनी अभयारण्य को पर्यटन मानचित्र पर व्यापक स्तर पर स्थापित करने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। नियमित मॉनिटरिंग के साथ पर्यटकों की सुविधाओं के समुचित प्रबंधन किया जा रहा है। खिवनी अभयारण्य भोपाल–इंदौर मार्ग पर आष्टा से लगभग 35 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इंदौर–नेमावर–हरदा मार्ग से कन्नौद होकर भी यहां पहुंचा जा सकता है। निकटतम रेलवे स्टेशन हरदा तथा निकटतम हवाई अड्डे इंदौर और भोपाल हैं।

    प्राकृतिक सौंदर्य, वन्यजीवों की विविधता और शांत वातावरण के कारण खिवनी अभयारण्य पर्यटकों की नई पसंद बनता जा रहा है और मध्यप्रदेश के इको-टूरिज्म को एक नई दिशा दे रहा है।

     

  • राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के माध्यम से शिक्षा को रोजगारोन्मुख, नवाचारपरक और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाया जा रहा है-उच्च शिक्षा मंत्री श्री टंक राम वर्मा

    राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के माध्यम से शिक्षा को रोजगारोन्मुख, नवाचारपरक और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाया जा रहा है-उच्च शिक्षा मंत्री श्री टंक राम वर्मा

    रायपुर.

    रायपुर में हुई उच्च स्तरीय एकदिवसीय कार्यशाला

    राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के क्रियान्वयन से जुड़ी चुनौतियों एवं संभावनाओं पर विमर्श के उद्देश्य से उच्च शिक्षा विभाग द्वारा न्यू सर्किट हाउस, सिविल लाइंस रायपुर में एकदिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया।    

    कार्यशाला में उच्च शिक्षा मंत्री  टंक राम वर्मा ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को केवल कागज़ों तक सीमित न रखकर प्रत्येक विद्यार्थी तक पहुँचाना हम सभी की जिम्मेदारी है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति का कुलपति,कुलसचिव,महाविद्यालय के प्राचार्य एवं प्राध्यापक स्वयं अध्ययन करें।उन्होंने राज्य स्तर पर संचालित समितियों द्वारा नियमित समीक्षा, जिला क्लस्टर व्यवस्था, टास्क फोर्स की बैठकें तथा विश्वविद्यालय स्तर पर प्रभावी निगरानी व्यवस्था सुनिश्चित करने पर जोर दिया। उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा को पाठ्यक्रम में समावेशित कर विद्यार्थियों को अपनी संस्कृति, विरासत और मूल्यों से जोड़ना समय की आवश्यकता है। स्थानीय लोक कला और शिल्प कला को पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा।भारतीय ज्ञान परंपरा पर विद्यार्थियों के बीच ऑनलाइन प्रतियोगिता आयोजित कर उनमें जागरूकता बढ़ाई जाएगी। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के माध्यम से शिक्षा को रोजगारोन्मुख, नवाचारपरक और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाया जा रहा है। मंत्री  वर्मा ने भविष्य में इस प्रकार की विस्तृत एवं बहुदिवसीय कार्यशालाओं के आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया।

    कार्यशाला में विशेष अतिथि के रूप में भारतीय शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के अध्यक्ष  अतुल कोठारी, राष्ट्रीय सह संयोजक, शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के डॉ. ओम प्रकाश शर्मा, निदेशक आईआईटी भिलाई डॉ. राजीव प्रकाश, शिक्षाविद  दिलीप केशरवानी, डॉ. नारायण गवांडकर सहित विभिन्न महाविद्यालयों के प्राध्यापक उपस्थित रहे।

    इस अवसर पर उच्च शिक्षा आयुक्त डॉ. संतोष कुमार देवांगन ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के उद्देश्यों और इसके प्रभावी क्रियान्वयन पर प्रकाश डाला।मुख्य वक्ता  अतुल कोठारी ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में भारतीय ज्ञान परंपरा को पाठ्यक्रम में सम्मिलित करने, क्रेडिट सिस्टम, मल्टीपल एंट्री एवं एग्जिट सिस्टम तथा टास्क फोर्स के गठन जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं की जानकारी दी। वहीं डॉ. राजीव प्रकाश ने नीति के व्यावहारिक क्रियान्वयन से जुड़े अनुभव साझा किए। इसी तरह  ओम प्रकाश शर्मा ने राष्ट्रीय एवं राज्य स्तर पर राष्ट्रीय शिक्षा नीति के क्रियान्वयन पर प्रकाश डाला।

    कार्यशाला के अंत में प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित किया गया। जिसमें प्रतिभागियों द्वारा पूछे गए प्रश्नों का समाधान विशेषज्ञों द्वारा किया गया।