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  • बांधवगढ़ की बाघिन का रिश्ता तय, राजस्थान में होगी विदाई हेलीकॉप्टर से, मुकुंदरा हिल टाइगर रिजर्व में शिफ्ट

    बांधवगढ़ की बाघिन का रिश्ता तय, राजस्थान में होगी विदाई हेलीकॉप्टर से, मुकुंदरा हिल टाइगर रिजर्व में शिफ्ट

    उमरिया 
    बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व की बाघिन का रेस्क्यू सफल रहा. इस बाघिन को राजस्थान के मुकुंदरा हिल टाइगर रिजर्व में शिफ्ट करने की योजना है. फिलहाल बाघिन को ऑब्जरवेशन में रखा गया है. राजस्थान सरकार ने केंद्र सरकार के सामने मध्य प्रदेश से 3 टाइगर की डिमांड रखी थी. राजस्थान को एक ऐसी बाघिन की तलाश है, जो मुकुंदरा हिल टाइगर रिजर्व में कुनबा बढ़ा सके.

    एयरफोर्स के हेलीकॉप्टर से राजस्थान जाएगी बाघिन

    बांधवगढ़ की बाघिन एयरफोर्स के हेलीकॉप्टर से राजस्थान जाएगी. यहां से उसकी दुल्हन की तरह धूमधाम से विदाई होगी. इसकी तैयारी के लिए एयरफोर्स के हेलीकॉप्टर का ट्रायल लैंडिंग भी हो चुका है. कुछ दिन पहले पेंच टाइगर रिजर्व से एक बाघिन को इसी तरह एयरफोर्स के हेलीकॉप्टर से राजस्थान के मुकुंदरा हिल टाइगर रिजर्व शिफ्ट किया गया था.

    रेस्क्यू के बाद बाघिन को रेडियो कॉलर पहनाया

    बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के डायरेक्टर अनुपम सहाय ने बताया "बांधवगढ़ टाइगर रिज़र्व प्रबंधन ने कक्ष क्रमांक RF-327, के दमना बीट के ताला परिक्षेत्र से एक बाघिन का रेस्क्यू किया है, जिसकी उम्र 3 से 4 वर्ष है. अब बाघिन के हर मूवमेंट पर नजर रहेगी. रेस्क्यू करने के बाद उसके स्वास्थ्य की जांच की गई है और रेडियो कॉलर पहनाया गया."

    बाघिन को अंडर ऑब्ज़र्वेशन रखने के लिए आगामी कुछ दिनों के लिए मगधी परिक्षेत्र के बहेरहा स्थित बाड़े में सुरक्षित रूप से रखा गया है. योजना के अनुसार सभी तरह की परमिशन मिलने के बाद बाघिन को राजस्थान भेजा जाएगा.

    मुकुंदरा टाइगर रिजर्व की शान बनेगी बाघिन

    बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से एक बाघिन को राजस्थान के मुकुंदरा हिल टाइगर रिजर्व में भेजने की योजना है. इसकी तैयारी लगभग पूरी हो चुकी है. इसी के तहत इस बाघिन का रेस्क्यू किया गया है. राजस्थान के मुकुंदरा हिल टाइगर रिजर्व को एक एडल्ट बाघिन चाहिए, जो बाघों का कुनबा बढ़ा सके. ऐसी बाघिन की उम्र 3 से 5 साल तक के बीच होनीचाहिए, जो प्रजनन करने योग्य हो.

    इस बारे में राजस्थान सरकार ने भारत सरकार के माध्यम से परमिशन लेकर मध्य प्रदेश से 03 टाइगर और महाराष्ट्र से 02 टाइगर मांगे हैं. इसी कड़ी में पेंच टाइगर रिजर्व से राजस्थान जा चुकी है. अब बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से बाघिन ले जाने की तैयारी है. 

  • गाजा में 3-मंजिला इमारत पर इजरायल का एयरस्ट्राइक, कैमरे में कैद हुई खौफनाक तस्वीर

    गाजा में 3-मंजिला इमारत पर इजरायल का एयरस्ट्राइक, कैमरे में कैद हुई खौफनाक तस्वीर

    गाजा

    सीजफायर लागू होने के बावजूद इजरायली सेना ने पूर्वी गाजा सिटी के जैतून इलाके में एक रिहायशी क्षेत्र को निशाना बनाते हुए एयरस्ट्राइक की. रिपोर्ट के मुताबिक हमला असकुला जंक्शन के पास स्थित तीन मंजिला इमारत पर किया गया. हमले के बाद इलाके में आग की लपटें और घना धुआं उठता देखा गया, जिससे स्थानीय लोगों में दहशत फैल गई.

    यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब अमेरिका प्रशासन ने जनवरी में घोषणा की थी कि युद्धविराम समझौते का दूसरा चरण शुरू हो चुका है.

    इस चरण में गाजा से इजरायली सेना की अतिरिक्त वापसी और पुनर्निर्माण कार्यों की शुरुआत शामिल है. संयुक्त राष्ट्र का अनुमान है कि गाजा के पुनर्निर्माण पर करीब 70 अरब डॉलर का खर्च आ सकता है.
    अक्टूबर 2023 में शुरू हुई इजरायली सैन्य कार्रवाई एक साल से अधिक समय तक चली थी. इस अभियान में गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार करीब 72 हजार फिलिस्तीनी मारे गए और 1.71 लाख से अधिक घायल हुए. इसके अलावा गाजा के लगभग 90 प्रतिशत बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा या वह नष्ट हो गया.
     
    युद्धविराम लागू होने के बाद भी हालात पूरी तरह शांत नहीं हुए हैं. गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि इस अवधि में इजरायली कार्रवाइयों में 574 लोगों की मौत हुई और 1,518 अन्य घायल हुए हैं. इन आंकड़ों के सामने आने के बाद समझौते के पालन और क्षेत्र में स्थिरता को लेकर नए सवाल उठने लगे हैं.
     
    फिलहाल क्षेत्र में तनाव बना हुआ है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर स्थिति पर टिकी है. आगे की घटनाओं और प्रतिक्रियाओं का इंतजार किया जा रहा है, जबकि युद्धविराम के भविष्य को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है.

  • 3 मार्च या 4 मार्च, कब मनाई जाएगी होली? पंडितों से जानें इस त्योहार की सही तिथि

    3 मार्च या 4 मार्च, कब मनाई जाएगी होली? पंडितों से जानें इस त्योहार की सही तिथि

    इंदौर 
       

    इस साल होली के पर्व को लेकर लोगों में काफी ज्यादा असमंजस की स्थिति बनी हो गई है. इसके पीछे का मुख्य कारण है 3 मार्च 2026 को लगने वाला चंद्र ग्रहण. गणनाओं के मुताबिक, 2 मार्च को होलिका दहन किया जाएगा है, जबकि रंगों का पर्व होली 4 मार्च को मनाया जाएगा. तो आइए देश के प्रसिद्ध पंडितों से जानते हैं कि होली की सही तिथि या डेट क्या रहने वाली है. 

    ज्योतिषाचार्य पंडित दैवज्ञ कृष्ण शास्त्री के अनुसार, भारतीय ज्योतिष और निर्णय सिंधु ग्रंथ के आधार पर फाल्गुन शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि 2 मार्च 2026 को पड़ रही है. शास्त्रों के मुताबिक, इस दिन भद्रा समाप्त होने के बाद या भद्रा के पूंछ काल में होलिका दहन करना ही शास्त्र सम्मत माना जा रहा है. उन्होंने बताया कि 2 मार्च की रात 12 बजकर 50 मिनट से 2 बजकर 2 मिनट के बीच होलिका दहन का श्रेष्ठ मुहूर्त रहेगा. अगले दिन 3 मार्च 2026 को फाल्गुन शुक्ल पक्ष पूर्णिमा के दिन साल का पहला चंद्रग्रहण लगेगा. ग्रहण होने के कारण अगले दिन चैत्र कृष्ण पक्ष प्रतिपदा यानी 4 मार्च 2026 को पूरे भारत में होली मनाई जाएगी. 

    3 मार्च को ये रहेगी चंद्रग्रहण की टाइमिंग 

    दरअसल गणनाओं के मुताबिक, 3 मार्च 2026 फाल्गुन शुक्ल पक्ष पूर्णिमा को चंद्रमा का उदय शाम 5 बजकर 59 मिनट पर होगा, जबकि ग्रहण की शुरुआत दोपहर 3 बजकर 20 मिनट पर होगी. ग्रहण का (मध्यकाल) मध्यान्ह समय शाम 5 बजकर 4 मिनट पर होगा और ग्रहण का मोक्ष काल शाम 6 बजकर 47 मिनट रहेगा. पूरे भारत में चंद्रोदय के समय यानी 3 मार्च की शाम 05 बजकर 59 के बाद ही सभी स्थानों में चंद्रग्रहण देखा जा सकेगा. केवल ग्रहण का मोक्ष काल ही दिखाई देगा, जबकि ग्रहण का प्रारंभ और मध्य काल भारत में कहीं भी दिखाई नहीं होगा, क्योंकि चंद्रोदय से पहले ही ग्रहण का आरंभ हो जाएगा. 

    सनातन धर्म के अनुसार, सूर्य ग्रहण में 12 घंटे पूर्व और चंद्र ग्रहण में 9 घंटे पूर्व सूतक काल मान्य होता है. इस गणना के अनुसार, 3 मार्च को सुबह 6 बजकर 20 मिनट से सूतक काल प्रारंभ हो जाएगा.

    कहां कहां दिखाई देगा चंद्रग्रहण? 

    3 मार्च को लगने जा रहा यह चंद्रग्रहण भारत के अलावा पूर्वी एशिया, ऑस्ट्रेलिया, प्रशांत महासागर और अमेरिका में भी दिखाई देगा. ऐसे में पूरे भारत में होली का पर्व 4 मार्च 2026 को ही मनाया जाना उचित रहेगा. होलिका दहन 2 मार्च 2026 को भद्रा पूंछ काल में, रात 12 बजकर 50 मिनट के बाद करना ही शास्त्र सम्मत माना जा रहा है. 

    होली की तिथि को लेकर पंडित वेद प्रकाश मिश्रा ने भी दिया अपना मत

    ज्योतिषाचार्य पंडित वेद प्रकाश मिश्रा ने बताया कि शास्त्रीय परंपरा के अनुसार, होलिका दहन रात में और रंगोत्सव अगले दिन प्रातः काल मनाया जाता है. लेकिन 3 मार्च को चंद्रग्रहण और सूतक काल होने के कारण उस दिन रंगोत्सव करना उचित नहीं है. इसी कारण होली का पर्व 4 मार्च 2026 को मनाया जाएगा.

    दरअसल, हृषीकेश पंचाङ्ग के अनुसार, फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 2 मार्च को शाम 5 बजकर 18 मिनट पर होगी, जो 3 मार्च को शाम 4 बजकर 33 मिनट तक रहेगी. इस प्रकार 2 मार्च को निशाव्यापिनी पूर्णिमा प्राप्त हो रही है. हालांकि, 2 मार्च को शाम 5 बजकर 18 मिनट से भद्रा लग रही है, इसलिए भद्रा के मुख काल को त्यागकर, भद्रा पूंछ काल में रात 12 बजकर 50 मिनट से रात 2 बजकर 02 मिनट तक होलिका दहन करना शास्त्र सम्मत माना जा रहा है. 

    आगे पंडित वेद प्रकाश मिश्रा ने बताया कि, प्रचलित मान्यता के अनुसार, होलिका दहन के अगले दिन अर्थात् 3 मार्च को होली का पर्व मनाया जाना चाहिए. लेकिन इस दिन शाम को ग्रस्तोदित चंद्रग्रहण है, जो शाम 5 बजकर 59 मिनट से शाम 6 बजकर 47 मिनट तक रहेगा. ग्रहण समाप्त होने के बाद 3 मार्च को चौसठ्ठी देवी की यात्रा और पूजन किया जाएगा. 

    यानी, सभी मतों और पंडितों के मुताबिक, 4 मार्च को ही होली मनाना ज्यादा शुभ माना जा रहा है.

  • सिंहस्थ के लिए 4200 हेक्टेयर में होगी फूलों की खेती, विशेष क्लस्टर बनाए जाने की योजना, केंद्र से मंजूरी मांगी

    सिंहस्थ के लिए 4200 हेक्टेयर में होगी फूलों की खेती, विशेष क्लस्टर बनाए जाने की योजना, केंद्र से मंजूरी मांगी

    उज्जैन 

    उज्जैन और ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के कारण धार्मिक दृष्टि से अहम इंदौर जिले में अब फूलों की खेती को बढ़ावा देने की तैयारी है। राज्य सरकार ने इंदौर सहित कुछ जिलों को चिह्नित करते हुए पुष्प क्षेत्र विस्तार योजना बनाई है। इस योजना के तहत इंदौर जिले में 110 हेक्टेयर भूमि पर फूलों की खेती का लक्ष्य तय किया गया है।

    110 हेक्टेयर में सिर्फ गुलाब की खेती का लक्ष्य
    योजना के पहले चरण में 83.87 हेक्टेयर भूमि पर 142 हितग्राही किसानों को चयनित किया गया है। सरकार का लक्ष्य है कि वर्ष 2027 तक पूरे 110 हेक्टेयर क्षेत्र में केवल गुलाब की खेती की जाए। इससे धार्मिक आयोजनों में फूलों की बढ़ती मांग को स्थानीय स्तर पर पूरा किया जा सकेगा।

    मुख्य सचिव करेंगे प्रोजेक्ट की निगरानी
    इस प्रोजेक्ट की मॉनिटरिंग खुद मुख्य सचिव अनुराग जैन करेंगे। हाल ही में हुई समीक्षा बैठक में इस योजना पर चर्चा के बाद उद्यानिकी विभाग को इसकी जिम्मेदारी सौंपी गई है। उप संचालक उद्यान को योजना का नोडल अधिकारी बनाया गया है।

    सिंहस्थ-2028 को लेकर उज्जैन के लिए बड़ा प्लान
    सिंहस्थ-2028 को ध्यान में रखते हुए उज्जैन जिले के लिए भी बड़ी योजना बनाई गई है। यहां 4200 हेक्टेयर क्षेत्र में फूलों की खेती के क्लस्टर विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए भारत सरकार से विशेष प्रोजेक्ट की मंजूरी के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। अधिकारियों के अनुसार सिंहस्थ मेले के दौरान बड़ी मात्रा में फूलों की आवश्यकता होगी।

    इंदौर में रोज 8 से 12 टन फूलों की आवक
    इंदौर फूल बाजार एसोसिएशन के अनुसार शहर में प्रतिदिन 8 से 12 टन फूलों की आवक होती है। त्योहारी और पीक सीजन में यह मात्रा कई गुना बढ़ जाती है। नवरात्रि, दीपावली और विवाह आयोजनों के दौरान आवक 30 से 70 टन तक पहुंच जाती है। बाजार में मुख्य रूप से गेंदा, गुलाब और सेवंती की आपूर्ति होती है।

    प्रदेश में तेजी से बढ़ रही फूलों की खेती
    प्रदेश में फूलों की खेती लगातार बढ़ रही है और मध्यप्रदेश पूरे देश में तीसरे स्थान पर है। गेंदा सबसे अधिक क्षेत्र में उगाया जाता है, इसके बाद गुलाब, क्रिसैंथेमम, ग्लैडियोलस, ट्यूबरोज और अन्य मौसमी फूलों की खेती होती है। राज्य में लगभग 43 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में फूलों की खेती की जा रही है। वर्ष 2024-25 में प्रदेश में 5.12 लाख टन से अधिक फूलों का उत्पादन हुआ।

    धार्मिक स्थलों के कारण बढ़ी मांग
    उज्जैन, ओंकारेश्वर के अलावा देवास, सलकनपुर, नीमच, मंदसौर, महेश्वर, नलखेड़ा, परशुराम लोक सहित कई धार्मिक और तीर्थ स्थल इस क्षेत्र में स्थित हैं। इसी वजह से यहां फूलों की खेती पर विशेष फोकस किया जा रहा है।

    मंत्री बोले, बाहर से फूल मंगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी
    उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण मंत्री नारायण सिंह कुशवाह ने हाल ही में पत्रकारों से चर्चा में कहा कि उज्जैन और महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग सहित अन्य धार्मिक स्थलों पर साल भर फूलों की भारी मांग रहती है। सिंहस्थ मेले के दौरान यह मांग कई गुना बढ़ जाती है। सरकार की योजना है कि स्थानीय किसानों से ही फूलों की आपूर्ति सुनिश्चित की जाए, जिससे परिवहन लागत घटेगी और किसानों को बेहतर दाम मिल सकेंगे। 

     

  • सऊदी अरब में छलकेगा जाम! क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान का बड़ा फरमान, खुली पहली शराब की दुकान

    सऊदी अरब में छलकेगा जाम! क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान का बड़ा फरमान, खुली पहली शराब की दुकान

    रियाद
    सऊदी अरब ने चुपचाप अमीर विदेशी निवासियों को शराब खरीदने की इजाजत देना शुरू कर दिया है। यह खुलासा बीबीसी ने अपनी एक रिपोर्ट में किया है। इसमें कहा गया है कि सऊदी अरब ने 73 साल पहले शराब पर प्रतिबंध लगाया था। इसे सऊदी अरब के कानूनों में बहुत बड़े बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है। इससे पहले सऊदी अरब ने विदेशी डिप्लोमेट्स को शराब खरीदने और उसका सेवन करने की इजाजत दी थी। हालांकि, सऊदी अरब में आज भी आम लोगों और मध्यम या गरीब तबके को शराब खरीदने या उसका सेवन करने की इजाजत नहीं है।
    सऊदी अरब में शराब की बिक्री पर कब लगा था प्रतिबंध

    सऊदी अरब इस्लाम के दो सबसे पवित्र स्थलों का घर है। उसने 1952 में शराब की बिक्री पर बैन लगा दिया था। लेकिन अपनी छवि को बदलने के बड़े प्रयास के तहत, सऊदी अरब ने हाल के सालों में बड़े सामाजिक और आर्थिक सुधार किए हैं। उसने खुद को एक ज्यादा उदार और निवेश-अनुकूल देश के रूप में पेश करने का प्रयास भी किया है। ये बदलाव क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के नेतृत्व में आए हैं, जो सऊदी अरब के प्रधानमंत्री हैं, लेकिन उन्हें किंगडम के असली शासक माना जाता है।
    सऊदी अरब में हो रहे बदलावों को जानें

    क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के नेतृत्व में सऊदी अरब में सिनेमाघर फिर से खोले गए हैं, बड़े म्यूजिक फेस्टिवल और फैशन शो आयोजित किए हैं, महिलाओं के ड्राइविंग पर बैन हटाया है, और धार्मिक पुलिस की शक्तियों को कम किया गया है। हालांकि शराब की बिक्री से प्रतिबंध हटाने का फैसला सबसे बड़ा और साहसिक कदम माना जा रहा है।

    सऊदी अरब में शराब की बिक्री शुरू

    सऊदी अरब में शराब की पहली दुकान जनवरी 2024 में रियाद में खुली थी। लेकिन, शुरुआत में इसमें खरीदारी की सिर्फ गैर-मुस्लिम डिप्लोमैट्स को ही इजाजत दी गई थी। अब रिपोर्ट में बताया गया है कि 2025 के आखिर में बिना किसी घोषणा के लागू किए गए नए नियमों के तहत, अमीर, गैर-मुस्लिम विदेशी निवासी अब बीयर, वाइन और स्पिरिट खरीदने के लिए वहां जा सकते हैं।

    सऊदी अरब में शराब खरीदने की योग्यता क्या है

    रिपोर्ट के अनुसार, सऊदी अरब में शराब खरीदने के लिए योग्यता एक विदेशी के पास या तो प्रीमियम रेजिडेंसी परमिट होना चाहिए, जिसकी कीमत सालाना 100,000 सऊदी रियाल ($27,000; £19,300) है; या यह दिखाना होगा कि वह हर महीने कम से कम 50,000 रियाल कमाता है। प्रीमियम रेजिडेंसी स्कीम के लिए अलग-अलग योग्यता मानदंड हैं, और यह आमतौर पर सीनियर विदेशी अधिकारियों, निवेशकों और खास स्किल्स वाले प्रोफेशनल्स के लिए खुली है।
     

  • लखनऊ में मायावती की अहम बैठक, 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों की समीक्षा करेंगी

    लखनऊ में मायावती की अहम बैठक, 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों की समीक्षा करेंगी

    लखनऊ 

    बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती आज लखनऊ में संगठन की एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक करेंगी। इस बैठक में प्रदेश स्तर के पदाधिकारियों के साथ-साथ सभी जिलों और विधानसभा क्षेत्रों के अध्यक्षों को शामिल होने के निर्देश दिए गए हैं। बैठक का मुख्य उद्देश्य वर्ष 2027 के विधानसभा चुनावों को लेकर पार्टी की तैयारियों की समीक्षा करना है।
    बसपा लंबे समय से चुनावों की रणनीति पर काम कर रही

    बसपा लंबे समय से आगामी विधानसभा चुनावों की रणनीति पर काम कर रही है। इसके तहत पहले ही जिला और विधानसभा स्तर की इकाइयों को संगठन विस्तार, समर्थक मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में जुड़वाने तथा बूथ स्तर पर सक्रियता बढ़ाने जैसे निर्देश दिए जा चुके हैं। साथ ही, भाईचारा कमेटियों को भी पार्टी की चुनावी रणनीति के अनुरूप जिम्मेदारियां सौंपी गई थीं।

    अब तक हुए कार्यों की विस्तृत रिपोर्ट लेंगी

    आज की बैठक में मायावती अब तक हुए कार्यों की विस्तृत रिपोर्ट लेंगी और संगठन की कमजोरियों व मजबूती दोनों पर मंथन करेंगी। इसके साथ ही वे कोर वोट बैंक को मजबूत बनाए रखने और सोशल इंजीनियरिंग के जरिए नए वर्गों को जोड़ने की रणनीति स्पष्ट करेंगी।

    ब्राह्मण मतदाताओं को पार्टी से जोड़ने पर विशेष जोर

    सूत्रों के अनुसार, इस बार बसपा प्रमुख ब्राह्मण मतदाताओं को पार्टी से जोड़ने पर विशेष जोर दे रही हैं। बैठक में इस दिशा में भी संगठन को ठोस दिशा-निर्देश दिए जाने की संभावना है।

  • TESLA की सेल्स में 88% की भारी गिरावट, उस बाजार में भी झटका जहां 90% इलेक्ट्रिक कारें बिकती हैं

    TESLA की सेल्स में 88% की भारी गिरावट, उस बाजार में भी झटका जहां 90% इलेक्ट्रिक कारें बिकती हैं

     नई दिल्ली
       
    यूरोप में इलेक्ट्रिक गाड़ियों की बात हो और टेस्ला का नाम न आए, ऐसा कम ही होता है. लेकिन इस बार कहानी थोड़ी उलटी है. जिस नॉर्वे को टेस्ला अपना सबसे मजबूत किला मानती रही, वहीं अब उसके दरवाजे चरमराते दिख रहे हैं. आंकड़े बताते हैं कि नॉर्वे की सड़कों पर इलेक्ट्रिक कारों की बाढ़ है, लेकिन EV की इस भीड़ में टेस्ला की नाव लड़खड़ा गई है. सवाल सिर्फ बिक्री घटने का नहीं है, सवाल यह है कि क्या यूरोप में टेस्ला का जादू सच में कमजोर पड़ने लगा है.

    बिक्री के मोर्चे पर आई सुस्ती का असर अब उन बाजारों में भी नजर आने लगा है, जिन्हें टेस्ला का गढ़ माना जाता था. नॉर्वे ऐसा ही एक देश है, जहां इलेक्ट्रिक गाड़ियों की जबरदस्त मांग रहती है, लेकिन अब यहां भी टेस्ला की पकड़ ढीली पड़ती दिख रही है. जनवरी 2026 के नए रजिस्ट्रेशन आंकड़ों के अनुसार, नॉर्वे में Tesla Model Y की सिर्फ 62 यूनिट्स बिकीं. यह कुल नई कार बिक्री का केवल 2.8 प्रतिशत है. पूरी टेस्ला रेंज की बात करें तो कंपनी ने कुल 83 कारें बेचीं, जो पिछले साल जनवरी में बेचे गए कारों के मुकाबले 88 प्रतिशत की बड़ी गिरावट है. 

    वहीं दूसरी इलेक्ट्रिक कार निर्माता कंपनियां तेजी से आगे बढ़ रही हैं. फॉक्सवैगन ID.3 ने 299 यूनिट्स की बिक्री के साथ टॉप पोजिशन हासिल की, जो टेस्ला से लगभग पांच गुना ज्यादा है. नॉर्वे में टेस्ला के लिए जनवरी भले ही मुश्किल रहा, लेकिन इस देश में इलेक्ट्रिक कारों की डिमांड बनी हुई है. पिछले महीने नॉर्वे में बिकने वाली नई गाड़ियों में से करीब 94 प्रतिशत इलेक्ट्रिक कारें थीं. डीजल गाड़ियों की सिर्फ 98 यूनिट्स बिकीं, जबकि पेट्रोल कारों का आंकड़ा केवल 7 पर सिमट गया. यह अब तक का सबसे कम रिकॉर्ड है.

    कुछ यूरोपीय देशों में टेस्ला की वापसी

    नॉर्वे में गिरावट के बावजूद टेस्ला को यूरोप के कुछ अन्य देशों में राहत मिली है. स्पेन में कंपनी की बिक्री 70 प्रतिशत बढ़कर 456 यूनिट्स तक पहुंच गई. इटली में 75 प्रतिशत की बढ़त के साथ 713 कारें बिकीं. स्वीडन में बिक्री 26 प्रतिशत बढ़कर 512 यूनिट्स रही, जबकि डेनमार्क में 3 प्रतिशत की मामूली बढ़त के साथ आंकड़ा 458 यूनिट्स तक पहुंचा.

    इन देशों में आई तेजी का कारण टेस्ला की नई और किफायती स्टैंडर्ड मॉडल्स मानी जा रही हैं. कंपनी ने हाल ही में Model 3 और Model Y के किफायती वेरिएंट को लॉन्च किया है. जो काफी बजट फ्रेंडली है. जानकारों का मानना है कि, कम कीमत और बेहतर रेंज के चलते इन कारों को लोग प्राथमिकता दे रहे हैं.

    भारत में बिक्री बढ़ाने के लिए खास ऑफर

    भारतीय बाजार की बात करें तो यहां भी टेस्ला की हालत खराब ही है. बीते साल जुलाई में टेस्ला ने बड़े जोर-शोर के साथ इंडिया एंट्री का ऐलान किया था. कंपनी ने मुंबई के ब्रांद्रा कुर्ला कॉम्पलेक्स (BKC) में अपना पहला शोरूम शुरू किया. जिसे बाद में दिल्ली और गुरुग्राम तक बढ़ा दिया गया है. टेस्ला ने भारत में अपनी पहली कार के तौर पर Model Y को लॉन्च किया है, जिसकी कीमत 59.89 लाख रुपये से शुरू होकर टॉप मॉडल के लिए 73.89 लाख रुपये तक जाती है.

    दरअसल, हाई इंपोर्ट ड्यूटी के चलते टेस्ला की कार यहां काफी महंगी पड़ रही है. शुरुआत में ऐसी रिपोर्ट आई थी कि, कुछ ग्राहकों ने टेस्ला मॉडल वाई की बुकिंग कराई थी, लेकिन बाद में उन्होंने कैंसिल करा दी. खैर, टेस्ला भारत में भी बिक्री बढ़ाने की कोशिश कर रही है. कंपनी टेस्ला मॉडल Y पर खास स्कीम्स दे रही है. इसके तहत पेट्रोल या डीजल गाड़ी के बदले एक्सचेंज कराने पर ग्राहकों को 3 लाख रुपये तक का एक्सचेंज बोनस ऑफर किया जा रहा है. 
     

  • टोल टैक्स चुकाने का तरीका बदला, अब बिना टोल प्लाजा के कटेगा शुल्क

    टोल टैक्स चुकाने का तरीका बदला, अब बिना टोल प्लाजा के कटेगा शुल्क

    नई दिल्ली

    देश में हाईवे नेटवर्क तेजी से फैल रहा है और रोज लाखों वाहन लंबी दूरी तय करते हैं. लेकिन टोल प्लाजा पर रुकना यात्रियों के सफर को स्लो कर देता है. फास्टैग के बाद भी कई जगह कतारें, जाम और समय की बर्बादी आम है. अब इस परेशानी का समाधान नई तकनीक से किया जा रहा है. 

    देश का पहला बिना बैरियर वाला टोल बूथ गुजरात के सूरत में शुरू किया गया है. यहां वाहन बिना रुके निकल जाएंगे और टोल अपने आप कट जाएगा. इस सिस्टम में हाई रिजोल्यूशन कैमरे, जीपीएस और ऑटोमेटेड नंबर प्लेट रिकग्निशन तकनीक का इस्तेमाल हो रहा है. यानी अब टोल देने का तरीका पूरी तरह डिजिटल और स्मूथ होने जा रहा है. जान लें पूरी खबर.
    बिना टोल प्लाजा के टोल कलेक्शन

    नए टोल प्लाजा सिस्टम में टोल प्लाजा पर बैरियर नहीं होगा. सड़क पर लगे हाई रिजोल्यूशन कैमरे हर गुजरने वाले वाहन की नंबर प्लेट पढ़ेंगे. अगर गाड़ी पर फास्टैग नहीं भी है. तब भी नंबर प्लेट के जरिए वाहन की पहचान हो जाएगी. सिस्टम इसे टोल उल्लंघन के तौर पर दर्ज करेगा और वाहन मालिक को ई चालान भेजा जाएगा. 

    हर लेन में रडार और लिडार आधारित कैमरे 360 डिग्री रिकॉर्डिंग करेंगे. पूरा डेटा कंट्रोल रूम और एनएचएआई सर्वर पर रियल टाइम दर्ज होगा. यानी कोई भी वाहन बिना पेमेंट के नहीं निकल सकेगा. यह टेक्नोलॉजी दुबई, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में पहले से ही इस्तेमाल की जा रही है

    फास्टैग है लेकिन बैलेंस कम है तो क्या होगा?

    अगर आपकी गाड़ी में  फास्टैग लगा है लेकिन उसमें बैलेंस कम है या ब्लैकलिस्टेड है. तब भी सिस्टम उसे पहचान लेगा. ऐसे मामलों में वाहन को डिफॉल्टर के रूप में दर्ज किया जाएगा. वाहन मालिक को एसएमएस और ऐप के जरिए अलर्ट मिलेगा. तय समय के भीतर रिचार्ज न करने पर ई चालान जारी होगा. 

    जानबूझकर टोल चोरी करने की कोशिश करने वालों पर भी यह सिस्टम नजर रखेगा. कैमरे हर एंगल से रिकॉर्डिंग करते हैं. इसलिए बच निकलना मुश्किल होगा. आने वाले समय में यह बिना बैरियर वाला टोल सिस्टम देश के बाकी हाईवे पर भी लागू किया जा सकता है. इससे सफर तेज और आसान हो जाएगा. 

  • बिकिनी में 40 साल की एक्ट्रेस मौनी रॉय, पूल किनारे इतराकर दिए हॉट पोज

    बिकिनी में 40 साल की एक्ट्रेस मौनी रॉय, पूल किनारे इतराकर दिए हॉट पोज

    मुंबई 

    टीवी से बॉलीवुड तक का सफर तय करने वालीं मौनी रॉय अपनी दमदार एक्टिंग के साथ बोल्ड लुक से भी फैंस को दीवाना बना देती हैं. मौनी ने अब बिकिनी में अपनी सेंशुअस तस्वीरें शेयर की हैं. 40 साल की मौनी रॉय नई तस्वीरों में सुपर गॉर्जियस लग रही हैं. एक्ट्रेस प्रिंटेड बिकिनी में कहर ढाती नजर आईं. उनके लुक से नजरें हटाना भी मुश्किल है.   बिकिनी संग मौनी ने ब्लैक सनग्लासेस लगाकर अपना लुक कंप्लीट किया है. ओपन हेयर और सटल मेकअप में एक्ट्रेस का सिजलिंग लुक देखते ही बनता है. 

    मौनी ने बिकिनी में पूल किनारे कई किलर पोज दिए. वो कभी बैठकर पोज देती दिखीं, तो कभी सुकून के पल बिताती नजर आईं. एक्ट्रेस की अदाओं पर फैंस अपना दिल हार बैठे हैं. मौनी ने कुछ सेल्फी फोटोज भी शेयर किए हैं. वो काफी स्टनिंग लग रही हैं. मौनी रॉय की बिकिनी फोटोज इंटरनेट पर वायरल हो रही हैं. फैंस कमेंट सेक्शन में एक्ट्रेस की तारीफ करते थक नहीं रहे हैं. मौनी को कोई गॉर्जियस बता रहा है, तो कोई सनशाइन. कई लोग फायर और हार्ट इमोजी के साथ उनकी तस्वीरों पर रिएक्ट कर रहे हैं. 

      मौनी रॉय की बात करें तो उन्हें सबसे पहले पॉपुलर टीवी सीरियल 'क्योंकि सास भी कभी बहू थी' से खास पहचान मिली थी. इसके बाद वो कई शोज में नजर आईं. टीवी पर धमाल मचाने के बाद मौनी ने फिल्मों का रुख किया. मौनी फिल्म ब्रह्मास्त्र, द भूतनी जैसी फिल्मों में दिखाई दे चुकी हैं. 

  • 9 फरवरी को बंधक श्रम उन्मूलन दिवस के अवसर पर नयी श्रमिक संहिताओं पर कार्यशाला

    9 फरवरी को बंधक श्रम उन्मूलन दिवस के अवसर पर नयी श्रमिक संहिताओं पर कार्यशाला

    9 फरवरी को बंधक श्रम उन्मूलन दिवस के अवसर पर नयी श्रमिक संहिताओं पर कार्यशाला

    राज्य स्तरीय एक्शन प्लान का भी होगा विमोचन

    भोपाल 

    श्रम विभाग ने 9 फरवरी को 'बंधक श्रम उन्मूलन दिवस' पर कुशाभाऊ ठाकरे इंटरनेशनल कन्वेन्शन सेंटर (मिंटो हॉल) में कार्यशाला का आयोजन किया है। उद्घाटन सुबह 10 बजे श्रम मंत्री श्री प्रहलाद सिंह पटेल करेंगे। कार्यशाला में राज्य स्तरीय एक्शन प्लान का विमोचन भी होगा।

    पूरे मध्य प्रदेश में महीनेभर चलेगा अभियान

    बंधक श्रम (बंधुआ मजदूरी) कराने वालों के विरुद्ध मध्यप्रदेश का श्रम विभाग 9 फरवरी 'बंधक श्रम उन्मूलन दिवस' से विशेष अभियान भी शुरू करने जा रहा है। उल्लेखनीय है कि श्रम मंत्री की पहल पर विभाग ने बाल एवं बंधक श्रम को रोकने और जागरुकता लाने एक विशेष 'वेदा पहल' की शुरुआत की है।

    कार्यशाला के प्रमुख चार बिंदु

    पहला: बाल एवं कुमार श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम, 1986 के अंतर्गत राज्य एक्शन प्लान के प्रभावी क्रियान्वयन पर चर्चा होगी। इसमें अधिनियम के अंतर्गत निरीक्षण, पहचान, बचाव एवं पुनर्वास की प्रक्रिया पर चर्चा की जाएगी।

    दूसरा: बंधुआ श्रम (उन्मूलन) अधिनियम, 1976 के क्रियान्वयन के 50 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर अधिनियम की उपलब्धियों एवं वर्तमान चुनौतियों पर विचार किया जाएगा।

    तीसरा: नई चार श्रम संहिताओं के माध्यम से श्रमिकों, विशेषकर महिलाओं के अधिकारों, सुरक्षा एवं सामाजिक संरक्षण से जुड़े प्रावधानों की जानकारी दी जाएगी।

    चौथा: राज्य एक्शन प्लान के माध्यम से विभागीय समन्वय, प्रवर्तन व्यवस्था एवं जनजागरूकता को सुदृढ़ करने की रणनीति प्रस्तुत की जाएगी।

    श्रम विभाग के अनुसार, कार्यशाला का उद्देश्य कानून, नीति और जमीनी क्रियान्वयन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना है, ताकि राज्य में बाल एवं बंधुआ श्रम के उन्मूलन की दिशा में प्रभावी और ठोस परिणाम सुनिश्चित किए जा सकें।