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  • देहरादून: IMA के पास इस्लामिक इंस्टीट्यूट के लिए 20 एकड़ जमीन आवंटन पर विवाद

    देहरादून: IMA के पास इस्लामिक इंस्टीट्यूट के लिए 20 एकड़ जमीन आवंटन पर विवाद

        देहरादून
        देहरादून की राजधानी देहरादून में इंडियन मिलिट्री एकेडमी (IMA) के पास मौजूद करीब 20 एकड़ ज़मीन विवादों में आ गई है. असल में नया विवाद जमीन के ट्रांसफर को लेकर शुरू हुआ है. कथित तौर पर यह जमीन एक इस्लामिक एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन बनाने के लिए आवंटित की गई थी, जो जांच के दायरे में आ गई है. यह भी आरोप लग रहे हैं कि यहां पर इंस्टीट्यूशन वाला प्लॉट काटकर लोगों को बसाया जा रहा है. 

    कथित तौर पर यह ज़मीन करीब दो दशक पहले उस वक्त की कांग्रेस सरकार ने अलॉट की थी.

    एजेंसी के मुताबिक, विकासनगर सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट विनोद कुमार की शुरुआती जांच के मुताबिक, IMA के पास धौलास इलाके में मौजूद ज़मीन के प्लॉट को अब रहने के मकसद से छोटे-छोटे प्लॉट में बेचा जा रहा है, जिससे मिलिट्री ट्रेनिंग इंस्टीट्यूशन की सिक्योरिटी को खतरा है.

    सियासी बयानबाजी तेज…

    पत्रकारों से बात करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उनकी सरकार इस मामले में सख्त एक्शन लेगी. उन्होंने कहा, "इस मामले से यह साफ है कि ये लोग (कांग्रेस), जो मुस्लिम यूनिवर्सिटी बनाने की बात करते थे, अगर सत्ता में आते तो उसी दिशा में आगे बढ़ते. हम सख्त एक्शन लेंगे."

    मामले पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस नेता और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि यह मामला 2004 का है, जब नारायण दत्त तिवारी मुख्यमंत्री थे. उन्होंने कहा, "यह 2004 का पुराना केस है, जब नारायण दत्त तिवारी मुख्यमंत्री थे. उसके बाद, बीजेपी कई बार सत्ता में आई और वे इस अलॉटमेंट को कैंसल कर सकते थे."

    बीजेपी विधायक और राज्य पार्टी प्रवक्ता विनोद चमोली ने कहा कि मामले से जुड़ी रिपोर्ट्स ने एक बार फिर कांग्रेस सरकारों की 'खतरनाक साज़िशों' को सामने ला दिया है. उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि क्या तिवारी सरकार के दौरान दी गई ज़मीन हरीश रावत की देख-रेख में इस्लामिक यूनिवर्सिटी बनाने के लिए थी?

    चमोली ने कहा, "बीजेपी के विरोध और 2022 में जनता के कांग्रेस को नकारने की वजह से यह इरादा पूरा नहीं हो सका और अब ज़मीन पर लैंड माफिया कब्ज़ा कर रहे हैं."

     

  • आखिरकार पाकिस्तान ने झुका, T20 वर्ल्ड कप में भारत से मुकाबला तय

    आखिरकार पाकिस्तान ने झुका, T20 वर्ल्ड कप में भारत से मुकाबला तय

     नई दिल्ली
    भारत और पाकिस्तान के बीच आईसीसी मेन्स टी20 वर्ल्ड कप 2026 का बहुप्रतीक्षित मुकाबला 15 फरवरी को तय कार्यक्रम के अनुसार खेला जाएगा. पाकिस्तान सरकार ने सोमवार को औपचारिक रूप से पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) को यह मैच खेलने की अनुमति दे दी, जिससे पिछले कई दिनों से बना गतिरोध समाप्त हो गया.

    प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ को PCB चेयरमैन मोहसिन नकवी ने आईसीसी, बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (BCB) और अन्य सदस्य देशों के साथ हुई उच्चस्तरीय बातचीत की जानकारी दी. इसके बाद सरकार ने सभी पहलुओं पर विचार करते हुए पाकिस्तान टीम को मैदान में उतरने का निर्देश दिया.

    पाकिस्तान ने पहले अपनी सरकार की सलाह पर भारत के खिलाफ मैच नहीं खेलने की बात कही थी, जिससे पूरे टूर्नामेंट पर संकट के बादल मंडराने लगे थे. हालांकि आईसीसी की सख्ती, बांग्लादेश की अपील और लगातार बातचीत के बाद पाकिस्तान पीछे हटता नजर आया.
    लाहौर मीटिंग के बाद रास्ता साफ

    लाहौर में हुई बैठक कई घंटों तक चली, लेकिन सूत्रों के अनुसार पाकिस्तान की ओर से रखी गई ज्यादातर मांगों पर आईसीसी ने सहमति नहीं जताई. इसके बाद पीसीबी ने बहिष्कार के रुख को नरम किया और अब मैच खेले जाने का रास्ता साफ हो गया है.

    भारत-पाकिस्तान मुकाबला क्रिकेट जगत का सबसे बड़ा और कमाई वाला मैच माना जाता है. ऐसे में इसके रद्द होने से आईसीसी, ब्रॉडकास्टर्स और सभी सदस्य बोर्डों को भारी नुकसान होता. अब मैच तय समय पर होने से टूर्नामेंट और क्रिकेट इकोसिस्टम को बड़ी राहत मिली है.

    बता दें कि लाहौर में हुई बैठक में पाकिस्तान ने कई शर्त रखी थीं. जिसमें भारत के साथ द्विपक्षीय सीरीज, भारत-बांग्लादेश और पाकिस्तान के बीच त्रिपक्षीय सीरीज. हैंडशेक विवाद औऱ रेवन्यू बढ़ाने की बात कही गई थी. लेकिन आईसीसी ने पाकिस्तान की कोई बात नहीं मानी. आईसीसी ने बस इतना कहा कि वो बांग्लादेश पर कोई आर्थिक एक्शन नहीं लेगा. लेकिन उसने पाकिस्तान की कोई बात मानने से इनकार कर दिया. आखिरकार पाकिस्तान को झुकना पड़ा.

    पाकिस्तान ने कैसे लिया यू-टर्न,पूरी इनसाइड स्टोरी

    पाकिस्तान सरकार ने आखिर कर देर रात यू टर्न लेते हुए भारत के साथ कोलंबो में 15 फरवरी को मैच खेलने के लिए अपनी टीम को निर्देश दे दिया.  पाकिस्तान सरकार ने प्रेस रिलीज जारी कर अपने यू टर्न के फैसले की वजहें बताई. पाकिस्तान सरकार ने यह भी कहा कि उन्होंने ग्लोबल क्रिकेट के लिए और श्रीलंका और बांग्लादेश का ख्याल रखते हुए भारत के साथ 15 फरवरी को मैच खेलने के लिए अपना मन बनाया.

    पाकिस्तान के माननीय प्रधानमंत्री, श्री शहबाज शरीफ को पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के अध्यक्ष, श्री मोहसिन नकवी ने पीसीबी, आईसीसी के प्रतिनिधियों और बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (बीसीबी) के बीच उच्च स्तरीय वार्ता के परिणामों के बारे में औपचारिक रूप से जानकारी दी है. 

     पाकिस्तान सरकार ने बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड की ओर से पीसीबी को भेजे गए औपचारिक अनुरोधों, साथ ही श्रीलंका, संयुक्त अरब अमीरात और अन्य सदस्य देशों के समर्थन पत्रों की समीक्षा की है.

    इन पत्रों में हाल की चुनौतियों का समाधान करने के लिए पाकिस्तान के नेतृत्व की मांग की गई थी. सरकार ने बीसीबी अध्यक्ष, श्री अमीनुल इस्लाम के बयान को भी नोट किया है.  हमारे भाईचारे वाले देश द्वारा व्यक्त की गई गहरी आंतरिकता को गर्मजोशी से स्वीकार किया गया है. पाकिस्तान ने दोहराया है कि वह बांग्लादेश के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है. 

    इसी शाम, प्रधानमंत्री ने श्रीलंका के राष्ट्रपति, एच.ई. अनुर कुमार दिसानायके के साथ एक टेलीफोन वार्ता की. उनकी गर्म और मित्रवत बातचीत के दौरान, उन्होंने याद किया कि पाकिस्तान और श्रीलंका हमेशा कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहे हैं, खासकर चुनौतीपूर्ण समय में। श्रीलंकाई राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री से वर्तमान गतिरोध को सौहार्दपूर्ण ढंग से हल करने के लिए गंभीर विचार करने का अनुरोध किया.

    बहुपक्षीय वार्ता में हासिल किए गए परिणामों और मित्र देशों के अनुरोध को देखते हुए, पाकिस्तान सरकार ने पाकिस्तान राष्ट्रीय क्रिकेट टीम को 15 फरवरी, 2026 को आईसीसी मेन्स टी20 वर्ल्ड कप में अपने निर्धारित मैच के लिए मैदान में उतरने का निर्देश दिया है.

    इसके अलावा, यह निर्णय क्रिकेट की भावना की रक्षा करने और सभी भाग लेने वाले देशों में इस वैश्विक खेल की निरंतरता का समर्थन करने के उद्देश्य से लिया गया . प्रधानमंत्री और पाकिस्तान के लोगों ने "मेन इन ग्रीन" को अपनी शुभकामनाएं दी हैं. हमें विश्वास है कि हमारी टीम वैश्विक गौरव के लिए प्रतिस्पर्धा करते हुए खेल भावना और राष्ट्रीय गर्व को मैदान में ले जाएगी.
    बांग्लादेश पर कोई पेनल्टी नहीं

    ICC ने बांग्लादेश के प्रति नरम रुख अपनाने पर सहमति जताई है, क्योंकि टीम ने T20 वर्ल्ड कप के लिए भारत जाने से मना कर दिया था, जिस वजह से इस बड़े टूर्नामेंट में उसकी जगह स्कॉटलैंड को शामिल किया गया. सोमवार को, दुनिया की गवर्निंग बॉडी ने पुष्टि की कि वह पीछे हटने के बावजूद बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड पर कोई पेनल्टी नहीं लगाएगी.  यह फैसला BCB के साथ-साथ पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड  के साथ बातचीत के बाद लिया गया, जिसने बांग्लादेश के साथ एकजुटता दिखाते हुए 15 फरवरी को भारत के खिलाफ मैच का बहिष्कार करने की घोषणा की थी. 
    यह सारा ड्रामा किस बारे में था?

    यह सब तब शुरू हुआ जब मुस्तफिजुर रहमान को आईपीएल से अलग किया गया जिसके बाद बांग्लादेश ने कड़ा रूख अपनाया और इसको लेकर आईसीसी से शिकायत की, वहीं, बांग्लादेश बोर्ड ने  सुरक्षा मामले को लेकर भारत आने से मना कर दिया. आईसीसी से लाख समझाने के बाद भी बांग्लादेश नहीं माना तो आईसीसी ने उन्हें टी-2- वर्ल्ड कप से अलग कर दिया जिसके बाद पाकिस्तान बोर्ड इस विवाद में कूद गया और पैंतरे बाजी करने लगा. पाकिस्तान ने बॉयकॉट का ड्रामा किया जिसके बाद आईसीसी, पीसीबी और बीसीबी ने मिलकर इस विवाद को सुलझाया और आखिकार पाकिस्तान बॉयकॉट ड्रामे पर यू-टर्न लिया.

    बांग्लादेश पर कोई एक्शन नहीं लेगा आईसीसी

    अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) ने सोमवार को कहा कि भारत में अपने टी20 वर्ल्ड कप मैच खेलने से इनकार करने पर बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (बीसीबी) पर किसी भी तरह का जुर्माना नहीं लगाया जाएगा. विश्व क्रिकेट की सर्वोच्च संस्था ने कहा कि यह फैसला बीसीबी के साथ-साथ पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) से बातचीत के बाद लिया गया है. पाकिस्तान ने बांग्लादेश के समर्थन में 15 फरवरी को भारत के खिलाफ होने वाले मैच के बहिष्कार की घोषणा की थी.

    आईसीसी ने एक बयान में कहा, इस बात पर सहमति बनी है कि मौजूदा मामले में बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड पर कोई भी आर्थिक, खेल संबंधी या प्रशासनिक दंड नहीं लगाया जाएगा. यह भी स्वीकार किया गया है कि बीसीबी को, यदि वह चाहे, तो विवाद समाधान समिति (डीआरसी) से संपर्क करने का अधिकार बना रहेगा. यह अधिकार आईसीसी के मौजूदा नियमों के तहत मौजूद है और पूरी तरह सुरक्षित रहेगा.”

    गौरतलब है कि बांग्लादेश ने सुरक्षा चिंताओं का हवाला देते हुए मौजूदा मेगा इवेंट के लिए भारत की यात्रा करने से इनकार कर दिया था, जिसके बाद उसकी जगह स्कॉटलैंड को टूर्नामेंट में शामिल किया गया. विश्व क्रिकेट संस्था ने यह भी कहा कि आपसी समझ के तहत बांग्लादेश 2028 से 2031 के बीच किसी एक आईसीसी टूर्नामेंट की मेज़बानी भी करेगा.

    आईसीसी के अनुसार, इस समझौते के तहत यह तय किया गया है कि आईसीसी पुरुष क्रिकेट विश्व कप 2031 से पहले बांग्लादेश एक आईसीसी इवेंट की मेज़बानी करेगा, जो सामान्य आईसीसी मेज़बानी प्रक्रियाओं, समय-सीमा और संचालन संबंधी आवश्यकताओं के अधीन होगा.

    इससे पहले बीसीबी अध्यक्ष अमीनुल इस्लाम रविवार को पाकिस्तान पहुंचे थे, जहां गतिरोध सुलझाने के प्रयासों के तहत आईसीसी और पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के साथ एक वर्चुअल बैठक सहित कई चर्चाएं हुई थीं.

     

  • कानपुर: नवजात की मौत पर कड़ी कार्रवाई, राजा नर्सिंग होम का रजिस्ट्रेशन रद्द, FIR दर्ज

    कानपुर: नवजात की मौत पर कड़ी कार्रवाई, राजा नर्सिंग होम का रजिस्ट्रेशन रद्द, FIR दर्ज

     कानपुर

    बिठूर के ब्रह्मनगर स्थित राजा नर्सिंग होम में एनआईसीयू के भीतर वार्मर मशीन में आग लगने से नवजात बच्ची की जलकर मौत के मामले में जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है. जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह के निर्देश पर कराई गई जांच में सामने आया कि अस्पताल में बिना अनुमति के एनआईसीयू यूनिट संचालित की जा रही थी.

    मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. हरिदत्त नेमी द्वारा सौंपी गई जांच रिपोर्ट के अनुसार, नर्सिंग होम का पंजीकरण तो था, लेकिन एनआईसीयू संचालन की अनुमति कभी नहीं ली गई. इसके बावजूद परिसर में अवैध रूप से एनआईसीयू चलाया जा रहा था. 

    निरीक्षण के दौरान अग्निशमन यंत्रों की वैधता अवधि समाप्त पाई गई, जो गंभीर सुरक्षा लापरवाही को दर्शाता है. इसके चलते मौके पर ही अवैध एनआईसीयू यूनिट को सील कर दिया गया.

    गंभीर अनियमितताओं को देखते हुए राजा नर्सिंग होम (पंजीकरण संख्या RMEE2122829) का पंजीकरण तत्काल प्रभाव से रद्द कर अस्पताल को पूरी तरह बंद करने के आदेश दिए गए हैं. प्रबंधन को तीन कार्य दिवसों के भीतर स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने का नोटिस भी जारी किया गया है. आदेशों की अवहेलना करने पर सख्त कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है.

    वहीं, पीड़ित परिजनों की तहरीर के आधार पर बिठूर थाने में अस्पताल के डॉक्टरों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 106(1) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है. इस मामले को लेकर परिजनों में भारी आक्रोश है. उन्होंने सख्त एक्शन की मांग की है. 

    गौरतलब है कि यह घटना निजी अस्पतालों की संवेदनहीनता और लचर व्यवस्था को उजागर करती है. पहली संतान खोने वाले परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है. स्थानीय प्रशासन अब अस्पताल की अन्य कमियों की भी फाइल खंगाल रहा है. पुलिस ने परिजनों को आश्वासन दिया है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा. फिलहाल अस्पताल परिसर में तनाव को देखते हुए पुलिस बल तैनात है और स्वास्थ्य विभाग की टीम अपनी अंतिम रिपोर्ट तैयार करने में जुटी है.

  • बांग्लादेश को बड़ा झटका! तीन साल में भारत छीन लेगा 15 हजार करोड़ का कारोबार, एक डील से दोगुना होगा निर्यात

    बांग्लादेश को बड़ा झटका! तीन साल में भारत छीन लेगा 15 हजार करोड़ का कारोबार, एक डील से दोगुना होगा निर्यात

    नई दिल्‍ली
     अमेरिका के साथ मुक्‍त व्‍यापार समझौता होने से भारत के कपड़ा निर्यात को सबसे ज्‍यादा लाभ मिलने की उम्‍मीद है. कपड़ा निर्यात संगठनों ने अनुमान लगाया है कि महज तीन साल में परिधान निर्यात बढ़कर दोगुना होने की पूरी उम्‍मीद है. अभी भारत से अमेरिका को होने वाला कपड़ा निर्यात करीब 15 हजार करोड़ रुपये सालाना का है, जो तीन साल के भीतर बढ़कर 30 हजार करोड़ रुपये से भी ज्‍यादा पहुंच सकता है.

    देश में कपड़ा निर्यात का हब माने जाने वाले तिरुप्‍पुर के कपड़ा उद्योग निर्यातकों का कहना है कि भारत और अमेरिका के बीच हुए हालिया समझौते के बाद अगले तीन वर्षों में अमेरिका को कपड़ों का निर्यात दोगुना होकर 30,000 करोड़ रुपये तक पहुचने की उम्मीद है. तिरुप्पुर निर्यातक संघ के अध्यक्ष के एम सुब्रमणियन ने कहा कि चेन्नई से लगभग 450 किलोमीटर पश्चिम में स्थित तिरुप्पुर में भी इस अवधि के दौरान रोजगार सृजन में लगभग पांच लाख की वृद्धि होने की उम्मीद है. इसका मतलब है कि इस डील ने 5 लाख नौकरियों के भी अवसर बनाए हैं.

    5 साल में जबरदस्‍त बढ़ोतरी
    भारत और अमेरिका ने शनिवार को घोषणा की कि उन्होंने द्विपक्षीय व्यापार समझौते के पहले चरण के ढांचे को अंतिम रूप दे दिया है, जिसके तहत दोनों पक्ष दोतरफा व्यापार को बढ़ावा देने के लिए कई वस्तुओं पर आयात शुल्क कम करेंगे. इस समझौते पर टिप्पणी करते हुए सुब्रमणियन ने कहा कि हम इस कदम का स्वागत करते हैं. यह समझौता महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे तिरुप्पुर को अगले 5 वर्षों में जबरदस्त वृद्धि मिलेगी.

    अभी 15 हजार करोड़ का है निर्यात
    उन्होंने बताया कि वर्तमान में तमिलनाडु से कपड़ों का निर्यात 15,000 करोड़ रुपये का है और इस समझौते के बाद इसके अगले तीन वर्षों में 30,000 करोड़ रुपये तक पहुंचने की उम्मीद है. सुब्रमणियन ने कहा कि भारत-अमेरिका समझौते के कारण पांच लाख और नए रोजगार पैदा होंगे. तिरुप्पुर के एक अन्य उद्यमी और स्टारलाइट एक्सपोर्टर्स के संस्थापक एम. रथिनसामी ने कहा कि इस सौदे से तमिलनाडु को अमेरिका से और अधिक ऑर्डर मिलेंगे.

    बांग्‍लादेश को पीछे छोड़ देंगे
    तिरुप्पुर निर्यातक संघ के कार्यकारी समिति सदस्य रथिनासामी ने कहा कि पहले कुछ ऑर्डर बांग्लादेश और अन्य देशों को जाते थे. इस समझौते के बाद हमें (अमेरिका से) और अधिक ऑर्डर मिलेंगे. यह समझौता सीधे तौर पर बांग्‍लादेश के लिए भी बड़ा झटका है. बांग्‍लादेश पर इससे पहले कम टैरिफ होने की वजह से अमेरिका के कई ऑर्डर वहां से जाते थे, जबकि अब भारत पर टैरिफ बांग्‍लादेश से भी कम हो गया है. लिहाजा आने वाले समय में अमेरिका से ज्‍यादा ऑर्डर मिलने का अनुमान है.

  • सावरकर को भारत रत्न की मांग पर गरमाई सियासत, विपक्षी नेताओं ने किया पलटवार

    सावरकर को भारत रत्न की मांग पर गरमाई सियासत, विपक्षी नेताओं ने किया पलटवार

    नई दिल्ली 

    राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत की ओर से वीर सावरकर को भारत रत्न दिए जाने की मांग पर विपक्ष लगातार सरकार पर हमलावर है। राजद सांसद मनोज झा ने कहा कि मोहन भागवत कैसे बयान देते हैं, समझ में नहीं आ रहा है। राजद सांसद मनोज झा ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा, "भारत रत्न का गौरव आज तक किसी के लिए प्रतीक्षा कर रहा है क्या? मुझे समझ नहीं आ रहा कि मोहन भागवत कैसे बयान देते हैं। विसंगतियों पर बात करिए, सरकार तो आप ही चला रहे हैं, बाकी सब तो कठपुतली हैं।" निर्दलीय सांसद और आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के बयान पर कहा, "अभिव्यक्ति की आजादी है। कोई किसी के लिए भी पुरस्कार की मांग कर सकता है। मोहन भागवत तो सरकार के मालिक हैं। उन्हें मांग करने की क्या जरूरत है? वे कह देंगे तो कौन मना करेगा?"

    उन्होंने कहा कि देश की आजादी में किसका कितना बड़ा योगदान है, यह किसी से छिपा नहीं है। हम लंबे समय से कांशीराम साहब को भारत रत्न दिए जाने की मांग कर रहे हैं। 1857 क्रांति के नायक कोतवाल धन सिंह गुर्जर के लिए भी हमने भारत रत्न की मांग की है, लेकिन ऐसे महापुरुषों को भारत रत्न न देकर सरकार इन वर्गों का अपमान कर रही है। यह हमारे लोग होने नहीं देंगे और वोट से इसका बदला लेंगे।"

    समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के बयान पर कहा, "बजट का जो हलवा बना था, वह ज्यादा किसे मिला? आज समय यह है कि 18 बड़ा है या शून्य? बजट पर चर्चा इसलिए होनी चाहिए क्योंकि अब किसान क्या करेगा? कभी भारत ने अपनी अर्थव्यवस्था खोली थी और यह बताया गया था कि गरीब, किसान की तरक्की होगी, लेकिन जब हम पीछे मुड़कर देखते हैं तो अमीर और अमीर और गरीब और गरीब हुआ है। उससे ज्यादा अर्थव्यवस्था आज खोल दी गई। ये सब बातें सिर्फ ध्यान भटकाने के लिए की जा रही हैं।"

    समाजवादी पार्टी सांसद डिंपल यादव ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा, "हमें लगातार देखने को मिला है कि जब से भाजपा आई है, सत्तापक्ष के कभी माइक ऑफ नहीं होते, लेकिन विपक्ष के नेताओं और सांसदों का माइक ऑफ किया जाता है। तो अगर अविश्वास प्रस्ताव लाना है तो इंडी गठबंधन मिलकर ही ये प्रस्ताव लाएगी।"

  • भारत में 2025 में सस्ते 5G स्मार्टफोन की शिपमेंट में 1,900% से ज्यादा की उछाल, रिपोर्ट

    भारत में 2025 में सस्ते 5G स्मार्टफोन की शिपमेंट में 1,900% से ज्यादा की उछाल, रिपोर्ट

    नई दिल्ली 
     साल 2025 में भारत में सस्ते 5जी स्मार्टफोन की शिपमेंट (डिलीवरी) में साल-दर-साल आधार पर 1,900 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई। इसकी बड़ी वजह आक्रामक कीमतें, एंट्री-लेवल 5जी चिपसेट की बेहतर उपलब्धता और देश भर में 5जी नेटवर्क का तेजी से विस्तार रहा। साइबरमीडिया रिसर्च (सीएमआर) की रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में भारत का स्मार्टफोन बाजार एक बड़े बदलाव के दौर में पहुंच गया। इस दौरान सस्ते 5जी फोन की बिक्री में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई और महंगे (प्रीमियम) स्मार्टफोन की मांग भी बनी रही। सबसे बड़ा बदलाव 6,000 से 8,000 रुपए की कीमत वाले फोन सेगमेंट में देखने को मिला। रिपोर्ट में बताया गया कि कुल स्मार्टफोन शिपमेंट में 5जी फोन की हिस्सेदारी 88 प्रतिशत रही, जो सालाना आधार पर 12 प्रतिशत ज्यादा है। इससे साफ है कि 5जी अब सिर्फ महंगे फोन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि बाजार की अनिवार्य आवश्यकता बन चुका है।

    भारत में एप्पल ने सालाना आधार पर 25 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की और मार्केट शेयर 9 प्रतिशत तक पहुंच गया। आईफोन 16 सीरीज में बेस मॉडल आईफोन 16 की हिस्सेदारी 47 प्रतिशत रही, जिससे पता चलता है कि लोग प्रो या प्लस मॉडल के बजाय कम कीमत वाले मॉडल को ज्यादा पसंद कर रहे हैं।

    सीएमआर की सीनियर एनालिस्ट मेनका कुमारी ने कहा, "2025 भारत के स्मार्टफोन बाजार के लिए गिरावट का नहीं, बल्कि दोबारा संतुलन बनाने का साल रहा। भले ही कुल बिक्री में थोड़ी कमी आई हो, लेकिन सस्ते 5जी फोन की तेजी, महंगे फोन की स्थिर मांग और नए ब्रांड्स के उभरने से यह साफ है कि बाजार कमजोर नहीं हो रहा, बल्कि बदल रहा है।"
    2025 में 6.7 इंच या उससे बड़े डिस्प्ले वाले स्मार्टफोन की हिस्सेदारी करीब 80 प्रतिशत रही, जिससे साफ है कि अब ग्राहक बड़े स्क्रीन वाले फोन ज्यादा पसंद कर रहे हैं।

    रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के स्मार्टफोन चिपसेट बाजार में मीडियाटेक 45 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ सबसे आगे रहा। वहीं, प्रीमियम स्मार्टफोन सेगमेंट में क्वालकॉम ने 34 प्रतिशत बाजार हिस्सेदारी के साथ बढ़त बनाए रखी।
    सीएमआर में इंडस्ट्री इंटेलिजेंस ग्रुप के एनालिस्ट पंकज जादली ने कहा कि 2026 में कंपोनेंट और मेमोरी की बढ़ी हुई लागत के चलते स्मार्टफोन की कीमतों पर दबाव बना रहेगा। इसका असर यह होगा कि साल भर उपभोक्ताओं का खरीदारी व्यवहार ज्यादा सोच-समझकर और सीमित रहेगा।

    उन्होंने बताया कि उपभोक्ता स्मार्टफोन बाजार से दूर नहीं हुए हैं, बल्कि वे अब ज्यादा चयनशील हो गए हैं। लोग अपने मौजूदा फोन का इस्तेमाल लंबे समय तक कर रहे हैं और तभी अपग्रेड कर रहे हैं, जब उन्हें नए डिवाइस में वाकई बेहतर वैल्यू नजर आती है।

  • तमिलनाडु की 100 साल पुरानी दरगाह में रोज नमाज पर रोक, पशु बलि भी हुई बैन

    तमिलनाडु की 100 साल पुरानी दरगाह में रोज नमाज पर रोक, पशु बलि भी हुई बैन

    चेन्नई 

    सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु के एक संवेदनशील में बड़ा फैसला सुनाया है. कोर्ट ने इस मामले में मद्रास हाईकोर्ट के आदेश को बरकरार रखा है. शीर्ष अदालत ने थिरुप्परनकुंड्रम (Thirupparankundram) दरगाह में रोज़ाना नमाज़ पढ़ने की अनुमति मांगने वाली याचिका को खारिज कर दिया है. कोर्ट ने साफ किया है कि इस दरगाह में हर दिन नमाज़ नहीं पढ़ी जाएगी, बल्कि केवल रमजान और बकरीद जैसे विशेष त्योहारों पर ही नमाज अदा करने की इजाजत रहेगी.

    यह अपील एक प्रैक्टिसिंग मुस्लिम, इमाम हुसैन द्वारा दायर की गई थी. इसमें उन्होंने मद्रास हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी थी. जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस अरविंद कुमार की पीठ ने मामले की सुनवाई की. पीठ ने कहा कि हाईकोर्ट के फैसले में दखल देने का कोई कारण नहीं है. सुप्रीम कोर्ट ने न केवल रोजाना नमाज की मांग को ठुकराया, बल्कि दरगाह परिसर में पशु बलि (Animal Sacrifice) पर लगी रोक को भी सही ठहराया है. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि धार्मिक स्थलों की गरिमा और वहां की स्थापित परंपराओं का पालन करना जरूरी है.
    क्या है पूरा विवाद और इसका इतिहास?

    यह पूरा मामला मदुरै के पास स्थित ऐतिहासिक थिरुप्परनकुंड्रम पहाड़ी से जुड़ा है. यह पहाड़ी भगवान मुरुगन के प्राचीन मंदिर (अरुपदाई वीदु में से एक) के लिए प्रसिद्ध है. इसी पहाड़ी की चोटी पर सिकंदर बादुशा की दरगाह भी स्थित है. विवाद की जड़ दरगाह के उपयोग को लेकर थी. याचिकाकर्ताओं की मांग थी कि दरगाह को एक मस्जिद की तरह इस्तेमाल करने दिया जाए. यहां रोज़ाना पांच वक्त की नमाज पढ़ने की मांग की गई थी. इसके अलावा, उर्स और अन्य मौकों पर वहां पशु बलि की अनुमति भी मांगी गई थी. हालांकि, हिंदू संगठनों और मंदिर प्रशासन ने इसका विरोध किया था, क्योंकि यह स्थान भौगोलिक और ऐतिहासिक रूप से मुरुगन मंदिर परिसर का हिस्सा माना जाता है.
    नई प्रथा को इजाजत नहीं

    मद्रास हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई के बाद फैसला सुनाया था कि दरगाह में रोज़ाना नमाज़ की परंपरा नहीं रही है और इसे नई प्रथा के रूप में शुरू नहीं किया जा सकता. हाईकोर्ट ने माना था कि यह स्थान सभी धर्मों के लोगों के लिए श्रद्धा का केंद्र हो सकता है, लेकिन इसे विशेष समुदाय के लिए दैनिक प्रार्थना स्थल (मस्जिद) में नहीं बदला जा सकता. अब सुप्रीम कोर्ट ने भी इसी तर्क पर मुहर लगा दी है.

  • AI एक साल में 99% जॉब्स खा जाएगा, ये नौकरियां रहेंगी बची: एक्सपर्ट की चेतावनी

    AI एक साल में 99% जॉब्स खा जाएगा, ये नौकरियां रहेंगी बची: एक्सपर्ट की चेतावनी

    नई दिल्ली

    आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI इंसानों की जीवन का अहम हिस्सा बन चुका है। आज AI पॉवर्ड डिवाइसेज की मदद से लोग हर तरह का काम निकलवा रहे हैं। हालांकि वह दिन अब दूर नहीं है जब AI महज हेल्पर की तरह हमारी मदद करने की बजाय, हमें रिप्लेस ही कर दे। ऐसा कहना है कि जाने-माने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस रिसर्चर डॉ. रोमन याम्पोल्स्की का। डॉ. रोमन ने चेतावनी दी है कि महज एक साल में AI इंसानों की 99 फीसदी नौकरियां खा जाएगा। उन्होंने यह तक कह दिया है कि कोई भी ऐसा इंसानी काम नहीं दिख रहा, जिसे ऑटोमेट ना किया जा सकता हो।

    याम्पोल्स्की के मुताबिक 2045 तक समाज एक ऐसे टेक्नोलॉजिकल पॉइंट पर पहुंच सकता है जहां से वापस लौटना मुमकिन नहीं होगा। आर्टिफिशियल जनरल इंटेलिजेंस, ऑटोमेशन और इस मुद्दे पर विस्तार से बात करते हुए, डॉ. रोमन याम्पोल्स्की ने कहा कि आने वाले बदलाव पिछले इंडस्ट्रियल बदलावों से बिल्कुल अलग होंगे।

    बता दें कि कम्प्यूटर साइंटिस्ट डॉ. याम्पोल्स्की लातविया से आते हैं और वे फिलहाल लुइसविले यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर हैं। उन्होंने AI सुरक्षा और जोखिम पर 100 से ज्यादा एकेडमिक पेपर पब्लिश किए हैं। उन्होंने हाल ही में स्टीवन बार्टलेट द्वारा होस्ट किए जाने वाले 'द डायरी ऑफ ए CEO' में यह बातें कही हैं।
    किसी भी फिजिकल लेबर को किया जा सकता है ऑटोमेट

    टाइम्स ऑफ इंडिया लाइक रिपोर्ट के मुताबिक बातचीत के दौरान, डॉ. याम्पोल्स्की ने कहा, "पांच सालों में किसी भी तरह के फिजिकल लेबर को ऑटोमेट किया जा सकता है। तो हम एक ऐसी दुनिया देख रहे हैं जहां बेरोजगारी का स्तर ऐसा होगा जो हमने पहले कभी नहीं देखा। मैं 10 प्रतिशत बेरोज़गारी की बात नहीं कर रहा हूं, बल्कि 99 प्रतिशत की बात कर रहा हूं।"
    कौन सी नौकरियां बचने की संभावना?

    डॉ. याम्पोल्स्की ने बताया है कि कौन सी नौकरियां बचने की संभावना है। उन्होंने इंटरव्यू में कहा, “आपके पास सिर्फ वही नौकरियां बचेंगी जहां किसी भी वजह से आप चाहेंगे कि कोई दूसरा इंसान आपके लिए वह काम करे। कुछ नौकरियां ऐसी होती हैं जहां इंसान की जरूरत होती है। हो सकता है आप अमीर हों और किसी भी वजह से आप एक इंसानी अकाउंटेंट चाहते हों।”

    उन्होंने कहा कि इंसानों द्वारा बनाए गए सामानों के लिए शौक की वजह से भी कुछ नौकरियां बीच सकती हैं। उन्होंने कहा, "आपको ऐसे लोगों के लिए एक छोटा सा मार्केट मिल सकता है जो अभी भी हाथ से बनी चीज़ों को पसंद करते हैं।” वहीं AI की निगरानी और रेगुलेशन का जॉब भी बचा हुआ रहेगा। हालांकि डॉ. याम्पोल्स्की ने कहा कि लंबे समय में AI को पूरी तरह से कंट्रोल करना शायद नामुमकिन हो, लेकिन उन्होंने कहा है कि इंसानी निगरानी बदलाव की गति को धीमा कर सकती है।

  • इंदौर में सड़क के बीच बिछी नर्मदा लाइन, एलिवेटेड कॉरिडोर बनाना होगा मुश्किल

    इंदौर में सड़क के बीच बिछी नर्मदा लाइन, एलिवेटेड कॉरिडोर बनाना होगा मुश्किल

    इंदौर 

    इंदौर में छह किलोमीटर लंबा एलिवेटेड कॉरिडोर बनाने की कवायद की जा रही है, लेकिन उसे बनाना इतना आसान भी नहीं होगा, क्योंकि जब बीआरटीएस कॉरिडोर पंद्रह साल पहले बनाया गया था, तब नर्मदा लाइन सड़क के बीच वाले हिस्से में डाली गई थी। इसके अलावा हर चौराहे पर सीवरेज के बड़े पाइप भी क्रॉस हुए हैं। यदि एबी रोड पर एलिवेटेड कॉरिडोर बनता है तो जगह-जगह लाइनों को शिफ्ट करना होगा। इसमें काफी समय लगेगा। 

    बीआरटीएस निर्माण की समयसीमा दो साल तय की गई थी, लेकिन उसके बनने में पांच साल से अधिक का समय लगा, क्योंकि एबी रोड पर ट्रैफिक का दबाव काफी रहता है। ट्रैफिक को दूसरे रूटों पर भी ज्यादा डायवर्ट नहीं किया जा सकता है। यह परेशानी एलिवेटेड कॉरिडोर बनाने में भी आएगी।

    व्हाइट चर्च चौराहे पर पथरीली जमीन

    एलिवेटेड कॉरिडोर के कॉलम बनाने के लिए जमीन में गहरी खुदाई करना होगी। इसमें सबसे ज्यादा समय गीता भवन से जीपीओ के बीच लगेगा। यहां पथरीला हिस्सा है। सीवरेज लाइन बिछाने के लिए इस हिस्से में चट्टानें तोड़ने के लिए विस्फोट का इस्तेमाल किया गया था। यहां लाइन शिफ्ट करना पड़ी तो उसके लिए भी अलग से खुदाई करना होगी।

    लंबी दूरी का ट्रैफिक और होगा कम

    एलआईजी से भंवरकुआं या राजीव गांधी चौराहे तक शहरवासियों को जाना हो तो वे अब रिंग रोड का उपयोग करने लगे हैं, क्योंकि खजराना चौराहा, बंगाली चौराहा, वर्ल्ड कप चौराहा, पालदा चौराहा पर ब्रिज बनने से अब रिंग रोड पर समय कम लगता है। इस मार्ग पर मुसाखेड़ी और आईटी चौराहे पर भी ब्रिज बन रहे हैं। इसके बाद ट्रैफिक और आसान हो जाएगा। एलिवेटेड कॉरिडोर को लेकर याचिका लगाने वाले अतुल शेठ का कहना है कि रिंग रोड के कारण वैसे ही एबी रोड के ट्रैफिक का दबाव कम हो जाएगा। इस कारण एलिवेटेड कॉरिडोर ज्यादा उपयोगी साबित नहीं होगा। पहले जब इसे लेकर सर्वे हुआ था, तब ट्रैफिक चार प्रतिशत आया था।

  • इंदौर में नई व्यवस्था: अब 72 घंटे में ईमेल पर मिलेगा मृत्यु प्रमाण पत्र

    इंदौर में नई व्यवस्था: अब 72 घंटे में ईमेल पर मिलेगा मृत्यु प्रमाण पत्र

    इंदौर 

    इंदौर नगर निगम ने नागरिकों को बड़ी राहत देने वाली नई व्यवस्था लागू की है। अब घर पर होने वाली मृत्यु के मामलों में मृत व्यक्ति का मृत्यु प्रमाण पत्र 72 घंटे के भीतर परिजनों के ईमेल पर भेजा जाएगा। इसके लिए नगर निगम कार्यालय के चक्कर लगाने या किसी तरह का आवेदन करने की जरूरत नहीं होगी। 

    पहले घर भेजा जाता था प्रमाण पत्र
    महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने बताया कि पहले नगर निगम की ओर से मृत्यु होने पर 72 घंटे के भीतर शोक संदेश के साथ मृत्यु प्रमाण पत्र मृतक के घर भिजवाया जाता था। बाद में जन्म–मृत्यु के राष्ट्रीय पोर्टल से नगर निगम पोर्टल के जुड़ने के कारण यह व्यवस्था बंद हो गई थी।

    संशोधित रूप में फिर लागू हुई व्यवस्था
    महापौर ने बताया कि अब राष्ट्रीय पोर्टल से जुड़े रहते हुए इस व्यवस्था को संशोधित स्वरूप में फिर से लागू किया गया है। मुक्तिधाम पर अंतिम संस्कार के समय यदि यह जानकारी दी जाती है कि संबंधित व्यक्ति की मृत्यु घर पर हुई है, तो परिजनों द्वारा दिए गए ईमेल एड्रेस पर 72 घंटे के भीतर मृत्यु प्रमाण पत्र भेज दिया जाएगा।

    नगर निगम आने की जरूरत नहीं
    इस नई व्यवस्था के तहत मृत्यु प्रमाण पत्र प्राप्त करने के लिए परिजनों को नगर निगम कार्यालय आने, आवेदन करने या किसी तरह का शुल्क जमा करने की आवश्यकता नहीं होगी। नगर निगम ने ईमेल के माध्यम से प्रमाण पत्र भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

    अस्पताल में मृत्यु पर लागू नहीं होगी सुविधा
    प्रश्न के उत्तर में महापौर ने स्पष्ट किया कि अस्पताल में होने वाली मृत्यु के मामलों में यह सुविधा फिलहाल लागू नहीं हो पाएगी। इसका कारण यह है कि अस्पतालों से मृत्यु की जानकारी नगर निगम को विलंब से प्राप्त होती है, जिससे 72 घंटे के भीतर प्रमाण पत्र जारी करना संभव नहीं हो पाता।

    जन्म प्रमाण पत्र की व्यवस्था पहले से लागू
    जन्म प्रमाण पत्र को लेकर उन्होंने बताया कि जिन अस्पतालों में प्रसूति होती है, वहां से जन्म प्रमाण पत्र देने की व्यवस्था पहले से ही लागू है। इसे तत्काल व्यवस्था में परिवर्तित करना अभी संभव नहीं है।

    हर साल जारी होते हैं हजारों मृत्यु प्रमाण पत्र
    इंदौर नगर निगम द्वारा हर वर्ष औसतन 14 हजार मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किए जाते हैं। वर्ष 2026 में अब तक 1084 मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किए जा चुके हैं। वर्ष 2025 में 15314, 2024 में 14119, 2023 में 13461 और 2022 में 14237 मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किए गए थे।