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  • महिला नेता के अंदाज़ से नाराज़ राष्ट्रपति ट्रंप, बढ़ाया टैरिफ

    महिला नेता के अंदाज़ से नाराज़ राष्ट्रपति ट्रंप, बढ़ाया टैरिफ

    वाशिंगटन 

    अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्विट्जरलैंड पर टैरिफ बढ़ा दिया था। अब उन्होंने खुलकर इसकी वजह पर भी बात की है। उन्होंने कहा है कि उन्हें स्विट्जरलैंड की महिला नेता का बात करने का तरीका पसंद नहीं आया। अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी बताया कि महिला नेता छोटा देश होने का हवाला देते हुए टैरिफ में राहत की मांग भी कर रही थीं।

    फॉक्स न्यूज से बातचीत में ट्रंप ने स्विस फेडरल काउंसिल की सदस्य कैरिन कैलर सटर से हुई बातचीत का जिक्र किया। ट्रंप ने कहा कि उन्होंने स्विस नेता को बता दिया कि छोटा देश होने के बाद अमेरिका के साथ उसका 42 बिलियन डॉलर का ट्रेड डेफिसिट है।

    ट्रंप ने कहा, 'मैंने 30 फीसदी टैरिफ लगाया था, जो काफी कम था। इसके बाद मुझे कॉल आया, जो मुझे लगा कि स्विट्जरलैंड की प्रधानमंत्री का था। और वह बहुत आक्रामक, लेकिन अच्छे से बात कर रहीं थीं। वह बहुत आक्रामक थीं। उन्होंने मुझसे कहा कि सर हम छोटे से देश हैं। हम ऐसा नहीं कर पाएंगे। हम ऐसा नहीं कर सकते। वह फोन रखने को तैयार ही नहीं थीं।'

    ट्रंप ने कहा, 'नहीं, नहीं, हम एक छोटा देश हैं। बार-बार एक ही बात। वह फोन रखने के लिए तैयार ही नहीं थीं और टैरिफ 30 फीसदी था। और जिस तरह से उन्होंने मुझसे बात की मुझे अच्छा नहीं लगा। ऐसे में उन्हें रियायत देने के बजाए, मैंने उसे बढ़ाकर 39 प्रतिशत कर दिया था।' उन्होंने दावा किया कि स्विट्जरलैंड अपना सामान अमेरिका निर्यात कर रहा था, लेकिन कोई भी टैरिफ नहीं दे रहा था।
    पहले भी किया था दावा

    दावोस में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में भी ट्रंप ने स्विट्जरलैंड की नेता से बात करने का दावा किया था। उन्होंने कहा था, 'मुझे लगता है प्रधानमंत्री थीं। मुझे नहीं पता राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री किसका फोन था। एक महिला थीं। वह एक ही बात बार-बार दोहरा रही थीं। वह कह रही थीं, नहीं नहीं आप ऐसा नहीं कर सकते। 30 फीसदी टैरिफ। हम बहुत छोटे देश हैं। लेकिन मैंने कहा कि आप भले ही छोटे हैं, लेकिन डेफिसिट बड़ा है।'

    खास बात है कि स्विट्जरलैंड में प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति नहीं होता। यहां सरकार की अगुवाई फेडरल काउंसिल की तरफ से की जाती है, जिसमें सात सदस्य होते हैं।
    भारत के साथ डील

    हाल ही में अमेरिका ने भारत के साथ ट्रेड डील की है, जिसके बाद टैरिफ घटकर 18 प्रतिशत पर आ गया है। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया मंच 'ट्रुथ सोशल' पर बीते सोमवार को घोषणा की थी कि भारत और अमेरिका एक व्यापार समझौते पर सहमत हुए हैं।

  • सायबर जालसाजों ने व्यवसायी को लगाई 1.60 लाख की चपत

    सायबर जालसाजों ने व्यवसायी को लगाई 1.60 लाख की चपत

    सायबर जालसाजों ने व्यवसायी को लगाई 1.60 लाख की चपत 

     टेलीग्राम ग्रुप से जोडऩे के बाद दिया ठगी को अंजाम 

    भोपाल
     पिपलानी पुलिस ने एक व्यवसायी की रिपोर्ट पर अज्ञात सायबर जालसाजों के खिलाफ धोखाधड़ी और अमानत में खयानत का मामला दर्ज किया है। आरोपियों ने शेयर बाजार तथा अन्य कंपनियों में निवेश का लालच देकर रुपये जमा करवाए और उसके बाद करीब एक लाख साठ हजार रुपये ठग लिए। जानकारी के अनुसार जगदीश सिंह (50) कर्मवीर नगर पिपलानी में रहते हैं और आक्सीजन सिलेंडर की सप्लाई करने का काम करते हैं। करीब एक महीने पहले उनके वाट्सएप नंबर पर एक लिंक आई।उन्होंने जैसे ही उसे खोला तो एक ग्रुप में जोड़ लिया गया। इस गुप में कई मेंबर थे जो कि ट्रेड में निवेश का काम ऑनलाइन तरीके से कर रहे थे। वह अलग-अलग कंपनियों में पैसा लगाते थे, जिसके बाद उन्हें मुनाफा होता था। मुनाफे की बात वे इस ग्रुप पर शेयर करते थे।

    जगदीश सिंह ने भी जब ट्रेड में निवेश के लिए हामी भर दी तो उन्हें टेलीग्राम ऐप के एक ग्रुप में जोड़ लिया गया। उन्होंने शुरूआत में 2 हजार रुपए का निवेश किया तो उन्हें फायदा हुआ। इसके बाद दो-तीन बार और उन्हें फायदा हुआ। फायदे की यह रकम ग्रुप के एडमिन द्वारा बनाए गए उनके खाते में दिखाई दे रही थी। दो दिन के भीतर ही उन्होंने 1 लाख 59 हजार रुपए का निवेश कर दिया। बाद में जब उन्होंने यह मूल राशि और मुनाफे की राशि लेना चाही तो उनसे कहा गया कि आपको और भी पैसे भरने होंगे तभी आपके पैसे मिलेंगे। जगदीश सिंह को ठगी का अहसास हुआ तथा उन्होंने मामले की शिकायत साइबर सेल को कर दी। वहां से पिपलानी थाने में शिकायत आने पर पुलिस ने अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ धोखाधड़ी का प्रकरण दर्ज कर लिया।

  • जबलपुर मंदिर में पेशाब करने पर भड़के हिंदूवादी संगठन, आरोपी गिरफ्तार

    जबलपुर मंदिर में पेशाब करने पर भड़के हिंदूवादी संगठन, आरोपी गिरफ्तार

     जबलपुर
    शहर के गढ़ा थाना अंतर्गत छोटी बजरिया क्षेत्र में सोमवार रात एक धार्मिक स्थल पर की गई आपत्तिजनक हरकत के बाद सांप्रदायिक तनाव की स्थिति निर्मित हो गई।

    1963 से स्थापित एक प्राचीन बरगद के पेड़ के नीचे स्थित पूजनीय स्थल पर एक संप्रदाय विशेष के युवक द्वारा की गई अमर्यादित क्रिया ने स्थानीय लोगों और हिंदूवादी संगठनों को आक्रोशित कर दिया। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है, हालांकि क्षेत्र में एहतियातन पुलिस बल तैनात किया गया है।
    यह है घटनाक्रम

    जानकारी के अनुसार, गढ़ा छोटी बजरिया में एक विशाल बरगद के पेड़ के नीचे दशकों पुराना धार्मिक स्थल है, जहां स्थानीय नागरिक नियमित रूप से श्रद्धापूर्वक पूजन-पाठ करते हैं।

    सोमवार की रात काजी मोहल्ला, गढ़ा निवासी मोहम्मद रिजवान उर्फ रिज्जू वहां पहुंचा और धार्मिक स्थल पर लघुशंका कर दी। इस घृणित कृत्य पर पास ही खड़े स्थानीय निवासी मोहित तिवारी की नजर पड़ गई। मोहित द्वारा आपत्ति जताने और शोर मचाने पर आरोपित रिजवान मौके से भाग निकला।

     

     

    दरअसल, घटना 9 फरवरी की रात करीब 9:30 बजे गढ़ा थाना क्षेत्र अंतर्गत छोटी बजरिया स्थित एक शिव मंदिर की है. यहां मुजावर मोहल्ला के रहने बाले एक मुस्लिम युवक रिजवान ने शिवलिंग पर पेशाब कर दिया था. लोगों ने जब उसे ऐसा करते देखा, तो पीटने लगे. इसकी सूचना हिंदूवादी संगठनों को भी मिली. वो भी वहां पहुंचे. साथ ही पुलिस को भी इसकी सूचना दी गई. इससे पहले की पुलिस वहां पहुंची आरोपी मौके से फरार हो गया.

    पुलिस ने लिया ये एक्शन

    पुलिस के अनुसार, आरोपी की पहचान रिजवान खान उर्फ रिज्जु उर्फ भूरा के रूप में हुई. गढ़ा थाना पुलिस ने उसके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 196B, 298 और 299 के तहत मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया है. थाना प्रभारी प्रसन्न शर्मा ने बताया कि धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने जैसे संवेदनशील मामले में पुलिस सख्त कार्रवाई कर रही है. साथ ही आरोपी के खिलाफ प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की भी तैयारी की जा रही है, ताकि भविष्य में शांति व्यवस्था भंग न हो.

    शिवलिंग का शुद्धिकरण

    घटना के बाद विभिन्न हिंदू संगठनों के कार्यकर्ता मंदिर पहुंचे और विधि-विधान के साथ शिवलिंग का शुद्धिकरण किया. हनुमान चालीसा और शिव स्तोत्र का पाठ किया गया तथा गंगा और नर्मदा जल से जलाभिषेक कर मंदिर परिसर को पुनः पवित्र किया गया. इस दौरान बड़ी संख्या में हिंदूवादी संगठनों के लोग और श्रद्धालु मौजूद रहे. वहीं सुरक्षा में भी भारी पुलिस बल मौके पर तैनात रहा. इसके अलावा पुलिस की पेट्रोलिंग लगातार की जा रही है और अतिरिक्त फोर्स को भी तैनात किया गया है.

    मुस्लिम समुदाय ने की निंदा

    इधर मुस्लिम समुदाय के प्रतिनिधियों ने भी इस घटना की निंदा की है. समुदाय के लोगों ने पुलिस को ज्ञापन सौंपते हुए स्पष्ट किया कि आरोपी का समाज से कोई संबंध नहीं है और उसके कृत्य का वे समर्थन नहीं करते. ज्ञापन में आरोपी को समाज से बहिष्कृत करने की बात कही गई है. साथ ही ये भी मांग की गई कि कानून के तहत उसके खिलाफ कठोर से कठोर कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति इस प्रकार की हरकत करने का साहस न करे.

    मंदिरों में पुलिस गश्त बढ़ाई

    महाशिवरात्रि पर्व को देखते हुए प्रशासन विशेष सतर्कता बरत रहा है. मंदिरों और संवेदनशील क्षेत्रों में पुलिस गश्त बढ़ा दी गई है. वहीं पूरे मामले में जबलपुर पुलिस अधीक्षक संपत उपाध्याय ने आम नागरिकों से शांति बनाए रखने और अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है. उन्होंने चेतावनी दी है कि क्षेत्र में किसी भी प्रकार का तनाव फैलाने या माहौल बिगाड़ने की कोशिश करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. फिलहाल स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है, लेकिन प्रशासन पूरी सतर्कता के साथ हालात पर नजर बनाए हुए है.

    थाने का घेराव कर प्रदर्शन

    सूचना जंगल की आग की तरह फैल गई, जिसके बाद बड़ी संख्या में हिंदूवादी संगठनों के पदाधिकारी, सदस्य और क्षेत्रीय नागरिक गढ़ा थाने पहुँच गए। आक्रोशित भीड़ ने थाने का घेराव कर जमकर नारेबाजी की और आरोपित को तत्काल गिरफ्तारी की मांग को लेकर करीब डेढ़ घंटे तक प्रदर्शन किया।

    प्रदर्शनकारियों का कहना था कि धार्मिक भावनाओं को जानबूझकर ठेस पहुंचाने की ऐसी कोशिशें बर्दाश्त नहीं की जाएंगी। तनाव के बाद पुलिस ने मोहित तिवारी की शिकायत पर आरोपी मोहम्मद रिजवान उर्फ रिज्जू के खिलाफ संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर उसे देर रात ही गिरफ्तार कर लिया।

  • ओम बिरला के साथ अभद्र व्यवहार, 25 कांग्रेस सांसदों ने चेंबर में जबरदस्ती प्रवेश किया

    ओम बिरला के साथ अभद्र व्यवहार, 25 कांग्रेस सांसदों ने चेंबर में जबरदस्ती प्रवेश किया

    नई दिल्ली

    संसद के बजट सत्र में लगातार जारी हंगामे के बीच बुधवार को केंद्रीय मंत्री किरन रिजिजू ने कांग्रेस सांसदों पर बड़ा आरोप लगाया है। संसदीय मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा है कि कम से कम 20-25 कांग्रेस सांसद लोकसभा स्पीकर के चेंबर में घुस गए और उन्हें गालियां दीं। उन्होंने यह आरोप लगाए हैं कि इस दौरान प्रियंका गांधी वाड्रा और केसी वेणुगोपाल समेत कई सीनियर कांग्रेस नेता भी वहां मौजूद थे।

    बुधवार को संसद परिसर में पत्रकारों के सवाल का जवाब देते हुए किरन रिजिजू ने कहा, “स्पीकर साहब बहुत आहत हैं। मैंने उनसे बात की है। स्पीकर साहब के चेंबर में जाकर गाली गलौज किया, बुरा भला कहा। फिर स्पीकर साहब ने जो फैसला सुनाया उसको नहीं माने, और फिर राहुल गांधी कहते हैं कि उन्हें सदन में बोलने के लिए किसी की परमिशन नहीं चाहिए, वो मर्जी से बोलेंगे। ये सब रिकॉर्ड पर है। लेकिन सदन में चेयर की अनुमति के बिना नहीं बोल सकते।”

    केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा, “स्पीकर के चेंबर में 20,25 कांग्रेस के MPs जब घुसे, तो मैं भी वहां गया। उन्होंने जो गाली गलौज किया स्पीकर के साथ, वह मैं आपको बता नहीं सकता। स्पीकर बहुत नरम आदमी हैं। नहीं तो और कठोर कदम उठाया जा सकता था। यह कोई तरीका नहीं होता।” रिजिजू ने कहा, “जब स्पीकर को गाली दी जा रही थी तब वहां प्रियंका गांधी भी मौजूद थीं, वेणुगोपाल भी मौजूद थे, कांग्रेस के सीनियर नेता वहां मौजूद थे और इसे बढ़ावा दे रहे थे।”

    विपक्ष ने पेश किया है अविश्वास प्रस्ताव
    इससे पहले विपक्ष ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पद से हटाने के लिए प्रस्ताव लाने संबंधी नोटिस मंगलवार को लोकसभा महासचिव को सौंपा है। ओम बिरला पर पक्षपातपूर्ण तरीके से सदन संचालित करने, कांग्रेस सदस्यों पर झूठे इल्जाम लगाने और अपने पद का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया गया है। लोकसभा सचिवालय के सूत्रों ने बताया है कि विपक्ष की ओर से नोटिस सौंपे जाने के बाद लोकसभा अध्यक्ष बिरला ने फैसला किया है कि वह मामले का निपटारा होने तक आसन पर नहीं बैठेंगे और उन्होंने लोकसभा महासचिव उत्पल कुमार सिंह को निर्देश दिया कि नोटिस की जांच कर उचित कार्रवाई की जाए। सूत्रों ने यह भी कहा कि नोटिस पर विचार किया जाएगा और नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

    सौ से ज्यादा सांसदों ने किए हस्ताक्षर
    जानकारी के मुताबिक निचले सदन में कांग्रेस के उप नेता गौरव गोगोई, कांग्रेस के मुख्य सचेतक कोडिकुनिल सुरेश और सचेतक मोहम्मद जावेद ने लोकसभा महासचिव उत्पल कुमार सिंह को ओम बिरला को पद से हटाने से संबंधित नोटिस सौंपा। नोटिस पर कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, द्रमुक और कई अन्य विपक्षी दलों के करीब 120 सांसदों से अधिक सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। हालांकि तृणमूल कांग्रेस के सांसदों ने इस नोटिस पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं।

    ओम बिरला पर क्या आरोप?
    यह प्रस्ताव संबंधी नोटिस संविधान के अनुच्छेद 94 (सी) के तहत सौंपा गया है। विपक्ष ने नोटिस में कहा, ''बीते दो फरवरी को लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर बोलते समय अपना भाषण पूरा नहीं करने दिया गया। यह कोई अकेली घटना नहीं है। करीब-करीब हमेशा ही ऐसा होता है कि लोकसभा में विपक्ष के नेता को बोलने नहीं दिया जाता।'' उन्होंने दावा किया कि गत 3 फ़रवरी को, विपक्ष के आठ सांसदों को पूरे बजट सत्र के लिए ''मनमाने ढंग से'' निलंबित कर दिया गया और उन्हें केवल अपने लोकतांत्रिक अधिकारों का इस्तेमाल करने के लिए दंडित किया जा रहा है। विपक्ष ने ओम बिरला द्वारा सदन में पांच फरवरी को दिए गए उस वक्तव्य का भी हवाला दिया जिसमें उन्होंने कहा था कि चार फरवरी को कांग्रेस के कई सदस्य सदन के नेता (प्रधानमंत्री) की सीट के पास पहुंचकर किसी अप्रत्याशित घटना को अंजाम देना चाहते थे, इसलिए उनके अनुरोध पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सदन में नहीं आए।

  • साय कैबिनेट का बड़ा फैसला: होली से पहले किसानों के खातों में एकमुश्त पहुंचेगी अंतर की राशि

    साय कैबिनेट का बड़ा फैसला: होली से पहले किसानों के खातों में एकमुश्त पहुंचेगी अंतर की राशि

    रायपुर

    मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में आज मंत्रालय, महानदी भवन में कैबिनेट की बैठक हुई। इस बैठक में किसानों के हित समेत कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए हैं।

    कैबिनेट की बैठक में लिए गए निर्णय

        मंत्रिपरिषद की बैठक में छत्तीसगढ़ के षष्ठम् विधान सभा के अष्टम् सत्र माह फरवरी-मार्च, 2026 के लिए राज्यपाल के अभिभाषण का अनुमोदन किया गया।
        मंत्रिपरिषद द्वारा बजट अनुमान वर्ष 2026-27 का विधानसभा में उपस्थापन के लिए छत्तीसगढ़ विनियोग विधेयक-2026 के प्रारूप का अनुमोदन किया गया।
        मंत्रिपरिषद ने राज्य में समर्थन मूल्य पर धान बेचने वाले किसानों को 3100 रूपए प्रति क्विंटल के मान से अंतर की राशि होली पर्व से पहले एकमुश्त भुगतान किए जाने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में 25 लाख 24 हजार 339 किसानों से 141.04 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी की गई है। छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा कृषक उन्नति योजना के तहत धान के मूल्य के अंतर की राशि के रूप में लगभग 10 हजार करोड़ रूपए का भुगतान होली त्यौहार से पहले एकमुश्त किया जाएगा।

    यहां यह उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा कृषक उन्नति योजना के तहत राज्य के किसानों से प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान की खरीदी 3100 रूपए प्रति क्विंटल के मान से की जा रही है, जो देश में सर्वाधिक है। बीते दो वर्षाें में कृषक उन्नति योजना के तहत राज्य के किसानों को धान के मूल्य के अंतर के रूप में 25 हजार करोड़ रूपए से अधिक का भुगतान किया जा चुका है। इस साल होली से पूर्व किसानों को 10 हजार करोड़ रूपए का भुगतान होने से यह राशि बढ़कर 35 हजार करोड़ रूपए हो जाएगी।

  • मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का विज़न: ‘स्पोर्ट्स फॉर पीस’ की मिसाल बना बस्तर ओलंपिक

    मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का विज़न: ‘स्पोर्ट्स फॉर पीस’ की मिसाल बना बस्तर ओलंपिक

    रायपुर

    नक्सलवाद, हिंसा और पिछड़ेपन की पहचान बन चुका था छत्तीसगढ़ का बस्तर अंचल, आज वहां खेल, विश्वास और उम्मीद के नए अध्याय लिखे जा रहे हैं। यह परिवर्तन राज्य के साय सरकार की एक सुदृढ़ राजनीतिक इच्छाशक्ति, संवेदनशील प्रशासन और दूरदर्शी नेतृत्व का परिणाम है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में आयोजित ‘बस्तर ओलंपिक’ इस ऐतिहासिक बदलाव का सबसे सशक्त प्रतीक बनकर उभरा है। यह आयोजन केवल एक खेल प्रतियोगिता नहीं बल्कि बस्तर के सामाजिक पुनर्जागरण, सांस्कृतिक गौरव और अंचल में शांति स्थापना का व्यापक अभियान है।

    ऐतिहासिक सहभागिता आया नजर जब पूरा बस्तर मैदान में उतर गया
    बस्तर ओलंपिक 2025 के प्रति जनता में अभूतपूर्व उत्साह दिखाई दिया।बस्तर संभाग के सातों जिलों बस्तर, दंतेवाड़ा, सुकमा, बीजापुर, नारायणपुर, कोंडागांव और कांकेर से 3,91,289 खिलाड़ियों ने पंजीयन कराया जिसमें पुरुष खिलाड़ी 1,63,668 और महिला खिलाड़ी 2,27,621 रहे। यह एक आंकड़ा नही बल्कि एक सामाजिक क्रांति का संकेत है। वो बस्तर जहाँ कभी भय और अविश्वास का माहौल था वहीं आज महिलाओं की ऐतिहासिक भागीदारी यह दर्शाती है कि बस्तर की बेटियों ने भी राज्य सरकार के प्रति भरोसा जताया है और अब आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रही हैं।

    मुख्यमंत्री साय ने क्रीड़ा को बनाया सामाजिक परिवर्तन का माध्यम
    मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का यह स्पष्ट मानना है कि “नक्सलवाद का स्थायी समाधान सिर्फ़ सुरक्षा बलों से नहीं बल्कि आम बस्तरिया को अवसर, विश्वास और सकारात्मक मंच देने से होगा।” इसी सोच के साथ राज्य के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बस्तर ओलंपिक को गृह (पुलिस) विभागखेल एवं युवा कल्याण विभाग के संयुक्त प्रयास से आकार दिया और यह आयोजन छत्तीसगढ़ के रजत जयंती वर्ष में बस्तर की नई पहचान बन गया है।

    खेलों की विविधता : परंपरा और आधुनिकता का संगम
    बस्तर ओलंपिक 2025 में शामिल खेलों की सूची यह दर्शाती है कि यह आयोजन समावेशी और संतुलित दृष्टिकोण पर आधारित है, खेलों की लिस्ट में शामिल थे एथलेटिक्स, तीरंदाजी, फुटबॉल, हॉकी, कबड्डी, खो-खो, बैडमिंटन, वॉलीबॉल,कराते और वेटलिफ्टिंग लेकिन इन खेलों के साथ ही स्थानीय प्रतिभा को उतना ही सम्मान दिया गया।बस्तर ओलंपिक की सबसे बड़ी विशेषता इसकी मानवीय और संवेदनशील सोच रही। इस आयोजन में विशेष रूप से सम्मिलित हुए आत्मसमर्पित नक्सली (नुवा बाट), माओवादी हिंसा से प्रभावित दिव्यांग खिलाड़ी, जूनियर वर्ग (14–17 वर्ष), सीनियर वर्ग। 300 से अधिक आत्मसमर्पित नक्सलियों और 18 से अधिक दिव्यांग खिलाड़ियों की भागीदारी यह सिद्ध करती है कि छत्तीसगढ़ का बस्तर अब बहिष्कार नहीं, पुनर्वास और पुनर्जन्म की भूमि बन रहा है।

    तीन स्तरीय प्रतियोगिता बनी पारदर्शिता और अवसरों का खजाना
    प्रतियोगिताएँ तीन चरणों में आयोजित की गईं— विकासखंड स्तर – 25 अक्टूबर से, जिला स्तर – 5 नवम्बर से और संभाग स्तर – 24 नवम्बर से। विजेताओं को नगद पुरस्कार,मेडल, ट्रॉफी और शील्ड प्रदान किए गए जिनमे नगद पुरस्कार DBT के माध्यम से राशि सीधे खातों में भेजी गई। संभागीय विजेताओं को “बस्तर यूथ आइकॉन” के रूप में प्रचारित किया गया। “बस्तर यूथ आइकॉन” बस्तर के युवाओं के लिए एक नई पहचान बन गई है।

    ‘स्पोर्ट्स फॉर पीस’ मॉडल बनी देश के लिए मिसाल
    देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी ‘मन की बात’ में कहा कि “बस्तर ओलंपिक केवल खेल आयोजन नहीं बल्कि विकास और खेल का संगम है।”आज बस्तर ओलंपिक पूरे देश में‘खेल के माध्यम से शांति और विश्वास’ के एक सफल मॉडल के रूप में देखा जा रहा है। बस्तर ओलंपिक का शुभंकर वन भैंसा और पहाड़ी मैना बस्तर की आत्मा के प्रतीक बने जिसमे वन भैंसा, सामूहिक शक्ति और साहस और पहाड़ी मैना, संवाद, संस्कृति और जीवंतता का प्रतीक बना। ये शुभंकर बताते हैं कि बस्तर की पहचान उसकी संस्कृति और सामूहिक चेतना ही है।

    केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इसे बताया ‘भविष्य की नींव’
    समापन समारोह में अमित शाह का वक्तव्य बस्तर के भविष्य का रोडमैप साबित हो रहा है उन्होंने स्पष्ट कहा कि 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद का पूर्ण अंत होगा। बस्तर को पर्यटन और उद्योग का केंद्र बनाया जाएगा और कश्मीर से अधिक पर्यटक बस्तर में लाने का लक्ष्य सफ़ल होगा। केंद्रीय गृह मंत्री का यह विश्वास कि बस्तर का कोई बच्चा अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक में गोल्ड लाएगा, पूरे देश के लिए प्रेरणा है।

    बस्तर ओलंपिक में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का भावनात्मक नेतृत्व
    प्रदेश के मुख्यमंत्री साय ने कहा कि “यह आयोजन केवल खेल नहीं अपितु बस्तर की संस्कृति, उत्साह और प्रतिभा का उत्सव है।” उन्होंने माना कि इतनी बड़ी सहभागिता का प्रबंधन चुनौतीपूर्ण था।सातों जिलों की टीम ने ऐतिहासिक कार्य किया उनके शब्दों में संवेदना, आत्मीयता और आत्मविश्वास झलक थी।

    आज बस्तर- सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन और खेल जैसे हर क्षेत्र में आगे बढ़ रहा है।बस्तर ओलंपिक इसी परिवर्तन का एक और जीवंत प्रमाण है।बस्तर की मिट्टी में साहस है, बस्तर के युवाओं में क्षमता है और प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में दिशा भी। बस्तर ओलंपिक केवल एक आयोजन नहीं बल्कि यह उस बस्तर का जय घोष है जो आज हिंसा नहीं, विकास से पहचाना जा रहा है, जो अब डर नहीं, गर्व का विषय बना हुआ है। जो अतीत नहीं, भविष्य की ओर देख रहा है। वह बस्तर जो आज स्थायी तौर पर बदल चुका है।

  • ऑपरेशन मुस्कान के तहत पुलिस को मिली बड़ी सफलताएं

    ऑपरेशन मुस्कान के तहत पुलिस को मिली बड़ी सफलताएं

    ऑपरेशन मुस्कान के तहत पुलिस को मिली बड़ी सफलताएं 

     राजस्थान-उत्तर प्रदेश समेत विभिन्न जिलों से 27 नाबालिग बालक-बालिकाएं सुरक्षित बरामद 

    भोपाल
    मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा महिला एवं बाल सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए संचालित ऑपरेशन मुस्कान के अंतर्गत प्रदेश के विभिन्न जिलों में अपहृत एवं गुमशुदा नाबालिग बालक-बालिकाओं की खोज हेतु निरंतर, समन्वित एवं तकनीकी रूप से सशक्त कार्रवाई की जा रही है।इसी क्रम में पुलिस टीम ने प्रदेश के विभिन्न जिलों से 27 नाबालिग/गुमशुदा बालक-बालिकाओं को सकुशल दस्तयाब कर परिजनों के सुपुर्द किया है। जानकारी के अनुसार शिवपुरी जिले में ऑपरेशन मुस्कान के अंतर्गत कुल 5 नाबालिग बालक-बालिकाओं की दस्तयाबी की गई है। कोतवाली थाना क्षेत्र में अपहृत नाबालिग बालक को मात्र 10 घंटे के भीतर सुरक्षित दस्तयाब कर परिजनों को सुपुर्द किया गया। वहीं थाना तेंदुआ पुलिस ने दो नाबालिक बालिका एवं थाना सुभाषपुरा पुलिस ने एक अपहृत नाबालिग बालिका को जयपुर, राजस्थान से सकुशल दस्तयाब कर आरोपी को गिरफ्तार कर माननीय न्यायालय में पेश किया। इसके अतिरिक्त थाना नरवर पुलिस ने भी अपहृत नाबालिग बालिका को सुरक्षित दस्तयाब कर परिजनों के सुपुर्द किया।इसी प्रकार सीहोर जिले में 4 नाबालिग बालिकाओं की दस्तयाबी की गई है। थाना आष्टा, जावर, रेहटी एवं भैरूंदा पुलिस द्वारा गठित टीमों ने तकनीकी सहायता से नाबालिग बालिकाओं को सुरक्षित दस्तयाब कर परिजनों को सुपुर्द किया, साथ ही अपहरण के मामलों में आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय पेश किया गया।

    तीन साल की बच्ची समेत तीन नाबालिग दस्तयाब सीधी जिले की थाना कोतवाली क्षेत्र में चीता मोबाइल टीम द्वारा 3 वर्षीय मासूम बच्ची को सुरक्षित परिजनों को सौंपा गया, वहीं थाना मझौली पुलिस द्वारा महाराष्ट्र एवं गुजरात से दो नाबालिग बालिकाओं को दस्तयाब कर आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।विदिशा जिले में ऑपरेशन मुस्कान के अंतर्गत कुल 2 नाबालिग बालिकाओं को दस्तयाब किया गया। अशोकनगर जिले में थाना ईसागढ़ पुलिस द्वारा दो अलग अलग कार्रवाई करते हुए दो नाबालिग बालिकाओं को सकुशल दस्तयाब कर परिजनों से मिलाया। बैतूल जिले में ऑपरेशन मुस्कान के अंतर्गत 2 नाबालिग बालिकाओं की दस्तयाबी की गई है। उज्जैन जिले में ऑपरेशन मुस्कान के अंतर्गत थाना भाटपचलाना पुलिस द्वारा राजस्थान के सांवलियाजी से दो बालिकाओं को सकुशल दस्तयाब कर अपहरण में प्रयुक्त वाहन जप्त किया गया तथा 2 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। 

     बारह सौ किलोमीटर दूर मिली नाबालिग

    कटनी जिले में ऑपरेशन मुस्कान के तहत कुल 2 नाबालिग बालिकाओं की दस्तयाबी की गई है। थाना बरही पुलिस द्वारा अलग-अलग क्षेत्रों से दोनों बालिकाओं को सकुशल दस्तयाब किया गया। इसी प्रकार उमरिया जिले के थाना मानपुर पुलिस टीम ने लगभग 1200 किलोमीटर दूर सिलवासा (दादर एवं नगर हवेली) से 15 वर्षीय गुमशुदा बालिका को तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर सकुशल दस्तयाब किया। इसी प्रकार मंदसौर जिले के थाना दलौदा पुलिस ने 150 से अधिक सीसीटीवी कैमरों की जांच कर लगभग 700 किलोमीटर दूर ग्रेटर नोएडा, उत्तरप्रदेश से 16 वर्षीय अपहृत नाबालिग बालिका को आरोपी के कब्जे से सकुशल दस्तयाब कर आरोपी को गिरफ्तार किया है। इधर दतिया, देवास एवं बड़वानी पुलिस ने 1-1 अपहृत नाबालिग बालिका को सुरक्षित बरामद कर परिजनों के सुपुर्द किया है।

  • मैनिट के विद्यार्थियों को सायबर क्राइम से किया जागरूक

    मैनिट के विद्यार्थियों को सायबर क्राइम से किया जागरूक

    मैनिट के विद्यार्थियों को सायबर क्राइम से किया जागरूक 

     शेफर इंटरनेट डे पर कार्यक्रम का आयोजन 

    भोपाल
     शेफर इंटरनेट डे के अवसर पर मैनिट कैम्पस में सायबर क्राइम एवं यातायात जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पुलिस आयुक्त संजय कुमार, विशेष अतिथि के रूप में अतिरिक्त पुलिस आयुक्त मोनिका शुक्ला एवं डायरेक्टर मैनिट केके शुक्ला उपस्थित रहे। इस अवसर पर डीसीपी अपराध अखिल पटेल, एडिशनल डीसीपी शैलेंद्र सिंह चौहान, मैनिट का स्टाफ और छात्र-छात्राएं उपस्थित रहीं।कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पुलिस आयुक्त संजय कुमार ने बढ़ते सायबर अपराध को चिंताजनक एवं पुलिस के लिए आने वाले समय में अत्यधिक चुनौतीपूर्ण बताया। साथ ही विद्यार्थियों को यातायात नियमों का पालन करने तथा अनुशासित होकर जीवन पथ पर आगे बढऩे हेतु सारगर्भित मार्गदर्शन दिया। अतिरिक्त पुलिस आयुक्त मोनिका शुक्ला ने भोपाल शहर की यातायात व्यवस्था, एक्सीडेंट डेथ, ट्रैफिक रूल्स इत्यादि विषयों पर चर्चा करते हुए सभी से ट्रैफिक नियमों का पालन कर अपना जीवन सुरक्षित करने हेतु अपील की। उन्होंने आईटीएमएस, ई- चालान और नई तकनीक के प्रयोग के बारे में जानकारी दी।  कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पुलिस उपायुक्त अखिल पटेल ने विद्यार्थियों द्वारा सायबर क्राइम और ट्रैफिक के बारे पूछे गए सवालों एवं संदेह का जवाब दिया।अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त शैलेन्द्र सिंह चौहान ने सायबर अपराध के प्रकार एवं उनसे बचाव हेतु व्यावहारिक जानकारी दी तथा सायबर क्राइम के बदलते ट्रेंड, गाइड लाइंस, संचार साथी ऐप्प इत्यादि विषयों पर विस्तृत चर्चा की। इस अवसर पर मैनिट संस्थान के डायेक्टर प्रो. डॉ0 केके शुक्ला ने विद्यार्थियों को सजग और सतर्क रहने हेतु तथा उक्त जागरूकता कार्यक्रम का महत्व बताया और अनुशासित बनकर जीवन का लक्ष्य प्राप्त करने हेतु मार्गदर्शन दिया।

  • योगी सरकार की प्राथमिकता में किसान, कृषि योजनाओं के लिए 10,888 करोड़ रुपये

    योगी सरकार की प्राथमिकता में किसान, कृषि योजनाओं के लिए 10,888 करोड़ रुपये

    बॉटलनेक टू ब्रेकथ्रू बजट 2026-27 (कृषि, मत्स्य, उद्यान, दुग्ध विकास, खाद्य-रसद) 

    योगी सरकार की प्राथमिकता में किसान, कृषि योजनाओं के लिए 10,888 करोड़ रुपये

    कृषकों के डीजल पंप सेट को सोलर पम्प में परिवर्तित करने के लिए 637 करोड़ 84 लाख रुपये 

    निजी नलकूपों को निर्बाध बिजली आपूर्ति के लिए 2400 करोड़ 

    उद्यान व खाद्य प्रसंस्करण के लिए 2832 करोड़ की व्यवस्था

    पशुधनः छुट्टा गोवंश के रख-रखाव के लिए 2,000 करोड़

    मत्स्यः अत्याधुनिक मत्स्य थोक बाजार, एकीकृत एक्वा पार्क तथा मत्स्य प्रसंस्करण केंद्र की स्थापना की नई योजना के लिए 100 करोड़ रुपये 

    खाद्य एवं रसद की योजनाओं के लिए 20,124 करोड़ 

    दुग्ध विकासः मथुरा में 30 हजार से बढ़कर एक लाख लीटर प्रतिदिन वाली क्षमता के नवीन डेयरी प्लांट की स्थापना 

    लखनऊ
    योगी सरकार के वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने सदन में 2026-27 का बजट प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि किसानों, युवाओं, महिलाओं और श्रमिकों का सशक्तिकरण, रोजगार के अवसर सृजित करना सरकार की प्राथमिकता है। सरकार ने अपनी बात को सार्थक करते हुए बजट में कृषि योजनाओं पर जोर दिया। इस बजट में कृषि योजनाओं के लिये 10,888 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। बजट में पशुधन, मत्स्य, खाद्य-रसद, उद्यान विभाग के लिए भी बजट में बड़ी धनराशि की व्यवस्था की है। 

    यूपीएग्रीज परियोजना के अन्तर्गत एग्रीएक्सपोर्ट हब की स्थापना के लिये 245 करोड़ रुपये
    सदन में वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि बजट 2026-27 में कृषि योजनाओं के लिये लगभग 10,888 करोड़ रुपये की व्यवस्था प्रस्तावित है, यह वर्ष 2025-2026 के मुकाबले 20 प्रतिशत अधिक है। खन्ना ने बताया कि वर्ष 2026-2027 में 753.55 लाख मीट्रिक टन खाद्यान्न उत्पादन एवं 48.18 लाख मीट्रिक टन तिलहन उत्पादन का लक्ष्य है। एक्वाब्रिज द्वारा प्रस्तावित यूपीएग्रीज परियोजना में एक्वा कल्चर आधारभूत संरचना के तहत विश्वस्तरीय हैचरी तथा विश्वस्तरीय ट्रेनिंग सेंटर की स्थापना की बाह्य सहायतित परियोजना के लिये 155 करोड़ रुपये प्रस्तावित किए गए हैं। यूपीएग्रीज परियोजना के अन्तर्गत एग्रीएक्सपोर्ट हब की स्थापना के लिये 245 करोड़ रुपये तथा किसान उत्पादक संगठनों हेतु रिवाल्विंग फण्ड योजना के लिये 75 करोड़ रूपये की व्यवस्था की गई है। 

    डीजल पंप सेट को सोलर पंप में परिवर्तित करने की योजना के लिए 673 करोड़ 84 लाख 
    वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि कृषकों के डीजल पंप सेट को सोलर पंप में परिवर्तित करने की योजना के लिए 637 करोड़ 84 लाख रुपये की व्यवस्था की गई है। नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फॉर्मिंग योजना सभी जनपदों के 94,300 हेक्टेयर में संचालित है। इस योजना के लिए बजट में 298 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। 

    निजी नलकूपों को निर्बाध बिजली आपूर्ति के लिए 2400 करोड़ प्रस्तावित
    सुरेश खन्ना ने सदन में बताया कि किसानों के निजी नलकूपों को निर्बाध विद्युत आपूर्ति के लिए बजट में 2,400 करोड़ रुपये दिए गए हैं। उत्तर प्रदेश बीज स्वावलंबन नीति 2024 के तहत प्रदेश में सीड पार्क विकास परियोजना के लिए 251 करोड़ रुपये और पं. दीनदयाल उपाध्याय किसान समृद्धि योजना के लिए लगभग 103 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। 

    उद्यान व खाद्य प्रसंस्करण के लिए 2832 करोड़ 
    वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने कहा कि बजट में उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण के लिए 2,832 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। यह वर्ष 2025-2026 के सापेक्ष 7 प्रतिशत से अधिक है। राष्ट्रीय औद्यानिक मिशन योजना के लिए 715 करोड़ तथा प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना के लिए 478 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। उत्तर प्रदेश खाद्य प्रसंस्करण उद्योग नीति-2022 के क्रियान्वयन के लिए 300 करोड़ रुपये तो मुख्यमंत्री राज्य औद्यानिक विकास योजना के लिए 25 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। 

    दुग्ध विकासः मथुरा में 30 हजार से बढ़कर अब एक लाख लीटर प्रतिदिन वाली क्षमता के नवीन डेयरी प्लांट की स्थापना 
    दुग्ध विकास के अंतर्गत वित्त मंत्री ने बताया कि सहकारी क्षेत्र के तहत प्रदेश में 19 दुग्ध संघों के माध्यम से दुग्धशाला विकास कार्यक्रम चलाया जा रहा है। मथुरा में पहले 30 हजार लीटर क्षमता की नवीन डेयरी परियोजना प्रस्तावित की गयी थी, लेकिन इसे संशोधित करते हुये 1 लाख लीटर प्रतिदिन क्षमता के नवीन डेयरी प्लांट की स्थापना का प्रस्ताव है। सरकार ने इसके लिए बजट में 23 करोड़ रुपये की व्यवस्था की है। दुग्ध संघों के सुदृढ़ीकरण एवं पुनर्जीवित करने की योजना के तहत प्रस्तावित दुग्ध संघों में 220 नई दुग्ध समितियों के गठन तथा 450 दुग्ध समितियों के पुनर्गठन का कार्य प्रस्तावित है। इसके लिए 107 करोड़ रुपये की व्यवस्था हुई है। 

    पशुधनः छुट्टा गोवंश के रखरखाव के लिए 2,000 करोड़
    खन्ना ने बताया कि प्रदेश के 7,497 गो-आश्रय स्थलों में 12,38,547 गोवंश संरक्षित है। इसके अतिरिक्त 155 वृहद गो- संरक्षण केंद्र निर्माणाधीन हैं। मुख्यमंत्री सहभागिता योजना तथा पोषण मिशन के तहत 1,13,631 पशुपालकों को 1,81,418 गोवंश सुपुर्द किये गये हैं। इन्हें भरण पोषण के लिए 50 रुपये की दर से डीबीटी के माध्यम से सीधे भुगतान किया जा रहा है। छुट्टा गोवंश के रखरखाव के लिए 2,000 करोड़ तथा वृहद गो-संरक्षण केंद्रों की स्थापना के लिए बजट में 100 करोड़ रुपये प्रस्तावित हैं। पशु रोग नियंत्रण योजना के लिए 253 करोड़ तथा पशु चिकित्सालयों/पशु संघ केंद्रों के सुदृढ़ीकरण के लिए 155 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। प्रदेश में पहली बार मोबाइल वेटरेनरी यूनिट की स्थापना भारत सरकार की अम्ब्रेला स्कीम पशुधन स्वास्थ्य एवं रोग नियंत्रण योजना के अंतर्गत सम्मिलित की गयी है।

    मत्स्यः अत्याधुनिक मत्स्य थोक बाजार, एकीकृत एक्वा पार्क तथा मत्स्य प्रसंस्करण केंद्र की स्थापना की नई योजना के लिए 100 करोड़ रुपये 
    सुरेश खन्ना ने बताया कि प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत पुरुष व महिला घटक के लिए क्रमशः 195 करोड़ तथा 115 करोड़ की व्यवस्था की गई है। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत एकीकृत एक्वा पार्क की स्थापना के लिए बजट में 190 करोड़ रुपये दिए गए हैं। राज्य सरकार द्वारा अत्याधुनिक मत्स्य थोक बाजार, एकीकृत एक्वा पार्क तथा मत्स्य प्रसंस्करण केंद्र की स्थापना की नई योजना के लिए 100 करोड़ रुपये की व्यवस्था प्रस्तावित है।

    खाद्य एवं रसदः योजनाओं के लिए 20,124 करोड़ 
    खाद्य एवं रसद की योजनाओं के लिये बजट में लगभग 20,124 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। अन्नपूर्ति योजना के लिए 15,480 करोड़, निःशुल्क एलपीजी सिलिंडर रीफिलिंग योजना के लिए 1,500 करोड़ तथा अन्नपूर्णा भवन के निर्माण के लिये 500 करोड़ रुपये की व्यवस्था इस बजट में प्रस्तावित की गई है।

  • राष्ट्रगान से पहले गूंजेगा वंदे मातरम्: सरकार ने जारी किए नए नियम, खड़े होना अनिवार्य

    राष्ट्रगान से पहले गूंजेगा वंदे मातरम्: सरकार ने जारी किए नए नियम, खड़े होना अनिवार्य

    नई दिल्ली

    केंद्रीय गृह मंत्रालय ने ‘वंदे मातरम्’ को लेकर नया प्रोटोकॉल जारी किया है. इसके तहत राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ के छह अंतरों वाला 3 मिनट 10 सेकंड का पूरा संस्करण कई आधिकारिक अवसरों पर बजाया या गाया जाना अब अनिवार्य कर दिया गया है. हिन्दुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, मंत्रालय का यह 10 पन्नों का आदेश 28 जनवरी को जारी किया गया है, जो सभी राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों, मंत्रालयों और संवैधानिक संस्थाओं को भेजा जा चुका है.

    गृह मंत्रालय के आदेश के अनुसार, तिरंगा फहराए जाने के समय, राष्ट्रपति के किसी कार्यक्रम में आगमन और प्रस्थान पर, राष्ट्र के नाम उनके संबोधन से ठीक पहले और बाद में, तथा राज्यपाल या उपराज्यपाल के आगमन-प्रस्थान और भाषणों से पहले-बाद में ‘वंदे मातरम्’ बजाया या गाया जाएगा. अगर किसी कार्यक्रम में ‘वंदे मातरम्’ और राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ दोनों प्रस्तुत किए जाते हैं, तो पहले ‘वंदे मातरम्’ और उसके बाद ‘जन गण मन’ होगा. इस दौरान उपस्थित लोगों को सावधान मुद्रा में खड़े रहना होगा.
    वंदे मातरम् के समय खड़ा होना अनिवार्य

    रिपोर्ट के मुताबिक, मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि जब ‘वंदे मातरम्’ का आधिकारिक संस्करण बजाया या गाया जाए, तो श्रोताओं को सम्मान में खड़ा होना चाहिए. हालांकि, अगर किसी समाचार फिल्म या डॉक्यूमेंट्री में यह गीत फिल्म का हिस्सा हो, तो दर्शकों से खड़े होने की अपेक्षा नहीं की जाएगी, ताकि कार्यक्रम में अव्यवस्था न हो.

    दरअसल अब तक ‘वंदे मातरम्’ को लेकर कोई स्पष्ट आधिकारिक प्रोटोकॉल नहीं था, जबकि राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के लिए समय, धुन और प्रस्तुति के नियम पहले से तय हैं. यह पहली बार है जब छह अंतरों वाले विस्तारित संस्करण को आधिकारिक कार्यक्रमों में शामिल करने के निर्देश दिए गए हैं.

    क्या हैं नियम

    वंदे मातरम को कई आधिकारिक कार्यक्रमों में गाया जाना अनिवार्य किया गया है। इनमें ध्वजारोहण के दौरान, कार्यक्रमों में राष्ट्रपति के आने से पहले और जाने के बाद, राज्यपालों के आने से पहले और जाने के बाद शामिल है। पद्म पुरस्कार जैसे समारोहों के दौरान भी वंदे मातरम गाया जाना जरूरी है। इसके अलावा सरकार ने कार्यक्रमों की सूची भी जारी की है।
    अंग्रेजों ने की रोक लगाने की कोशिशें

    PIB के अनुसार, गाने और नारेदोनों के तौर परवंदे मातरम के बढ़ते प्रभाव से घबराकर ब्रिटिश सरकार ने इसके प्रसार को रोकने के लिए कड़े कदम उठाए। नए बने पूर्वी बंगाल प्रांत की सरकार ने स्कूलों और कॉलेजों में वंदे मातरम गाने या बोलने पर रोक लगाने वाले परिपत्र जारी किए। शैक्षणिक संस्‍थानों को मान्यता रद्द करने की चेतावनी दी गई, और राजनीतिक आंदोलन में हिस्सा लेने वाले छात्रों को सरकारी नौकरी से निकालने की धमकी दी गई थी।

    नवंबर 1905 में, बंगाल के रंगपुर के एक स्कूल के 200 छात्रों में से हर एक पर 5-5 रुपये का जुर्माना लगाया गया, क्योंकि वे वंदे मातरम गाने के दोषी थे। रंगपुर में, बंटवारे का विरोध करने वाले जाने-माने नेताओं को स्पेशल कांस्टेबल के तौर पर काम करने और वंदे मातरम गाने से रोकने का निर्देश दिया गया। नवंबर 1906 में, धुलिया (महाराष्ट्र) में हुई एक विशाल सभा में वंदे मातरम के नारे लगाए गए। 1908 में, बेलगाम (कर्नाटक) में, जिस दिन लोकमान्य तिलक को बर्मा के मांडले भेजा जा रहा था, वंदे मातरम गाने के खिलाफ एक मौखिक आदेश के बावजूद ऐसा करने के लिए पुलिस ने कई लड़कों को पीटा और कई लोगों को गिरफ्तार किया।

    तीन कैटेगरी में बांटे गए कार्यक्रम

    आदेश में कार्यक्रमों को तीन श्रेणियों में बांटा गया है. पहली श्रेणी में वे अवसर हैं, जहां राष्ट्रीय गीत केवल बजाया जाएगा, जैसे- नागरिक अलंकरण समारोह, राष्ट्रपति का औपचारिक राजकीय समारोहों में आगमन-प्रस्थान, आकाशवाणी और दूरदर्शन पर राष्ट्रपति के राष्ट्र के नाम संबोधन से पहले और बाद में, राज्यपाल या उपराज्यपाल का औपचारिक कार्यक्रमों में आगमन-प्रस्थान, परेड में राष्ट्रीय ध्वज लाए जाने के समय आदि.

    दूसरी श्रेणी में वे कार्यक्रम शामिल हैं, जहां गीत को बजाने के साथ-साथ सामूहिक गायन भी होगा. इसमें राष्ट्रीय ध्वज फहराने के अवसर, सांस्कृतिक और औपचारिक समारोह (परेड को छोड़कर), तथा राष्ट्रपति का किसी सरकारी या सार्वजनिक कार्यक्रम में आगमन और प्रस्थान शामिल है. इसके लिए कोयर, साउंड सिस्टम और आवश्यकता होने पर गीत के बोल वितरित करने की भी सलाह दी गई है.

    तीसरी श्रेणी में वे अवसर हैं, जहां ‘वंदे मातरम्’ गाया जा सकता है, जैसे स्कूलों के कार्यक्रम. आदेश में कहा गया है कि स्कूलों में दिन की शुरुआत सामूहिक रूप से राष्ट्रीय गीत गाकर की जा सकती है और छात्रों में राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति सम्मान बढ़ाने के प्रयास किए जाएं.

    वंदे मातरम् पर नए आदेश की खास बातें

    केंद्र सरकार ने ‘वंदे मातरम्’ को लेकर क्या नया आदेश जारी किया है?
    गृह मंत्रालय ने निर्देश दिया है कि अब ‘वंदे मातरम्’ का छह अंतरों वाला, 3 मिनट 10 सेकंड का आधिकारिक संस्करण कई सरकारी और औपचारिक कार्यक्रमों में बजाया या गाया जाएगा.

    किन-किन मौकों पर ‘वंदे मातरम्’ बजाना या गाना अनिवार्य होगा?
    राष्ट्रपति के आगमन-प्रस्थान, तिरंगा फहराने, राष्ट्रपति के राष्ट्र के नाम संबोधन से पहले-बाद, राज्यपाल/उपराज्यपाल के कार्यक्रमों और नागरिक अलंकरण समारोहों जैसे अवसरों पर.

    अगर ‘वंदे मातरम्’ और ‘जन गण मन’ दोनों बजें तो क्रम क्या होगा?
    पहले ‘वंदे मातरम्’ और उसके बाद राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ बजाया जाएगा.

    क्या सभी लोगों के लिए खड़ा होना जरूरी होगा?
    हां, जब आधिकारिक रूप से गीत बजाया या गाया जाए तो सभी को सावधान मुद्रा में खड़ा होना होगा.

    क्या हर स्थिति में खड़ा होना अनिवार्य है?
    नहीं, अगर किसी डॉक्यूमेंट्री या न्यूज़रील में ‘वंदे मातरम्’ फिल्म का हिस्सा हो, तो खड़े होने की जरूरत नहीं होगी.

    स्कूलों के लिए क्या निर्देश हैं?
    स्कूलों में दिन की शुरुआत सामूहिक रूप से ‘वंदे मातरम्’ गाकर की जा सकती है.
    वंदे मातरम् पर सरकार का जोर

    यह कदम ऐसे समय उठाया गया है, जब केंद्र सरकार ‘वंदे मातरम्’ को लोकप्रिय बनाने पर जोर दे रही है. हाल ही में संसद में राष्ट्रीय गीत की 150वीं जयंती पर लंबी बहस हुई थी और इस वर्ष गणतंत्र दिवस परेड का विषय भी ‘स्वतंत्रता का मंत्र – वंदे मातरम्’ रखा गया था.

    बंगाली साहित्यकार बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा 1870 के दशक में रचित इस गीत के पहले दो अंतरों को 1950 में भारत का राष्ट्रीय गीत घोषित किया गया था. पिछले वर्ष संसद में वंदे मातरम् पर हुई चर्चा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि गीत के मूल स्वरूप से छेड़छाड़ ने इसके महत्व को कमजोर किया और इसे देश के विभाजन से भी जोड़ा.

    नए आदेश के साथ ‘वंदे मातरम्’ के सम्मान और प्रस्तुति को लेकर एक स्पष्ट और औपचारिक व्यवस्था तय हो गई है, जिसे देशभर में लागू किया जाएगा.