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  • उत्तर प्रदेश बन रहा इंफ्रास्ट्रक्चर और कनेक्टिविटी का हब: मुख्यमंत्री

    उत्तर प्रदेश बन रहा इंफ्रास्ट्रक्चर और कनेक्टिविटी का हब: मुख्यमंत्री

    उत्तर प्रदेश बन रहा इंफ्रास्ट्रक्चर और कनेक्टिविटी का हब: मुख्यमंत्री 

    विधानसभा में सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहाः एक्सप्रेसवे, एयरपोर्ट, मेट्रो और वाटरवे में अग्रणी राज्य है उत्तर प्रदेश 

    देश का सबसे बड़ा रेल नेटवर्क, पांचवां इंटरनेशनल एयरपोर्ट और छह मेट्रो सिटीज के साथ यूपी आर्थिक विकास की राह पर तेजी से अग्रसर

    लखनऊ
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश देश के इंफ्रास्ट्रक्चर और कनेक्टिविटी के क्षेत्र में अग्रणी बनता जा रहा है। मुख्यमंत्री ने बताया कि उत्तर प्रदेश देश के कुल एक्सप्रेसवे का 55 प्रतिशत हिस्सा रखने वाला प्रदेश बन चुका है। राज्य में देश का सबसे बड़ा रेल नेटवर्क है और एयर कनेक्टिविटी के लिए भी यूपी अग्रणी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि देश की पहली रैपिड रेल और पहली इनलैंड वाटरवे यूपी में ही स्थापित की गई है। इसके अलावा देश का पहला रोपवे, जो शहरों को जोड़ रहा है, वह भी उत्तर प्रदेश के पास है। सबसे अधिक सिटीज में मेट्रो संचालन में यूपी है। बजट भाषण में चार मेट्रो का उल्लेख हुआ था, लेकिन वर्तमान में छह सिटी मेट्रो पूरी तरह चालू हैं और सातवां-मेरठ, प्रधानमंत्री के लोकार्पण के बाद जुड़ जाएगा।

    फ्रेट कॉरिडोर और मल्टीमॉडल टर्मिनल
    मुख्यमंत्री ने कहा कि ईस्टर्न और वेस्टर्न रोपवे चलाया जा रहा है। ईस्टर्न और वेस्टर्न फ्रेट कॉरिडोर का जंक्शन भी उत्तर प्रदेश में विकसित हो रहा है, जो लॉजिस्टिक का बड़ा केंद्र बनेगा। इनलैंड वाटरवे में मल्टीमॉडल टर्मिनल स्थापित किए जा रहे हैं, जिससे किसानों की सब्जियां और खाद्यान्न वैश्विक बाजार तक पहुंच सकें। जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट उत्तर प्रदेश का पांचवां और भारत का सबसे बड़ा एयरपोर्ट बनने जा रहा है। यह 12,000 एकड़ भूमि में विकसित हो रहा है। इसमें पांच रनवे होंगे। इसके आसपास एमआरओ, एक्सप्रेसवे के किनारे एविएशन आधारित इंडस्ट्रियल क्लस्टर और डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग गतिविधियां संचालित होंगी।

    प्रदेश में तेजी से बढ़ रही कनेक्टिविटी और आर्थिक अवसर
    मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश में वर्तमान में 16 एयरपोर्ट संचालित हैं और पांच एयरपोर्ट पर निर्माण कार्य प्रगति पर है। राज्य में मेट्रो, एक्सप्रेसवे, रोपवे, रैपिड रेल और इनलैंड वाटरवे जैसे विकासात्मक कार्य तेजी से बढ़ रहे हैं। ये सभी परियोजनाएं न केवल कनेक्टिविटी बढ़ा रही हैं, बल्कि निवेश और रोजगार के अवसर भी उत्पन्न कर रही हैं। उत्तर प्रदेश का यह विकास मॉडल देश के अन्य राज्यों के लिए उदाहरण प्रस्तुत करता है। इंफ्रास्ट्रक्चर और लॉजिस्टिक के क्षेत्र में हो रहे सुधार प्रदेश को राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर आर्थिक विकास का केंद्र बना रहे हैं।

  • डिब्रूगढ़ में प्रधानमंत्री मोदी का ऐतिहासिक आगमन: नेशनल हाईवे पर पहली बार PM विमान की लैंडिंग

    डिब्रूगढ़ में प्रधानमंत्री मोदी का ऐतिहासिक आगमन: नेशनल हाईवे पर पहली बार PM विमान की लैंडिंग

    डिब्रूगढ़
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी असम दौरे के तहत डिब्रूगढ़ पहुंच गए हैं. उनके दौरे की शुरुआत बेहद रणनीतिक रही, जब उनका विमान डिब्रूगढ़ के मोरान बाईपास पर नवनिर्मित इमरजेंसी लैंडिंग सुविधा (ELF) पर उतरा. यह पहली बार है कि पीएम का विमान नेशनल हाइवे पर उतरा.

    पूर्वोत्तर भारत में अपनी तरह की यह पहली सुविधा है, जो युद्ध और प्राकृतिक आपदा जैसी स्थितियों में भारतीय वायुसेना के लिए गेम-चेंजर साबित होगी.

    प्रधानमंत्री ब्रह्मपुत्र नदी पर बने कुमार भास्कर वर्मा सेतु का उद्घाटन करेंगे. ₹3,030 करोड़ की लागत से बना यह 6-लेन पुल पूर्वोत्तर का पहला 'एक्स्ट्राडोज्ड' पुल है. इस आधुनिक पुल की मदद से गुवाहाटी और उत्तर गुवाहाटी के बीच का सफर जो घंटों में तय होता था, अब मात्र 7 मिनट में सिमट जाएगा. इसमें भूकंपरोधी तकनीक और रियल-टाइम हेल्थ मॉनिटरिंग सिस्टम का इस्तेमाल किया गया है.

    प्रधानमंत्री आईआईएम गुवाहाटी (IIM Guwahati) का उद्घाटन करेंगे, जो क्षेत्र में उच्च शिक्षा के मानक बदलेगा. साथ ही, कामरूप जिले में राष्ट्रीय डेटा केंद्र (National Data Center) का शुभारंभ होगा. 8.5 मेगावाट क्षमता वाला यह केंद्र पूर्वोत्तर की सरकारी सेवाओं को डिजिटल रूप से सुरक्षित और सशक्त बनाएगा.

    शहरी परिवहन को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए प्रधानमंत्री 225 इलेक्ट्रिक बसों को हरी झंडी दिखाएंगे. इनमें से 100 बसें अकेले गुवाहाटी के लिए होंगी, जबकि बाकी नागपुर, भावनगर और चंडीगढ़ के लिए रवाना की जाएंगी.

    क्या है इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज (14 फरवरी) असम के डिब्रूगढ़ में देश की पहली हाईवे इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी (ELF) पर भारतीय वायुसेना के C-130J Super Hercules से लैंड किया. यह सुविधा ऊपरी असम में एक हाईवे स्ट्रिप पर बनाई गई है, जो युद्ध या आपातकाल में लड़ाकू विमानों, ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट और हेलीकॉप्टरों के लिए वैकल्पिक लैंडिंग की जगह देगी. यह पूर्वोत्तर भारत की रक्षा और रणनीतिक तैयारी में एक महत्वपूर्ण कदम है. 

    ELF क्या है और डिब्रूगढ़ में क्यों खास?

    इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी एक ऐसा हाईवे स्ट्रिप होता है जहां सामान्य समय में गाड़ियां चलती हैं, लेकिन जरूरत पड़ने पर इसे रनवे में बदलकर विमान उतारे और उड़ाए जा सकते हैं. डिब्रूगढ़ ELF असम के ऊपरी हिस्से में है, जो भारत-चीन सीमा के बहुत करीब है.

    •     भारतीय वायुसेना (IAF) को अगर मुख्य एयरबेस पर हमला हो या क्षतिग्रस्त हो जाएं, तो वैकल्पिक जगह देगी.
    •     विमानों को तैनात करने की सुविधा देगी, जिससे दुश्मन का निशाना लगाना मुश्किल हो जाएगा.
    •     पूर्वी सेक्टर में हवाई ऑपरेशंस की गहराई और जीवित रहने की क्षमता बढ़ाएगी.
    • पहले ही सफल रिहर्सल हो चुकी है
    • इस ELF की सारी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं. हाल ही में पूर्ण पैमाने 'रिहर्सल' की गई…

        राफेल और सुखोई-30 MKI जैसे लड़ाकू विमान.
        C-130J सुपर हरक्यूलिस ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट.
        डोर्नियर सर्विलांस विमान.
        एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर (ALH).

    ये सभी विमान हाईवे स्ट्रिप पर सफलतापूर्वक उतरे और उड़े. 'टच एंड गो' मैन्यूवर्स और कॉम्बैट फॉर्मेशन लैंडिंग भी की गई. हेलीकॉप्टरों से घायलों को निकालने (कैजुअल्टी इवैक्यूएशन) का अभ्यास भी हुआ. यह सुविधा युद्ध के साथ-साथ मानवीय सहायता मिशनों में भी काम आएगी.

    प्रधानमंत्री मोदी खुद IAF के C-130J विमान से इस स्ट्रिप पर उतरे. यह 2021 में उत्तर प्रदेश में बने इसी तरह के स्ट्रिप की तरह होगा, जहां भी उन्होंने विमान से लैंडिंग की थी. यह सेना की क्षमता का प्रदर्शन भी है.

    देशभर में ELF का नेटवर्क

    डिब्रूगढ़ ELF अकेला नहीं है. सड़क परिवहन मंत्रालय और IAF मिलकर देशभर में ऐसे 28 स्थानों की पहचान कर चुके हैं. असम में ही 5 ELF बन रहे हैं. कई पहले से ऑपरेशनल हैं. सभी IAF एडवांस्ड लैंडिंग ग्राउंड्स को आधुनिक बनाया जा चुका है.

    पूर्वोत्तर में अन्य रणनीतिक प्रोजेक्ट्स

    यह सुविधा पूर्वोत्तर की रक्षा को मजबूत करने की बड़ी योजना का हिस्सा है…

    ब्रह्मपुत्र नदी के नीचे प्रस्तावित अंडरवाटर रोड-रेल सुरंग – नदी के उत्तर और दक्षिण तट के बीच तेज आवाजाही. कई स्ट्रैटेजिक टनल और ऑल-वेदर रोड – बरसात या आपदा में भी कनेक्टिविटी बनी रहे. ये प्रोजेक्ट्स सिलीगुड़ी कॉरिडोर (चिकन नेक) पर निर्भरता कम करेंगे. सेना की तेज तैनाती सुनिश्चित करेंगे.

    क्यों जरूरी है यह सब?

    पूर्वोत्तर भारत की संवेदनशील सीमाओं (चीन, म्यांमार, बांग्लादेश) के पास है. यहां का इलाका मुश्किल है – नदियां, पहाड़, बाढ़. ये प्रोजेक्ट्स… प्राकृतिक आपदाओं और दुश्मन हमले दोनों से बचाव देंगे. सेना को तेज रिस्पॉन्स और बेहतर लॉजिस्टिक्स देंगे. रक्षा के साथ-साथ आम लोगों के लिए भी कनेक्टिविटी और विकास लाएंगे.

    डिब्रूगढ़ ELF पूर्वोत्तर की रक्षा रीढ़ को मजबूत करने वाला मील का पत्थर है. यह भारत की रणनीतिक सोच को दर्शाता है – भूगोल की चुनौतियों को ताकत में बदलना. आने वाले समय में ऐसे प्रोजेक्ट्स पूर्वोत्तर को और सुरक्षित और विकसित बनाएंगे.

  • गिरगिट भी पश्चाताप करेगा कि ये समाजवादी मुझसे भी आगे निकल गएः मुख्यमंत्री

    गिरगिट भी पश्चाताप करेगा कि ये समाजवादी मुझसे भी आगे निकल गएः मुख्यमंत्री

    गिरगिट भी पश्चाताप करेगा कि ये समाजवादी मुझसे भी आगे निकल गएः मुख्यमंत्री

    मुख्यमंत्री ने अपनी सरकार के कार्यों को गिनाया तो समाजवादी पार्टी को आईना भी दिखाया

    तुष्टिकरण के नाम पर आक्रांताओं का महिमामंडन समाजवादी आंदोलन का मुख्य धंधा बन गया हैः योगी 

    लखनऊ
     मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सपा सदस्यों से कहा कि मैंने राजू पाल और उमेश पाल की हत्या का मुद्दा इसलिए उठाया, क्योंकि आप लोगों ने माफिया को गले लगाया था। उन माफिया ने हमें आंखें दिखाने का प्रयास किया, तो दुष्परिणाम भी भुगता। हर गरीब को जीने का अधिकार, बिना भेदभाव के उनका हक मिलना चाहिए। जातीय वैमनस्यता समाज, देश हित में नहीं है। देश गुलाम भी जातीय वैमनस्यता के कारण हुआ। तुष्टिकरण के नाम पर आक्रांताओं को महिमामंडन करना समाजवादी आंदोलन का मुख्य धंधा बन गया है। यह कब रंग बदल दें, कोई भरोसा नहीं। सीएम ने तंज कसा कि गिरगिट भी आज पश्चाताप करेगा कि ये समाजवादी मुझसे भी आगे निकल गए हैं।

    संपत्ति और संतति का प्रतीक बन गया है समाजवादी
    सीएम ने कहा कि समाजवाद के आदर्श जेपी-लोहिया ने देश में बराबरी और सामाजिक न्याय की वकालत की थी, लेकिन आज संपत्ति और संतति समाजवादी के प्रतीक बन गए हैं। जो समाजवाद त्याग, संघर्ष, नैतिक आदर्शों का आह्वान करता था, आज वह इन लोगों के लिए वंशवाद, सुविधावाद और निजी साम्राज्य खड़ा करने की सीढ़ी बन गई है। लोहिया और जेपी की परंपरा ने कभी शोषण के विरुद्ध संघर्ष का उद्घोष किया था, लेकिन आज वही समाजवाद जातीय वैमनस्यता पैदा करने का माध्यम बन गया है। प्रयास होना चाहिए कि किसी वर्ग विशेष या जाति विशेष को जातीय संबोधन करने से बचें। 

    सीएम का कटाक्ष- समाजवादी पार्टी और विकास
    सीएम ने समाजवादी पार्टी पर कटाक्ष करते हुए कहा कि यह लोग विकास के बारे में क्या बात करेंगे। सीएम योगी ने समाजवादी पार्टी के गोमती रिवर फ्रंट, जेपीएनआईसी व पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के भ्रष्टाचार को भी गिनाया। बोले कि सरकार आने के बाद बैठक में हमने 110 मीटर चौड़े एक्सप्रेसवे को 120 मीटर चौड़ा करने का प्रस्ताव रखा। सीएम ने यह भी कहा कि प्रस्तावित सेमी बुलेट ट्रेन हम वहीं से चलाएंगे। देश के अंदर जो नए कॉरिडोर बनने जा रहे हैं, उनके लिए हमारी तैयारी उस दृष्टि से चल रही है। वाराणसी से इसे जोड़ने के लिए लैंड राज्य उपलब्ध कराएगा। 

    चार बार में सपा उतना नहीं कर पाई, जितना खेल मंत्री गिरीश यादव ने आधे समय में कर दिया 
    सीएम ने कहा कि प्रदेश में डबल इंजन सरकार शहर से गांव तक खेल इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास कर रही है। हमारे खेल मंत्री गिरीश चंद्र यादव ही हैं। समाजवादी पार्टी चार बार में जितना नहीं कर पाई, उन्होंने आधे समय में इतना कर दिया कि पूरी सपा उसमें डूब जाएगी। सरकार ने तय किया है कि 2030 के कॉमनवेल्थ और 2036 में भारत के ओलंपिक की दावेदारी को ध्यान में रखकर हर मंडल मुख्यालय पर एक स्पोट्रस कॉलेज होगा। हर कॉलेज के पास किसी एक खेल में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस होगा। 

    खेल के लिए पर्याप्त बजट, पैसे की कमी नहीं  
    सीएम ने कहा कि वाराणसी- गाजीपुर के नौजवान हॉकी में श्रेष्ठ प्रदर्शन कर रहे हैं। ललित उपाध्याय और राजकुमार पाल इसकी देन है। बीच में विपक्षी सदस्य ने टोका कि गाजीपुर का स्टेडियम सपा ने दिया है तो सीएम ने इस पर कहा कि पैसा गिरीश यादव (हमारी सरकार) ने दिया है। हमने प्राइवेट एकेडमी को भी धनराशि देनी प्रारंभ की है। पश्चिम यूपी में प्राइवेट एकेडमी अच्छा काम कर रही है। वहां से अच्छे खिलाड़ी निकलकर ओलंपिक में मेडल जीते हैं। ओलंपिक, कॉमनवेल्थ व एशियाड में मेडल जीतने वाले यूपी के खिलाड़ियों को सरकारी नौकरी में प्राथमिकता के साथ डिप्टी एसपी, तहसीलदार व अन्य महत्वपूर्ण पदों पर तैनाती दी गई। खेल के लिए पर्याप्त बजट है। 

    इलेक्ट्रिक व्हीकल में भी यूपी ने दमदारी से उपस्थिति दर्ज की
    सीएम ने कहा कि इलेक्ट्रिक व्हीकल में भी यूपी ने दमदारी से उपस्थिति दर्ज की है। देश की पहली इलेक्ट्रिक व्हीकल मैन्युफेक्चरिंग की यूनिट यूपी में प्रारंभ हो चुकी है, यहां बस निर्माण की कार्रवाई चल रही है। राष्ट्रीय बाजार में यूपी की उपस्थिति 19 फीसदी है। तिपहिया ईवी में 40 प्रतिशत भागीदारी यूपी की है। एक्सप्रेसवे कॉरिडोर पर चार्जिंग स्टेशन व प्रदेश में 700 ईवी बसों का संचालन हो रहा है।

  • कांग्रेस और सपा ने किया किसानों को कर्जदाता बनाने का महापाप: सीएम योगी

    कांग्रेस और सपा ने किया किसानों को कर्जदाता बनाने का महापाप: सीएम योगी

    विधानसभा में सीएम योगी (भाग-9)

    कांग्रेस और सपा ने किया किसानों को कर्जदाता बनाने का महापाप: सीएम योगी

    13 से 36 लाख करोड़ तक पहुँची यूपी की अर्थव्यवस्था, बिना नया टैक्स लगाए विकास की रफ्तार तेज: मुख्यमंत्री

    ओडीओपी से ई-केसीसी तक, यूपी का ग्रामीण उत्थान बना राष्ट्रीय मिसाल: विधानसभा में सीएम योगी

    लखनऊ

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विधानसभा में कहा कि औपनिवेशिक काल ने जिस किसान को उत्पादक से उपभोक्ता बनाया, उसी किसान को बाद की कांग्रेस और सपा सरकारों ने कर्जदाता बना देने का पाप किया। उन्होंने कहा कि जिस कारीगर में उद्यमी बसता था, उसे निराश-हताश कर पलायन के लिए मजबूर कर दिया गया। जो व्यापारी उत्तर से दक्षिण और पूरब से पश्चिम तक देश को जोड़ने वाला सेतु था, उसे भय और अव्यवस्था में धकेल दिया गया। परिणामस्वरूप प्रदेश में हताशा-निराशा, किसानों की दुर्दशा और एमएसएमई की बंदी जैसी स्थिति पैदा हो गई थी। मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले आठ-नौ वर्षों में राज्य ने इस परिदृश्य को पूरी तरह बदल दिया है। स्पष्ट कृषि नीति ने परिस्थितियाँ पलट दी हैं। पहले लागत अधिक और उत्पादन कम था, बिचौलियों का वर्चस्व था। आज लागत कम, उत्पादन अधिक और उपज का पूरा लाभ डीबीटी के माध्यम से सीधे किसान को मिल रहा है। उन्होंने कहा कि विकास की इस यात्रा में उत्तर प्रदेश ने अन्नदाता को फिर से केंद्र में स्थापित किया है और कृषि-अर्थव्यवस्था को दोहरी गति से आगे बढ़ाया है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था अब नई ऊँचाइयों पर पहुँच चुकी है, जहाँ कभी प्रदेश की जीएसडीपी 13 लाख करोड़ रुपये थी, वहीं आज यह 36 लाख करोड़ रुपये के ऐतिहासिक स्तर तक पहुँच गई है। देश की कुल जीडीपी में उत्तर प्रदेश का हिस्सा लगातार बढ़ रहा है। फिस्कल डेफिसिट को 3 प्रतिशत से नीचे लाने में भी प्रदेश ने उल्लेखनीय सफलता अर्जित की है और यह टैक्स चोरी तथा रेवेन्यू लीकेज पर प्रभावी नियंत्रण का प्रमाण है। उन्होंने बताया कि पिछले नौ वर्षों में बिना कोई नया टैक्स लगाए प्रदेश के विकास को गति दी गई है।

    नेता प्रतिपक्ष द्वारा लगाए गए आरोपों का उत्तर देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत किसानों और कारीगरों की सृजनशीलता के बल पर खड़ा हुआ देश है। ग्राम स्वराज की यह परंपरा सदैव हमारी पहचान रही है। औपनिवेशिक काल ने हमारे उत्पादक किसानों को उपभोक्ता बनने पर विवश किया और बाद में पूर्ववर्ती सरकारों ने उन्हें कर्ज में डुबो दिया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि कांग्रेस और समाजवादी पार्टी की सरकारों ने अन्नदाता को कर्जदाता बनाने का पाप किया, जबकि कारीगरों और उद्यमियों को हताशा-निराशा के अंधकार में धकेल दिया। उस समय प्रदेश में पलायन, बेरोज़गारी और एमएसएमई के पतन का माहौल था, निवेशकों की धारणा पूरी तरह नकारात्मक थी।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले आठ-नौ वर्षों में किसानों के हित में किए गए कार्य अभूतपूर्व हैं। स्पष्ट कृषि नीति के परिणामस्वरूप अन्नदाता को कम लागत में अधिक उत्पादन का लाभ मिला है। बिचौलियों को हटाकर डीबीटी के माध्यम से किसानों को उनकी उपज का पूरा मूल्य सीधे उनके बैंक खातों में उपलब्ध कराया जा रहा है। कृषि उत्पादों में गुणवत्ता सुधार पर विशेष बल दिया गया है। इसी का परिणाम है कि आज उत्तर प्रदेश खाद्यान्न उत्पादन में देश में प्रथम है, दुग्ध उत्पादन में अग्रणी है और गन्ना उत्पादन में भी दोगुनी क्षमता पर पहुँच चुका है।

    उन्होंने बताया कि प्रदेश में लगभग 16 लाख निराश्रित गोवंश का संरक्षण किया जा रहा है और उत्तर प्रदेश देश का पहला राज्य है जो प्रति गोवंश 1500 रुपये प्रति माह की सहायता प्रदान कर रहा है। आज देश के कुल गन्ना उत्पादन का 55 प्रतिशत उत्तर प्रदेश से आता है। 2000 से 2017 तक मात्र 2.14 हजार करोड़ रुपये का गन्ना मूल्य भुगतान हुआ था, जबकि पिछले साढ़े आठ वर्षों में 3 लाख 05 हजार करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान सीधे किसानों के खातों में भेजा गया है—यानी आधे समय में 90,000 करोड़ रुपये से अधिक अतिरिक्त राशि किसानों को प्राप्त हुई है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में आज 122 चीनी मिलें संचालित हैं और किसान को 400 रुपये प्रति क्विंटल गन्ना मूल्य का भुगतान किया जा रहा है। एथेनॉल उत्पादन 41 करोड़ लीटर से बढ़कर 182 करोड़ लीटर हो गया है, जिसमें भी उत्तर प्रदेश देश में प्रथम स्थान पर है। आज चीनी मिलें घाटे का क्षेत्र नहीं, बल्कि लाभकारी उद्योग बन चुकी हैं। छाता और बागपत की चीनी मिलों को इंटीग्रेटेड परिसर के रूप में विकसित किया जा रहा है। राज्य में 89 कृषि विज्ञान केंद्र संचालित हैं। एक्सप्रेसवे और लॉजिस्टिक्स के माध्यम से किसानों की उपज को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने का काम प्राथमिकता से किया जा रहा है। कृषि वैल्यू चेन, स्टोरेज, प्रोसेसिंग और वैल्यू एडिशन पर व्यापक कार्य हो रहा है।

    मुख्यमंत्री ने बताया कि ‘हर खेत को पानी’ के संकल्प के तहत नहरों, पाइपलाइन और माइक्रो इरिगेशन के माध्यम से सिंचाई व्यवस्था को मजबूत किया गया है। प्रदेश की 31 बड़ी सिंचाई परियोजनाएँ पूरी की जा चुकी हैं। निजी नलकूपों को मुफ्त बिजली उपलब्ध कराई गई है और डीजलचालित नलकूपों के लिए भी प्रभावी व्यवस्था की गई है। उन्होंने बताया कि महात्मा बुद्ध कृषि विश्वविद्यालय और लखनऊ में चौधरी चरण सिंह सीड पार्क का निर्माण प्रदेश के कृषि विकास को नई दिशा देगा। ई-केसीसी पोर्टल के माध्यम से किसान क्रेडिट कार्ड की प्रक्रिया को सरल बनाकर पाँच मिनट में पूरा किए जाने की सुविधा उपलब्ध कराई गई है।

    एक जिला–एक उत्पाद योजना का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि ओडीओपी ने कारीगरों, शिल्पकारों और किसानों के उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। मार्केटिंग, पैकेजिंग और ब्रांडिंग के माध्यम से एमएसएमई सेक्टर लोकल-टू-ग्लोबल की अवधारणा को साकार कर रहा है, जिसका सीधा लाभ किसानों और ग्रामीण उद्यमियों को मिल रहा है। सिद्धार्थनगर के काला नमक चावल का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि ओडीओपी के कारण आज इसकी राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय मांग अत्यधिक बढ़ी है। प्रदेश के 77 उत्पादों को जीआई टैग प्राप्त हो चुका है, जिससे उनके लिए वैश्विक बाजार में प्रमाणन की आवश्यकता समाप्त हो गई है। उन्होंने बताया कि सरकार ने इस वर्ष एक जिला-एक व्यंजन (ओडीओसी) योजना शुरू की है, जिसके माध्यम से प्रत्येक जिले के विशेष व्यंजन को बढ़ावा दिया जा रहा है और इसे भी व्यापक आर्थिक गतिविधि से जोड़ा जा रहा है।

  • विरासत और विकास के साथ उत्तर प्रदेश का आगे बढ़ना आधुनिक रामराज्य की अनुभूति हैं – मुख्यमंत्री

    विरासत और विकास के साथ उत्तर प्रदेश का आगे बढ़ना आधुनिक रामराज्य की अनुभूति हैं – मुख्यमंत्री

    विरासत और विकास के साथ उत्तर प्रदेश का आगे बढ़ना आधुनिक रामराज्य की अनुभूति हैं – मुख्यमंत्री  

    एसआईआर के मुद्दे पर विपक्ष केवल जनता को गुमराह कर रहा है, प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी है – मुख्यमंत्री  

    उत्तर प्रदेश को वर्ष 2029-30 तक देश की नंबर वन अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है – सीएम योगी आदित्यनाथ

    लखनऊ
    उत्तर प्रदेश विधानसभा में आज राज्यपाल के अभिभाषण पर व्यक्तव्य देते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एसआईआर के मुद्दे पर विपक्ष पर तीखा हमला करते हुए कहा कि विपक्ष केवल जनता को गुमराह करने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने मतदाता सूची के विशेष गहन सत्यापन (एसआईआर) प्रक्रिया को लेकर उठाए जा रहे विरोध पर आपत्ति जताई और कहा कि यह प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी है तथा भारत निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुरूप संचालित हो रही है।

    मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि फॉर्म 7 के माध्यम से यदि किसी नाम पर आपत्ति दर्ज की जाती है तो निर्वाचन आयोग उसका सत्यापन करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष समाज को माता के नाम, शंकराचार्य के नाम और एसआईआर के नाम पर भ्रमित किया जा रहा है, जबकि सरकार का उद्देश्य मतदाता सूची को शुद्ध और विश्वसनीय बनाना है। यदि संबंधित व्यक्ति स्वयं उपस्थित होकर यह प्रमाणित करता है कि वह जीवित है और आपत्ति गलत है, तो वह आपत्ति तत्काल निरस्त कर दी जाती है। मुख्यमंत्री ने प्रश्न उठाया कि विपक्ष पारदर्शी व्यवस्था का समर्थन क्यों नहीं कर रहा है। 

    मुख्यमंत्री ने बताया कि अब तक उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार एब्सेंट, शिफ्टिंग और डेथ (एएसडी) श्रेणी में कुल 2 करोड़ 88 लाख से अधिक नाम ऐसे हैं जो सत्यापन में सामने नहीं आए या जिनके संबंध में आवश्यक जानकारी प्राप्त नहीं हुई। इनमें 46 लाख 23 हजार मृतकों के नाम शामिल हैं। लगभग 1 करोड़ 39 लाख लोग स्थायी रूप से स्थानांतरित हो चुके हैं, लेकिन उनके नाम सूची में बने हुए थे। 25 लाख 47 हजार डुप्लिकेट प्रविष्टियां पाई गई हैं, जबकि लगभग 80 लाख नाम एब्सेंट श्रेणी में हैं। अन्य नाम विभिन्न श्रेणियों में आते हैं।

    उन्होंने सरकार की बेहतर प्रशासनिक व्यवस्था, सुरक्षा और सुविधाओं का उल्लेख करते हुए माघ मेला की सफलता का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि वर्ष 2013 के कुंभ में लगभग 12 करोड़ श्रद्धालु आए थे, जबकि वर्तमान माघ मेला में अब तक 21 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं की उपस्थिति दर्ज की जा चुकी है। उन्होंने इसे बेहतर सरकार के प्रति जनता के विश्वास का प्रमाण कहा।

    मुख्यमंत्री ने राज्यपाल के अभिभाषण का उल्लेख करते हुए कहा कि उसमें सरकार की उपलब्धियों और भावी योजनाओं का स्पष्ट विवरण था। यदि विपक्ष ने उसे ध्यानपूर्वक सुना होता तो ऐसे प्रश्न नहीं उठते। उन्होंने कहा कि आज उत्तर प्रदेश में कानून का राज स्थापित है, अपराधियों में भय है, गरीबों को सम्मान मिल रहा है, किसान सशक्त हो रहे हैं, महिलाओं में सुरक्षा की भावना है और युवाओं को रोजगार के अवसर मिल रहे हैं। गांवों तक बिजली पहुंच चुकी है और प्रदेश में विकास की नई चेतना दिखाई दे रही है।

    मुख्यमंत्री ने इसे आधुनिक रामराज्य की अनुभूति बताते हुए कहा कि प्रदेश में विरासत और विकास साथ-साथ आगे बढ़ रहे हैं। सरकार जन कल्याण, रोजगार सृजन, निवेश विस्तार और सामाजिक सुरक्षा के माध्यम से राज्य को सशक्त, सुरक्षित और समृद्ध बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने घोषणा की कि वर्ष 2029-30 तक उत्तर प्रदेश को देश की नंबर वन अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है और हमारी सरकार उसी दिशा में निरंतर कार्य कर रही है। भाषण के अंत में मुख्यमंत्री ने सदन के सभी सदस्यों, अध्यक्ष और चर्चा में भाग लेने वाले प्रतिनिधियों का आभार व्यक्त किया।

  • शंकराचार्य की परंपरा मर्यादा से चलती है, मनमर्जी से नहीं: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

    शंकराचार्य की परंपरा मर्यादा से चलती है, मनमर्जी से नहीं: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

    शंकराचार्य की परंपरा मर्यादा से चलती है, मनमर्जी से नहीं: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 

    सीएम ने कहा, कानून सबके लिए समान, मुख्यमंत्री का पद भी कानून से ऊपर नहीं

    सरकार कानून के शासन में विश्वास करती है, मर्यादा व व्यवस्था बनाए रखना उसकी जिम्मेदारीः मुख्यमंत्री 

    नैतिकता की बात करने वालों को पहले परंपरा व व्यवस्था का सम्मान करना चाहिएः सीएम योगी 

    लखनऊ
     विधानसभा में चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शंकराचार्य विवाद पर पूरी मजबूती से सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने सनातन परंपरा की मर्यादाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि शंकराचार्य का पद भारत की सनातन परंपरा में सर्वोच्च और अत्यंत पवित्र माना जाता है। यह कोई सामान्य उपाधि नहीं है, जिसे कोई भी व्यक्ति स्वयं ग्रहण कर ले। सपा शासनकाल में हुई वाराणसी की पुरानी घटना का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने प्रश्न उठाया कि यदि संबंधित व्यक्ति वास्तव में शंकराचार्य थे, तो उन पर लाठीचार्ज और एफआईआर क्यों हुई?  नैतिकता की बात करने वालों को पहले परंपरा और व्यवस्था का सम्मान करना चाहिए। माघ मेला में मौनी अमावस्या के अवसर पर साढ़े चार करोड़ श्रद्धालुओं के आगमन का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे अवसरों पर कड़ी व्यवस्था लागू करनी होती है। प्रवेश और निकास मार्ग निर्धारित होते हैं और उनका पालन सभी के लिए अनिवार्य है। नियमों की अनदेखी भगदड़ जैसी स्थिति पैदा कर सकती है, जिससे श्रद्धालुओं की जान खतरे में पड़ सकती है।

    मुख्यमंत्री ने दोहराया कि कानून सबके लिए समान है। मुख्यमंत्री का पद भी कानून से ऊपर नहीं है। कोई भी व्यक्ति कानून से ऊपर नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि सरकार कानून के शासन में विश्वास करती है और मर्यादा व व्यवस्था बनाए रखना उसकी जिम्मेदारी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि एक जिम्मेदार और मर्यादित व्यक्ति कभी इस प्रकार का आचरण नहीं कर सकता। हम मर्यादित लोग हैं, कानून के शासन पर विश्वास करते हैं। कानून के शासन का पालन करना भी जानते हैं, पालन करवाना भी जानते हैं। दोनों चीजों को एक साथ लागू करवाना जानते हैं, लेकिन इसके नाम पर गुमराह करना बंद करिए।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि आदि शंकराचार्य ने देश की चारों दिशाओं में चार पीठों की स्थापना की थी, उत्तर में ज्योतिष पीठ, दक्षिण में श्रृंगेरी, पूर्व में जगन्नाथपुरी और पश्चिम में द्वारिकापुरी। इन चारों पीठों की अपनी-अपनी परंपरा, दायित्व और आध्यात्मिक आधार हैं। इन पीठों से चार वेद जुड़े हैं- ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद। प्रत्येक वेद का अपना महावाक्य है- “प्रज्ञानं ब्रह्म”, “अहम् ब्रह्मास्मि”, “तत्त्वमसि” और “अयमात्मा ब्रह्म”। ये महावाक्य भारतीय दर्शन की आत्मा हैं और साधना की उच्चतम अवस्था का बोध कराते हैं। मैं ही ब्रह्म हूं, कोई भी साधक जब अपनी साधना की पराकाष्ठा में पहुंचता है तो उसको इस बात की अनुभूति होती है। यही उपनिषदों का उद्घोष भी है। 

    झूठ को मुद्दा बनाना विपक्ष की प्रवृत्ति
    मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह बार-बार एक ही बात को दोहराकर उसे मुद्दा बनाने का प्रयास करता है। उन्होंने कहा कि जो विषय वास्तविक मुद्दा नहीं था, उसे जानबूझकर विवाद का रूप दिया गया। सदन में तथ्यात्मक चर्चा होनी चाहिए, न कि भ्रम फैलाने का प्रयास।

  • पानी की किल्लत से जूझ रहे नगर वासी

    पानी की किल्लत से जूझ रहे नगर वासी

    पानी की किल्लत से जूझ रहे नगर वासी 

     मंडला
     जनपद पंचायत घुघरी के ग्राम पंचायत नैझर मैं लोग पानी के लिए बहुत ही समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है गर्मी के दिनों में हैंड पंप  में पानी निकलना बंद हो जाता है और लोग कुआं बावली से पानी पीते हैं उसके लिए दो से तीन किलोमीटर पैदल चलकर जाना पड़ता है और पानी लाना पड़ता है गर्मी की चल चलती धूप और ऊपर से दो गुंडी पानी सिर पर रखा जाता हैं कई लोगों को तो चक्कर आ जाते हैं गिर जाते हैं जबकि शासन प्रशासन मैं हमारे प्रिय यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नेझर ग्राम पंचायत को डेढ़ से 2 करोड़ की योजना ग्राम वासियों के लिए पी एच ई द्वारा दी गई हैं इस योजना का क्रियान्वयन हुआ पानी टंकी तो बनाई गई गांव में पाइप लाइन भी बिछा दी गई पाइपलाइन कहीं बिछी कहीं नहीं बिछी सीमेंट का नल घर के सामने खड़ा कर दिया गया है लेकिन 3 वर्षों में किसी के घर पर दो बूंद पानी नहीं आया यह कैसी शासन प्रशासन की योजना है ठेकेदार एवं पी एच ई के अधिकारी मनोज भास्कर के द्वारा इन लोगों का सारा पैसा निकाल दिया गया है ना ही इनके एसडीओ और इंजीनियर कभी देखने नहीं आए ठेकेदार जो कह दिया वह मान लिया गया और पूरा पैसा निकाल दिया गया इसमें अधिकारी कर्मचारी  की लूट है गांव के लोगों का कहना था की हम लोग जनसुनवाई में आवेदन देकर आए हैं  कहीं भी हमारी कोई नहीं सुन रहा है लगता है कि शासन प्रशासन पर बैठे लोग पी एच ई द्वारा किसी ने घूस दी हो है इसलिए कुछ नहीं बोलते चाहे वह पीएचई मंत्री संपत्तिया उइके जी या फिर सांसद श्री फग्गन सिंह कुलस्ते जी सभी को हमने आवेदन निवेदन सब किया है सब शांत रह जाते हैं इन इनकी शांती की खामोशी कुछ बयान करती है यह कहीं ना कहीं पी एच ई अधिकारी के दबाव में जरूर है गांव के लोगों की समस्या को सुनकर हमारे  आंसू निकल आते हैं जब हम उनकी समस्या को देखते हैं यही डेढ़ दो लाख की यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की योजना का नहीं हो रहा है क्रियान्वयन मंडला से प्रीतम कुमार बर्मन की रिपोर्ट

  • परिणाम ही मापदंड, स्वास्थ्य सेवाओं में हुआ व्यापक सुधारः मुख्यमंत्री योगी

    परिणाम ही मापदंड, स्वास्थ्य सेवाओं में हुआ व्यापक सुधारः मुख्यमंत्री योगी

    परिणाम ही मापदंड, स्वास्थ्य सेवाओं में हुआ व्यापक सुधारः मुख्यमंत्री योगी 

    इन्सेफेलाइटिस पर प्रभावी नियंत्रण डबल इंजन सरकार की बड़ी उपलब्धि

    वन डिस्ट्रिक्ट, वन मेडिकल कॉलेज के तहत मेडिकल कॉलेजों की संख्या 36 से बढ़कर 81 हुई

    गोरखपुर और रायबरेली में संचालित हो रहे एम्स, हर जिले में निःशुल्क डायलिसिस सुविधा

    प्रदेश में 5 करोड़ 46 लाख आयुष्मान गोल्डन कार्ड जारी, स्वास्थ्य क्षेत्र में 45 हजार से ज्यादा नियुक्तियां 

    लखनऊ
     मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर स्पष्ट कहा कि सरकार के लिए घोषणाएं नहीं बल्कि परिणाम ही वास्तविक मापदंड हैं। विपक्ष के आरोपों पर उन्होंने कहा कि कोई भी बात कहने से पहले यह देखना चाहिए कि उसका परिणाम क्या है। केवल लंबी-चौड़ी बातें करने से क्या लाभ यदि परिणाम शून्य हो? इसी दृष्टिकोण के साथ उन्होंने प्रदेश में स्वास्थ्य क्षेत्र में हुए बदलावों, इन्सेफेलाइटिस पर नियंत्रण, मेडिकल ढांचे के विस्तार और भविष्य की स्वास्थ्य अर्थव्यवस्था की योजनाओं का विस्तृत उल्लेख किया।

    माफिया की तरह इंसेफेलाइटिस पर भी किया प्रभावी नियंत्रण
    मुख्यमंत्री योगी ने नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय से कहा कि इन्सेफेलाइटिस की बीमारी के कारण आपके जिले के भी बच्चे काल-कवलित होते थे। आपने इस बीमारी का पूरा दौर देखा है। चार बार समाजवादी पार्टी की सरकार बनी, लेकिन उन बच्चों का हाल-चाल लेने कोई नहीं गया। उपचार और सुविधाएं अलग विषय हैं, परंतु संवेदनशीलता भी आवश्यक होती है। आज विश्वासपूर्वक कह सकता हूं कि इन्सेफेलाइटिस से बच्चों को बचाने का जो कार्य हुआ है, उसका श्रेय प्रधानमंत्री जी के गतिशील नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार को जाता है। यह भारतीय जनता पार्टी और एनडीए की डबल इंजन सरकार की उपलब्धि है। हमने इन्सेफेलाइटिस पर वैसे ही प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया है, जैसे प्रदेश में माफियाओं के विरुद्ध कार्रवाई की है। यह सरकार केवल माफिया पर ही नहीं, बल्कि मच्छरों से फैलने वाली घातक बीमारियों पर भी उसी दृढ़ता के साथ नियंत्रण करती है। इन्सेफेलाइटिस इसका एक उदाहरण है।

    बिना भेदभाव सभी को मिल रही चिकित्सा की सुविधा
    मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि “वन डिस्ट्रिक्ट, वन मेडिकल
    कॉलेज” की परिकल्पना हमारी सरकार ने आगे बढ़ाई। प्रदेश में मेडिकल कॉलेजों की संख्या 36 से बढ़कर 81 हो चुकी है। 81वां मेडिकल कॉलेज अमेठी में प्रारंभ हो चुका है। इसके अतिरिक्त कुछ नए मेडिकल कॉलेजों पर कार्य प्रगति पर है। प्रदेश में दो एम्स गोरखपुर और रायबरेली में संचालित हो रहे हैं। कई मेडिकल कॉलेजों में सुपर स्पेशियलिटी सुविधाएं विकसित की गई हैं। डायलिसिस की सुविधा अब प्रत्येक जिले में निःशुल्क उपलब्ध है। आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत उत्तर प्रदेश में पांच करोड़ 46 लाख गोल्डन कार्ड जारी किए गए हैं। उन्होंने कहा कि विधायक निधि के संदर्भ में भी हमने लचीलापन दिखाने का प्रयास किया है, ताकि गंभीर बीमारियों से पीड़ित जरूरतमंदों को सहायता मिल सके। यदि कोई विधायक सिफारिश करते हैं तो बिना किसी भेदभाव के धनराशि उपलब्ध कराई जाती है। न किसी की जाति देखी जाती है, न मत, न मजहब। हर जरूरतमंद के साथ सरकार खड़ी है। आईसीयू की व्यवस्था के संबंध में एक समय कुछ निजी अस्पतालों के विरुद्ध शिकायतें आई थीं। उस पर जांच कराई गई और संबंधित अस्पतालों को योजना से बाहर किया गया। किंतु जो मामले लंबित थे, उन्हें पुनः धनराशि उपलब्ध कराई गई। किसी भी प्रकार की सीमा निर्धारित नहीं की गई है। हर जरूरतमंद को सहायता दी जा रही है।

    42 हजार पैरामेडिक्स की हुई भर्ती
    मुख्यमंत्री ने कहा कि निजी अस्पतालों की मनमानी पर नियंत्रण आवश्यक है। यदि सरकार सीजीएचएस दरों के अनुसार भुगतान कर रही है, तो अस्पतालों को भी सहयोग करना चाहिए। शेष भुगतान सरकार उपलब्ध कराएगी। यह धन किसी व्यक्ति विशेष का नहीं, बल्कि प्रदेश की जनता का है और उसका उपयोग जनता के हित में होना चाहिए। मुख्यमंत्री ने पैरामेडिकल स्टाफ का जिक्र करते हुए कहा कि अब तक 41,868 पैरामेडिक्स की भर्ती की जा चुकी है, जिन्होंने विभिन्न संस्थानों में कार्यभार ग्रहण किया है। चिकित्सा शिक्षा क्षेत्र में 4,110 से अधिक भर्तियां हुई हैं। कुल मिलाकर 45,978 नियुक्तियां स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा क्षेत्र में की गई हैं। सरकार की ओर से किसी प्रकार की कोताही नहीं बरती गई है। उन्होंने कहा कि अब प्रदेश में आईसीयू, मिनी आईसीयू, डिजिटल एक्स-रे, ब्लड बैंक, डायलिसिस यूनिट और ऑक्सीजन प्लांट जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में प्रत्येक रविवार को मुख्यमंत्री आरोग्य मेले का आयोजन किया जा रहा है। 108 और 102 एंबुलेंस सेवाओं के माध्यम से आपात चिकित्सा सेवाएं और अधिक सुलभ बनाई गई हैं।

    भविष्य की दिशा में बढ़ रहीं फार्मा गतिविधियां 
    मुख्यमंत्री ने कहा कि भविष्य की दिशा में सरकार एआई, जीनोमिक्स, टेलीमेडिसिन, मेडटेक और हेल्थटेक पर विशेष ध्यान दे रही है। बजट में भी इन क्षेत्रों के लिए प्रावधान किए गए हैं। सेंटर ऑफ एक्सीलेंस विकसित करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। उत्तर प्रदेश केवल स्वास्थ्य सेवाओं का बड़ा बाजार ही नहीं बनेगा बल्कि फार्मा प्रोडक्शन और फार्मा मैन्युफैक्चरिंग का भी प्रमुख केंद्र बनेगा। ललितपुर में फार्मा पार्क की स्थापना की प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी है। हाल ही में लखनऊ में आयोजित फार्मा कॉन्क्लेव में देश-विदेश के शीर्ष फार्मा उद्यमियों ने भाग लिया। इसके अतिरिक्त गौतम बुद्ध नगर में मेडिकल डिवाइस पार्क का कार्य तीव्र गति से प्रगति पर है, जिससे मेडिकल उपकरण सस्ती और गुणवत्तापूर्ण दरों पर उपलब्ध हो सकें। इन सभी प्रयासों के माध्यम से उत्तर प्रदेश स्वास्थ्य क्षेत्र में व्यापक परिवर्तन की दिशा में अग्रसर है, और सरकार इस दिशा में निरंतर गति से कार्य कर रही है।

  • अभिभाषण के दौरान हंगामा राज्यपाल ही नहीं, मां का भी अपमानः योगी

    अभिभाषण के दौरान हंगामा राज्यपाल ही नहीं, मां का भी अपमानः योगी

    अभिभाषण के दौरान हंगामा राज्यपाल ही नहीं, मां का भी अपमानः योगी

    बजट सत्र में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नेता प्रतिपक्ष के आचरण को बताया सनातन के विपरीत

    लखनऊ
     राज्यपाल माननीय आनंदीबेन पटेल के अभिभाषण के दौरान शुक्रवार को हुए हंगामे पर विपक्षी नेताओं को आड़े हाथ लेते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि मुख्य विपक्षी दल के आचरण से न केवल प्रदेश की संवैधानिक प्रमुख, बल्कि मातृ शक्ति का भी अपमान हुआ। उन्होंने सदन में नेता प्रतिपक्ष के आचरण को सनातन की परंपरा के विपरीत बताया।
    राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा में सीएम योगी ने स्पष्ट कहा कि माननीय राज्यपाल यहां पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार आई थीं। उनका यह कार्यक्रम अचानक नहीं थोपा गया था, दलीय बैठकों में इसकी चर्चा हुई थी। मुख्यमंत्री ने नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय से कहा कि आप श्रेष्ठ कुल में पैदा हुए, ब्राह्मण हैं, वयोवृद्ध हैं और सदन में वरिष्ठतम सदस्यों में से एक हैं, इसीलिए आपकी बात का बुरा नहीं माना जाता, लेकिन यह आचरण उचित नहीं है। आप अपने वक्तव्य में सनातन की बात कर रहे थे, लेकिन इसके अनुरूप कार्य नहीं कर रहे हैं।
    मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सनातन धर्म की परंपरा में मां की उम्र या अपनी उम्र से बड़ी महिला को मां के समान सम्मान देने का विधान है। इस बारे में महर्षि वेदव्यास ने हमें हजारों साल पहले बताया है। वह सनातन धर्म के सबसे बड़े व्याख्याकार हैं। उन्होंने वेदों को लिपिबद्ध कर आने वाली पीढ़ी को दिया। उनका कार्यकाल पांच हजार वर्ष पूर्व था, तब भारत में सबसे विकसित सभ्यता थी, तब भारत दुनिया को दिशा दिखा रहा था। महर्षि वेदव्यास जी ने कहा था.. ‘नास्ति मातृसमा छाया, नास्ति मातृसमा गतिः। नास्ति मातृसमं त्राणं, नास्ति मातृसमा प्रिया।' यानी मां के समान कोई छाया नहीं है, मां के समान कोई सहारा नहीं है, मां  के समान कोई रक्षक नहीं और मां के समान कोई प्रिय नहीं है।

  • पाकिस्तान मुकाबले से पहले खुशखबरी: अभिषेक पूरी तरह फिट, वरुण का बड़ा अपडेट

    पाकिस्तान मुकाबले से पहले खुशखबरी: अभिषेक पूरी तरह फिट, वरुण का बड़ा अपडेट

    नई दिल्ली
    भारतीय स्पिनर वरुण चक्रवर्ती ने कहा है कि पेट के संक्रमण से उबर रहे आक्रामक सलामी बल्लेबाज अभिषेक शर्मा रविवार को पाकिस्तान के खिलाफ होने वाले टी20 विश्व कप के महत्वपूर्ण मुकाबले में खेलने के लिए पूरी तरह फिट दिख रहे हैं।

    अभिषेक अस्वस्थ होने के कारण गुरुवार को नामीबिया के खिलाफ मैच में नहीं खेल पाए थे। पेट के संक्रमण के कारण उन्हें दो दिन अस्पताल में भर्ती रहना पड़ा था।

    चक्रवर्ती ने कहा कि यह सलामी बल्लेबाज बेहतर महसूस कर रहा है और उन्हें लगता है कि अगला मैच खेल सकता है। चक्रवर्ती ने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि वह अगला मैच खेलेगा। मुझे उसकी स्थिति के बारे में पूरी तरह नहीं पता। लेकिन मैंने उससे बात की है, वह अच्छी स्थिति में लग रहा है। उसने आज कुछ अभ्यास भी किया। उसने बताया कि वह वापसी की प्रक्रिया में है।’’

    भारतीय कप्तान सूर्यकुमार यादव ने टॉस के समय कहा था कि अभिषेक पूरी तरह फिट होने से पहले एक या दो मैच से बाहर रह सकते हैं। अभिषेक की अनुपस्थिति में संजू सैमसन ने ईशान किशन के साथ पारी की शुरुआत की थी।