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  • जनदर्शन में मिली त्वरित राहत: लगनी बाई को मिला राशन कार्ड

    जनदर्शन में मिली त्वरित राहत: लगनी बाई को मिला राशन कार्ड

    रायपुर.

    शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने और जन समस्याओं के त्वरित निराकरण के लिए जिला प्रशासन द्वारा आयोजित साप्ताहिक जनदर्शन में  कोंडागांव जिले  के केशकाल विकासखंड के ग्राम गौरगांव निवासी मती लगनी बाई को त्वरित राहत मिली। जिला कार्यालय के सभाकक्ष में आयोजित समय-सीमा बैठक के उपरांत कलेक्टर नूपुर राशि पन्ना ने जनदर्शन में जिले के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे नागरिकों की समस्याएं सुनीं। इस दौरान लगनी बाई ने राशन कार्ड बनवाने हेतु आवेदन प्रस्तुत किया। कलेक्टर ने उनके आवेदन पर खाद्य विभाग के अधिकारियों को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। खाद्य विभाग द्वारा उसी दिन आवश्यक प्रक्रिया पूर्ण कर लगनी बाई को राशन कार्ड बनाकर प्रदान किया गया।

    राशन कार्ड प्राप्त होने से लगनी बाई और उनका परिवार अब नियमित रूप से शासकीय योजनाओं के अंतर्गत मिलने वाले राशन सामग्री के साथ साथ अन्य योजनाओं का भी लाभ उठा सकेंगे। उन्होंने इस त्वरित सहायता के लिए शासन प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद दिया। इस अवसर पर जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी  अविनाश भोई, खाद्य अधिकारी  नवीनचंद वास्तव सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

  • एसडीएम की कथित पिटाई से आदिवासी ग्रामीण की मौत, कांग्रेस व ग्रामीणों का उग्र प्रदर्शन

    एसडीएम की कथित पिटाई से आदिवासी ग्रामीण की मौत, कांग्रेस व ग्रामीणों का उग्र प्रदर्शन

    बलरामपुर

    बलरामपुर जिले के कुसमी में एसडीएम द्वारा की गई मारपीट से आदिवासी किसान की मौत के मामले को लेकर दूसरे दिन भी माहौल गरमाया रहा। कुसमी बस स्टैंड में ग्रामीणों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने धरना देते हुए मृतक परिवार को मुआवजा और एक सदस्य को नौकरी देने की मांग की। इस दौरान शासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी भी की गई।

    इस धरना प्रदर्शन में पूर्व मंत्री अमरजीत भगत सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे। कांग्रेस नेताओं ने मृतक के परिजनों को एक करोड़ रुपये मुआवजा और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग की है।

    यह है पूरा मामला
    जानकारी के अनुसार, बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के कुसमी ब्लॉक स्थित हंसपुर गांव में बॉक्साइट के अवैध खनन की जांच के लिए कुसमी एसडीएम करुण डहरिया पहुंचे थे। आरोप है कि वे निजी वाहन से कुछ निजी लोगों को साथ लेकर आए थे। सरना के पास उन्होंने तीन ग्रामीणों को रोककर अवैध खनन का आरोप लगाया और रॉड, डंडे तथा लात-घूंसों से बेरहमी से पिटाई की। बताया जा रहा है कि ग्रामीणों को बेहोश होने तक पीटा गया। मारपीट में घायल ग्रामीणों को कुसमी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान 62 वर्षीय रामनरेश राम की मौत हो गई। वहीं गंभीर रूप से घायल 60 वर्षीय अजीत उरांव और 20 वर्षीय आकाश अगरिया का इलाज जारी है।

    यह घटना रविवार-सोमवार की दरमियानी रात करीब 2 बजे की बताई जा रही है। प्रत्यक्षदर्शियों का दावा है कि बिना किसी पूछताछ या जांच के एसडीएम और उनके साथ गए प्राइवेट लोगों ने ग्रामीणों पर आरोप लगा लाठी डंडों से हमला कर दिया। वहीं सूत्र यह भी बताते हैं कि मारपीट में ग्रामीणों के घायल होने के बाद एसडीएम ने सामरी के नायब तहसीलदार पारस शर्मा को भी फोन कर बुलवाया ताकि यह दिखाया जा सके की पूरा राजस्व अमला अवैध खनन की जांच के लिए गया हुआ था।

    खेत में पानी की सिंचाई करने के लिए गए थे ग्रामीण
    मामले में घायल ग्रामीण आकाश अगरिया एवं अजीत उरांव ने बताया कि वे गेहूं के खेत में पानी की सिंचाई करने गए हुए थे। लौटने के दौरान बिना किसी पूछताछ या जांच अवैध खनन का आरोप लगा उनकी पिटाई की गई। मामला सामने आने के बाद एसडीएम और उनके तीनों साथियों को पुलिस ने हिरास्त में ले लिया था और पूछताछ कर रही थी।

    पहले भी विवादों में रहे हैं एसडीएम
    एसडीएम करुण डहरिया पूर्व में भी विवादों में रह चुके हैं। जांजगीर जिले के चांपा में पदस्थापना के दौरान उन्होंने एक छात्र को तमाचा मार दिया था जिसके बाद छात्रों ने उनके खिलाफ प्रदर्शन किया था। प्रशिक्षण के दौरान गरियाबंद जनपद सीईओ रहने के दौरान नवंबर 2022 में उन्हें नलकूप खनन का बिल पास करने बीस हजार रुपये रिश्वत लेते एसीबी ने भी गिरफ्तार किया था।

    मामले में अब तक क्या-क्या हुई कार्रवाई
    मामले में घायल दो ग्रामीणों के बयान के आधार पर कुसमी एसडीएम करुण डहरिया सहित उनके साथ गए विक्की सिंह उर्फ अजय प्रताप सिंह, मंजिल कुमार यादव और सुदीप यादव के खिलाफ राजपुर थाने में धारा 103, 115(2) और 3(5) के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। मामले में कार्रवाई करते हुए पुलिस ने एसडीएम समेत चारों आरोपियों को गिरफ्तार किया। जिसके बाद सभी से पूछताछ के बाद उन्हें जेल भेज दिया गया है।

  • दिव्यांगजनों के लिये तहसील स्तर पर शिविर, सामाजिक सुरक्षा पेंशन और अंत्येष्टि सहायता राशि बढ़ाने का प्रस्ताव

    दिव्यांगजनों के लिये तहसील स्तर पर शिविर, सामाजिक सुरक्षा पेंशन और अंत्येष्टि सहायता राशि बढ़ाने का प्रस्ताव

    सामाजिक न्याय, दिव्यांगजन कल्याण विभाग की परामर्शदात्री समिति की बैठक सम्पन्न

    भोपाल
    दिव्यांगजनों के चिन्हांकन के लिये तहसील स्तर पर शिविर आयोजित करने, सामाजिक सुरक्षा पेंशन और अंत्येष्टि सहायता योजना की राशि बढ़ाये जाने का प्रस्ताव सामाजिक न्याय, दिव्यांगजन कल्याण मंत्री श्री नारायण सिंह कुशवाह की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई परामर्शदात्री समिति की बैठक में पारित किया गया। बैठक में समिति सदस्य विधायक सर्वश्री नरेन्द्र सिंह कुशवाह, प्रीतम लोधी और भैरो सिंह बापू उपस्थित रहे।

    मंत्री श्री नारायण सिंह कुशवाह ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा सामाजिक रूप से कमजोर और दिव्यांगजनों के कल्याण के लिये अनेक योजनाओं का संचालन किया जा रहा है। योजनाओं के जमीनी स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन के लिये विधायकगणों को परामर्शदात्री समिति के सदस्य के रूप में शामिल किया जाता है। इनके महत्वपूर्ण सुझाव और अनुभवों के माध्यम से सामाजिक न्याय विभाग जरूरतमंदों को योजनाओं का लाभ प्रभावी ढंग से पहुंचा सकेगा। उन्होंने कहा कि जन-प्रतिनिधियों के माध्यम से मुख्यमंत्री कन्या विवाह/निकाह योजना में भागीदारी के लिये आमजन को प्रेरित किया जाना आसान होता है। उन्होंने समिति सदस्यों से अपने-अपने विधानसभा क्षेत्रों और जिलों में मुख्यमंत्री कन्या विवाह/निकाह योजना के नये प्रावधानों अनुसार आयोजित कराने की अपेक्षा की। नये प्रावधानों के तहत सामूहिक विवाह/निकाह योजना में न्यूनतम 11 और अधिकतम 200 जोड़ों को शामिल कर आयोजन किया जा सकता है। चालू वित्त वर्ष में इस योजना के अंतर्गत 54 हजार से अधिक जोड़ों का विवाह/निकाह करावाएं जा चुके हैं।

    बैठक में सदस्यों ने दिव्यांगजनों के चिन्हांकन के लिये तहसील स्तर पर शिविर आयोजित करने, सामाजिक सुरक्षा पेंशन राशि बढ़ाने तथा अंत्येष्टि सहायता योजना की राशि बढ़ाए जाने का सुझाव दिया। समिति द्वारा उक्त प्रस्ताव राज्य शासन को भेजने का निर्णय लिया गया।

    बैठक में प्रमुख सचिव श्रीमती सोनाली वायंगणकर ने सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन कल्याण विभाग द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं की कार्य-प्रणाली और प्रगति के विषय में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि विभाग द्वारा मुख्यमंत्री कल्याणी विवाह योजना के अंतर्गत 551 हितग्राहियों को 11 करोड़ 2 लाख रुपये, दिव्यांग विवाह प्रोत्साहन योजना में 736 हितग्राहियों को 13 करोड़ 38 लाख रुपये, दिव्यांग व्यक्तियों को सहायक उपकरण वितरण में 17 हजार 503 हितग्राहियों को 8 करोड 75 लाख रुपये के उपकरण प्रदान किये गये हैं। विभिन्न पेंशन योजनाओं के अंतर्गत 53 लाख से अधिक हितग्राहियों को 325 करोड़ रुपये की राशि प्रतिमाह उनके खातों में अंतरित की जा रही है। साथ ही विभाग द्वारा दिव्यांगजनों के कल्याण के लिये अनेक योजनाएँ भी संचालित की जा रही हैं।

     

  • श्रमिकों के बच्चों का शैक्षणिक उत्थान हमारी प्राथमिकता : मंत्री श्री पटेल

    श्रमिकों के बच्चों का शैक्षणिक उत्थान हमारी प्राथमिकता : मंत्री श्री पटेल

    भोपाल 

    मध्यप्रदेश श्रम कल्याण मंडल की 64वीं बैठक में श्रमिकों के बच्चों के शैक्षणिक उत्थान को केंद्र में रखते हुए मेधावी छात्रों को प्रोत्साहन देने और प्रारंभिक स्तर पर कॅरियर काउंसलिंग की व्यवस्था विकसित करने पर प्राथमिकता दी गई। श्रम मंत्री  प्रहलाद पटेल ने कहा कि श्रमिक परिवारों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण मार्गदर्शन और अवसर उपलब्ध कराना मंडल की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने मंडल की योजनाओं के व्यापक प्रचार-प्रसार के साथ उद्योगों में कार्यरत श्रमिकों को इन अवसरों के प्रति जागरूक करने के निर्देश दिए। बैठक में मंडल का आगामी वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट माननीय सदस्यों द्वारा चर्चा उपरांत सर्वसम्मति से पारित किया गया। बैठक में श्रम सचिव  रघुराज राजेन्द्रन, कल्याण आयुक्त  संजय कुमार एवं श्रमिकों एवं नियोजकों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

    मंत्री  पटेल ने कहा कि श्रमिकों और कर्मचारियों का मनोबल बनाए रखना शासन की जिम्मेदारी है। वेतनमान से जुड़े मामलों में देरी कार्यकुशलता को प्रभावित करती है, इसलिए सभी लंबित प्रकरणों की सूची बनाकर त्वरित कार्रवाई की जाए। इसके साथ ही भविष्य निधि (ईपीएफ) से जुड़ी समस्याओं के समाधान और सामाजिक सुरक्षा अंशदान जमा न करने वाले प्रिंसिपल एम्प्लॉयर की जानकारी पोर्टल पर सार्वजनिक करने की प्रक्रिया प्रारंभ करने के निर्देश भी दिए गए। बैठक में दैनिक वेतनभोगियों के नियमितीकरण, श्रमिक कल्याण योजनाओं की प्रगति, खेल एवं कौशल विकास गतिविधियों तथा नवीन श्रम संहिताओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर भी विस्तार से चर्चा हुई।

    बैठक में श्रम सचिव  रघुराज राजेन्द्रन ने बताया कि श्रम कल्याण बोर्ड में संपूर्ण कंप्यूटरीकरण एमपीएसईडीसी के माध्यम से किया जा रहा है। श्रम विभाग द्वारा नवीन श्रम संहिताओं पर संभागीय स्तर की कार्यशालाएं आयोजित की जा रही हैं, जिनमें से एक भोपाल में संपन्न हो चुकी है। इन संहिताओं के आधार पर राज्य में श्रम कानूनों में संशोधन किए जा रहे हैं।

    सिलाई केंद्रों का पुनः संचालन, 17 केंद्र सक्रिय

    बैठक में बताया गया कि चचाई और इंदौर में सिलाई केंद्रों को पुनः प्रारंभ किया जा रहा है। वर्तमान में 27 श्रम कल्याण केंद्रों में से 17 में सिलाई-कढ़ाई केंद्र संचालित हो रहे हैं। कौशल विकास विभाग द्वारा प्रशिक्षणार्थियों का परीक्षण कराया गया है।

    मंडल के अंतर्गत संचालित श्रम कल्याण केंद्रों के माध्यम से स्वास्थ्य परीक्षण, राष्ट्रीय पर्व, विश्वकर्मा जयंती जैसे आयोजन नियमित रूप से किए जा रहे हैं। श्रमिकों के लिए कंप्यूटर केंद्र भी संचालित हैं।

    खेलों को बढ़ावा, समयावधि बढ़ाने का प्रस्ताव

    बैठक में खेल प्रतियोगिताओं की अवधि बढ़ाने का प्रस्ताव रखा गया। बताया गया कि खेलों के माध्यम से श्रमिकों का सर्वांगीण विकास संभव है। साथ ही नियमित कर्मचारियों को समयमान वेतनमान के एरियर भुगतान को शीर्ष प्राथमिकता देने की बात कही गई। भविष्य निधि (ईपीएफ) से जुड़ी समस्याओं के निराकरण पर भी चर्चा हुई।

    अंत में सभी सदस्यों ने श्रमिक एवं कर्मचारी हितों को सर्वोपरि रखते हुए निर्णयों के प्रभावी क्रियान्वयन का संकल्प लिया।

     

  • परंपरागत बीज संरक्षण के लिये बीज सखी का हुआ राज्य स्तरीय प्रशिक्षण

    परंपरागत बीज संरक्षण के लिये बीज सखी का हुआ राज्य स्तरीय प्रशिक्षण

    भोपाल .
    आजीविका मिशन की पहल

    मध्‍यप्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन द्वारा अभिनव पहल करते हुए 27 जिलों की बीज सखियों को परंपरागत बीज संरक्षण एवं बीज बैंक स्थापना के सम्बन्ध में दो दिवसीय राज्‍य स्‍तरीय प्रशिक्षण का आयोजन क्षेत्रीय ग्रामीण विकास संस्थान भोपाल में 9 एवं 10 फरवरी को आयोजित किया गया।

    प्रशिक्षण में पद्म,  बाबूलाल दहिया जिला सतना द्वारा बीज संरक्षण के अनुभव साझा किए गए एवं बीज बैंक स्थापना पर व्याख्यान भी दिया गया। कर्नाटक राज्य की बी.बी. जान जो विगत 9 वर्षों से परंपरागत बीज संरक्षण का कार्य कर रही है, उनके द्वारा भी प्रतिभागियों को बीज संरक्षण के लिये प्रशिक्षण दिया। विगत 16 वर्षों से देशी बीजों का संरक्षण कर रहीं जिला डिंडोरी की सु फुलझरिया बाई द्वारा भी प्रशिक्षण में अपने अनुभव साझा किए एवं बीज संरक्षण के तरीके भी बताए। इसके अलावा कृषि एवं उद्यानिकी विभाग के प्रतिनिधियों ने भी जानकारी दी।

    मुख्‍य कार्यपालन अधिकारी आजीविका मिशन मती हर्षिका सिंह की पहल पर प्रदेश में महिला समूहों की सदस्‍यों को प्राकृतिक खेती को बढावा देने के उद्देश्‍य से परंपरागत बीज संरक्षण के लिये जिलों में बीज बैंक की स्‍थापना के लिये काम शुरू किया गया है। इसके अंतर्गत प्रारंभिक चरण में हितग्राहियों का चयन, प्रशिक्षण आदि किया जाना है। इसी क्रम में क्षेत्रीय ग्रामीण विकास संस्थान भोपाल में प्रशिक्षणों का आयोजन किया जा रहा है।

    प्रशिक्षण में देशी बीजों को महत्‍व देते हुये उनके फायदे के संबंध में प्रतिभागियों को बताया गया। देशी बीज स्थानीय जलवायु और मिट्टी के अनुसार ढले होने के कारण कम पानी, खाद व कीटनाशकों में भी बेहतर पैदावार देते हैं। इनकी अन्‍य विशेषतायें भी हैं जैसे यह अन्‍य की तुलना में अत्यधिक पौष्टिक होते हैं, सूखा-रोग प्रतिरोधी होते हैं जो किसानों को आत्मनिर्भर और खेती को किफायती व टिकाऊ बनाते हैं।

    उद्यानिकी विभाग से  दीनानाथ धोटे द्वारा देशी सब्जी बीज संरक्षण पर तकनीकी प्रशिक्षण प्रदाय किया गया। कृषि विभाग से  जितेंद्र सिंह परिहार द्वारा भी प्राकृतिक खेती एवं परंपरागत बीज संरक्षण के संबंध में प्रशिक्षण दिया गया। आजीविका मिशन के राज्य परियोजना प्रबंधक कृषि,  मनीष सिंह एवं युवा सलाहकार सु पायल कुमारी द्वारा बीज बैंक की कार्ययोजना एवं आगामी 6 माह की कार्ययोजना तैयार करने के संबंध में जानकारी दी गई। आगामी समय में जिला स्तर पर बीज सखी के प्रशिक्षण आयोजित किए जाएंगे और बीज बैंक की स्थापना की जावेगी।

    परंपरागत बीज की विशेषताएँ

    आत्मनिर्भरता: किसान हर साल बीज खरीदकर खर्च करने के बजाय अपनी पिछली फसल से ही बीज सुरक्षित कर सकते हैं, जिससे उत्पादन लागत बहुत कम हो जाती है। जलवायु-प्रतिरोधी – ये स्थानीय पर्यावरण के अनुकूल होते हैं, इसलिए सूखे, अत्यधिक बारिश या कीटों का सामना करने की इनमें बेहतर क्षमता होती है। उच्च पौष्टिकता – देसी फसलों में संकर बीजों की तुलना में प्राकृतिक रूप से अधिक विटामिन, खनिज और पोषक तत्व होते हैं, जो मानव स्वास्थ्य के लिए बहुत अच्छे हैं। पर्यावरण संरक्षण – इन बीजों में कम रासायनिक उर्वरकों की आवश्यकता होती है, जिससे मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है और जल स्रोत भी सुरक्षित रहते हैं। जैव विविधता का संरक्षण: विभिन्न प्रकार की देसी किस्में पारंपरिक ज्ञान को अगली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखती हैं।

     

  • 1800 करोड़ जमीन सौदे में बड़ा मोड़, अजित पवार के बेटे को क्लीन चिट, दो अधिकारियों पर कार्रवाई तय

    1800 करोड़ जमीन सौदे में बड़ा मोड़, अजित पवार के बेटे को क्लीन चिट, दो अधिकारियों पर कार्रवाई तय

    मुंबई
    महाराष्ट्र के पूर्व डिप्टी सीएम अजित पवार के बेटे पार्थ पवार को 1800 करोड़ रुपये के जमीन सौदे के मामले में क्लीन चिट मिल गई है। अजित पवार का बीते महीने ही प्लेन क्रैश में निधन हो गया था। इसके बाद राज्य में हुए नगर परिषद और पंचायत समिति के चुनावों में एनसीपी को बड़ी जीत मिली है। इस बीच अजित पवार के बेटे के लिए भी राहत भरी खबर आई है। इस मामले की जांच के लिए आईएएस अधिकारी विकास शंकर खरागे के नेतृत्व में जांच समिति गठित हुई थी। इस पैनल ने 1000 पन्नों की अपनी जांच रिपोर्ट सौंपी है। इसमें पार्थ पवार को क्लीन चिट दी गई है, जबकि जमीन सौदे की प्रक्रिया में लापरवाही के लिए दो सरकारी अधिकारियों के खिलाफ ऐक्शन की सिफारिश की गई है।

    इस मामले में आरोप था कि पुणे के एक पॉश इलाके में करीब 1800 करोड़ रुपये मूल्य की जमीन महज 300 करोड़ रुपये में खरीदी गई। इस जमीन सौदे में अजित पवार के बेटे का नाम भी आया था। इस केस की जांच करने वाले अधिकारी विकास शंकर खरागे फिलहाल राजस्व विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव हैं। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने इस केस की जांच रिपोर्ट विभाग के मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले को सौंप दी। अब इस रिपोर्ट को सीएम देवेंद्र फडणवीस के समक्ष रखा जाना है। यह मामला कुल 41 एकड़ जमीन का है, जो पुणे के तेजी से विकसित इलाके मुंधवा की है।

    सूत्रों का कहना है कि इस रिपोर्ट में सीधे तौर पर ऐसा कोई प्रमाण नहीं है, जिससे यह साबित हो सके कि पार्थ पवार ने लैंड डील में कोई आपराधिक गलती की थी। इसलिए उन्हें क्लीन चिट दी जाती है। हालांकि इस रिपोर्ट में कुछ प्रक्रिया से जुड़ी खामियां पाई गई हैं। इसके लिए दो सरकारी अधिकारियों सूर्यकांत येवाले और रविंद्र तारू के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की गई है। येवाले फिलहाल हवेली तहसील के तहसीलदार हैं। इसके अलावा रविंद्र असिस्टेंट रजिस्ट्रार के पद पर तैनात हैं। दोनों ही अधिकारियों को इस लैंड डील पर सवाल उठने के बाद सस्पेंड कर दिया गया था और फिलहाल वे न्यायिक हिरासत में हैं।

    1800 करोड़ की डील और 300 करोड़ का सौदा, किसके नाम पर
    इस मामले में विवाद यह था कि जमीन का मूल्य 1800 करोड़ रुपये बताया गया था, जबकि इसकी खरीद सिर्फ 300 करोड़ में हुई। यह डील Amedia Enterprises LLP के नाम से हुई थी। इस फर्म में मुख्य हिस्सेदारी पार्थ पवार की ही है, जबकि उनके साथ चचेरे भाई दिग्विजय भी इसमें हिस्सेदार हैं। यही नहीं आरोप यह भी लगे थे कि इस डील में स्टांप ड्यूटी भी नहीं वसूली गई, जो 21 करोड़ रुपये बनती थी। पार्थ पवार खुद राजनीति में बहुत दखल नहीं रखते हैं, लेकिन उनके पिता डिप्टी सीएम थे। इसके चलते वह भी आरोपों के घेरे में आए थे।

     

  • बिरनपुर हिंसा मामला: कोर्ट से 17 आरोपियों को राहत, सबूतों के अभाव में बरी

    बिरनपुर हिंसा मामला: कोर्ट से 17 आरोपियों को राहत, सबूतों के अभाव में बरी

    बेमेतरा

    छत्तीसगढ़ में आज की सबसे बड़ी खबर बेमेतरा से निकलकर सामने आई. बेमेतरा जिले के बहुचर्चित बिरनपुर हिंसा मामले में जिला न्यायालय ने फैसला सुनाते हुए 17 आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया है.

    जिला न्यायालय ने जिन आरोपियों को दोषमुक्त किया गया है, उनमें चेचानमेटा बिरनपुर थाना निवासी डकेश्वर सिन्हा उर्फ हरिओम पिता गौतम सिन्हा (28 साल), ग्राम खैरी, थाना साजा जिला बेमेतरा निवासी मनीष वर्मा पिता नंदकुमार वर्मा (23 साल), कोरवाय थाना साजा जिला बेमेतरा निवासी समारू नेताम पिता जेठूराम नेताम (43 साल), पदमी थाना व जिला बेमेतरा निवासी पूरन पटेल पिता खेमकुमार पटेल (19 साल), पदमी थाना व जिला बेमेतरा निवासी राजकुमार निषाद पिता संजय निषाद (19 साल), पदमी थाना व जिला बेमेतरा निवासी भोला निषाद पिता श्रवण निषाद (23 साल), पेंण्डरवानी, थाना गण्डई जिला खैरागढ़-छुईखदान-गंडई निवासी दूधनाथ साहू पिता कमल साहू (27 साल), पेण्डरवानी, थाना गण्डई जिला खैरागढ़-छुईखदान-गंडई निवासी अरुण रजक पिता मनहरण रजक (18 साल), कोरवाय, थाना साजा जिला बेमेतरा निवासी चंदन साहू पिता देवकुमार साहू (20 साल), कोरवाय, थाना साजा जिला बेमेतरा निवासी होमेन्द्र नेताम पिता नीलकंठ नेताम (25 साल), कोगियाखुर्द, थाना परपोड़ी, जिला बेमेतरा निवासी टाकेन्द्र साहू पिता परसराम साहू (22 साल), कोगियाखुर्द, थाना परपोडी, जिला बेमेतरा निवासी राम निषाद पिता हिरेश निषाद (19 साल) मासुलगोदी, थाना परपोड़ी, जिला बेमेतरा निवासी संजय कुमार साहू पिता नेमराम साहू (25 साल), निवासी कोरवाय, थाना साजा, जिला बेमेतरा निवासी चिंताराम साहू पिता स्व. बिरझुराम साहू (68 साल), निवासी कोगियाखुर्द, थाना परपोडी, जिला बेमेतरा निवासी लोकेश साहू पिता चतुरराम साहू (23 साल) निवासी कोगियाखुर्द, थाना परपोड़ी, जिला बेमेतरा वरूण साहू पिता रामकुमार साहू (18 साल 3 माह) और मासुलगोदी, थाना परपोडी जिला बेमेतरा निवासी राजेश साहू पिता बल्लु साहू (23 साल) शामिल हैं.

    बिरनपुर मामले में साजा थाना में कुल 173 लोगों के विरूद्ध दर्ज धारा 302, 147, 148, 149, 153 (3) भादवि तथा 201, 109, 34 भादवि के अपराध में अपर सत्र न्यायाधीश साक्षी दिक्षित की न्यायालय में विचारण किया गया है. 64 अभियोजन साक्षियों का कथन के बाद आज संदेह का लाभ देकर न्यायालय से सभी 17 लोगों को छोड़ दिया गया है.

    क्या था बिरनपुर हिंसा मामला?
    बिरनपुर हिंसा मामला शुरू हुआ था दो बच्चों की मामूली लड़ाई से, जो देखते-देखते हिंदू-मुस्लिम समुदायों के बीच हिंसक झड़प में बदल गया. 8 अप्रैल 2023 को साजा विधायक ईश्वर साहू के 22 वर्षीय पुत्र भुनेश्वर साहू की लाठी-डंडों से पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी.

    घटना के बाद तनाव इतना बढ़ा कि 10 अप्रैल को विश्व हिंदू परिषद ने छत्तीसगढ़ बंद का आह्वान किया. गांव में आगजनी हुई और मुस्लिम समुदाय के रहीम (55) व उनके पुत्र ईदुल मोहम्मद (35) की भी हत्या हो गई. प्रशासन ने धारा 144 लागू किया, जो करीब दो सप्ताह तक जारी रहा. पुलिस ने शुरुआत में 12 लोगों को आरोपी बनाया था, लेकिन CBI ने अपनी जांच में 6 नए आरोपियों का उल्लेख किया है.

  • राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के बाद अयोध्या की अर्थव्यवस्था में आया ऐतिहासिक उछाल

    राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के बाद अयोध्या की अर्थव्यवस्था में आया ऐतिहासिक उछाल

    राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के बाद अयोध्या की अर्थव्यवस्था में आया ऐतिहासिक उछाल

    राम मंदिर पर आईआईएम लखनऊ की विस्तृत केस स्टडी ने साबित किया प्राण प्रतिष्ठा के बाद अयोध्या में पर्यटन, निवेश, रोजगार और राजस्व में हुई व्यापक वृद्धि

    अध्ययन में मंदिर निर्माण से पहले और बाद की आर्थिक परिस्थितियों का किया गया तुलनात्मक विश्लेषण, मंदिर निर्माण से पूर्व पवित्र तीर्थस्थान तक सीमित थी अयोध्या की पहचान, प्राण प्रतिष्ठा के बाद आर्थिक गतिविधियों में आया अभूतपूर्व उछाल

    पर्यटन आधारित गतिविधियों से कर राजस्व ₹20,000-25,000 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान, आतिथ्य, निर्माण, परिवहन और सेवा क्षेत्रों में रोजगार के अवसरों में हुआ तीव्र विस्तार

    मंदिर प्राण प्रतिष्ठा से देशभर में हुआ ₹1 लाख करोड़ से अधिक का व्यापारिक कारोबार, महत्वपूर्ण रही अयोध्या की हिस्सेदारी, प्रतिदिन दो लाख से अधिक श्रद्धालुओं के आगमन से आतिथ्य और उससे जुड़े उद्योगों को मिली नई गति, 150 से अधिक नए होटल और होमस्टे हुए स्थापित

    प्रतिष्ठित होटल चेन्स ने अयोध्या में विस्तार योजनाओं को बढ़ाया आगे, ऑनलाइन ट्रैवल प्लेटफॉर्म पर बुकिंग में चार गुना तक दर्ज की गई वृद्धि, स्थानीय हस्तशिल्प, धार्मिक स्मृति-चिह्न और मूर्तियों की मांग में तेज उछाल से कारीगरों और स्थानीय उत्पादकों को प्रत्यक्ष लाभ मिला

    लगभग 6,000 एमएसएमई स्थापित हुए, अगले 4–5 वर्षों में पर्यटन, परिवहन और आतिथ्य क्षेत्रों में लगभग 1.2 लाख प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजन का अनुमान, छोटे दुकानदारों और रेहड़ी-पटरी व्यवसायियों की दैनिक आय ₹2,500 तक पहुंची, रियल एस्टेट क्षेत्र में भी तीव्र वृद्धि

    लखनऊ
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ‘टेंपल इकॉनमी मॉडल’ पर भारतीय प्रबंधन संस्थान लखनऊ (आईआईएम लखनऊ) ने अपनी मुहर लगाई है। आईआईएम लखनऊ की ताजा अध्ययन रिपोर्ट “इकॉनमिक रेनेसांस ऑफ अयोध्या” (अयोध्या का आर्थिक पुनर्जागरण) बताती है कि राम मंदिर निर्माण के बाद अयोध्या में व्यापक आर्थिक सक्रियता, निवेश प्रवाह और रोजगार सृजन देखने को मिला है। अध्ययन में मंदिर निर्माण से पहले और बाद की आर्थिक परिस्थितियों का तुलनात्मक विश्लेषण करते हुए यह दर्शाया गया है कि धार्मिक अवसंरचना, यदि सुविचारित नीति और प्रशासनिक प्रतिबद्धता से जुड़ जाए, तो वह क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को गति देने वाला उत्प्रेरक बन सकती है। गौरतलब है कि 2017 में प्रदेश की कमान संभालने के बाद सीएम योगी ने टेंपल इकॉनमी को तेज गति दी और अयोध्या में मंदिर निर्माण के साथ-साथ आधुनिक इन्फ्रास्ट्रक्चर देकर आर्थिक समृद्धता के रास्ते खोल दिए।
    मंदिर से पहले दायरे में सिमटी अयोध्या की अर्थव्यवस्था
    अध्ययन के अनुसार, मंदिर निर्माण से पूर्व अयोध्या की पहचान मुख्यतः एक पवित्र तीर्थस्थान तक ही सीमित थी, जहां आगंतुकों की वार्षिक संख्या लगभग 1.7 लाख के आसपास ठहर जाती थी। स्थानीय बाजार छोटे पैमाने पर संचालित होते थे और अधिकांश दुकानदारों की औसत दैनिक आय ₹400–₹500 के बीच सीमित थी, जिससे आर्थिक गतिविधि का दायरा संकुचित बना रहता था। राष्ट्रीय स्तर की होटल श्रृंखलाओं की उपस्थिति लगभग नगण्य थी, रेलवे स्टेशन बुनियादी सुविधाओं तक सीमित था और हवाई अड्डे का अभाव क्षेत्र की कनेक्टिविटी को प्रभावित करता था। रोजगार के अवसर सीमित होने के कारण युवाओं का बड़े शहरों की ओर पलायन, एक सामान्य प्रवृत्ति बन चुका था। पर्यटन से होने वाला राजस्व राज्य की व्यापक अर्थव्यवस्था में उल्लेखनीय योगदान नहीं दे पा रहा था और अचल संपत्ति बाजार में भी ठहराव की स्थिति दिखाई देती थी। कुल मिलाकर, अयोध्या की आर्थिक संरचना पारंपरिक तीर्थ-आधारित गतिविधियों तक सीमित थी, जिसमें विस्तार और निवेश की संभावनाएं स्पष्ट रूप से अविकसित थीं।

    प्राण प्रतिष्ठा के बाद आर्थिक गतिविधियों में अभूतपूर्व उछाल
    अध्ययन के अनुसार, जनवरी 2024 में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद अयोध्या की आर्थिक तस्वीर ने तेजी से करवट ली। रिपोर्ट बताती है कि पहले ही छह महीनों में 11 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं का आगमन दर्ज किया गया, जिसने स्थानीय बाजार, परिवहन और आतिथ्य क्षेत्र में नई ऊर्जा का संचार किया। अब अयोध्या में वार्षिक स्तर पर 5–6 करोड़ आगंतुकों की संभावना जताई गई है, जो अयोध्या को देश के प्रमुख धार्मिक-पर्यटन केंद्रों की अग्रिम पंक्ति में ला खड़ा करती है। यहां लगभग ₹85,000 करोड़ की पुनर्विकास परियोजनाएं विभिन्न चरणों में प्रगति पर हैं, जिनका प्रभाव केवल आधारभूत ढांचे तक सीमित नहीं, बल्कि निवेश और सेवा क्षेत्र तक फैला हुआ है। आधारभूत संरचना के क्षेत्र में भी व्यापक निवेश हो रहा है। इसके अंतर्गत अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, आधुनिक रेलवे स्टेशन, विस्तारित सड़क नेटवर्क और नगर सौंदर्यीकरण के कार्य प्रगति पर हैं। सतत शहरी विकास को बढ़ावा देने के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों और सौर ऊर्जा जैसी पहलों को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिससे अयोध्या को “मॉडल सोलर सिटी” के रूप में विकसित करने की दिशा में कदम बढ़ाए जा रहे हैं।

    अंतरराष्ट्रीय आध्यात्मिक केंद्र के रूप में मिली नई पहचान
    आईआईएम की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025 तक उत्तर प्रदेश में पर्यटन व्यय ₹4 लाख करोड़ से अधिक होने का अनुमान है, जिसमें अयोध्या की महत्वपूर्ण भूमिका मानी जा रही है। पर्यटन आधारित गतिविधियों से कर राजस्व ₹20,000-25,000 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है। आतिथ्य, निर्माण, परिवहन और सेवा क्षेत्रों में रोजगार के अवसरों में तीव्र विस्तार हुआ है। साथ ही, अयोध्या ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय आध्यात्मिक केंद्र के रूप में नई पहचान प्राप्त की है, जहां प्रवासी भारतीय, शोधकर्ता और वैश्विक श्रद्धालु आकर्षित हो रहे हैं। 

    आतिथ्य क्षेत्र में निवेश का नया दौर
    अध्ययन बताता है कि कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) के अनुसार मंदिर प्राण प्रतिष्ठा से देशभर में ₹1 लाख करोड़ से अधिक का कारोबार हुआ, जिसमें अयोध्या की हिस्सेदारी महत्वपूर्ण रही। प्रतिदिन दो लाख से अधिक श्रद्धालुओं के आगमन ने आतिथ्य और उससे जुड़े उद्योगों को नई गति दी है। 150 से अधिक नए होटल और होमस्टे स्थापित हुए हैं, जबकि देश-विदेश की प्रतिष्ठित होटल श्रृंखलाएं ताज होटल्स, मैरियट इंटरनेशनल और विंडहैम होटल्स एंड रिसॉर्ट्स ने अयोध्या में अपने विस्तार की योजनाएं घोषित की हैं। ऑनलाइन ट्रैवल प्लेटफॉर्म पर अयोध्या के लिए बुकिंग में चार गुना तक वृद्धि दर्ज की गई है। साथ ही स्थानीय हस्तशिल्प, धार्मिक स्मृति-चिह्न और मूर्तियों की मांग में तेज उछाल आया है, जिससे कारीगरों और स्थानीय उत्पादकों को प्रत्यक्ष लाभ मिला है।

    उद्यमिता और रोजगार पर भी पड़ा प्रभाव
    आईआईएम रिपोर्ट के मुताबिक, आर्थिक सक्रियता का प्रभाव उद्यमिता और रोजगार सृजन में भी स्पष्ट है, विशेषकर युवाओं के बीच। लगभग 6,000 सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSMEs) या तो नए रूप में स्थापित हुए हैं या पुनः अयोध्या लौटे हैं। अनुमान है कि अगले 4–5 वर्षों में पर्यटन वृद्धि के कारण पर्यटन, परिवहन और आतिथ्य क्षेत्रों में लगभग 1.2 लाख प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजन होगा। छोटे दुकानदारों और रेहड़ी-पटरी व्यवसायियों की दैनिक आय ₹2,500 तक पहुंच गई है। रियल एस्टेट क्षेत्र में भी तीव्र वृद्धि दर्ज की गई है, जहां मंदिर के आसपास संपत्ति मूल्यों में पांच से दस गुना तक उछाल देखा गया है, जिससे देशभर के निवेशकों का ध्यान आकर्षित हुआ है। 

    आस्था से अर्थव्यवस्था तक, बदलती विकास अवधारणा
    रिपोर्ट संकेत देती है कि अयोध्या का विकास अब केवल धार्मिक महत्व तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधियों का एक सशक्त केंद्र बनकर उभरा है। अध्ययन में यह रेखांकित किया गया है कि धार्मिक विरासत आधारित विकास मॉडल, यदि सुव्यवस्थित निवेश, प्रशासनिक समन्वय और दीर्घकालिक दृष्टि के साथ लागू किया जाए, तो वह स्थानीय अर्थव्यवस्था में व्यापक और संरचनात्मक परिवर्तन ला सकता है। अयोध्या का अनुभव दर्शाता है कि सांस्कृतिक और धार्मिक परियोजनाएं योजनाबद्ध क्रियान्वयन के माध्यम से पर्यटन, रोजगार और निजी निवेश को गति देकर बहुस्तरीय आर्थिक वृद्धि का आधार बन सकती हैं। अयोध्या में आधारभूत संरचना, पर्यटन सुविधाओं और निवेश माहौल में व्यापक बदलाव देखने को मिला, जिसने इस तीर्थनगरी को विकास की मुख्यधारा में अग्रिम पंक्ति पर ला खड़ा किया है।

  • अजित पवार के निधन के बाद बड़ा फैसला! 75 स्कूलों को अल्पसंख्यक दर्जा, फडणवीस ने लगाई ब्रेक

    अजित पवार के निधन के बाद बड़ा फैसला! 75 स्कूलों को अल्पसंख्यक दर्जा, फडणवीस ने लगाई ब्रेक

    मुंबई

    महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सोमवार को उन 75 विद्यालयों को दिए गए अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थान के दर्जे पर रोक लगाने का आदेश दिया है, जिनके बारे में खबरें थीं कि उपमुख्यमंत्री अजित पवार के निधन के तुरंत बाद इन विद्यालयों को मंजूरी दी गई थी। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। इसके अलावा, उपमुख्यमंत्री और अल्पसंख्यक विकास मंत्री सुनेत्रा पवार ने अधिकारियों को अल्पसंख्यक प्रमाण पत्र जारी करने में कथित अनियमितता की विस्तृत जांच करने और किसी भी प्रकार की गड़बड़ी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई शुरू करने का निर्देश दिया।

    अजित पवार की मौत के 9 मिनट बाद ही जारी हुआ पहला सर्टिफिकेट

    अधिकारियों के अनुसार, 28 जनवरी से दो फरवरी के बीच 75 संस्थानों को अल्पसंख्यक दर्जा दिया गया। बताया जाता है कि पहला प्रमाण पत्र 28 जनवरी को दोपहर तीन बजकर नौ मिनट पर जारी किया गया था, उसी दिन अजित पवार की विमान दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी। उस दिन सात संस्थानों को स्वीकृति मिली और अगले तीन दिनों में यह संख्या बढ़कर 75 हो गई।
    जांच के आदेश

    उस समय अजित पवार अल्पसंख्यक विकास विभाग का कार्यभार संभाल रहे थे। यह विभाग अब सुनेत्रा पवार के अधीन है, जिन्होंने हाल ही में उपमुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली है। सरकार में सूत्रों ने बताया कि मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया है कि इस अवधि के दौरान जारी की गई सभी स्वीकृतियों, अनुदानों और प्रमाणपत्रों को व्यापक समीक्षा लंबित रहने तक रोक दिया जाए। स्वीकृतियां कैसे दी गईं, उचित प्रक्रिया का पालन किया गया या नहीं, और क्या अल्पसंख्यक प्रमाण पत्र जारी करने पर पहले लगाए गए किसी भी प्रतिबंध को औपचारिक रूप से हटाया गया था, यह पता लगाने के लिए उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए गए हैं।

    राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के नेता रोहित पवार ने कहा कि शिक्षण संस्थानों के अल्पसंख्यक दर्जे पर रोक लगाना पर्याप्त नहीं है और उन्होंने इसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। राज्य अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष प्यारे खान ने इस घटना को 'बेहद चिंताजनक' बताया और उच्च स्तरीय जांच और सीआईडी ​​जांच सहित जवाबदेही की मांग की।
    अजित पवार पर लिखे लेख पर बवाल

    एनसीपी (एसपी) और एनसीपी के नेताओं ने दोनों गुटों के विलय की प्रक्रिया के साथ-साथ अजित पवार पर लिखे गये एक लेख को लेकर एक-दूसरे पर शनिवार को निशाना साधा। एनसीपी नेता आनंद परांजपे ने जहां एक ओर लेख के लिए माफी की मांग करते हुए दावा किया कि इसमें पवार की मृत्यु के बाद भी उन्हें बदनाम किया गया है, वहीं राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (SP) की राज्य इकाई के प्रमुख शशिकांत शिंदे ने कहा कि शरद पवार के नेतृत्व वाली पार्टी ने विलय के मुद्दे को बंद कर दिया है। शशिकांत शिंदे ने पार्टी के मुखपत्र 'राष्ट्रवादी' में यह लेख लिखा था।

  • अजित पवार की विरासत संभालेंगी सुनेत्रा पवार, NCP के मर्जर पर उठे सवाल

    अजित पवार की विरासत संभालेंगी सुनेत्रा पवार, NCP के मर्जर पर उठे सवाल

    मुंबई 

    महाराष्ट्र सरकार में डिप्टी सीएम का पद संभालने के बाद से अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार अब फुल एक्शन में नजर आ रही हैं. सोमवार को एनसीपी के तमाम वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक में सुनेत्रा पवार को पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने पर सहमति बन गई है. अब सुनेत्रा पवार सरकार में भूमिका के साथ ही संगठन की कमान भी संभालेंगी. ऐसे में अजित पवार की सियासी विरासत को आगे बढ़ाने के लिए सुनेत्रा पवार पूरी तरह से तैयार हैं. 

    एनसीपी नेताओं की बैठक में सुनेत्रा पवार को NCP की नई राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाए जाने पर सहमति जताई गई है. एनसीपी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष प्रफुल पटेल ने सुनेत्रा पवार के नाम का प्रस्ताव रखा, जिसे सभी विधायकों ने हाथ उठाकर अपना पूर्ण समर्थन दिया.सुनेत्रा पवार को अधिकारिक रूप से राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाए जाने के फैसले पर 26 फरवरी को फाइनल मुहर लगेगी.

    एनसीपी के दोनों गुटों के प्रस्तावित विलय पर विचार-विमर्श की मांग के बीच पार्टी नेताओं के साथ डिप्टीसीएम सुनेत्रा पवार ने मुंबई में सोमवार शाम पार्टी नेताओं के साथ बैठक की. इस दौरान विलय के मुद्दे पर चर्चा तक नहीं हुई. ऐसे में सवाल उठता है कि एनसीपी के मर्जर प्लान पर क्या पूर्ण विराम लग गया है? 

    एनसीपी के विलय पर क्या लग गया ग्रहण
    डिप्टीसीएम बनने के बाद सुनेत्रा पवार ने पहली बार एनसीपी विधायकों और वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक की. सुनेत्रा पवार ने यह कदम कई नेताओं के उन बयानों के बाद उठाया है, जिनमें उन्होंने कहा था कि कोई भी निर्णय लेने से पहले पार्टी नेताओं की राय को ध्यान में रखा जाना चाहिए. इसके साथ ही यह बात भी उठी थी कि सभी विधायकों की एक बैठक बुलाई जानी चाहिए, जिसमें इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा की जाए और विलय पर सामूहिक निर्णय लिया जाए. यह बात एनसीपी नेताओं के द्वारा लगातार उठाई जा रही थी. 

    सुनेत्रा पवार के साथ सोमवार को पार्टी नेताओं की बैठक हुई, जिसमें शरद पवार और अजित पवार गुट के एक साथ आने और एनसीपी के विलय के मुद्दे पर चर्चा भी नहीं हुई. ऐसे में एनसीपी विलय की चर्चा पर फिलहाल फैसला टाल दिया गया है. साथ ही विधायकों को सख़्त हिदायत दी गई है कि विलय के संबंध में बाहर मीडिया में कोई भी बयान न दें. डिप्टी सीएम सुनेत्रा पवार को पार्टी में भी लीड रोल देने की बात पर चर्चा जरूर हुई है. ऐसे में सवाल उठता है कि एनसीपी के मर्जर प्लान पर क्या ग्रहण लग गया है क्या?

    एनसीपी की कमान संभालेंगी सुमेत्रा पवार
    महाराष्ट्र सरकार में डिप्टी सीएम का पद संभालने के बाद अब अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार एनसीपी की कमान संभालेंगी. सोमवार को हुई एनसीपी नेताओं की बैठक में सुनेत्रा पवार को एनसीपी की नई राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाए जाने पर सहमति जताई गई है. बताया गया कि सुनेत्रा पवार के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाए जाने के फैसले पर 26 फरवरी को आधिकारिक मुहर लगेगी.

    पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष प्रफुल पटेल ने उनके नाम का प्रस्ताव रखा, जिसे सभी विधायकों ने हाथ उठाकर अपना पूर्ण समर्थन दिया.एनसीपी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक 26 फरवरी को मुंबई में होने की उम्मीद है, जहां उनकी नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी होगी. महाराष्ट्र की राजनीति में एनसीपी किस रास्ते जा रही.

    अजित पवार की विरासत को आगे बढ़ाएंगी
    सुनेत्रा पवार की मौजूदगी में हुई बैठक में विधायकों ने उन्हें पार्टी संगठन को मजबूत करने और दिवंगत अजित पवार की विरासत को आगे बढ़ाने में अपना समर्थन देने का आश्वासन दिया.एनसीपी के कार्यकारी अध्यक्ष प्रफुल पटेल, राज्य इकाई के प्रमुख सुनील तटकरे और वरिष्ठ पार्टी मंत्री छगन भुजबल ने बैठक को संबोधित किया और एनसीपी के विकास में अजित पवार की भूमिका और राज्य भर में इसके विस्तार की उनकी इच्छा को याद किया.

    डिप्टीसीए सुनेत्रा पवार ने अजित पवार के साथ अपने सियासी जुड़ाव और उन परिस्थितियों के बारे में विस्तार से बताया, जिनके कारण वह विधायक दल की नेता और उपमुख्यमंत्री बनीं. उन्होंने एनसीपी विधायकों से कहा कि मैंने पार्टी को एकजुट रखने और उसकी स्थिति को मजबूत करने के लिए नई जिम्मेदारी स्वीकार करने का फैसला किया है.