Author: Admin

  • खेल प्रतिभा से वर्ल्ड क्लास इंफ्रास्ट्रक्चर तक, ट्रेड शो में दिखेगा नए यूपी का स्पोर्ट्स मॉडल

    खेल प्रतिभा से वर्ल्ड क्लास इंफ्रास्ट्रक्चर तक, ट्रेड शो में दिखेगा नए यूपी का स्पोर्ट्स मॉडल

    खेल प्रतिभा से वर्ल्ड क्लास इंफ्रास्ट्रक्चर तक, ट्रेड शो में दिखेगा नए यूपी का स्पोर्ट्स मॉडल

    इंटरनेशनल ट्रेड शो में पहली बार खेल विभाग का भव्य पवेलियन

    200 वर्ग मीटर के पवेलियन में खेल निदेशालय, युवा कल्याण, स्पोर्ट्स कॉलेज और खेल यूनिवर्सिटी की होगी संयुक्त भागीदारी

    राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों की उपलब्धियां, वीडियो बाइट्स और तस्वीरों के जरिए दिखेगी यूपी की खेल प्रतिभा

    आधुनिक खेल परियोजनाओं के 3डी मॉडल होंगे आकर्षण का केंद्र

    जेन-जी को खेलों से जोड़ने के साथ एआई के इस्तेमाल और खेल प्रतिभाओं के डिजिटल डेटा प्रबंधन की भी दिखाई जाएगी झलक

    लखनऊ, 
    योगी सरकार के कार्यकाल में उत्तर प्रदेश में खेलों और खेल सुविधाओं के तेजी से विस्तार को अब अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी प्रदर्शित किया जाएगा। ग्रेटर नोएडा स्थित इंडिया एक्सपो मार्ट में 25 से 29 सितंबर तक आयोजित होने वाले पांच दिवसीय यूपी इंटरनेशन ट्रेड शो-4.0 में पहली बार प्रदेश का खेल विभाग अपनी व्यापक भागीदारी दर्ज कराने जा रहा है। खेल विभाग की ओर से करीब 200 वर्ग मीटर क्षेत्रफल में विशेष पवेलियन तैयार किया जा रहा है, जिसमें उत्तर प्रदेश के खेल क्षेत्र की उपलब्धियों, खिलाड़ियों की सफलता, आधुनिक खेल सुविधाओं और भविष्य की योजनाओं को एक साथ प्रदर्शित किया जाएगा।

    इस पवेलियन में उत्तर प्रदेश सरकार के खेल विभाग के चार प्रमुख अंग संयुक्त रूप से प्रतिभाग करेंगे। इसमें खेल निदेशालय, प्रादेशिक विकास दल एवं युवा कल्याण विभाग, स्पोर्ट्स कॉलेज और मेरठ में विकसित हो रही खेल यूनिवर्सिटी शामिल हैं। शासन स्तर पर इस आयोजन के नोडल अधिकारी विशेष सचिव कुमार विनीत होंगे, जबकि खेल विभाग की ओर से भी इसकी तैयारियों के लिए नोडल अधिकारी की जिम्मेदारी तय की गई है।

    उपलब्धियों से लेकर खिलाड़ियों तक की होगी झलक

    ट्रेड शो में खेल विभाग की उपलब्धियों को आकर्षक तरीके से प्रदर्शित किया जाएगा। पवेलियन में प्रदेश से निकले राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों की उपलब्धियों की प्रदर्शनी लगाई जाएगी। खिलाड़ियों के वीडियो बाइट्स, उनकी तस्वीरों और उपलब्धियों से जुड़ी सामग्री के माध्यम से आगंतुकों को उत्तर प्रदेश की खेल प्रतिभाओं से परिचित कराया जाएगा। इसके लिए टीवी पैनल और डिजिटल डिस्प्ले का भी इस्तेमाल होगा।

    योगी सरकार के दौर में तैयार किए जा रहे वर्ल्ड क्लास स्पोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर को भी विशेष रूप से प्रदर्शित किया जाएगा। अयोध्या, गोरखपुर, वाराणसी और कानपुर सहित प्रदेश में विकसित हो रही प्रमुख खेल सुविधाओं के साथ मेरठ में बन रही खेल यूनिवर्सिटी को भी पवेलियन में जगह मिलेगी। इन परियोजनाओं के 3डी मॉडल तैयार कर प्रदर्शित किए जाएंगे। साथ ही प्रदेश के खेल इंफ्रास्ट्रक्चर पर तैयार की जा रही डॉक्यूमेंट्री भी ट्रेड शो के दौरान दिखाई जाएगी।

    युवा कल्याण विभाग की उपलब्धियां भी होंगी प्रदर्शित

    पवेलियन में युवा कल्याण विभाग की गतिविधियों और उपलब्धियों को भी प्रमुखता दी जाएगी। युवक मंगल दल और महिला मंगल दल से जुड़ी गतिविधियों और उपलब्धियों की प्रदर्शनी लगाई जाएगी। मुख्यमंत्री के हाथों सम्मानित किए गए प्रमाणपत्रों, पुरस्कारों और मेडल्स को भी गैलरी के माध्यम से प्रदर्शित किया जाएगा। 

    गेमिंग जोन बनेगा आकर्षण का केंद्र

    पवेलियन को केवल प्रदर्शनी तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि इसे पूरी तरह इंटरएक्टिव बनाने की तैयारी है। इसके लिए एक विशेष गेमिंग जोन बनाया जा रहा है, जिसमें फुटबॉल, हॉकी और टेबल टेनिस समेत चार खेलों से जुड़े गेम शामिल किए जाएंगे। ट्रेड शो में आने वाले दर्शक इन खेलों का छोटा सा इंटरएक्टिव अनुभव ले सकेंगे। बेहतर प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को छोटे उपहार और चॉकलेट आदि देकर प्रोत्साहित किया जाएगा।

    जेन-जी को खेलों से जोड़ने पर जोर

    आज की युवा पीढ़ी और खासकर जेन-जी को सकारात्मक ऊर्जा के साथ खेलों से जोड़ने पर भी पवेलियन में विशेष प्रस्तुति होगी। इसका उद्देश्य युवाओं को खेल, फिटनेस, अनुशासन और सकारात्मक सोच की दिशा में प्रेरित करना है। खेल विभाग की कोशिश होगी कि युवा पीढ़ी खेलों को केवल प्रतियोगिता के तौर पर नहीं, बल्कि बेहतर और स्वस्थ जीवनशैली के माध्यम के रूप में भी देखे।

    खेलों में एआई के इस्तेमाल की भी झलक

    पवेलियन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के खेल क्षेत्र में इस्तेमाल की संभावनाओं को भी प्रदर्शित किया जाएगा। खिलाड़ियों के लिए एआई का उपयोग, खेल प्रतिभाओं के डेटा बेस के बेहतर प्रबंधन और भविष्य में तकनीक के माध्यम से खेल गतिविधियों को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की प्रस्तुति होगी।

    उच्च उत्कृष्टता केंद्रों की स्थापना से खिलाड़ियों को मिल रहा बेहतर प्रशिक्षण

    खेल विभाग के विशेष सचिव विनीत कुमार ने कहा कि उत्तर प्रदेश के स्पोर्ट्स कॉलेजों ने खेल नर्सरी के रूप में दशकों से देश और विश्व पटल पर प्रदेश की प्रतिभाओं को पहचान दिलाई है। इन संस्थानों से निकले खिलाड़ी विभिन्न क्षेत्रों में उच्च पदों पर आसीन होने के साथ राष्ट्र का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। अब खेल प्रतिभाओं को और बेहतर संबल देने के लिए प्रतियोगिताओं की तैयारी से लेकर शासकीय सेवा तक सहायता दी जा रही है। खेल विद्यालय, खेल विश्वविद्यालय, स्पोर्ट्स हॉस्टल और उच्च उत्कृष्टता केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं। साई के सहयोग से अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों को सुविधाएं, ग्रामीण प्रतिभाओं को प्रोत्साहन तथा स्टेडियमों में राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर के उपकरण व सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

  • ₹27,000 करोड़ का निवेश, 90 हजार नौकरियां! यहां बनेगा देश का सबसे बड़ा शिपबिल्डिंग हब

    ₹27,000 करोड़ का निवेश, 90 हजार नौकरियां! यहां बनेगा देश का सबसे बड़ा शिपबिल्डिंग हब

     मुंबई

    महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले में जल्द ही एक बड़ा शिपबिल्डिंग प्रोजेक्ट आकार ले सकता है. दिघी में करीब ₹27,000 करोड़ के निवेश से ग्रीनफील्ड शिपबिल्डिंग क्लस्टर बनाने की तैयारी है. महाराष्ट्र सरकार के मुताबिक, इस प्रोजेक्ट से करीब 90,000 रोजगार के मौके बन सकते हैं. प्रोजेक्ट को मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड(MDL) आगे बढ़ाएगी और यहां बड़े कमर्शियल जहाजों के निर्माण के लिए आधुनिक सुविधाएं तैयार की जाएंगी। 

    महाराष्ट्र सरकार की ओर से मंगलवार को जारी रिलीज के मुताबिक, मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स ने नेशनल शिपबिल्डिंग इंडस्ट्रियल पार्क एंड मरीन लॉजिस्टिक्स (NSHIPML) के साथ मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) साइन किया है. यह समझौता मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की मौजूदगी में हुआ. इस प्रोजेक्ट को केंद्र सरकार की ग्रीनफील्ड शिपबिल्डिंग क्लस्टर डेवलपमेंट योजना के तहत आगे बढ़ाया जा रहा है. इसका मकसद देश में बड़े स्तर पर जहाज बनाने की क्षमता बढ़ाना और शिपबिल्डिंग से जुड़ी पूरी इंडस्ट्री को मजबूत करना है। 

    ₹27,000 करोड़ का निवेश, बड़े जहाज बनेंगे

    प्रस्तावित प्रोजेक्ट में करीब ₹27,000 करोड़ का निवेश किया जाएगा. सरकार के मुताबिक, दिघी में बनने वाले क्लस्टर में बड़े कमर्शियल वेसल्स यानी कारोबारी जहाज बनाए जा सकेंगे. इस प्रोजेक्ट से भारत की मैरीटाइम इंडस्ट्री से जुड़ी क्षमता बढ़ने की उम्मीद है. साथ ही जहाज निर्माण से जुड़े दूसरे कारोबार, सप्लाई चेन और औद्योगिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिल सकता है। 

    सालाना 2 मिलियन ग्रॉस टन क्षमता का लक्ष्य
    समझौते के तहत MDL ने दिघी में कम से कम 2 मिलियन ग्रॉस टन सालाना शिपबिल्डिंग क्षमता तैयार करने का लक्ष्य रखा है. इसका मतलब है कि क्लस्टर को काफी बड़े स्तर पर विकसित करने की योजना है. यहां सिर्फ जहाज बनाने की सुविधा ही नहीं होगी, बल्कि शिपबिल्डिंग से जुड़े दूसरे कामों के लिए भी जरूरी ढांचा तैयार किया जाएगा. दिघी का ग्रीनफील्ड शिपबिल्डिंग क्लस्टर महाराष्ट्र मेरिटाइम बोर्ड और मुंबई पोर्ट अथॉरिटी मिलकर विकसित कर रहे हैं. इसके लिए NSHIPML को स्पेशल पर्पज कंपनी (SPC) के तौर पर बनाया गया है. सरकार का कहना है कि यह प्रोजेक्ट 'मैरीटाइम अमृत काल विजन 2047' के लक्ष्यों के साथ भी जुड़ा है। 

    शिपबिल्डिंग के साथ पूरा इकोसिस्टम बनेगा
    सरकारी रिलीज के मुताबिक, प्रोजेक्ट के तहत आधुनिक शिपबिल्डिंग इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जाएगा. इसके साथ मैरीटाइम इंडस्ट्री को जरूरी सपोर्ट देने वाला इंडस्ट्रियल और सप्लाई चेन नेटवर्क भी विकसित होगा. इससे जहाज निर्माण के लिए जरूरी सामान, सेवाओं और दूसरी औद्योगिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है. सरकार का मानना है कि इससे भारत में शिपबिल्डिंग की क्षमता बढ़ेगी और नई तकनीक व निवेश आकर्षित करने में मदद मिलेगी। 

    90 हजार रोजगार के मौके बनने की उम्मीद
    इस प्रोजेक्ट का एक बड़ा असर रोजगार के मोर्चे पर भी देखने को मिल सकता है. महाराष्ट्र सरकार ने करीब 90,000 नौकरियां पैदा होने की उम्मीद जताई है. इनमें शिपबिल्डिंग के अलावा सप्लाई चेन और इससे जुड़े दूसरे क्षेत्रों में रोजगार के अवसर भी शामिल हो सकते हैं. मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर कैप्टन जगमोहन ने कहा कि कंपनी सभी स्टेकहोल्डर्स के सहयोग से दिघी में आधुनिक और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी शिपबिल्डिंग सुविधा तैयार करने की दिशा में काम करेगी. MoU पर कैप्टन जगमोहन और NSHIPML के मैनेजिंग डायरेक्टर प्रदीप पी ने हस्ताक्षर किए। 

    भारत के शिपबिल्डिंग सेक्टर के लिए अहम
    दिघी का यह प्रोजेक्ट सिर्फ एक शिपयार्ड बनाने तक सीमित नहीं है. इसके जरिए बड़े जहाजों के निर्माण की क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ उससे जुड़े उद्योगों का नेटवर्क तैयार करने की योजना है. अगर प्रोजेक्ट तय योजना के मुताबिक आगे बढ़ता है तो इससे महाराष्ट्र के साथ-साथ देश के शिपबिल्डिंग और समुद्री उद्योग को भी फायदा मिल सकता है। 

  • सहारा रिफंड पोर्टल पर फिर से करना होगा क्लेम? लाखों निवेशकों की चिंता, जानें जवाब

    सहारा रिफंड पोर्टल पर फिर से करना होगा क्लेम? लाखों निवेशकों की चिंता, जानें जवाब

    नई दिल्ली

    चाय की दुकान चलाने वाले कुशीनगर जिले के दिनेश का सहारा में 4 लाख रुपये से अधिक फंसे हैं। नगर पंचायत मथौली बाजार के प्रमोद जायसवाल और उनके परिवार के कई सदस्यों के भी सहारा में फंसे लाखों रुपये अभी तक रिफंड नहीं हुए। जबकि, इन लोगों ने सहारा रिफंड पोर्टल पर अप्लाई कर चुके हैं। दिनेश और प्रमोद जैसे लाखों निवेशकों के मन अब भी एक ही सवाल गूंज रहा है कि आवेदन किए कई महीने गुजर गए तो क्या फिर से अप्लाई करना पड़ेगा?

    इसका सीधा जवाब है नहीं। अगर आपने साल 2023 या 2024 या फिर 2025 में क्लेम कर दिया था और अभी तक पैसा नहीं आया, तो सिर्फ पैसा नहीं आने के कारण नया क्लेम न करें। पहले पुराने क्लेम का Status देखें। जिन लोगों ने पहले CRCS-Sahara Refund Portal पर क्लेम कर दिया है, उन्हें सामान्य स्थिति में दोबारा नया क्लेम दाखिल करने की जरूरत नहीं है, लेकिन यहां एक जरूरी अंतर है।

    क्लेम पहले से जमा है और कोई कमी/Deficiency नहीं बताई गई है तो दोबारा आवेदन न करें। पुराने क्लेम की प्रोसेसिंग का इंतजार करें। अगर पोर्टल पर दिए गए स्टेटस या आपके रजिस्टर्ड नंबर पर मिले SMS में कोई कमी बताई गई है तो उसी पुराने क्लेम को Resubmission Portal पर सुधारकर दोबारा जमा करना करें।

    अगर Payment Failed दिख रहा है तो इसके लिए भी Resubmission Portal के जरिए निर्धारित प्रक्रिया अपनानी होगी।

    अगर पहले कभी क्लेम नहीं किया तो क्या करें
    अगर अबतक आपने क्लेम नहीं किया है तो नया क्लेम CRCS-Sahara Refund Portal पर करना है। Resubmission में नया क्लेम जोड़ना संभव नहीं है। वह पुराने क्लेम की कमी दूर करने के लिए है।

    अभी सबसे जरूरी काम ये करना है
    अगर आपने पहले क्लेम किया था तो पहले अपना CRN डालकर Status/Remarks चेक करें। अगर वहां Deficiency या Resubmission Required जैसा मैसेज नहीं है, तो केवल नए सिरे से आवेदन करने की जरूरत नहीं है।

    बता दें सरकार ने 8 सितंबर 2026 को बताया कि अब तक ₹9,267 करोड़ 41.56 लाख जमाकर्ताओं को वापस किए जा चुके हैं, जबकि लगभग 20 लाख आवेदन प्रोसेसिंग के लिए बाकी थे।

    सहारा रिफंड क्लेम स्टेटस को ऐसे जांचें
        सबसे पहले पहले अपना पुराना क्लेम चेक करें। इसके लिए आधिकारिक पोर्टल CRCS-Sahara Refund पर जाएं।
        यहां अपने रजिस्टर्ड मोबाइल/आधार से लॉगिन करके Claim/Refund Status देखें। 

    Status में क्या लिखा हो तो क्या करें?
        अगर लिखा है Under Process / Processing तो नया आवेदन न करें, पुराने क्लेम की प्रक्रिया का इंतजार करें।
        अगर लिखा है Verified / Eligible तो भुगतान की प्रक्रिया का इंतजार करें।
        अगर लिखा है Payment Processed/Success तो अपने आधार से लिंक्ड बैंक खाते में पेमेंट को चेक करें।
        अगर लिख है Deficiency Communicated तो कमी दूर करके Resubmission Portal पर दोबारा जमा करें।
        अगर लिखा है Rejected/Deficiency तो पोर्टल पर बताई गई वजह देखें और यदि Resubmission उपलब्ध है तो सुधार करें।

    सरकार ने स्पष्ट किया है कि सिर्फ कमी पाए जाने वाले पुराने क्लेम को सुधारने के लिए Resubmission Portal का इस्तेमाल करना है।

    Deficiency आई है तो कहां जाएं
    यह नया क्लेम करने वाला पोर्टल नहीं है। यह पहले जमा किए गए क्लेम में बताई गई कमी को सुधारकर फिर जमा करने के लिए है। सितंबर 2026 की सरकार की सूचना भी यही कहती है।

  • नॉर्थ कोरिया पर साउथ कोरिया की कोर्ट का बड़ा फैसला, 32 मिलियन डॉलर का जुर्माना

    नॉर्थ कोरिया पर साउथ कोरिया की कोर्ट का बड़ा फैसला, 32 मिलियन डॉलर का जुर्माना

    सियोल

    नॉर्थ कोरिया ने 2020 में गुस्से में साउथ कोरिया का एक साझा संपर्क कार्यालय ही उड़ा दिया था. अब करीब 6 साल बाद इस मामले में साउथ कोरिया की कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है. सियोल सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट कोर्ट ने नॉर्थ कोरिया को 44.6 अरब वॉन (करीब 32. 5 करोड़ डॉलर) का भुगतान करने का आदेश दिया है. रकम कएसोंग में बनाए गए संयुक्त संपर्क कार्यालय को उड़ाने से हुए नुकसान के लिए है। 

    हालांकि इस फैसले का असर फिलहाल प्रतीकात्मक ही माना जा रहा है. इसकी वजह यह है कि साउथ कोरिया के पास नॉर्थ कोरिया से इस रकम की वसूली कराने का कोई साफ रास्ता नहीं है. दोनों देशों के बीच राजनयिक रिश्ते बेहद खराब हैं. ऐसे में कोर्ट का आदेश लागू कराना बड़ी चुनौती है। 

    यह मामला इसलिए भी खास है क्योंकि पहली बार साउथ कोरिया की सरकार ने नॉर्थ कोरिया के खिलाफ कोर्ट में मुकदमा किया था. इससे पहले कुछ लोग मानवाधिकार उल्लंघन और दूसरे मामलों को लेकर नॉर्थ कोरिया की सरकार पर मुकदमा कर चुके हैं। 

    साउथ कोरिया ने 2023 में यह केस दायर किया था. सरकार ने कहा था कि नॉर्थ कोरिया ने कएसोंग में संपर्क कार्यालय को उड़ाकर गैरकानूनी और हिंसक कार्रवाई की. इससे दोनों देशों के बीच हुए पुराने समझौतों का उल्लंघन हुआ. साथ ही आपसी सम्मान और भरोसे को भी बड़ा नुकसान पहुंचा। 

    दरअसल, यह संयुक्त संपर्क कार्यालय कएसोंग में बनाया गया था. इसका मकसद दोनों देशों के बीच बातचीत और संपर्क का रास्ता बनाए रखना था. लेकिन 2020 में दोनों देशों के रिश्ते तेजी से बिगड़ने लगे। 

    जून 2020 में नॉर्थ कोरिया ने विस्फोट करके इस इमारत को उड़ा दिया. उस समय इमारत खाली थी. कोरोना महामारी के कारण नॉर्थ कोरिया ने जनवरी में ही दफ्तर बंद कर दिया था। 

    नॉर्थ कोरिया साउथ कोरिया से इस बात पर नाराज था कि वह उत्तर कोरियाई लोगों को सीमा पार गुब्बारों के जरिए प्योंगयांग विरोधी पर्चे भेजने से नहीं रोक रहा था. इसी मुद्दे को लेकर उसने सियोल के खिलाफ कड़ी नाराजगी जताई थी। 

    न्यूक्लियर वार्ता टूटने के बाद बढ़ा तनाव
    दफ्तर को उड़ाने की घटना को सिर्फ सीमा विवाद के तौर पर नहीं देखा गया था. उस समय अमेरिका और नॉर्थ कोरिया के बीच परमाणु वार्ता भी ठप हो चुकी थी। 

    2018 में नॉर्थ कोरिया के नेता किम जोंग उन और तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच पहली शिखर वार्ता हुई थी. तत्कालीन साउथ कोरियाई राष्ट्रपति मून जे-इन ने दोनों देशों के बीच बातचीत शुरू कराने में अहम भूमिका निभाई थी। 

    लेकिन 2019 में किम और ट्रंप की दूसरी मुलाकात के बाद बातचीत आगे नहीं बढ़ सकी. नॉर्थ कोरिया प्रतिबंधों में बड़ी राहत चाहता था. बदले में वह अपने परमाणु कार्यक्रम के कुछ हिस्से को छोड़ने की बात कर रहा था. अमेरिका ने उसकी मांग स्वीकार नहीं की. इसके बाद दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ता गया. नॉर्थ कोरिया ने अपने परमाणु हथियार और मिसाइल कार्यक्रम को और तेज कर दिया। 

    साउथ कोरिया में पिछले साल सत्ता बदलने के बाद नॉर्थ कोरिया को लेकर सरकार का रुख कुछ नरम हुआ. मौजूदा राष्ट्रपति ली जे म्यंग ने प्योंगयांग के साथ बातचीत फिर शुरू करने की अपील की. लेकिन नॉर्थ कोरिया ने अब तक इन अपीलों को ज्यादा तवज्जो नहीं दी है. किम जोंग उन ने साउथ कोरिया को अपना सबसे शत्रुतापूर्ण देश तक बताया है। 

    नॉर्थ कोरिया ने इसी दौरान रूस और चीन के साथ अपने रिश्ते भी मजबूत किए हैं. रूस के साथ उसकी सैन्य साझेदारी बढ़ी है. अमेरिका की ओर से भी किम के साथ फिर बातचीत शुरू करने में रुचि दिखाई गई है. लेकिन प्योंगयांग ने अभी तक बातचीत के अमेरिकी प्रस्तावों को स्वीकार नहीं किया है। 

    साउथ कोरिया ने कहा- बातचीत से ही सुलझेगा मामला
    साउथ कोरिया के एकीकरण मंत्रालय ने अदालत के फैसले का सम्मान करने की बात कही है. मंत्रालय ने यह भी कहा कि दोनों देशों के बीच बातचीत फिर शुरू होनी चाहिए। 

    मंत्रालय के मुताबिक, दक्षिण और उत्तर के बीच सभी मुद्दों का समाधान बातचीत और सहयोग के जरिए किया जाना चाहिए. वहीं नॉर्थ कोरिया की सरकारी मीडिया ने अदालत के इस फैसले पर तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। 

    इस तरह 2020 में उड़ाया गया एक दफ्तर अब दोनों देशों के बिगड़े रिश्तों और रुकी हुई बातचीत का प्रतीक बन गया है. अदालत का फैसला साउथ कोरिया के पक्ष में आया है, लेकिन नॉर्थ कोरिया से रकम की वसूली और दोनों देशों के बीच संवाद बहाल करना अभी भी बड़ी चुनौती है। 

     

  • भिलाई के गीतांश बामनिया की Rentomojo का ₹1,266 करोड़ IPO, जल्द होगा लॉन्च

    भिलाई के गीतांश बामनिया की Rentomojo का ₹1,266 करोड़ IPO, जल्द होगा लॉन्च

    भिलाई 
     शहर के कारोबारी गीतांश बामनिया ने अपनी कंपनी रेंटोमोजो का 1,266 करोड़ का आइपीओ बाजार में उतारकर बड़ी उपलब्धि हासिल की है। रेंटोमोजो की इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (आईपीओ) 9 सितंबर को खुली और 11 सितंबर को बंद हुई। कंपनी की शेयर बाजार में लिस्टिंग 17 सितंबर को प्रस्तावित है।

    बता दें कि रेंटोमोजो एक प्रमुख भारतीय आनलाइन रेंटल प्लेटफार्म है। यह कंपनी ग्राहकों को घर और आफिस के उपयोग के लिए फर्नीचर, घरेलू उपकरण (जैसे फ्रिज, वाशिंग मशीन) और इलेक्ट्रानिक्स सामान मासिक किराए या सब्सक्रिप्शन माडल पर उपलब्ध कराती है।

    भिलाई में पले-बढ़े, दो स्टार्टअप रहे असफल
        गीतांश भिलाई में ही पले-बढ़े हैं। भिलाई इस्पात संयंत्र (बीएसपी) के सेक्टर-10 इंग्लिश मीडियम हायर सेकंडरी स्कूल से पढ़ाई करने वाले गीतांश ने आइआइटी मद्रास से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में पोस्ट ग्रेजुएशन किया है।

     इसके बाद उन्होंने केपीएमजी और फ्लिपकार्ट जैसी प्रतिष्ठित कंपनियों में काम किया। फिर उन्होंने खुद उद्यमी बनने का निर्णय लिया, दो स्टार्टअप भी शुरू किए, जो असफल रहे।

        असफलता से सीखते हुए उन्होंने वर्ष 2012 में ‘रेंटोमोजो’ की शुरुआत की। धीरे-धीरे कंपनी ने अपने कारोबार का विस्तार किया और ग्राहकों के बीच अपनी जगह बनाई।

    असफलताओं से मिली सीख बनी कारोबार की ताकत
        रेंटोमोजो के सफर में गीतांश के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि उन्होंने शुरुआती असफलताओं को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। 

    कारोबार में आने वाली चुनौतियों को समझते हुए उन्होंने माडल में बदलाव किए और बाजार की जरूरत के अनुरूप कंपनी को आगे बढ़ाया।

    अब 1,266 करोड़ रुपये के आइपीओ के जरिए कंपनी ने पहली बार अपने शेयर आम निवेशकों के लिए पेश किए हैं। शेयर बाजार में लिस्टिंग के बाद कंपनी के शेयरों की खरीद-बिक्री बाजार में की जा सकेगी।

    पिता से कारोबार की प्रेरणा, मां चिकित्सा क्षेत्र में रहीं अग्रणी
    गीतांश अपने कारोबारी दृष्टिकोण के लिए परिवार से मिली प्रेरणा को भी महत्वपूर्ण मानते हैं। उनके पिता जगदीश बामनिया भिलाई इस्पात संयंत्र में कार्यरत रहे और सेवानिवृत्ति के बाद करीब 10 वर्षों तक पैकेज्ड ड्रिंकिंग वाटर के व्यवसाय से जुड़े रहे। उनकी मां डॉ. मीरा बामनिया बीएसपी के जेएलएन अस्पताल एवं रिसर्च सेंटर सेक्टर-नौ में बाल एवं शिशु रोग विभाग की प्रमुख रहीं और वर्ष 2020 में सेवानिवृत्त हुईं।

  • छत्तीसगढ़ कांस्टेबल भर्ती के 400+ अभ्यर्थियों को राहत, सुप्रीम कोर्ट ने सरकार की SLP खारिज की

    छत्तीसगढ़ कांस्टेबल भर्ती के 400+ अभ्यर्थियों को राहत, सुप्रीम कोर्ट ने सरकार की SLP खारिज की

    बिलासपुर
     छत्तीसगढ़ में कांस्टेबल भर्ती के सैकड़ों प्रतीक्षारत अभ्यर्थियों के लिए बड़ी राहत की खबर है। सुप्रीम कोर्ट ने 2017 में 2259 कांस्टेबल पदों की भर्ती से जुड़े मामले में छत्तीसगढ़ सरकार की विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) खारिज कर दी है। इससे 400 से ज्यादा प्रतीक्षारत कांस्टेबल अभ्यर्थियों की नियुक्ति का रास्ता साफ होने की उम्मीद बढ़ गई है। मामला प्रतीक्षा सूची से रिक्त पदों को भरे जाने के अधिकार को लेकर लंबे समय से न्यायिक प्रक्रिया में था।

    हाई कोर्ट ने सुनाया था अभ्यर्थियों के पक्ष में फैसला
        मामला पारस राम ध्रुव एवं अन्य की ओर से दायर याचिका से जुड़ा है। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने एक फरवरी 2024 को अभ्यर्थियों के पक्ष में फैसला सुनाते हुए कहा था कि पुलिस कांस्टेबल सेवा नियम, 2007 के नियम 13(2) के तहत वैध प्रतीक्षा सूची से रिक्त पदों को भरा जा सकता है।

    हाई कोर्ट के फैसले के अनुसार भर्ती प्रक्रिया के दौरान प्रोन्नति, सेवानिवृत्ति, कैडर परिवर्तन अथवा अन्य कारणों से रिक्त हुए पदों को केवल इस आधार पर प्रतीक्षा सूची से बाहर नहीं किया जा सकता कि वे प्रारंभिक रूप से चयनित अभ्यर्थियों के पद नहीं थे।

    सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की राज्य सरकार की एसएलपी
        हाई कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ छत्तीसगढ़ सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दायर की थी। मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने 17 नवंबर 2025 को 47 सफल अभ्यर्थियों के पद सुरक्षित रखने का निर्देश भी दिया था।

    सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार की एसएलपी खारिज कर दी। इसके साथ ही हाई कोर्ट के फैसले के आधार पर प्रतीक्षा सूची के अभ्यर्थियों को नियुक्ति मिलने की संभावना मजबूत हो गई है। सुनवाई के दौरान प्रतिवादियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता नौशीना अली उपस्थित रहीं। हस्तक्षेपकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता रुचि नागर और एओआर देवाशीष तिवारी ने पैरवी की। छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से अतिरिक्त सालिसिटर जनरल के. नटराज उपस्थित हुए।

    वर्षों से नियुक्ति का इंतजार
        2017 की कांस्टेबल भर्ती प्रक्रिया में चयन और प्रतीक्षा सूची को लेकर विवाद के कारण बड़ी संख्या में अभ्यर्थी वर्षों से नियुक्ति की उम्मीद लगाए बैठे थे। हाई कोर्ट के पक्ष में फैसले के बाद राज्य सरकार की एसएलपी सुप्रीम कोर्ट तक पहुंची।

        अब एसएलपी खारिज होने से 400 से ज्यादा प्रतीक्षारत अभ्यर्थियों के लिए नियुक्ति की प्रक्रिया आगे बढ़ने की उम्मीद है। हालांकि, वास्तविक नियुक्ति प्रक्रिया और रिक्त पदों की संख्या के संबंध में संबंधित विभाग द्वारा आगे की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी।

     

  • उच्च शिक्षा में डिजिटल नवाचार, विद्यार्थियों तक पहुंचेगा गुणवत्तापूर्ण ई-कंटेंट

    उच्च शिक्षा में डिजिटल नवाचार, विद्यार्थियों तक पहुंचेगा गुणवत्तापूर्ण ई-कंटेंट

    उच्च शिक्षा में डिजिटल नवाचार, विद्यार्थियों तक पहुंचेगा गुणवत्तापूर्ण ई-कंटेंट

    अब डिजिटल माध्यम से घर बैठे पढ़ सकेंगे विद्यार्थी, ई-ज्ञानसेतु पर मिलेंगे गुणवत्तापूर्ण ई-कंटेंट

    कला, विज्ञान और वाणिज्य सहित विभिन्न विषयों के वीडियो व्याख्यान होंगे उपलब्ध

    10 डिजिटल स्टूडियो के माध्यम से क्षेत्रीय भाषाओं में भी तैयार की जा रही डिजिटल अध्ययन सामग्री

    भोपाल 

    मध्यप्रदेश के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण डिजिटल अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराने की दिशा में उच्च शिक्षा विभाग द्वारा ई-कंटेंट वीडियो तैयार किए जा रहे हैं। तैयार किए गए वीडियो विद्यार्थियों को विभाग के e-GyanSetu YouTube Channel पर मिलेंगे। विभाग की इस पहल से विद्यार्थी अपनी सुविधा के अनुसार डिजिटल माध्यम से विभिन्न विषयों की अध्ययन सामग्री का लाभ ले सकेंगे।

    राष्ट्रीय शिक्षा नीति -2020 की भावना के अनुरूप प्रदेश के संभागीय मुख्यालयों में स्थापित 10 डिजिटल स्टूडियो के माध्यम से स्नातक स्तर के विभिन्न विषयों एवं पाठ्यक्रमों के लिए ई-कंटेंट तैयार किया जा रहा है। कला, विज्ञान, वाणिज्य सहित विभिन्न विषयों के वीडियो व्याख्यान तैयार किए जा रहे हैं।

    ई-कंटेंट वीडियो को विद्यार्थियों के लिए अधिक प्रभावी एवं रोचक बनाने के लिए ग्राफिक्स और डिजिटल विजुअल्स का उपयोग किया जा रहा है। वीडियो की विषयगत एवं शैक्षणिक गुणवत्ता सुनिश्चित करने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। यह ई-कंटेंट प्रदेश के शासकीय विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में कार्यरत प्राध्यापकों एवं सहायक प्राध्यापकों द्वारा तैयार किया जा रहा है।

    Validation Board करेगा ई-कंटेंट का परीक्षण एवं सत्यापन

    ई-कंटेंट की प्रमाणिकता, विषयवस्तु और शैक्षणिक गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए तैयार वीडियो का Validation Board द्वारा परीक्षण एवं सत्यापन किया जा रहा है। वीडियो की विषयवस्तु, पाठ्यक्रमानुरूपता एवं शैक्षणिक गुणवत्ता का परीक्षण करने के बाद ही सत्यापित ई-कंटेंट को विद्यार्थियों के लिए e-GyanSetu YouTube Channel पर प्रकाशित किया जाएगा।

    क्षेत्रीय भाषाओं में तैयार किए जा रहा ई-कंटेंट

    ई-कंटेंट निर्माण में प्रदेश की भाषाई विविधता का भी विशेष ध्यान रखा गया है। विद्यार्थियों की सुविधा के लिए बघेली, बुंदेली, मराठी एवं संस्कृत सहित विभिन्न क्षेत्रीय भाषाओं में भी वीडियो तैयार किए जा रहे हैं। इससे अलग-अलग भाषाई पृष्ठभूमि वाले विद्यार्थियों तक डिजिटल अध्ययन सामग्री पहुंचाने में सुविधा होगी।

    अपनी सुविधा के अनुसार पढ़ सकेंगे विद्यार्थी

    e-GyanSetu YouTube Channel पर उपलब्ध वीडियो के माध्यम से विद्यार्थी मोबाइल, लैपटॉप, टैबलेट अथवा अन्य डिजिटल माध्यमों से अपनी सुविधा के अनुसार अध्ययन कर सकेंगे। विद्यार्थी आवश्यकता के अनुसार विषयवस्तु को दोहरा सकेंगे, कठिन टॉपिक्स को पुनः समझ सकेंगे और अपनी सीखने की गति के अनुरूप अध्ययन कर सकेंगे।

    सत्यापन के बाद चरणबद्ध रूप से प्रकाशित होंगे वीडियो

    ई-कंटेंट निर्माण, एडिटिंग एवं सत्यापन की प्रक्रिया निरंतर जारी है। सत्यापन की प्रक्रिया पूर्ण होने वाले वीडियो को चरणबद्ध रूप से e-GyanSetu YouTube Channel पर प्रकाशित किया जाएगा। इस पहल से प्रदेश के विद्यार्थियों के लिए गुणवत्तापूर्ण डिजिटल अध्ययन सामग्री की उपलब्धता को और व्यापक बनाने में सहायता मिलेगी।

     

  • मध्यप्रदेश में प्राथमिक शिक्षा की बड़ी उपलब्धि, 23 साल बाद ड्रॉपआउट दर हुई शून्य

    मध्यप्रदेश में प्राथमिक शिक्षा की बड़ी उपलब्धि, 23 साल बाद ड्रॉपआउट दर हुई शून्य

    प्राथमिक शिक्षा में स्तर का ड्रॉप आउट दर

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में नवाचार के साथ गुणवत्तापूर्ण एवं समावेशी शिक्षा को मिल रही नई दिशा
    स्कूल शिक्षा में मध्यप्रदेश में हुई ऐतिहासिक प्रगति 23 साल बाद शून्य पर
    साइकिल, स्कूटी, लैपटॉप और गणवेश जैसी योजनाओं से मिल रहा है विद्यार्थियों को पढ़ाई के लिये प्रोत्साहन

    भोपाल

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा किए जा रहे निरंतर नवाचारों और सुधारों का सकारात्मक असर भी प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में दिखाई दे रहा है। पिछले 23 वर्षों में शिक्षा के क्षेत्र में किए गए बदलावों और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की वजह से प्राथमिक शालाओं में विद्यार्थियों की ड्रॉप आउट दर शून्य तक पहुंच गई है। प्रदेश के शासकीय स्कूलों में अध्ययनरत विद्यार्थियों को नवाचार के साथ गुणवत्तापूर्ण एवं समावेशी शिक्षा उपलब्ध कराने की दिशा में प्रदेश सरकार लगातार प्रयास कर रही है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव के निर्देशानुसार विद्यार्थियों को शिक्षा से सतत जोड़े रखने और उनकी पढ़ाई को रूचिकर एवं आसान बनाने में विभाग द्वारा संचालित विभिन्न योजनाएं भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। साइकिल, स्कूटी, लैपटॉप, गणवेश और छात्रवृत्ति जैसी योजनाओं के माध्यम से विद्यार्थियों को आर्थिक संबल प्रदान कर शिक्षा के लिये प्रोत्साहन दिया जा रहा है। इन योजनाओं ने विद्यार्थियों की स्कूल तक पहुंच बढ़ाने के साथ ही उन्हें पढ़ाई में बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रोत्साहित किया है। इन योजनाओं से विद्यार्थियों का शासकीय स्कूलों के प्रति रूझान बढ़ा है।

    स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ नवाचार, तकनीक, बेहतर अधोसंरचना और विद्यार्थियों की आवश्यकताओं पर केंद्रित व्यवस्थाओं को प्राथमिकता दी जा रही है। पीएमएवं सांदीपनि विद्यालयों, ई-हॉस्टल मैनेजमेंट सिस्टम, गृह संपर्क अभियान और व्यावसायिक शिक्षा जैसे नवाचारों से शिक्षा व्यवस्था को नई दिशा मिल रही है।

    प्रदेश सरकार का प्रयास है कि हर विद्यार्थी को समान अवसर, बेहतर शैक्षणिक वातावरण और आगे बढ़ने के पर्याप्त अवसर उपलब्ध हों। शासकीय विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के साथ विद्यार्थियों को शिक्षा से जोड़े रखने और उनके सर्वांगीण विकास पर निरंतर काम किया जा रहा है।

    साइकिल योजना से 1 करोड़ से अधिक विद्यार्थी हुए लाभान्वित

    प्रदेश सरकार द्वारा वर्ष 2004-05 में शासकीय स्कूलों की कक्षा 6वीं एवं 9वीं की छात्राओं को स्कूल आने-जाने में आने वाली परेशानी को दूर करने के लिये साइकिल योजना शुरू की गई। योजना अंतर्गत अब तक 1 करोड़ से अधिक विद्यार्थी लाभान्वित हो चुके हैं। योजना पर प्रदेश सरकार द्वारा अब तक 2,942.63 करोड़ रुपये से अधिक की राशि व्यय की गई हैं।

    ड्रॉप आउट दर में आई उल्लेखनीय कमी

    प्रदेश के हर बच्चे को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के निरंतर प्रयासों का परिणाम है कि ड्रॉप आउट दर में उल्लेखनीय कमी आई है। वर्ष 2002-03 में ड्रॉप आउट दर प्राथमिक स्तर पर 15% और माध्यमिक स्तर पर 24.70% थी। वर्ष 2025-26 में पहली बार प्राथमिक स्तर पर ड्रॉप आउट दर शून्य प्रतिशत हो गई है। माध्यमिक स्तर पर यह दर घटकर 6.2% और सेकंडरी स्तर पर 13.0% रह गई है।

    व्यावसायिक शिक्षा में मध्यप्रदेश देश में अग्रणी

    व्यावसायिक शिक्षा के क्षेत्र में मध्यप्रदेश देश में अग्रणी है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति- 2020 के अनुरूप विद्यार्थियों को रोजगारोंमुखी और कौशल विकास के लिये भी शिक्षा उपलब्ध कराई जा रही है। प्रदेश में कक्षा 9वीं से 12वीं तक व्यावसायिक शिक्षा पाठ्यक्रम संचालित करने वाले विद्यालयों की संख्या बढ़कर 3,367 हो गई है, जो देश में सर्वाधिक है। वर्ष 2024-25 में 4.06 लाख विद्यार्थियों एवं वर्ष 2025-26 में 5,98,452 विद्यार्थियों ने इन पाठ्यक्रमों में नामांकन कराया। पिछले दो वर्षों में 1,010 विद्यालयों में एग्रीकल्चर ट्रेड प्रारंभ किया गया है। विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसरों से जोड़ने के उद्देश्य से जनवरी 2026 में प्रदेश के सभी हाई एवं हायर सेकंडरी विद्यालयों में कॅरियर सप्ताह एवं कॅरियर मेले का आयोजन भी किया गया।

    वर्ष 2003 की तुलना में चार गुना से अधिक बढ़ा शिक्षा बजट

    शासकीय स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और अधोसंरचना विकास को प्राथमिकता देते हुए प्रदेश सरकार ने शिक्षा बजट में उल्लेखनीय वृद्धि की है। वर्ष 2002-03 में शिक्षा का बजट 2,456 करोड़ रुपये था, जो वर्ष 2026-27 में बढ़कर 9,623.12 करोड़ रुपये हो गया है। इस प्रकार वर्ष 2003 की तुलना में शिक्षा बजट में लगभग चार गुना वृद्धि हुई है।

    अब तक प्रदेश के 23,000 से अधिक विद्यार्थियों को मिल चुकी है स्कूटी

    प्रदेश सरकार द्वारा मेधावी विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से वर्ष 2022-23 से मुख्यमंत्री स्कूटी योजना संचालित की जा रही है। कक्षा 12वीं में प्रथम प्रयास में 70% अंक के साथ स्कूल में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले शासकीय हायर सेकंडरी स्कूलों के नियमित विद्यार्थियों को योजना का लाभ मिलता है। प्रदेश सरकार द्वारा योजना शुरू होने से अब तक 23 हजार 487 विद्यार्थी लाभान्वित हो चुके हैं। योजना पर लगभग 246 करोड़ रुपये प्रदेश सरकार द्वारा व्यय किए जा चुके हैं। मोटराइज्ड स्कूटी के लिए अधिकतम 90 हजार रुपये और ई-स्कूटी के लिए अधिकतम 1.20 लाख रुपये की राशि प्रदान की जाती है।

    पहली बार एक अप्रैल से शुरू हुआ पाठ्यपुस्तक वितरण

    शासकीय स्कूलों में अध्ययनरत कक्षा 1 से 12वीं तक के विद्यार्थियों को निःशुल्क पाठ्यपुस्तकें प्रदान की जाती हैं। शैक्षणिक सत्र 2025-26 में पहली बार एक अप्रैल से निःशुल्क पाठ्य पुस्तकों का वितरण शुरू किया गया, जिससे विद्यार्थियों को सत्र की शुरुआत से ही पढ़ाई की सामग्री उपलब्ध हो सके। वर्ष 2026-27 में पुस्तकों की प्रिंटिंग, बाइंडिंग एवं पेपर की गुणवत्ता बेहतर करने के लिए एसओपी निर्धारित की गई है।

    बोर्ड परीक्षा परिणामों में हुआ उल्लेखनीय सुधार

    विगत वर्षों में हाई स्कूल एवं हायर सेकेंडरी के परीक्षा परिणामों में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है। हाई स्कूल स्तर पर वर्ष 2025-26 में परीक्षा परिणाम 73.42 प्रतिशत रहा। इसी प्रकार हायर सेकंडरी में वर्ष 2025-26 में परीक्षा परिणाम 76.01 प्रतिशत रहा।

    स्थानीय परीक्षाओं की अंकसूचियां अब ऑनलाइन

    स्थानीय परीक्षाओं की अंकसूचियों की ऑनलाइन उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। शैक्षणिक सत्र 2025-26 से विद्यार्थियों को स्थानीय परीक्षाओं की अंकसूचियां ऑनलाइन उपलब्ध कराई जा रही हैं। इससे विद्यार्थियों को अंकसूची प्राप्त करने में सुविधा के साथ ही प्रक्रिया में पारदर्शिता और डिजिटल व्यवस्था को बढ़ावा मिला है।

    पीएमएवं सांदीपनि विद्यालयों के प्रति विद्यार्थियों एवं अभिभावकों का बढ़ा रूझान

    पीएमएवं सांदीपनि विद्यालय गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और विश्वस्तरीय अधोसंरचना के केंद्र के रूप में अपनी पहचान बना रहे हैं। विद्यालयों में उपलब्ध बेहतर शैक्षणिक सुविधाओं और आधुनिक अधोसंरचना के कारण विद्यार्थियों एवं अभिभावकों का रुझान लगातार बढ़ा है। बेहतर शैक्षणिक प्रदर्शन की वजह से इन विद्यालयों को निजी विद्यालयों के समकक्ष और कई मामलों में बेहतर विकल्प के रूप में स्थापित किया है।

    प्रदेश में प्रथम चरण में आधुनिक भौतिक सुविधाओं से परिपूर्ण 368 सांदीपनि विद्यालयों का संचालन शुरू चुका है। इसमें 274 स्कूल शिक्षा विभाग और 94 जनजातीय विभाग के सांदीपनि विद्यालय हैं। प्रदेश में 799 पीएमविद्यालय संचालित हैं, जिनमें 4 लाख 80 हजार छात्र नामांकित हैं। सभी पीएमस्कूलों में शिक्षा मंत्रालय भारत सरकार से निर्धारित 21 इंडिकेटर पर प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है।

    ई-हॉस्टल मैनेजमेंट सिस्टम से छात्रावास संचालन में पारदर्शिता

    स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा छात्रावासों के प्रभावी संचालन के लिए पहली बार ई-हॉस्टल एडमिशन एवं मैनेजमेंट सिस्टम लागू किया गया है। इससे स्कूलों में प्रवेश एवं सीट आवंटन प्रक्रिया को सरल बनाने के साथ विद्यार्थियों के डिजिटल रिकॉर्ड का व्यवस्थित संधारण किया जा रहा है। विद्यालय एवं आवासीय कैचमेंट क्षेत्र की मैपिंग के साथ स्टोर, रसोई, उपस्थिति, वित्त एवं स्वास्थ्य जैसी विभिन्न गतिविधियों का भी डिजिटल प्रबंधन किया जा रहा है। इससे छात्रावास व्यवस्था अधिक पारदर्शी, सुगम एवं प्रभावी बनी है।

    गृह संपर्क अभियान से 3 लाख से अधिक बच्चे स्कूल लौटे

    आउट-ऑफ-स्कूल बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से पुन: जोड़ने के लिए गृह संपर्क अभियान संचालित किया जा रहा है। अभियान अंतर्गत शिक्षक घर-घर जाकर सर्वेक्षण करते हैं और अप्रवेशित विद्यार्थियों की पहचान कर आवश्यकता के अनुसार मौके पर ही प्रवेश दिलाते हैं। विद्यार्थियों के घर पर उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में उसके विद्यालय छोड़ने के कारणों को भी दर्ज किया जाता है। अभियान के माध्यम से अब तक तीन लाख से अधिक बच्चों को पुनः स्कूल से जोड़ा गया है।

    पीएम जनमन अंतर्गत 106 छात्रावास स्वीकृत

    प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महाअभियान पीएम-जनमन अंतर्गत विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह पीवीटीजी के विद्यार्थियों के लिए 106 छात्रावासों को स्वीकृति दी गई है। छात्रावासों की यह सुविधा जनजातीय क्षेत्रों के विद्यार्थियों को आवासीय एवं शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

    धरती आबा अभियान के तहत 104 छात्रावास स्वीकृत

    धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के अंतर्गत 104 छात्रावास स्वीकृत किए गए हैं। इन छात्रावासों के माध्यम से जनजातीय क्षेत्रों के विद्यार्थियों को बेहतर आवासीय एवं शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है।

    अब तक 6 लाख 47 हजार से अधिक प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को लैपटॉप के लिए मिली 25 हजार रुपये की राशि

    प्रदेश में प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से लैपटॉप प्रदान किये जा रहे है। वर्ष 2009-10 से संचालित योजना में माध्यमिक शिक्षा मंडल की हायर सेकेंडरी परीक्षा में 75 प्रतिशत या उससे अधिक अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को लैपटॉप क्रय करने के लिए 25 हजार रुपये की राशि उनके बैंक खाते में अंतरित की जाती है। प्रदेश सरकार द्वारा अब तक 6 लाख 47 हजार 599 विद्यार्थियों को लैपटॉप क्रय करने के लिए राशि प्रदान कर चुकी है।

    समेकित छात्रवृत्ति योजना से लाखों विद्यार्थियों को लाभ

    समेकित छात्रवृत्ति योजना से कक्षा पहली से 12वीं तक के विद्यार्थियों को विभिन्न छात्रवृत्ति योजनाओं का लाभ मिल रहा है। वर्ष 2013-14 से संचालित इस योजना में छह विभागों की लगभग 20 प्रकार की छात्रवृत्ति योजनाओं को शामिल किया गया है। छात्रवृत्ति की स्वीकृति एवं राशि का भुगतान शिक्षा पोर्टल से ऑनलाइन प्रक्रिया द्वारा सीधे विद्यार्थियों के बैंक खातों में किया जाता है। वर्ष 2024-25 में 63.72 लाख विद्यार्थियों को 352 करोड़ रुपये, जबकि वर्ष 2025-26 में 60.59 लाख विद्यार्थियों को 344 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति प्रदान की गई।

    सुपर 100 योजना में मेधावी विद्यार्थियों को करा रहे है प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी

    सुपर 100 योजना के माध्यम से शासकीय विद्यालयों के मेधावी विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं की गुणवत्तापूर्ण तैयारी कराई जा रही है। कक्षा 10वीं में अध्ययनरत विद्यार्थियों का चयन परीक्षा के माध्यम से किया जाता है। चयनित विद्यार्थियों को कक्षा 11वीं एवं 12वीं में भोपाल के शासकीय सुभाष उत्कृष्ट उच्चतर माध्यमिक विद्यालय तथा इंदौर के शासकीय मल्हार आश्रम उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में अध्ययन के साथ इंजीनियरिंग, मेडिकल एवं अन्य प्रतिष्ठित व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए विशेष कोचिंग दी जाती है। वर्तमान में दोनों संस्थाओं में कुल 304 विद्यार्थियों को प्रवेश दिया जाता है।

    19 लाख छात्राओं के बैंक खातों में सैनिटरी नैपकिन के लिए सीधे पहुंच रही राशि

    प्रदेश में बालिकाओं के स्वास्थ्य, स्वच्छता और विद्यालय में नियमित उपस्थिति को बढ़ावा देने के लिए सैनिटरी नैपकिन योजना संचालित की जा रही है। योजना अन्तर्गत कक्षा 7वीं से 12वीं तक अध्ययनरत सभी बालिकाओं को प्रतिवर्ष 300 रुपये की राशि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) से प्रदान की जाती है। सितंबर 2025 में शासकीय विद्यालयों में अध्ययनरत लगभग 19 लाख बालिकाओं के खातों में कुल 57 करोड़ रुपये की राशि अंतरित की गई।

    डिजिटल शिक्षा से स्मार्ट हुई स्कूलों की पढ़ाई

    प्रदेश में डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश के स्कूलों में स्मार्ट क्लास एवं आईसीटी लैब की सुविधा का विस्तार किया जा रहा है। वर्ष 2025-26 तक मिडिल स्कूलों में 4,163 स्मार्ट क्लास, जबकि कस्तूरबा गांधी बालिका शिक्षा छात्रावासों में शत-प्रतिशत स्मार्ट क्लास एवं आईसीटी लैब स्वीकृत की गई हैं। नेताजी सुभाषचंद्र बोस छात्रावासों में भी शत-प्रतिशत स्मार्ट क्लास स्वीकृत हैं। प्रदेश के 9,316 हाई स्कूल एवं हायर सेकेंडरी स्कूलों में 8,870 (95%) स्मार्ट क्लास स्वीकृत हैं, जिनमें 7,405 कार्यशील हैं। इसी तरह 8,754 (94%) स्कूलों में आईसीटी लैब स्वीकृत हैं, जिनमें 3,706 कार्यशील हैं।

    निःशुल्क गणवेश से विद्यार्थियों को मिली है मदद

    प्रदेश की शासकीय शालाओं में अध्ययनरत बालिकाओं को वर्ष 2004-05 से प्रारम्भ इस योजना में 2 जोड़ी निःशुल्क गणवेश की सुविधा प्रदान की गई। वर्ष 2011-12 से इस योजना में छात्रों को भी शामिल किया गया। वर्तमान में प्रदेश की शासकीय शालाओं में कक्षा 1 से 8 में अध्ययनरत लगभग 60 लाख विद्यार्थियों को प्रतिवर्ष 2 जोड़ी गणवेश के लिए 600 रुपये की राशि के मान से लगभग 360 करोड़ प्रतिवर्ष का व्यय किया जा रहा है।

     

  • योगी सरकार के योजनाबद्ध प्रयास से प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना से रोशन हो रहे यूपी के 8.25 लाख घर

    योगी सरकार के योजनाबद्ध प्रयास से प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना से रोशन हो रहे यूपी के 8.25 लाख घर

    योगी सरकार के योजनाबद्ध प्रयास से प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना से रोशन हो रहे यूपी के 8.25 लाख घर

    उत्तर प्रदेश में 2,769.59 मेगावाट सौर क्षमता स्थापित, सवा लाख से अधिक उपभोक्ताओं का बिजली बिल हुआ शून्य

    हर दिन बन रही 1.25 करोड़ यूनिट बिजली, प्रति वर्ष लगभग 36.6 लाख मीट्रिक टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन कम

    लखनऊ, 
     प्रधानमंत्री सूर्य घरः मुफ्त बिजली योजना ने उत्तर प्रदेश में घरेलू बिजली की तस्वीर बदल दी है। प्रदेश में अब तक 8,24,492 घरों की छतों पर सौर संयंत्र लग चुके हैं और कुल 2,769.59 मेगावाट क्षमता स्थापित हो चुकी है, जिससे हर दिन लगभग 1.25 करोड़ यूनिट स्वच्छ बिजली बन रही है। इस उपलब्धि के साथ उत्तर प्रदेश घरेलू छत आधारित (रूफटॉप) सौर ऊर्जा में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो गया है।
       औसतन 4.5 यूनिट प्रति किलोवाट प्रतिदिन के आधार पर यह उत्पादन ₹6.50 प्रति यूनिट की दर से हर दिन लगभग ₹8.10 करोड़ मूल्य की बिजली के बराबर बैठता है। इस हिसाब से प्रदेश में प्रतिवर्ष करीब ₹2,956 करोड़ की बचत या आर्थिक लाभ का अनुमान है, जो सीधे आम उपभोक्ता की जेब तक पहुंच रहा है।

    सवा लाख से अधिक घरों का बिजली बिल शून्य या ऋणात्मक
      प्रधानमंत्री सूर्य घर उपभोक्ता बिल विवरण के अनुसार जून 2026 में प्रदेश के 1,25,262 उपभोक्ताओं का बिजली बिल शून्य या ऋणात्मक रहा। यानी इन परिवारों को उस महीने बिजली का कोई भुगतान नहीं करना पड़ा या उनके खाते में क्रेडिट दर्ज हुआ। ऋणात्मक बिल की स्थिति तब बनती है, जब उपभोक्ता ग्रिड से ली गई बिजली की तुलना में अधिक बिजली ग्रिड को देता है और यह अतिरिक्त बिजली उसके आगामी बिलों में समायोजित होती है।

    ₹7,300 करोड़ से अधिक की सहायता बनी संबल
       योजना के अंतर्गत प्रदेश के उपभोक्ताओं को अब तक ₹5,400 करोड़ से अधिक की केंद्रीय वित्तीय सहायता दी जा चुकी है, जबकि उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से लाभार्थियों को ₹1,900 करोड़ से अधिक का राज्य अनुदान मिला है। कुल ₹7,300 करोड़ से अधिक की इस सहायता ने घरेलू उपभोक्ताओं के लिए सौर संयंत्र लगाना कहीं अधिक सुलभ और किफायती बना दिया है।

    हर साल 36.6 लाख टन कार्बन उत्सर्जन की बचत
        स्थापित 2,769.59 मेगावाट क्षमता से प्रतिवर्ष लगभग 36.6 लाख मीट्रिक टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन कम होने का अनुमान है, जो करीब 16.5 करोड़ परिपक्व वृक्षों द्वारा एक वर्ष में सोखी जाने वाली कार्बन मात्रा के बराबर है। छत आधारित मॉडल के कारण लगभग 10,617 एकड़ भूमि बड़े भू-आधारित सौर संयंत्रों में लगने से बच रही है और कृषि, आवासीय तथा अन्य उत्पादक उपयोगों के लिए सुरक्षित बनी हुई है।

    85 हजार से अधिक लोगों को मिला रोजगार का आधार
      इस योजना से प्रदेश में 85,000 से अधिक प्रत्यक्ष रोजगार का आधार तैयार हुआ है और स्थापित क्षमता बढ़ने के साथ ये अवसर लगातार बढ़ रहे हैं। अभियंताओं, तकनीशियनों, विद्युतकर्मियों, सर्वेक्षकों, पर्यवेक्षकों, आपूर्ति एवं परिवहन से जुड़े कर्मियों तथा अनुरक्षण सेवाओं से जुड़े लोगों के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए रास्ते खुले हैं। प्रदेश में 7,750 पंजीकृत सौर विक्रेताओं (वेंडर) का नेटवर्क उपभोक्ताओं तक सर्वेक्षण, डिजाइन, स्थापना, विद्युत संयोजन, निरीक्षण, संयंत्र चालू करने और अनुरक्षण जैसी सेवाएं पहुंचा रहा है।

      इस योजना के क्रियान्वयन की अवधि 31 मार्च 2027 तक निर्धारित है। इसी अवधि में आवेदन से लेकर संयंत्र की स्थापना, विद्युत निरीक्षण, नेट मीटरिंग और सब्सिडी भुगतान तक की सभी प्रक्रियाएं पूरी की जानी हैं। इन चरणों में समय लगता है, इसलिए अंतिम समय का इंतजार करने वाले उपभोक्ताओं को सब्सिडी का लाभ लेने में कठिनाई आ सकती है।
      इच्छुक घरेलू उपभोक्ताओं से अपील है कि वे राष्ट्रीय पोर्टल pmsuryaghar.gov.in पर अथवा अपने विद्युत वितरण निगम के पंजीकृत वेंडर के माध्यम से शीघ्र आवेदन करें, ताकि केंद्र सरकार की सब्सिडी और राज्य सरकार के अतिरिक्त अनुदान का पूरा लाभ समय रहते लिया जा सके। जितनी जल्दी संयंत्र लगेगा, उतने ही अधिक महीनों तक मुफ्त बिजली और बिल में बचत का लाभ मिलेगा।

  • पीएम मोदी आज करेंगे Semicon India 2026 का उद्घाटन, 300 अंतरराष्ट्रीय कंपनियां होंगी शामिल

    पीएम मोदी आज करेंगे Semicon India 2026 का उद्घाटन, 300 अंतरराष्ट्रीय कंपनियां होंगी शामिल

    नई दिल्ली
     प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज  यहां तीन दिवसीय सेमीकॉन इंडिया 2026 का उद्घाटन करेंगे. इसमें वैश्विक चिप निर्माता, नीति निर्माता और निवेशक और प्रौद्योगिकी कंपनियां एक साथ आएंगी, क्योंकि भारत अपने सेमीकंडक्टर विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र का प्रदर्शन करेगा। 

    द्वारका के यशोभूमि में 'सिलिकॉन टू सिस्टम्स: बिल्डिंग द इकोसिस्टम' थीम के तहत हो रहा यह इवेंट इस बात पर जोर देता है कि भारत अब यह नहीं पूछ रहा है कि वह चिप्स बना सकता है या नहीं, बल्कि अब वह यह पूछ रहा है कि वह अपने आस-पास सब कुछ कितनी तेजी से बना सकता है। 

    तीन दिनों में 600 से अधिक प्रदर्शक, 300 अंतरराष्ट्रीय कंपनियां 15,000 वर्ग मीटर स्थान को भर देगी और 150 से अधिक प्रसिद्ध वक्ता ज्ञान और बुद्धिमत्ता को साझा करेंगे. छह देश मंडप और 12 राज्य मंडप एक स्टार्टअप शोकेस, एक छात्र हैकथॉन, एक श्रमिक विकास मंडप और महिला फोरम के साथ बैठेंगे. इनमें से प्रत्येक पारिस्थितिकी तंत्र की एक छोटी झलक जिसे भारत ने पांच साल में बनाया है देखा जा सकता है. एक सरकारी विज्ञप्ति में कहा गया है। 

    गौरतलब है कि चिप को डिजाइन करने में सालों और बनाने में महीनों लग जाते हैं, लेकिन इसका असर हर फोन, हर कार, हर अस्पताल के उपकरण पर लंबे समय तक रहता है. आज हमारे जीवन का हर उपकरण इस बात पर निर्भर करता है कि किसी ने, कहीं न कहीं, उस चिप को पहले बनाया है। 

    चिप्स अब एक आला उत्पाद नहीं हैं. वे कारों, ड्रोन, हवाई जहाज, एमआरआई मशीनों और उपग्रहों के अंदर होते हैं. फिलहाल, वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग का मूल्य लगभग 4.3 ट्रिलियन डॉलर है और यह तेजी से बढ़ रहा है. सेमीकंडक्टर इस बढ़ते ढांचे के ठीक आधार पर हैं, इसकी नींव बनाते हैं. ऑटोमोबाइल, हेल्थकेयर से लेकर डिफेंस तक हर दूसरा उद्योग इस बात पर निर्भर करता है कि चिप फैब्रिकेशन प्लांट से क्या निकलता है. यही बात सेमीकंडक्टर को एक आधारभूत उद्योग बनाती है. बयान में कहा गया है। 

    दुनिया ने यह मुश्किल तरीके से सीखा. उदाहरण के लिए कोविड महामारी के दौरान कार फैक्ट्रियों को बंद करना पड़ा. स्टील या लेबर की कमी की वजह से नहीं, बल्कि इसलिए कि उन्हें चिप्स नहीं मिल पा रहे थे. जिन देशों ने दशकों तक सेमीकंडक्टर को किसी और की समस्या माना था, वे अचानक अपनी कैपेसिटी बनाने के लिए दौड़ पड़े. महामारी ने चिप्स की रेस नहीं लगाई. इसने बस सभी को और तेज दौड़ने पर मजबूर कर दिया,' इसमें कहा गया। 

    सेमीकंडक्टर में भारत की दिलचस्पी उससे भी पुरानी है जितना ज़्यादातर लोग सोचते हैं. दशकों की चुपचाप कोशिशें, छोटी शुरुआत, और मुश्किल से सीखे गए सबक. लंबे समय से यह इच्छा थी, लेकिन इसके आस-पास का इकोसिस्टम कभी ठीक से नहीं बन पाया. यह एक अलग नजरिए से बदल गया. विदेशी निवेश, टैक्स और कस्टम में सुधारों ने इसके लिए दरवाजे खोल दिए. ग्लोबल इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियों ने धीरे-धीरे भारत में मैन्युफैक्चरिंग लाइनें लगानी शुरू कर दी और इसके नतीजों को नकारना मुश्किल है। 

    सरकारी विज्ञप्ति के अनुसार 2014-15 में भारत ने लगभग 1.9 लाख करोड़ रुपये मूल्य के इलेक्ट्रॉनिक्स सामान का उत्पादन किया. 2025-26 तक यह संख्या 13.11 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई, जो सात गुना वृद्धि है. इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात लगभग 38,000 करोड़ रुपये से बढ़कर 4.24 लाख करोड़ रुपये हो गया जो ग्यारह गुना वृद्धि है। 

    मोबाइल फोन एक और भी तीखी कहानी बताते हैं. उत्पादन 33 गुना बढ़ा 18,000 करोड़ रुपये से 6.27 लाख करोड़ रुपये हो गया. निर्यात 165 गुना बढ़ा, लगभग 1,500 करोड़ रुपये से 2.59 लाख करोड़ रुपये हो गया. 2014 में भारत के शीर्ष 100 निर्यात किए गए सामानों में स्मार्टफ़ोन भी शामिल नहीं थे। 

    वित्त वर्ष 2025-26 में स्मार्टफोन भारत का सबसे बड़ा एक्सपोर्ट किया जाने वाला कमोडिटी बन गया. पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स और जेम्स एंड ज्वेलरी से भी आगे. भारत अब अपने इस्तेमाल होने वाले 99.2 फीसदी फोन खुद बनाता है, और मोबाइल के नेट इंपोर्टर से नेट एक्सपोर्टर बन गया है. यह पूरा मैन्युफैक्चरिंग इंजन अब 2.5 मिलियन नौकरियों को सपोर्ट करता है, ऐसा कहा गया। 

    एक देश जो कभी इलेक्ट्रॉनिक्स में गलत शुरुआत के लिए जाना जाता था, अब वॉल्यूम के हिसाब से दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरर है. भारत का सेमीकंडक्टर पुश अब सिर्फ एक घरेलू कहानी नहीं है. इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के पाँचवें दिन, भारत औपचारिक रूप से पैक्स सिलिका कोएलिशन में शामिल हो गया. इसमें कहा गया है कि यह कोएलिशन अमेरिका और दूसरे पार्टनर देशों को एक साथ लाता है, जो ग्लोबल सिलिकॉन सप्लाई चेन को सुरक्षित करने पर फोकस करता है। 

    बयान में आगे कहा गया, 'इसका लक्ष्य जरूरी मिनरल और फैब्रिकेशन से लेकर एडवांस्ड एआई सिस्टम और डिप्लॉयमेंट इंफ़्रास्ट्रक्चर तक पूरे 'सिलिकॉन स्टैक' को सुरक्षित करना है. मिशन आसान है. जरूरी सामान का प्रोडक्शन और डिलीवरी सिर्फ कुछ कंपनियों, देशों या लोगों पर निर्भर नहीं होनी चाहिए. आर्थिक दबाव का विरोध करें. इस सदी को तय करने वाली टेक्नोलॉजी को खुले, लोकतांत्रिक देशों के हाथों में रखें. भारत के लिए यह इस बात का सबूत है कि उसके सेमीकंडक्टर के सपने अब उसकी अपनी सीमाओं से कहीं आगे तक पहुँच गए हैं।