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  • हमले की योजना बना रहे 8 संदिग्ध गिरफ्तार, पाकिस्तान और बांग्लादेश से जुड़े तार

    हमले की योजना बना रहे 8 संदिग्ध गिरफ्तार, पाकिस्तान और बांग्लादेश से जुड़े तार

    नई दिल्ली.

    दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने एक बड़े अंतर्राज्यीय आतंकी मॉड्यूल का पर्दाफाश करते हुए आठ संदिग्धों को गिरफ्तार किया है। अधिकारियों ने रविवार को बताया कि इस मॉड्यूल के तार पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI और बांग्लादेश स्थित कट्टरपंथी संगठनों से जुड़े हैं। यह कार्रवाई तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में चलाए गए एक समन्वित सुरक्षा अभियान के तहत की गई है।

    पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार किए गए आठ संदिग्धों में से छह को तमिलनाडु के तिरुप्पुर जिले में स्थित विभिन्न गारमेंट फैक्ट्रियों से हिरासत में लिया गया। इनकी पहचान मिजानुर रहमान, मोहम्मद शबात, उमर, मोहम्मद लिटन, मोहम्मद शाहिद और मोहम्मद उज्ज्वल के रूप में हुई है। वहीं, दो अन्य संदिग्धों को पश्चिम बंगाल से गिरफ्तार किया गया है। जांच में यह भी सामने आया है कि गिरफ्तार किए गए कुछ व्यक्ति बांग्लादेशी नागरिक हैं, जो अपनी पहचान छिपाने के लिए जाली आधार कार्ड का इस्तेमाल कर रहे थे।

    इस मॉड्यूल का पर्दाफाश दिल्ली के विभिन्न हिस्सों विशेषकर दिल्ली मेट्रो नेटवर्क में हाल ही में दिखाई दिए भड़काऊ पोस्टरों के बाद हुआ। इन पोस्टरों में कश्मीर से संबंधित भड़काऊ सामग्री और आपत्तिजनक बातें लिखी गई थीं, जिससे सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गईं। स्पेशल सेल ने जब पोस्टरों के स्रोत की गहन जांच शुरू की, तो कड़ियां तमिलनाडु में सक्रिय इस नेटवर्क से जुड़ीं, जिसके बाद छापेमारी कर गिरफ्तारियां की गईं।

    बड़ी साजिश को नाकाम करने का दावा
    जांचकर्ताओं के अनुसार, ये संदिग्ध अपने विदेशी आकाओं के इशारे पर भारत में एक बड़े आतंकवादी हमले की योजना बना रहे थे। ऑपरेशन के दौरान पुलिस ने 8 मोबाइल फोन और 16 सिम कार्ड बरामद किए हैं। इन डिजिटल उपकरणों की फॉरेंसिक जांच की जा रही है ताकि अन्य गुर्गों और उनके विदेशी संपर्कों के बारे में और अधिक साक्ष्य जुटाए जा सकें। पकड़े गए सभी संदिग्धों को ट्रांजिट रिमांड पर दिल्ली लाया जा रहा है, जहां उनसे सघन पूछताछ की जाएगी। पुलिस अधिकारी इसे एक बड़ी सफलता मान रहे हैं, क्योंकि इससे समय रहते एक संभावित आतंकी साजिश को टाल दिया गया है। फिलहाल, इस मॉड्यूल की फंडिंग के स्रोतों और सीमा पार संपर्कों की पहचान के लिए विस्तृत जांच जारी है।

  • शरद पवार की तबीयत फिर बिगड़ी, पुणे के रूबी हॉल क्लिनिक में दोबारा भर्ती

    शरद पवार की तबीयत फिर बिगड़ी, पुणे के रूबी हॉल क्लिनिक में दोबारा भर्ती

    नई दिल्ली.

    राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (SP) के संस्थापक और महाराष्ट्र के चार बार मुख्यमंत्री रह चुके दिग्गज नेता शरद पवार को रविवार को एक बार फिर पुणे के रूबी हॉल क्लिनिक में भर्ती कराया गया है। पिछले कुछ दिनों से उनकी सेहत में उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। उनकी बेटी और बारामती की सांसद सुप्रिया सुले ने सोशल मीडिया के माध्यम से इस खबर की पुष्टि की है।

    ताजा जानकारी के अनुसार, शरद पवार पिछले कुछ दिनों से खांसी और गले के संक्रमण से जूझ रहे थे। शनिवार को अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद वे अपने आवास पर विश्राम कर रहे थे, लेकिन रविवार सुबह उन्हें अत्यधिक कमजोरी और शरीर में पानी की कमी महसूस हुई। डॉक्टरों की सलाह पर परिवार ने उन्हें तुरंत आगे की जांच और चिकित्सकीय देखरेख के लिए अस्पताल में भर्ती करने का निर्णय लिया।
    सुप्रिया सुले ने एक्स पर लिखा, "हम बाबा को फॉलो-अप टेस्ट और हाइड्रेशन के लिए पुणे के रूबी हॉल में भर्ती कर रहे हैं। हम सभी डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों का आभार व्यक्त करते हैं।"

    85 साल के शरद पवार को पिछले हफ्ते भी इसी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उस समय उन्हें सांस लेने में कठिनाई और सीने में संक्रमण की शिकायत थी। डॉक्टरों ने उन्हें एंटीबायोटिक्स का पांच दिनों का कोर्स दिया था और शनिवार को ही उन्हें अस्पताल से छुट्टी मिली थी। हालांकि, डॉक्टरों ने उन्हें 3-4 दिन पूर्ण विश्राम की सलाह दी थी, लेकिन उनकी स्थिति में सुधार न होने के कारण उन्हें दोबारा भर्ती करना पड़ा।

    आपको बता दें कि हाल ही में पवार परिवार पर आए दुखों के पहाड़ ने भी वरिष्ठ नेता के स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव डाला है। जनवरी के अंत में एक विमान हादसे में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और उनके भतीजे अजित पवार के असामयिक निधन के बाद से शरद पवार बारामती में परिवार को संभालने में व्यस्त थे। इस दौरान हुई भागदौड़ और मानसिक तनाव ने उनकी सेहत पर प्रतिकूल असर डाला है।

    रूबी हॉल क्लिनिक के डॉक्टरों के अनुसार, शरद पवार की स्थिति फिलहाल स्थिर है। उनके महत्वपूर्ण अंगों की स्थिति सामान्य है, लेकिन उम्र और संक्रमण को देखते हुए उन्हें विशेष निगरानी में रखा गया है। अस्पताल प्रशासन ने समर्थकों और कार्यकर्ताओं से अपील की है कि वे अस्पताल में भीड़ न लगाएं ताकि अन्य मरीजों को असुविधा न हो।

  • चुनाव से पहले कांग्रेस से मोहभंग!, बीजेपी में शामिल हुए असम कांग्रेस के पूर्व चीफ भूपेन बोरा

    चुनाव से पहले कांग्रेस से मोहभंग!, बीजेपी में शामिल हुए असम कांग्रेस के पूर्व चीफ भूपेन बोरा

    नई दिल्ली.

    असम कांग्रेस के पूर्व चीफ भूपेन बोरा ने कई अटकलों के बीच बीजेपी का दामन थाम लिया है। असम बीजेपी चीफ दिलीप सैकिया और बीजेपी सांसद बैजयंत पांडा की उपस्थिति में उन्होंने बीजेपी की सदस्यता ग्रहण की। एक दिन पहले ही बोरा ने गृह में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की थी।

    बोरा ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा, भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बैजयंत पांडा और लखीमपुर के विधायक मनाब डेका की मौजूदगी में शाह से मुलाकात की थी। बैठक के बाद बोरा ने पत्रकारों को बताया कि मुख्यमंत्री ने उन्हें शाह से मिलने के लिए कहा था, इसलिए वह उनसे शिष्टाचार भेंट करने आए थे।

    उन्होंने दावा किया कि आठ मार्च तक आत्मसम्मान और राज्य के प्रति 'राष्ट्रवादी' भावना रखने वाले लगभग 50 प्रतिशत कांग्रेस सदस्य भाजपा में शामिल हो जाएंगे। हालांकि उन्होंने 22 फरवरी को ही बीजेपी की सदस्यता ग्रहण कर ली। बोरा सोमवार को कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया था। हालांकि पार्टी आला कमान ने इसे स्वीकार नहीं किया और वरिष्ठ नेता उनके आवास पर मिलने पहुंचे। राहुल गांधी ने भी उनसे फोन पर बात की। कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने बोरा से अपने फैसले पर पुनर्विचार करने को कहा था, लेकिन अगले दिन मुख्यमंत्री शर्मा उनके आवास पर पहुंचे और घोषणा की कि बोरा 22 फरवरी को भाजपा में शामिल होंगे।

  • झूठा हलफनामा पेश करने पर हाई कोर्ट सख्त, मेट्रो रेल के महाप्रबंधक को व्यक्तिगत किया तलब

    झूठा हलफनामा पेश करने पर हाई कोर्ट सख्त, मेट्रो रेल के महाप्रबंधक को व्यक्तिगत किया तलब

    जबलपुर.

    हाई कोर्ट ने मध्य प्रदेश मेट्रो रेल निगम लिमिटेड के महाप्रबंधक हरिओम शर्मा को निर्देश दिए हैं कि वे व्यक्तिगत रूप से हाजिर होकर यह स्पष्टीकरण दें कि उन्होंने अदालत में झूठा हलफनामा क्यों पेश किया। जस्टिस विशाल मिश्रा की एकलपीठ ने महाप्रबंधक को 23 फरवरी को उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं।

    क्या है मामला
    यह मामला भोपाल मुख्य रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म क्रमांक छह के समीप चल रहे मेट्रो निर्माण कार्य के कारण उत्पन्न अवरोध एवं बैरिकेडिंग से संबंधित है। भोपाल निवासी श्रीनिवास अग्रवाल व अन्य की ओर से दायर याचिका में कहा गया कि मेट्रो प्रबंधन ने फेंसिंग और बैरिकेडिंग पूरी तरह से नहीं हटाई है। इससे आवागमन में दिक्कत हो रही है।

    हलफनामे में कहा गया कि बैरिकेडिंग हटा दी गई है
    इस पर मेट्रो रेल प्रशासन की ओर से हलफनामे में कहा गया कि बैरिकेडिंग हटा दी गई है। इस पर हाई कोर्ट ने कलेक्टर से रिपोर्ट मांगी थी। कलेक्टर भोपाल द्वारा किए गए स्थल निरीक्षण के आधार पर रिपोर्ट में बताया गया कि याचिकाकर्ताओं को मात्र लगभग 3.75 फीट का संकरा मार्ग उपलब्ध कराया गया है, जो व्यवहारिक उपयोग के लिए पर्याप्त नहीं है।

    तीनों ओर की बैरिकेडिंग हटाई नहीं गई
    यह भी बताया गया कि तीनों ओर की बैरिकेडिंग हटाई नहीं गई है, जबकि महाप्रबंधक द्वारा न्यायालय में प्रस्तुत शपथपत्र में यह उल्लेख किया गया था कि बैरिकेडिंग पूर्णतः हटा दी गई है।

  • धार में ट्रक ड्राइवर ने कंटेनर को मारी टक्कर, तीन घंटे तक फंसा रहा

    धार में ट्रक ड्राइवर ने कंटेनर को मारी टक्कर, तीन घंटे तक फंसा रहा

    धार.

    धार जिले के धामनोद थाना क्षेत्र में राऊ-खलघाट फोरलेन के गणपति घाट पर देर रात लगभग 3 बजे भीषण सड़क हादसा हो गया। आगे चल रहे कंटेनर में पीछे टैंकर जा घुसा। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि चालक केबिन में बुरी तरह फंस गया। प्राप्त जानकारी के अनुसार ट्रक इंदौर से मुंबई की ओर जा रहा था। इसी दौरान गणपति घाट पर आगे चल रहे कंटेनर से जा टकराया।

    हादसे के बाद चालक भानु पिता रामप्रसाद ट्रॉले की केबिन में बुरी तरह फंस गया। वह करीब साढ़े तीन घंटे तक वहीं फंसा रहा। सुबह करीब 7.30 बजे चालक को बहार निकाला गया। इस दौरान एनएचआई के अधिकारी, 112 पुलिस, टोल एंबुलेंस, कटर मशीन और क्रेन भी मौके पर पहुंच चुकी थी। काफी प्रयासों के बावजूद चालक को बाहर निकालने में सफलता नहीं मिल रही थी। आखिरकार सीट तोड़कर सन्नी जाट ने साहस दिखाते हुए चालक को सुरक्षित बाहर निकाला। घायल चालक को तत्काल धामनोद के शासकीय अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉ. रेश्मी सोलंकी द्वारा प्राथमिक उपचार किया गया।

    चालक के पैर में गंभीर चोट
    बताया जा रहा है कि चालक के पैर में गंभीर चोट है। एक्स-रे रिपोर्ट आने के बाद आगे की स्थिति स्पष्ट होगी और आवश्यकता पड़ने पर रेफर भी किया जा सकता है। फिलहाल चालक की हालत स्थिर बताई जा रही है।

  • भाजपा की राष्ट्रीय टीम में दिखेंगे मध्य प्रदेश के कई चेहरे, पार्टी ने 15 नेताओं के नाम भेजे

    भाजपा की राष्ट्रीय टीम में दिखेंगे मध्य प्रदेश के कई चेहरे, पार्टी ने 15 नेताओं के नाम भेजे

    भोपाल.

    भाजपा संगठन की राष्ट्रीय टीम में मध्य प्रदेश के कई चेहरे दिखाई दे सकते हैं। प्रदेश संगठन ने राज्य के ऐसे 15 नेताओं के नाम केंद्रीय नेतृत्व को भेजे हैं, जो अलग-अलग अंचलों से हैं और अभी सत्ता या संगठन के किसी पद पर नहीं हैं। भाजपा के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की टीम का गठन होना है और अन्य मोर्चे भी गठित किए जाने हैं। केंद्रीय नेतृत्व ने इस बारे में प्रदेश संगठन से सुझाव मांगे थे।

    युवा और महिला चेहरों को भी वरीयता
    वर्तमान में मध्य प्रदेश से सत्यनारायण जटिया (संसदीय बोर्ड सदस्य), ओम प्रकाश धुर्वे (राष्ट्रीय सचिव) और लाल सिंह आर्य (राष्ट्रीय अध्यक्ष, एससी मोर्चा) जैसे नेता राष्ट्रीय स्तर पर जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। पार्टी 2029 के लोकसभा चुनाव और संगठन की मजबूती को ध्यान में रखकर अनुभवी नेताओं के साथ-साथ युवा और महिला चेहरों को भी वरीयता देना चाहती है।

    नड्डा की टीम मेंचार नेताओं को स्थान मिला था
    पूर्व अध्यक्ष जेपी नड्डा की टीम में मध्य प्रदेश से कैलाश विजयवर्गीय सहित चार नेताओं को स्थान मिला था। उस दौरान कैलाश विजयवर्गीय राष्ट्रीय महासचिव थे। बाद में वर्ष 2023 में वह राज्य में मंत्री बना दिए गए। पार्टी नेताओं का मानना है कि चूंकि पूर्व में राष्ट्रीय संगठन में एक ही समय में मध्य प्रदेश से दो-दो महासचिव थावरचंद गहलोत और नरेंद्र सिंह तोमर रहे हैं। ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि नितिन नवीन की टीम में भी मध्य प्रदेश का प्रभाव बढ़ सकता है।

    इस बार भी चार से पांच नेताओं को स्थान मिलने की संभावना
    इस बार भी चार से पांच नेताओं को नितिन नवीन की टीम में स्थान मिलने की संभावना है। इसमें एक या दो महिलाएं भी हो सकती हैं। इसके साथ ही युवा नेताओं को भी अवसर मिल सकता है। बाकी अन्य को मोर्चा- प्रकोष्ठ में शामिल किया जा सकता है। दरअसल, मध्य प्रदेश हमेशा से ही भाजपा के लिए एक प्रयोगशाला की तरह रहा है। हिंदू महासभा हो या जनसंघ, दोनों की जड़ें मध्य प्रदेश में मजबूत रही हैं। यही कारण है कि भाजपा यहां लंबे समय से सत्ता में है। संगठन की मजबूती की दूसरी वजह यहां के कुशल संगठनकर्ता भी माने जा सकते हैं। जिनकी वजह से राष्ट्रीय संगठन के स्तर पर भी यहां के भाजपा कार्यकर्ताओं का दबदबा रहा है।

  • ग्वालियर मेडिकल सोल्लगे के इंटर्न छात्र को आया दिल का दौरा, जेएएच से ग्रीन कॉरिडोर बनाकर पुरानी छावनी तक पहुंचाया

    ग्वालियर मेडिकल सोल्लगे के इंटर्न छात्र को आया दिल का दौरा, जेएएच से ग्रीन कॉरिडोर बनाकर पुरानी छावनी तक पहुंचाया

    ग्वालियर.

    जीआरएमसी (GRMC) के इंटर्न छात्र को दिल का दौरा पड़ने के बाद उसकी हालत बिगड़ती जा रही थी। शनिवार रात को उसे दिल्ली ले जाने के लिए ट्रैफिक पुलिस द्वारा ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया। पहले उसे एयर एंबुलेंस से ले जाया जा रहा था, लेकिन रात में एयर एंबुलेंस लैंड नहीं हो सकी। इसके चलते आपात स्थिति में रात करीब 10 बजे ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया।

    महज 20 मिनट में ही जेएएच से पुरानी छावनी ले जाया गया। जीआरएमसी के इंटर्न छात्र शैलेंद्र को दिल का दौरा पड़ा था। ग्वालियर में वह जेएएच में भर्ती था। यहां उसकी हालत में सुधार नहीं आया। इसके चलते शनिवार दोपहर में उसे दिल्ली ले जाने का निर्णय लिया गया।

    रात तक एयर एंबुलेंस नहीं आ सकी
    एयर एंबुलेंस से संपर्क किया। जेएएच प्रबंधन द्वारा पुलिस को सूचना दी गई, जिससे एंबुलेंस को एयरपोर्ट तक पहुंचने में परेशानी न हो। जाम का सामना न करना पड़े। रात तक एयर एंबुलेंस न आ सकी। इसके बाद छात्र को सड़क मार्ग से ही ले जाने का निर्णय लिया गया।

    महज आधा घंटे में ही सारे इंतजाम कर लिए
    रात 9:30 बजे ट्रैफिक पुलिस को सूचना मिली। महज आधा घंटे में ही सारे इंतजाम कर लिए गए। तुरंत ही जेएएच से लेकर पुरानी छावनी तक सभी मार्गों पर ट्रैफिक रोक दिया गया। जेएएच से एंबुलेंस रवाना हुई। पूरे रास्ते कहीं भी एंबुलेंस नहीं फंसी। आगे पुलिस की गाड़ी चल रही थी, साथ में एंबुलेंस जा रही थी। महज 20 मिनट में जेएएच से पुरानी छावनी पहुंचा दिया गया। पुरानी छावनी में बानमोर बॉर्डर तक एंबुलेंस को छोड़ा गया। दरअसल, छात्र शैलेंद्र को हाथ में दर्द की शिकायत लेकर न्यूरोसर्जरी विभाग पहुंचे थे, जहां अचानक उन्हें सीवियर हार्ट अटैक (गंभीर हृदयाघात) आ गया। जैसे ही छात्र की तबीयत बिगड़ी, वहां मौजूद चिकित्सकों ने तत्काल प्राथमिक उपचार शुरू किया और उन्हें भर्ती कर गहन निगरानी में रखा।

    स्वजन दिल्ली से ग्वालियर पहुंच गए
    हृदय रोग विशेषज्ञ एवं विभागाध्यक्ष, कार्डियक सेंटर जया आरोग्य अस्पताल डॉ. पुनीत रस्तोगी ने बताया कि छात्र को काफी गंभीर हार्ट अटैक आया है। शैलेंद्र को हार्ट अटैक आने की सूचना मिलते ही उनके स्वजन दिल्ली से ग्वालियर पहुंच गए। छात्र की नाजुक स्थिति को देखते हुए स्वजन बेहतर इलाज के लिए दिल्ली रेफर किया गया है।

    युवा वर्ग में बढ़ते हार्ट अटैक ने बढ़ाई चिंता
    अस्पताल परिसर में एक युवा डॉक्टर के साथ हुई इस घटना ने छात्रों के बीच चिंता बढ़ा दी है। डॉक्टरों का कहना है कि हाथ में दर्द या सीने में भारीपन जैसे संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। सही समय पर विशेषज्ञ के पास पहुंचकर 
    उपचार कराना चाहिए। शहर में दिल के दौरे के मरीज बढ़ते जा रहे हैं।

  • लालू की आरजेडी की स्थिति कमजोर, लेफ्ट-उद्धव-पवार की पावर दिखी कम, राज्यसभा चुनाव की मिस्ट्री गहरी

    लालू की आरजेडी की स्थिति कमजोर, लेफ्ट-उद्धव-पवार की पावर दिखी कम, राज्यसभा चुनाव की मिस्ट्री गहरी

     नई दिल्ली
       
    देश के 10 राज्यों की 37 राज्यसभा सीटों पर 16 मार्च को चुनाव है, जिसे लेकर राजनीतिक दांव पेच सेट किए जाने लगे हैं. कांग्रेस और बीजेपी को पहले से ज्यादा सीटें मिलती दिख रही हैं तो क्षेत्रीय दलों के लिए यह चुनाव काफी मुश्किल भरा लग रहा है. लालू यादव की आरजेडी से लेकर शरद पवार की एनसीपी और उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) को एक सीट मिलती नहीं दिख रही है. वहीं बीआरएस और लेफ्ट का पूरी तरह सफाया हो रहा है. 

    महाराष्ट्र की 7, तमिलनाडु की 6, बिहार की 5, पश्चिम बंगाल की 5, ओडिशा की 4 और असम की 3, हरियाणा, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना की 2-2 और हिमाचल प्रदेश की 1 राज्यसभा सीट के​ लिए 16 मार्च को चुनाव होने हैं. इन 37 राज्यसभा सीटों में से फिलहाल बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए के पास 15 और कांग्रेस नेतृत्व वाले इंडिया ब्लॉक के पास 18 सीटें हैं. इसके अलावा 4 सीटें अन्य दलों के पास हैं. हालांकि, इन सीटों के लिए अब जो चुनाव हो रहे हैं, उनमें सियासी गणित बदले हुए हैं, जिसमें एनडीए को लाभ तो इंडिया ब्लॉक के घटक दलों को सियासी नुकसान हो सकता है. 

    कांग्रेस-बीजेपी को फायदा तो घाटा किसे? 

    बिहार से लेकर महाराष्ट्र, ओडिशा और तेलंगाना विधानसभा की स्थिति पहले से काफी बदल गई है, जिसका सियासी असर सीधे तौर पर राज्यसभा के चुनाव पर पड़ता नजर आ रहा है. देश के जिन राज्यों में राज्यसभा चुनाव हो रहे हैं, उसके लिहाज से देखें तो एनडीए की सीटें 15 से बढ़कर 18 होने की संभावना है तो इंडिया ब्लॉक की सीटें 18 से घटकर 14 से 15 हो सकती हैं. 

    राज्यसभा की इन 37 सीटों में से फिलहाल बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए के पास 15 सीटें हैं, जिसमें बीजेपी के पास 9, जेडीयू के पास 2 , AIADMK के पास 1, आरएलएम के पास 1 और 1 सीट आरपीआई के पास है. आगामी चुनावों के बाद बीजेपी की सीटें 9 से बढ़कर 12 हो सकती हैं, तो जेडीयू और AIADMK अपनी-अपनी सीटों को बचाए रख सकती हैं.

    वहीं, विपक्षी गठबंधन इंडिया ब्लॉक की बात करें तो चुनाव वाले 37 में से 18 राज्यसभा सीटें उसके कब्जे में हैं, जिसमें से 4 सीटें कांग्रेस के पास, 4 सीटें टीएमसी के पास, 4 सीटें डीएमके के पास और आरजेडी के पास 2 सीटें हैं. एक सीट शिवसेना (यूबीटी) और एक सीट सीपीआईएम के पास है. आगामी चुनावों के बाद कांग्रेस को एक सीट का लाभ हो सकता है तो नुकसान शरद पवार की एनसीपी से लेकर उद्धव ठाकरे और लालू यादव की पार्टी को हो सकता है. ममता बनर्जी और डीएमके अपनी सीटें बचा ले जाएंगी.

    चुनाव वाली 37 राज्यसभा सीटों में से 4 सीटें अन्य दलों के पास हैं, जिसमें बीजेडी के पास 2 और 1 सीट बीआरएस और 1 सीट तमिलनाडु के क्षेत्रीय दल के कब्जे में है. आगामी चुनावों के बाद बीजेडी हाफ तो बीआरएस पूरी तरह साफ हो जाएगी. इसके अलावा वामदल भी अपनी राज्यसभा सीट नहीं बचा पाएंगे? 

    लालू की आरजेडी क्या हो जाएगी साफ
    बिहार की पांच राज्यसभा सीटों पर चुनाव हो रहे हैं. विधानसभा की मौजूदा स्थिति के लिहाज से एनडीए चार सीटें आसानी से जीत लेगी और एक सीट पर सियासी मिस्ट्री उलझी हुई है. एनडीए के पास 202 विधायक तो महागठबंधन के पास 35 विधायक और 7 अन्य विधायक हैं. राज्यसभा की एक सीट के लिए 41 विधायकों का समर्थन चाहिए. ऐसे में महागठबंधन अपने दम पर एक भी सीट जीतने की स्थिति में नहीं है. इसका सीधे नुकसान आरजेडी को होता दिख रहा है. 

    41 वोट के लिहाज से चार राज्यसभा सीटें जीतने के लिए एनडीए को 164 विधायकों के समर्थन की जरूरत पड़ेगी. इसके बाद एनडीए के पास 38 सीटें बचेंगी और पांचवी सीट जीतने के लिए उसे 3 विधायकों का अतरिक्त समर्थन चाहिए होगा. वहीं, आरजेडी, कांग्रेस और लेफ्ट दलों को मिलाकर इंडिया ब्लॉक के पास 35 विधायक हैं. ऐसे में महागठबंधन को एक सीट जीतने के लिए 6 अतरिक्त वोटों की जरूरत होगी. बिहार के राज्यसभा चुनाव में जिस तरह की सियासी मिस्ट्री बन गई है, उसके लिहाज से आरजेडी को एक सीट जीतना भी मुश्किल दिख रहा है.

    एनडीए सभी पांचों सीटें जीतने की कवायद में है, जिसके संकेत जेडीयू नेता अशोक चौधरी ने दे दिए हैं. विपक्ष अगर संयुक्त रूप से चुनाव लड़े तो जीत सकता है, पर AIMIM से लेकर बसपा तक का सियासी स्टैंड अलग ही राह पर दिख रहा है. ऐसे में आरजेडी का राज्यसभ चुनाव में सफाया हो सकता है, क्योंकि AIMIM अपना उम्मीदवार उतारने की बात कह रहा है. 
    पवार और उद्धव का पावर होगा कम

    महाराष्ट्र की सात राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव हो रहे हैं, लेकिन विधानसभा चुनाव के बाद बदले समीकरणों ने शरद पवार और उद्धव ठाकरे की सियासी जमीन को तंग कर दिया है. महाराष्ट्र में एक राज्यसभा सीट जीतने के लिए 37 विधायकों के समर्थन की जरूरत है. राज्य में वर्तमान में कुल 284 विधायक हैं, जिसमें बीजेपी के पास 131, शिंदे की शिवसेना के पास 57 और अजित पवार की एनसीपी के पास 40 विधायक हैं. इस तरह एनडीए के 228 विधायक होते हैं, जिसके दम पर वह राज्य की 7 राज्यसभा सीटों में से 6 सीटें आसानी से जीत सकती है. बीजेपी को चार सीटें तो एकनाथ शिंदे और अजित पवार की पार्टी को 1-1 सीट मिल सकती हैं. दूसरी ओर शरद पवार की एनसीपी के 10, उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) के 20 और कांग्रेस के 16 विधायक हैं. इस तरह तीनों दल मिलकर अगर एक उम्मीदवार को जिता सकते हैं, लेकिन उन्हें 1 अतिरिक्त विधायक के समर्थन की जरूरत पड़ेगी. वहीं अगर, एनडीए अपने 7वें उम्मीदवार को जिताना चाहता है तो उसे 31 अतिरिक्त विधायकों के समर्थन की जरूरत होगी.

    शिवसेना (यूटीबी) के नेता आदित्य ठाकरे ने राज्यसभा सीट पर दावा ठोक दिया है. उन्होंने कहा कि विधायकों की संख्या को देखते हुए, राज्यसभा की सीट पर शिवसेना का हक बनता है. महाविकास आघाड़ी में बातचीत कर आगे बढ़ेंगे, लेकिन असल दिक्कत है कि शरद पवार का कार्यकाल भी खत्म हो रहा है. शरद पवार राज्यसभा में अपनी वापसी के फिराक में हैं, लेकिन नंबर गेम में पिछड़ रहे हैं. ऐसे में उद्धव ठाकरे और शरद पवार दोनों में से किसी एक को अपने कदम पीछे खींचने होंगे. 

    महाराष्ट्र में शरद पवार सहित एनसीपी (एसपी) के दो राज्यसभा सदस्यों का कार्यकाल खत्म हो रहा है तो उद्धव ठाकरे की पार्टी से प्रियंका चतुर्वेदी का टर्म पूरा हो रहा. शरद पवार की वापसी होती है तो एनसीपी को एक सीट का नुकसान होगा और उद्धव ठाकरे की पार्टी का सफाया हो जाएगा. शिवसेना अगर अपनी सीट बचाती है तो शरद पवार की राज्यसभा में वापसी नहीं हो पाएगी. इस तरह कुल मिलाकर राज्यसभा चुनाव महाविकास अघाड़ी के लिए किसी इम्तिहान से कम नहीं हैं. 

    लेफ्ट से बीआरएस तक का सफाया

    पश्चिम बंगाल की 5 सीटों में से टीएमसी अपनी चारों सीटें बचा लेगी, लेकिन यहां पर एक सीट सीपीएम को खोनी पड़ सकती है, जो बीजेपी के खाते में जा सकती है. इस तरह लेफ्ट का बंगाल से कोई प्रतिनिधित्व अब राज्यसभा में नहीं रह जाएगा. तेलंगाना की दोनों राज्यसभा सीटों पर चुनाव हो रहे हैं, जो कांग्रेस के खाते में जा सकती हैं और यहां पर बीआरएस को अपनी एक सीट गंवानी पड़ सकती है. इस तरह लेफ्ट और बीआरएस का राज्यसभा में सफाया हो जाएगा. 

    ओडिशा में चार सीटों में से बीजेपी 3 सीटें आसानी से जीत लेगी और बीजेडी को एक सीट से संतोष करना पड़ सकता है. इस तरह बीजेडी को दो सीटों का नुकसान उठाना पड़ सकता है. तमिलनाडु की जिन छह राज्यसभा सीटों पर चुनाव हो रहे हैं, विधानसभा की स्थिति के लिहाज से डीएमके आसानी से चार सीटें और एक सीट AIADMK  जीत लेगी, एक सीट पर मुकाबला हो सकता है. असम की तीन राज्यसभा सीटों में से बीजेपी के पास 2 और असम गण परिषद के पास एक सीट है. नए चुनावी समीकरणों के हिसाब से असम गण परिषद को अपनी सीट गंवानी पड़ सकती है. 

    छत्तीसगढ़ की दो सीटों में से एक सीट बीजेपी और एक सीट कांग्रेस के खाते में जा सकती है. इस तरह कांग्रेस को एक सीट का नुकसान उठाना पड़ सकता. ऐसे ही हरियाणा की दो सीटें बीजेपी के पास हैं, लेकिन मौजूदा विधानसभा के लिहाज से एक सीट बीजेपी और एक सीट कांग्रेस आसानी से जीत लेंगी. ऐसे में बीजेपी को एक सीट का नुकसान होगा. हिमाचल की एक सीट पर हो रहे चुनाव में बीजेपी को अपनी यह सीट कांग्रेस के हाथों गंवानी पड़ सकती है.

     

  • भोपाल में घर खरीदना होगा महंगा, एयरोसिटी समेत 621 लोकेशन पर 11 प्रतिशत तक बढ़ेंगे दाम

    भोपाल में घर खरीदना होगा महंगा, एयरोसिटी समेत 621 लोकेशन पर 11 प्रतिशत तक बढ़ेंगे दाम

    भोपाल.

    वित्तीय वर्ष 2026-27 की कलेक्टर गाइडलाइन का प्रस्ताव तैयार कर लिया गया है, जिसको लेकर शनिवार को कलेक्ट्रेट में जिला मूल्यांकन समिति की बैठक आयोजित की गई। जिसमें पंजीयन अधिकारियों ने नई कलेक्टर गाइडलाइन का प्रस्ताव रखा, जिस पर अधिकारियों व समिति के सदस्यों ने चर्चा करते हुए अपने सुझाव रखे।

    11 प्रतिशत तक वृद्धि का प्रस्ताव तैयार
    इस बार अधिकारियों ने शहर के एयरोसिटी, कोहेफिजा, करोंद, लांबाखेड़ा, नवीबाग, मेट्रो रेल लाइन, नए औद्योगिक क्षेत्र, नए राजमार्ग के आसपास सहित करीब 621 लोकेशन पर 11 प्रतिशत तक वृद्धि का प्रस्ताव तैयार किया है। बैठक में जिला मूल्यांकन समिति के अध्यक्ष व कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह, जिला पंजीयक स्वप्नेश शर्मा, मुकेश श्रीवास्तव सहित अन्य अधिकारी व समिति के सदस्य उपस्थित थे। जानकारी के अनुसार वित्तीय वर्ष 2025-26 में हुईं प्रॉपर्टी की रजिस्ट्रियों का विश्लेषण किया गया तो पता चला कि एक हजार 307 लोकेशन पर अत्यधिक दरों पर दस्तावेज रजिस्टर्ड किए गए हैं।

    समीक्षा के दौरान पता चला कि एक ही वार्ड की आसपास की कालोनियों में दरों के अत्यधिक अंतर को देखते हुए 203 लोकेशन और पंजीयन अधिकारियों के सर्वे के आधार पर 91 लोकेशन व नए विकास के कारण 37 लोकेशन में दरों में वृद्धि प्रस्तावित की गई है। इसी तरह टीएंडसीपी से अभिन्यास स्वीकृति व आमजन सुविधा के कारण 38 लोकेशन, नए राष्ट्रीय राजमार्ग, बायपास, रिंग रोड के प्रभाव से 18 लोकेशन और नए औद्योगिक व विशेष आर्थिक क्षेत्रों की स्थापना के कारण तीन लोकेशन प्रभावित पाई गई हैं। इस तरह जिले में कुल 621 लोकेशन में दर वृद्धि का प्रस्ताव तैयार किया गया है।

    शहरी क्षेत्र में डेढ़ से 11 प्रतिशत तक वृद्धि प्रस्तावित
    जिले में कुल दो हजार 882 लोकेशन हैं, जहां पर प्रॉपर्टी की खरीद-फरोख्त की जाती है। इनमें से शहरी क्षेत्र की कुल 551 लोकेशन पर डेढ़ से 11 प्रतिशत तक प्रॉपर्टी की दरों में वृद्धि प्रस्तावित की गई है। इनमें लांबाखेड़ा, नवीबाग, एयरोसिटी राजाभोज परियोजना, सीटीओ कालोनी, कैलाश नगर, पूजाश्री नगर, लाउखेड़ी बीडीए, हाउसिंग बोर्ड कोहेफिजा, ग्राम पलासी एवं पलासी की अन्य कालोनी, पंचवटी एलआईजी, करोंद, जनता नगर व उसके आसपास की अन्य कालोनियां, बड़बई, नरेला बाजयाफ्त, हिरनखेड़ी, घाटखेड़ी, इनायतपुर, फंदा कलां, बैरागढ़ खुमान, बेहटा, मिनाल शॉपिंग, अरेड़ी, सूखसेवनियां, ओंकारा सेवनियां, नर्मदापुरम रोड, अरेरा कालोनी, भोपाल रेलवे स्टेशन सहित अन्य शामिल हैं।
    जबकि नगर पालिका परिषद बैरसिया की करीब 70 लोकेशन पर भी प्रॉपर्टी की दरों में वृद्धि करने का प्रस्ताव है। इनको मिलाकर कुल 621 लोकेशन प्रस्ताव में परिलक्षित की गई हैं।

    मेट्रो रेल लाइन के आसपास प्रॉपर्टी होगी महंगी
    कलेक्टर गाइडलाइन के प्रस्ताव में उन लोकेशन को भी शामिल किया गया है, जहां पर मेट्रो रेल लाइन का काम किया जा रहा है। इनमें सुभाष नगर से एम्स तक के मेट्रो रूट में आने वाले सभी इलाकों में प्रॉपर्टी की दरों में वृद्धि प्रस्तावित है। जबकि सुभाष नगर से करोंद तक के मेट्रो रूट के बीच आने वाले इलाकों में भी प्रॉपर्टी महंगी की जाएगी। सूत्रों ने बताया कि जिन क्षेत्रों में शासन को प्रोजेक्ट लगाने या शासकीय प्रयोजन के लिए जमीन चाहिए, उन लोकेशन पर प्रॉपर्टी की दरें यथावत रखी गई हैं।

    औद्योगिक क्षेत्र में प्रॉपर्टी की दरों में बदलाव का सुझाव
    जिला मूल्यांकन समिति के सदस्य व विधायक ने सुझाव रखते हुए बताया कि गोविंदपुरा औद्योगिक क्षेत्र में प्रॉपर्टी दरों में बदलाव किया जाना चाहिए। यहां पर अधिकांश जगह पर एक समान प्रॉपर्टी की दरें हैं, जिनमें बदलाव किया जाना चाहिए। जबकि हाउसिंग बोर्ड ने अपना सुझाव रखते हुए बताया कि रविशंकर शुक्ल मार्केट में बनी इमारतों में सभी में प्रॉपर्टी की दरें एक तरह की हैं, लेकिन एक इमारत में प्रॉपर्टी की दरें अलग हैं, जिन्हें एक समान किया जाना चाहिए।

    नई कलेक्टर गाइडलाइन 2026-27 में प्रमुख 17 लोकेशन पर प्रस्तावित दरें
    लोकेशन     वर्तमान दरें (प्रति वर्ग मीटर)     प्रस्तावित दरें (प्रति वर्ग मीटर)
    एयरोसिटी राजाभोज परियोजना     20,000     22,000
    सीटीओ कालोनी/कैलाश नगर, पूजाश्री नगर     15,000     18,000
    लाउखेड़ी     12,000     15,000
    बीडीए, हाउसिंग बोर्ड कोहेफिजा     45,000     50,000
    ग्राम पलासी एवं पलासी की अन्य कालोनी     15,000     17,000
    पंचवटी एलआईजी     10,000     12,000
    लांबाखेड़ा, नवीबाग व अन्य कालोनी     10,000     12,000
    पुरुषोत्तम नगर     13,000     15,000
    घाटखेड़ी     3,000     4,000
    झागरिया खुर्द     5,600     7,000
    दामखेड़ा खुर्द की कालोनियां     16,000     20,000
    सुरम्य परिसर     26,000     30,000
    नर्मदा एवन्यू     16,000     20,000
    सागर एवन्यू     18,000     20,000
    एकतापुरी, कौशल्या कालोनी     15,800     17,000
    पंत नगर     13,800     15,000
    राजेंद्र नगर     12,800     16,000

    इनका कहना है
    वित्तीय वर्ष 2026-27 की कलेक्टर गाइडलाइन का प्रारंभिक प्रस्ताव तैयार कर लिया गया है, जिस पर जिला मूल्यांकन समिति की बैठक में चर्चा करने के बाद अब आम नागरिकों से सुझाव मांगे गए हैं, जिसे संपदा टू पोर्टल पर दे सकते हैं। इन सुझावों पर चर्चा के बाद प्रस्ताव को केंद्रीय मूल्यांकन बोर्ड को भेज दिया जाएगा।
    – कौशलेंद्र विक्रम सिंह, कलेक्टर व अध्यक्ष, जिला मूल्यांकन समिति

  • मध्य प्रदेश हाईकोर्ट से शूटरों को बड़ी राहत, प्रैक्टिस के लिए 1000 रायफलें मिलेंगी

    मध्य प्रदेश हाईकोर्ट से शूटरों को बड़ी राहत, प्रैक्टिस के लिए 1000 रायफलें मिलेंगी

    जबलपुर
     भोपाल के शूटरों को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट से राहत मिली है. भोपाल कलेक्टर द्वारा शूटरों को अभ्यास के लिए प्रदान किये जाने वाले कारतूसों की संख्या कम किये जाने के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी. 19 फरवरी को हाईकोर्ट जस्टिस विशाल मिश्रा की एकलपीठ ने याचिका की सुनवाई करते हुए शूटरों को एक-एक हजार कारतूस का कोटा दिये जाने के आदेश पारित किये हैं.

    याचिका की सुनवाई के दौरान एकलपीठ को बताया गया कि, ''केन्द्र सरकार ने राइफल एसोसिएशन ऑफ इंडिया का लायसेंस निरस्त कर दिया है. एकलपीठ ने इस संबंध में आदेश पेश करने के निर्देश दिये हैं. याचिका पर अगली सुनवाई 23 फरवरी को तय की गयी है.

    भोपाल के शूटर ने दायर की थी याचिका
    भोपाल निवासी इब्राहिम जावेद खान सहित अन्य 3 लोगों की तरफ से याचिका दायर की गयी थी. याचिका में कहा गया था कि याचिकाकर्ता इब्राहिम जावेद खान एक मशहूर शूटर है और अन्य याचिकाकर्ता शूटर बनना चाहते हैं. उन्हें आर्म्स रूल्स, 2016 के नियमों के तहत कारतूस देने के लिए कोटा निर्धारित किया है. जिला कलेक्टर ने शूटरों को कारतूस प्रदान करने के संबंध में एक कमेटी गठित की थी.

    कारतूस न होने से प्रतियोगिता में शामिल होना मुश्किल
    कमेटी ने प्रैक्टिस के लिए एक-एक हजार कारतूस प्रदान करने के आदेश जारी किये थे. कमेटी की सिफारिश के बावजूद भी निर्धारित कोटे को घटाकर सिर्फ 500 कारतूस कर दिया है. याचिका में कहा गया था कि कलेक्टर द्वारा पारित विवादित आदेश के कारण याचिकाकर्ता आने वाले समय में आयोजित प्रतियोगिता में शामिल नहीं हो पाएंगे. प्रतियोगिता में हिस्सा लेने के लिए अभ्यास करने की आवश्यकता है और उनके पास कारतूस नहीं हैं.

    सरकार की तरफ से एकलपीठ को बताया गया कि, जनहित में कोटा बढ़ाने का फैसला लिया जा सकता है. जाने-माने शूटर तथा उभरते शूटर को एक हजार कारतूस दिये जायेंगे. जिससे वह आने वाली प्रतियोगिता की तैयारी कर सकें. वह बता सकें कि, सभी कारतूस ट्रेनिंग में समाप्त हो गये हैं तो उन्हें एक हजार कारतूस का कोटा रिन्यू कर दिया जायेगा.

    शूटरों को एक-एक हजार कारतूस का कोटा आवंटित हो
    एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा कि, ''शूटरों को एक-एक हजार कारतूस का कोटा आवंटित किया जाये. जिससे वह आने वाली प्रतियोगिता की तैयारी कर सकें. कारतूस का कोटा खत्म होने पर वह जिला कलेक्टर को रिपोर्ट करेंगे. जिला कलेक्टर कारतूस के इस्तेमाल की जांच करने के बाद अभ्यास के लिए कारतूस जारी करना सुनिश्चित करें. इसके अलावा स्पोर्ट कैटेगरी के हथियारों के इस्तेमाल के बारे में भारत सरकार की राय और खिलाड़ियों को दिये जाने वाली कारतूस की संख्या के संबंध में भी हाईकोर्ट में पेश की जाये.''

    याचिका की सनुवाई के दौरान केन्द्र सरकार के अधिवक्ता की तरफ से एकलपीठ को बताया गया कि, ''राइफल एसोसिएशन ऑफ इंडिया का लाइसेंस कैंसिल कर दिया गया है. उनके द्वारा इस संबंध में कोई आदेश पेश नहीं किया गया.'' एकलपीठ ने केन्द्र सरकार के अधिवक्ता को आदेश पेश करने के निर्देश जारी किये हैं. याचिकाकर्ता के अधिवक्ता को केंद्रीय गृह विभाग को अनावेदक बनाने के निर्देश भी एकलपीठ ने जारी किये हैं. याचिकाकर्ताओं की तरफ से अधिवक्ता विशाल डेनियल ने पैरवी की.