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  • रटगा की सोनू देवी अपने हुनर से परिवार की आर्थिक मजबूती में निभा रहीं भूमिका

    रटगा की सोनू देवी अपने हुनर से परिवार की आर्थिक मजबूती में निभा रहीं भूमिका

    रायपुर

     गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले के मरवाही विकासखंड के ग्राम पंचायत रटगा की मती सोनू देवी के हाथों में हुनर पहले से था, जरूरत थी तो बस उस हुनर को आगे बढ़ाने के लिए थोड़े से आर्थिक संबल की। घर पर ही सिलाई का काम करने वाली सोनू देवी परिवार और आसपास के लोगों के कपड़े सिलकर अपनी आमदनी में सहयोग करती थीं। मेहनत और हुनर के बावजूद सीमित आर्थिक संसाधनों के कारण उनके काम का दायरा छोटा था और वह अपनी सिलाई कला को बड़े स्तर पर नहीं ले जा पा रही थीं।

    सोनू देवी के लिए सिलाई केवल एक काम नहीं, बल्कि परिवार की आर्थिक जरूरतों में हाथ बंटाने और अपने पैरों पर खड़े होने का माध्यम रही है। वह उपलब्ध संसाधनों में ही लगातार मेहनत करती रहीं। इसी बीच महतारी वंदन योजना से मिलने वाली नियमित आर्थिक सहायता उनके लिए बदलाव की शुरुआत बनी।

    महतारी वंदन योजना बना आर्थिक संबल

    महतारी वंदन योजना के तहत मिलने वाली एक हजार रुपये की मासिक आर्थिक सहायता ने सोनू देवी को अपने हुनर को आगे बढ़ाने का अवसर दिया। उन्होंने योजना से मिलने वाली राशि और अपनी टेलरिंग मशीन का बेहतर उपयोग करते हुए सिलाई के काम को और गति दी। धीरे-धीरे उनके काम का दायरा बढ़ने लगा और घर से संचालित होने वाला उनका सिलाई कार्य आय के बेहतर साधन के रूप में विकसित होने लगा।

    सोनू देवी बताती हैं कि नियमित रूप से मिलने वाली आर्थिक सहायता ने उन्हें अपने काम को जारी रखने और आवश्यक जरूरतों को पूरा करने में सहारा दिया। इससे उन्हें अपने सिलाई कार्य पर ध्यान केंद्रित करने और अपने हुनर को और बेहतर तरीके से उपयोग करने का अवसर मिला।

    महतारी वंदन योजना के अंतर्गत सोनू देवी के बैंक खाते में 31वीं किस्त की राशि भी पहुंच चुकी है। योजना के माध्यम से लगातार मिल रही आर्थिक सहायता उनके लिए नियमित संबल का काम कर रही है। इस सहयोग से उन्हें अपने काम को आगे बढ़ाने के साथ-साथ परिवार की जरूरतों में योगदान देने का अवसर मिल रहा है।

    सिलाई से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम

    आज सोनू देवी के लिए सिलाई का काम महज घर तक सीमित गतिविधि नहीं रह गया है। उनका हुनर अब आत्मनिर्भरता और आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में आगे बढ़ता माध्यम बन रहा है। अपनी मेहनत, लगन और उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग करते हुए वह अपने काम को नई ऊंचाइयों तक ले जाने का प्रयास कर रही हैं।

    महतारी वंदन योजना से मिली आर्थिक सहायता ने उन्हें अपने हुनर पर आगे काम करने और जरूरत के अनुसार संसाधनों का उपयोग करने का अवसर दिया है। इससे परिवार की आर्थिक जरूरतों में सहयोग मिलने के साथ ही उनके आत्मविश्वास को भी मजबूती मिली है।

    मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के प्रति जताया आभार

    मती सोनू देवी महतारी वंदन योजना के लिए मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहती हैं कि योजना से मिलने वाली आर्थिक सहायता ने उनके सिलाई कार्य को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण सहयोग दिया है। उनका कहना है कि नियमित आर्थिक सहायता से उन्हें अपने काम को जारी रखने का संबल मिला है और अब वह अपने हुनर के माध्यम से परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के लिए लगातार प्रयास कर रही हैं।

    सोनू देवी की कहानी यह दर्शाती है कि नियमित आर्थिक सहयोग जब मेहनत और हुनर के साथ जुड़ता है, तो छोटे स्तर पर किया जा रहा काम भी आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ सकता है। महतारी वंदन योजना उनके लिए आर्थिक सहायता के साथ-साथ अपने हुनर को नई पहचान देने का माध्यम बन रही है।

  • सपा राज की गुंडागर्दी पर योगी सरकार ने लगाया ब्रेक’, मंत्री असीम अरुण का अखिलेश पर तीखा हमला

    सपा राज की गुंडागर्दी पर योगी सरकार ने लगाया ब्रेक’, मंत्री असीम अरुण का अखिलेश पर तीखा हमला

    लखनऊ

     उत्तर प्रदेश सरकार में समाज कल्याण मंत्री असीम अरुण ने समाजवादी पार्टी के सुप्रीमो अखिलेश यादव पर जमकर निशाना साधा है। उन्होंने प्रदेश की कानून व्यवस्था पर अखिलेश यादव द्वारा उठाए गए सवालों पर पलटवार करते हुए कहा कि सपा सुप्रीमो वहां की कानून व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं, जहां की व्यवस्था पूरे देश के लिए मानक बन गई है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के बाहर कहीं भी जाइए, लोग उत्तर प्रदेश जैसी कानून व्यवस्था चाहते हैं। उन्होंने इसके लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आभार जताते हुए धन्यवाद भी दिया।

    पूर्ववर्ती सपा सरकार के समय की कानून व्यवस्था से तुलना करते हुए मंत्री असीम अरुण ने कहा कि समाजवादी पार्टी की सरकार में जो स्थिति थी, वह किसी से छिपी नहीं है। लूट, डकैती, अपहरण और माफियागर्दी चल रही थी। योगी जी ने इसे व्यवस्थित तरीके से रोका और समाप्त किया। उन्होंने सरकार के अगले एजेंडे पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जैसे अपराध की सफाई हुई, उसी तरह अब योगी सरकार भ्रष्टाचार की सफाई में जुटी है। उन्होंने विश्वास जताया कि इसमें भी निर्णायक सफलता मिलेगी।

    आरक्षण को लेकर भी सपा को घेरा

    सरकारी भर्तियों पर असीम अरुण ने कहा कि सपा सरकार के समय नियमित भर्तियां हुई ही नहीं। जो हुईं, उनमें भारी भ्रष्टाचार हुआ। आउटसोर्सिंग की भर्तियों में आरक्षण की व्यवस्था सपा ने खत्म कर दी। योगी जी का धन्यवाद कि आज प्रदेश में लाखों भर्तियां हो रही हैं और इनमें आरक्षण के नियमों को पूरी ईमानदारी और सख्ती से लागू किया जा रहा है। सपा ने आउटसोर्सिंग में जो आरक्षण समाप्त किया था, योगी सरकार ने उसे पूरी तरह लागू किया है। आउटसोर्सिंग कॉरपोरेशन भी बना दिया गया है, ताकि नियमित भर्तियों और आउटसोर्सिंग दोनों में आरक्षण जमीन पर लागू हो।

    महापुरुषों के सम्मान पर मंत्री ने कहा कि बाबा साहेब और अन्य सामाजिक नायकों की प्रतिमाओं के लिए योगी जी ने मूर्ति विकास योजना दी है। प्रत्येक विधानसभा को एक-एक करोड़ रुपये दिए गए हैं। मूर्तियों के जीर्णोद्धार, सुधार और सुंदरता के लिए दस-दस लाख रुपये तक खर्च किए जा सकते हैं। इसके विपरीत सपा सरकार के समय अखिलेश यादव ने महापुरुषों के अपमान में कोई कसर नहीं छोड़ी चाहे जिले हों, मेडिकल कॉलेज हों या कन्नौज का इंजीनियरिंग कॉलेज, हर जगह अपमान का काम हुआ।

    जब बाबा साहेब का अपमान हो रहा था तब हंस रहे थे अखिलेश

    उन्होंने कहा कि सपा जो फर्जी आंकड़े दिखा रही है, उनकी कोई वैल्यू नहीं है। कैबिनेट मंत्री और सुपर सीएम कहे जाने वाले आजम खान ने बाबा साहेब पर अभद्र टिप्पणी की थी और उस समय अखिलेश यादव मंच पर बैठे हंसते रहे। यह सबके सामने है। बस के ऊपर आज कोई भी रंग लगा लीजिए, सबको 2017 वाली बस का रंग भी याद है और वह बस किस तरह फंसी, यह भी याद है।

    रोजगार के सवाल पर असीम अरुण ने कहा कि सपा युवाओं को रोजगार नहीं मिलने का आरोप लगा रही है। आज व्यापक स्तर पर सरकारी नौकरियां दी गई हैं, प्राइवेट सेक्टर तेजी से बढ़ा है, कृषि में विस्तार हुआ है। युवाओं के पास काम या नौकरी की कमी नहीं है। बच्चे सरकारी नौकरी कर रहे हैं, प्राइवेट नौकरी कर रहे हैं और स्वावलंबन से खुद व्यवसाय और स्टार्टअप चला रहे हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धन्यवाद और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आभार व्यक्त किया कि ऐसा माहौल बना जिससे यह सफलता मिली।

  • गांव की बेटी ने लिखी आत्मनिर्भरता की कहानी, सुमन लता बनीं ‘लखपति दीदी’

    गांव की बेटी ने लिखी आत्मनिर्भरता की कहानी, सुमन लता बनीं ‘लखपति दीदी’

    रायपुर

     प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए संचालित विभिन्न योजनाओं एवं आजीविका गतिविधियों का सकारात्मक प्रभाव गांव-गांव में दिखाई दे रहा है। इसी कड़ी में गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के मरवाही विकासखंड के ग्राम पंचायत गुदुमदेवरी की मती सुमन लता वाकरे की कहानी ग्रामीण महिलाओं के आत्मविश्वास, मेहनत और आत्मनिर्भरता की प्रेरणादायी मिसाल बनकर सामने आई है।

    स्व-सहायता समूह से जुड़कर बदली जिंदगी

    मती सुमन लता वाकरे आज ‘लखपति दीदी’ के रूप में अपनी पहचान बना चुकी हैं। कभी परिवार की आर्थिक परिस्थितियों को लेकर चिंतित रहने वाली सुमन लता ने स्व-सहायता समूह से जुड़कर अपनी मेहनत और लगन से आर्थिक सशक्तिकरण की राह चुनी। वे माँ महामाया महिला स्व-सहायता समूह से जुड़ी हैं और वर्तमान में समूह की सचिव के दायित्व का निर्वहन कर रही हैं।

    सुमन लता बताती हैं कि स्व-सहायता समूह से जुड़ना उनके जीवन में बदलाव का महत्वपूर्ण पड़ाव साबित हुआ। समूह के माध्यम से उन्हें आर्थिक गतिविधि शुरू करने का अवसर मिला और धीरे-धीरे उनका आत्मविश्वास बढ़ा। समूह की गतिविधियों और उपलब्ध वित्तीय सहायता ने उन्हें स्वयं का व्यवसाय शुरू करने के लिए प्रेरित किया।

    15 हजार की आरएफ राशि से शुरू हुई आत्मनिर्भरता की राह

    समूह के माध्यम से मती सुमन लता को 15 हजार रुपये की आरएफ राशि प्राप्त हुई। इसके बाद 60 हजार रुपये की सीआईएफ राशि में से 20 हजार रुपये का उपयोग कर उन्होंने गांव में किराना दुकान शुरू की। शुरुआत छोटे स्तर से हुई, लेकिन अपनी मेहनत, ग्राहकों के प्रति विश्वास और बेहतर संचालन के बल पर उन्होंने दुकान का लगातार विस्तार किया।

    व्यवसाय को आगे बढ़ाने के लिए उन्होंने बैंक से ऋण लेकर अपनी दुकान में आवश्यक सामग्री बढ़ाई। आज उनकी किराना दुकान पहले की तुलना में काफी विस्तृत हो चुकी है और व्यवसाय से उन्हें प्रतिवर्ष एक लाख रुपये से अधिक की आय प्राप्त हो रही है। आर्थिक गतिविधि के विस्तार ने न केवल उनके परिवार की आय को मजबूत किया, बल्कि उन्हें अपने पैरों पर खड़े होने का आत्मविश्वास भी दिया।

    ‘लखपति दीदी’ बनकर बनीं गांव की प्रेरणा

    मती सुमन लता की सफलता इस बात का उदाहरण है कि जब महिलाओं को संगठित होकर आगे बढ़ने का अवसर, आर्थिक सहयोग और मार्गदर्शन मिलता है, तो वे अपने परिवार की आर्थिक स्थिति में सकारात्मक बदलाव ला सकती हैं। स्व-सहायता समूह ने उन्हें केवल आर्थिक सहायता ही नहीं दी, बल्कि अपने सपनों को साकार करने का आत्मविश्वास भी प्रदान किया।

    किराना दुकान के माध्यम से नियमित आय अर्जित कर सुमन लता ने ‘लखपति दीदी’ बनने की उपलब्धि हासिल की है। उनकी कहानी गांव की अन्य महिलाओं को भी आर्थिक गतिविधियों से जुड़कर आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित कर रही है।

    महतारी वंदन योजना का भी मिला संबल

    मती सुमन लता को महतारी वंदन योजना की 31 किस्तों की राशि भी प्राप्त हो चुकी है। उनके अनुसार योजना से मिलने वाली आर्थिक सहायता ने परिवार की आवश्यकताओं को पूरा करने में सहयोग दिया है। उन्होंने इस सहयोग के लिए मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त किया है।

    महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण को मिल रहा बढ़ावा

    मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने, स्व-सहायता समूहों को मजबूत करने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। स्व-सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं को सामूहिक रूप से आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने के साथ उन्हें विभिन्न आजीविका अवसरों का लाभ दिलाने का प्रयास किया जा रहा है।

    प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत के संकल्प से प्रेरित होकर गांव की महिलाएं अब सहायता की प्रतीक्षा करने के बजाय स्वयं रोजगार और आय के साधन तैयार कर रही हैं। सुमन लता वाकरे की कहानी इसी बदलाव की जीवंत तस्वीर है, जहां समूह से मिला सहयोग, सरकारी योजनाओं का संबल और स्वयं की मेहनत मिलकर आर्थिक आत्मनिर्भरता की नई राह तैयार कर रहे हैं।

    सेवा संकल्प अभियान में सुमन लता की कहानी बनी प्रेरणा

    सेवा संकल्प अभियान के परिप्रेक्ष्य में सुमन लता वाकरे की सफलता की कहानी ग्रामीण भारत में हो रहे सकारात्मक बदलाव को सामने लाती है। यह कहानी बताती है कि योजनाओं का वास्तविक प्रभाव तब दिखाई देता है, जब लाभार्थी उन्हें अवसर में बदलकर अपनी मेहनत से नई उपलब्धियां हासिल करते हैं।

    गुदुमदेवरी की सुमन लता आज केवल अपने परिवार के लिए आय का मजबूत आधार नहीं बनी हैं, बल्कि गांव की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत हैं। उनका सफर यह संदेश देता है कि संगठित प्रयास, सरकारी योजनाओं का सहयोग और दृढ़ इच्छाशक्ति मिलकर ग्रामीण महिलाओं के जीवन में स्थायी सकारात्मक परिवर्तन ला सकते हैं।

  • मुर्गी पालन ने बदली रजनी की राह, आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ाया कदम

    मुर्गी पालन ने बदली रजनी की राह, आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ाया कदम

    रायपुर

     जब अवसर और सहयोग साथ मिले तो मेहनत को नई दिशा मिलती है। रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ विकासखंड के ग्राम पाराघाटी की मती रजनी केरकेट्टा की कहानी इसकी मिसाल है। कभी परिवार की आर्थिक जरूरतों में सीमित भूमिका निभाने वाली रजनी ने मुर्गी पालन को आजीविका का साधन बनाया और धीरे-धीरे अपने परिवार की आय बढ़ाने में सहभागी बन गईं। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़े स्व-सहायता समूह ने उन्हें आर्थिक सहयोग के साथ वह आत्मविश्वास भी दिया, जिसके सहारे वे अब अपनी आजीविका गतिविधि से जुड़े निर्णय स्वयं ले रही हैं।

    स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद खुला नया रास्ता

    रजनी जीवन ज्योति स्व-सहायता समूह से जुड़ी हैं। समूह के माध्यम से उन्हें राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन की विभिन्न सहायता व्यवस्थाओं की जानकारी मिली और मुर्गी पालन को आगे बढ़ाने के लिए आर्थिक सहयोग प्राप्त हुआ।

    उन्हें सामुदायिक निवेश निधि से 50 हजार रुपये, बैंक लिंकेज के माध्यम से 1 लाख रुपये तथा स्वयं सिद्धा के तहत प्रथम वर्ष में 1.50 लाख रुपये की राशि प्राप्त हुई। आजीविका गतिविधि को निरंतर आगे बढ़ाने के लिए द्वितीय वर्ष में 1.50 लाख रुपये की राशि का पुनः नवीनीकरण भी किया गया।

    इस आर्थिक सहयोग से रजनी ने मुर्गी पालन गतिविधि को विस्तार दिया। समूह से मिलने वाले मार्गदर्शन ने उन्हें व्यवसाय को बेहतर तरीके से संचालित करने और आय के अवसरों को बढ़ाने का भरोसा दिया।

    आर्थिक सहयोग के साथ बढ़ा आत्मविश्वास

    रजनी बताती हैं कि समूह से जुड़ने के बाद उन्हें केवल आर्थिक सहायता ही नहीं मिली, बल्कि आगे बढ़ने का हौसला भी मिला। मुर्गी पालन से जुड़कर वे अपने पैरों पर खड़े होने की दिशा में आगे बढ़ सकीं और परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में योगदान दे रही हैं।

    अब आजीविका गतिविधि से जुड़े निर्णय लेने में उनकी सक्रिय भूमिका है। अपनी मेहनत और समूह के सहयोग से उन्होंने यह विश्वास हासिल किया है कि ग्रामीण महिलाएं भी अपने हुनर और प्रयासों के बल पर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकती हैं।

    गांव की महिलाओं के लिए स्व-सहायता समूह बन रहे बदलाव का माध्यम

    राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को स्व-सहायता समूहों से जोड़कर उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। समूहों के माध्यम से नियमित बचत, बैंक लिंकेज और विभिन्न निधियों से आजीविका गतिविधियों के लिए सहयोग उपलब्ध कराया जाता है।

    इससे ग्रामीण महिलाएं मुर्गी पालन, पशुपालन, कृषि और अन्य आयमूलक गतिविधियों से जुड़कर परिवार की आय बढ़ाने में सहभागी बन रही हैं। साथ ही आर्थिक गतिविधियों में उनकी भागीदारी बढ़ने से निर्णय लेने का आत्मविश्वास भी मजबूत हो रहा है।

    “समूह से मिला सहारा, अपने पैरों पर खड़े होने का मिला अवसर”

    मती रजनी केरकेट्टा ने प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी, मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय और जिला प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि शासन की योजनाओं और स्व-सहायता समूह से मिले सहयोग ने उन्हें अपनी आजीविका आगे बढ़ाने का अवसर दिया। उन्होंने कहा कि मुर्गी पालन ने उन्हें अपने पैरों पर खड़े होने और परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने का रास्ता दिया है।

    रजनी की यह कहानी बताती है कि जब ग्रामीण महिलाओं को संगठन, पूंजी और मार्गदर्शन का साथ मिलता है, तो वे केवल अपने परिवार की आय बढ़ाने वाली नहीं, बल्कि अपने आर्थिक निर्णय स्वयं लेने वाली आत्मनिर्भर उद्यमी भी बन सकती हैं।

  • सारंगढ़-बिलाईगढ़ के जामपाली में खुली ‘बदलाव की राह’

    सारंगढ़-बिलाईगढ़ के जामपाली में खुली ‘बदलाव की राह’

    ​रायपुर

    कभी अवैध कब्जे की आड़ में उपेक्षित पड़ी शासकीय जमीन आज गांव के मासूमों के उज्ज्वल भविष्य और बेहतर स्वास्थ्य की आधारशिला बन चुकी है। छत्तीसगढ़ के जिला सारंगढ़-बिलाईगढ़ अंतर्गत सरिया तहसील के ग्राम जामपाली ने प्रशासनिक मुस्तैदी और जनहितैषी दृष्टि का एक ऐसा अनुकरणीय उदाहरण पेश किया है, जहां अतिक्रमण से मुक्त कराई गई जमीन पर अब बच्चों की किलकारियां और शिक्षा के स्वर गूंज रहे हैं।

    ​अवैध कब्जे की जकड़न से जनहित का सफर

     ​ग्राम जामपाली स्थित शासकीय भूमि (खसरा नंबर 309/1, कुल रकबा 1.833 हेक्टेयर) के एक हिस्से पर लंबे समय से स्थानीय लोगों का अवैध कब्जा था। इसके चलते गांव के नन्हे-मुन्ने बच्चों के लिए आवश्यक प्राथमिक सुविधाओं और बाल विकास केंद्र के निर्माण में बाधा आ रही थी।
           ​मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए 'सेवा संकल्प अभियान' के तहत तहसीलदार सरिया द्वारा राजस्व अभिलेखों के सूक्ष्म परीक्षण व कड़े स्थल निरीक्षण के बाद नियमानुसार बेदखली की सख्त कार्रवाई की गई। राजस्व टीम की इस त्वरित प्रशासनिक पहल से करोड़ों मूल्य की शासकीय भूमि को पूरी तरह अतिक्रमण मुक्त कराया गया।

    ​आदर्श आंगनबाड़ी केंद्र: बाल विकास की नई मिसाल

     ​जमीन को केवल खाली कराने तक सीमित न रखते हुए, जिला व जनपद पंचायत बरमकेला के समन्वय से वहां एक 'आदर्श आंगनबाड़ी केंद्र' का भव्य निर्माण कराया गया। अब गांव के छोटे बच्चों को एक ही छत के नीचे सुरक्षित, हाइजीनिक और खेल-खेल में सीखने योग्य परिवेश मिल रहा है। केंद्र के माध्यम से बच्चों को सही पोषण, स्वास्थ्य जांच और गुणवत्तापूर्ण प्रारंभिक शिक्षा उपलब्ध कराई जा रही है।अतिक्रमण हटने से न केवल गांव की सार्वजनिक संपत्ति सुरक्षित हुई, बल्कि शासन के प्रति ग्रामीणों का विश्वास भी और मजबूत हुआ है।

    ​बदलाव की स्थायी छाप

    कब्जामुक्त हुई यह जमीन आज जामपाली के बच्चों के सुनहरे कल को आकार दे रही है। यह पहल सिद्ध करती है कि यदि प्रशासनिक दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ जनहित को प्राथमिकता दी जाए, तो उपेक्षित पड़ी शासकीय संपत्तियां भी समाज और नई पीढ़ी के उत्थान का सबसे मजबूत आधार बन सकती हैं।

  • इंडियास्किल्स प्रतियोगिता के लिए अब 22 सितंबर तक करें आवेदन

    इंडियास्किल्स प्रतियोगिता के लिए अब 22 सितंबर तक करें आवेदन

    लखनऊ

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में युवाओं को कौशल प्रशिक्षण के साथ रोजगार और स्वरोजगार के अवसरों से जोड़ने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इसी क्रम में इंडियास्किल्स प्रतियोगिता 2026-27 में प्रतिभाग करने के इच्छुक युवाओं के लिए महत्वपूर्ण अवसर है। प्रतियोगिता के लिए ऑनलाइन पंजीकरण की अंतिम तिथि बढ़ाकर 22 सितंबर 2026 कर दी गई है। उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन (यूपीएसडीएम) ने युवाओं से अपील की है कि वे निर्धारित तिथि तक अपना पंजीकरण अवश्य करा लें।

    इच्छुक अभ्यर्थी स्किल इंडिया डिजिटल पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। इसके अलावा जारी किए गए क्यूआर कोड को स्कैन करके भी पंजीकरण किया जा सकता है। तिथि बढ़ाए जाने से प्रदेश के अधिक से अधिक युवाओं को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर मिलेगा।

    जिला स्तर से अंतरराष्ट्रीय मंच तक प्रतिभा दिखाने का अवसर

    इंडियास्किल्स प्रतियोगिता युवाओं को अपनी व्यावसायिक एवं तकनीकी दक्षता प्रदर्शित करने के लिए व्यापक मंच उपलब्ध कराती है। प्रतियोगिता की प्रक्रिया जिला स्तर से शुरू होकर मंडल, राज्य, रीजनल और राष्ट्रीय स्तर तक आगे बढ़ती है। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व करने का अवसर भी मिल सकता है। प्रतियोगिता में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स, 3डी प्रिंटिंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स, ड्रोन, कोडिंग, वेल्डिंग, ब्यूटी एंड वेलनेस सहित विभिन्न कौशल क्षेत्रों में प्रतिभागियों को अपनी दक्षता प्रदर्शित करने का अवसर मिलता है।

    पदक के साथ पुरस्कार राशि भी

    प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले युवाओं को पदक के साथ पुरस्कार राशि भी प्रदान की जाती है। राज्य स्तर पर स्वर्ण पदक विजेता को 20 हजार रुपये, रजत पदक विजेता को 15 हजार रुपये और कांस्य पदक विजेता को 10 हजार रुपये दिए जाते हैं। वहीं रीजनल स्तर पर यह पुरस्कार राशि क्रमशः 75 हजार, 50 हजार और 25 हजार रुपये है। राष्ट्रीय स्तर पर सफल प्रतिभागियों को इससे अधिक पुरस्कार राशि के साथ विशेष सम्मान प्राप्त होता है।

    विशेषज्ञों से प्रशिक्षण, अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं की तैयारी

    इंडियास्किल्स में प्रतिभाग करने वाले युवाओं को उनकी संबंधित स्किल के अनुरूप राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार प्रशिक्षण दिया जाता है। आईआईटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों और उद्योग विशेषज्ञों के सहयोग से प्रतिभागियों की क्षमता को निखारने का प्रयास किया जाता है। राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले युवाओं को आगे वर्ल्डस्किल्स जैसी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व करने का अवसर मिल सकता है।

    कौशल के साथ रोजगार और आय के अवसर

    यह पहल युवाओं को केवल प्रतियोगिता तक सीमित नहीं रखती, बल्कि कौशल आधारित करियर के नए अवसरों से भी जोड़ती है। इंडियास्किल्स की प्रक्रिया के दौरान प्रशिक्षकों और असेसरों की आवश्यकता होती है। पूर्व राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय विजेताओं को प्रशिक्षक और असेसर के रूप में कार्य करने के अवसर मिल सकते हैं। इसके साथ ही विभिन्न स्तरों पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को आईटीआई में प्रशिक्षक के अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं। उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन के अनुसार, इंडियास्किल्स प्रतियोगिता युवाओं को अपनी प्रतिभा पहचानने, उसे राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप विकसित करने और कौशल आधारित करियर की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर देती है। तिथि बढ़ाए जाने से अब अधिक युवाओं को इसमें भाग लेने का अवसर मिलेगा।

  • अतिक्रमण मुक्त 25 एकड़ बंजर भूमि पर उगी समृद्धि

    अतिक्रमण मुक्त 25 एकड़ बंजर भूमि पर उगी समृद्धि

    रायपुर

     ​सारंगढ़–बिलाईगढ़ जिले के तहसील सरिया स्थित ग्राम सुखापाली में बदलाव की एक अनूठी और प्रेरणादायक कहानी आकार ले रही है। जिस 25 एकड़ शासकीय भूमि पर वर्षों से भू-माफिया और अतिक्रमणकारियों का कब्जा था, आज वही भूमि महिलाओं के श्रम, दृढ़ संकल्प और सरकारी योजनाओं के बेहतर अभिसरण (Convergence) से हरी-भरी होकर आर्थिक समृद्धि का केंद्र बन चुकी है। 'हरियाली स्व-सहायता समूह' की 14 महिलाएं इस भूमि के जरिए न केवल आत्मनिर्भर बन रही हैं, बल्कि राज्य के 'लखपति दीदी' अभियान की नई पहचान बनकर उभर रही हैं।

    ​कब्जे से मुक्ति: अतिक्रमण से आजीविका तक का सफर

    ग्राम सुखापाली की करीब 25 एकड़ शासकीय भूमि लंबे समय से अतिक्रमण की चपेट में थी। राजस्व विभाग, ग्राम पंचायत और स्थानीय प्रशासन के संयुक्त प्रयास से इस भूमि को सफलतापूर्वक मुक्त कराया गया। प्रशासन ने भूमि को केवल अपने आधिपत्य में लेने तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे ग्रामीण महिलाओं के सशक्तिकरण और आजीविका संवर्धन का जरिया बनाने की दूरदर्शी योजना तैयार की।

    ​योजनाओं का अभिसरण और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर

     ​बंजर और असिंचित भूमि को मॉडल फार्म में बदलने के लिए शासन की विभिन्न योजनाओं को एक साथ जोड़ा गया। वीबीग्रामजी (VB-GramG) योजना के तहत जमीन को कृषि योग्य बनाकर आवश्यक शेड का निर्माण कराया गया। जिला खनिज संस्थान न्यास (DMF) मद से पूरे 25 एकड़ क्षेत्र की सुरक्षा के लिए चैन-लिंकिंग फेंसिंग कराई गई और आधुनिक ड्रिप सिंचाई प्रणाली स्थापित की गई। क्लस्टर लेवल फेडरेशन (CLF) के माध्यम से समूह को 10 लाख रुपये की ऋण सहायता दी गई।

    ​7,300 अमरूद के पौधे और अंतर-फसली मॉडल

     ​प्राप्त वित्तीय सहायता से समूह ने उच्च गुणवत्ता वाले वीएनआर (VNR) और पिंक ताइवान किस्म के करीब 7,300 अमरूद के पौधों का रोपण किया। चूंकि अमरूद के बाग से फल आने में समय लगता है, इसलिए महिलाओं की दैनिक आय बनी रहे, इसके लिए स्मार्ट अंतर-फसली (Inter-Cropping) मॉडल अपनाया गया।
              ​
    महिलाओं ने अमरूद के पौधों के बीच खाली पड़ी जमीन पर खीरा, लौकी और मखना जैसी सब्जियों व नकदी फसलों की खेती शुरू की। स्थानीय मंडियों और बाजारों में इन फसलों की बिक्री से समूह को तत्काल और नियमित आय प्राप्त होने लगी है।

    ​महिला सशक्तिकरण और 'लखपति दीदी' का सपना

     ​कब्जे से मुक्त हुई शासकीय भूमि पर आज खेती, बागवानी और आधुनिक सिंचाई का जो संगम दिख रहा है, उसने सुखापाली गांव के आर्थिक परिदृश्य को बदल दिया है। 'हरियाली स्व-सहायता समूह' की 14 महिलाएं अब पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर व्यावसायिक कृषि उद्यमी के रूप में स्थापित हो रही हैं।

    ​शासकीय भूमि के संरक्षण और महिला सशक्तिकरण का यह अभिनव प्रयोग पूरे छत्तीसगढ़ के लिए एक अनुकरणीय मॉडल बन चुका है, जो यह साबित करता है कि इच्छाशक्ति और सही नीति से बंजर व अतिक्रमित भूमि को भी 'समृद्धि का आधार' बनाया जा सकता है।

  • महतारी वंदन योजना बनी प्रीति बैगा के परिवार का मजबूत सहारा

    महतारी वंदन योजना बनी प्रीति बैगा के परिवार का मजबूत सहारा

    रायपुर

     मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा महिलाओं और परिवारों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए संचालित जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंच रहा है। गौरेला विकासखंड के ग्राम पंचायत ठाड़पथरा की मती प्रीति सुजान बैगा के लिए महतारी वंदन योजना नियमित आर्थिक सहयोग का महत्वपूर्ण माध्यम बन गई है। योजना के तहत उन्हें प्रत्येक माह एक हजार रुपये की राशि प्राप्त हो रही है, जिससे परिवार की दैनिक जरूरतों को पूरा करने में उन्हें आर्थिक सहायता मिल रही है।

    नियमित आर्थिक सहायता से घरेलू खर्च में मिली राहत

    मती प्रीति सुजान बैगा बताती हैं कि महतारी वंदन योजना के तहत मिलने वाली राशि से उन्हें घर की जरूरी आवश्यकताओं को पूरा करने में काफी मदद मिलती है। वे इस राशि का उपयोग मुख्य रूप से राशन, सब्जी और अन्य घरेलू जरूरतों की पूर्ति में करती हैं। नियमित रूप से मिलने वाली आर्थिक सहायता से उन्हें छोटे-छोटे घरेलू खर्चों के लिए अतिरिक्त आर्थिक दबाव का सामना कम करना पड़ता है।

    परिवार की जरूरतों में मिल रहा योजनाओं का संयुक्त लाभ

    प्रीति बैगा को सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के माध्यम से नियमित रूप से खाद्यान्न का लाभ भी मिल रहा है। एक ओर महतारी वंदन योजना से प्रतिमाह आर्थिक सहायता प्राप्त हो रही है, वहीं दूसरी ओर पीडीएस के माध्यम से खाद्यान्न की उपलब्धता सुनिश्चित हो रही है। इन दोनों योजनाओं के संयुक्त लाभ से उनके परिवार के घरेलू बजट को राहत मिली है और आर्थिक स्थिति पहले की तुलना में अधिक सुदृढ़ हुई है।

    महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में पहल

    महतारी वंदन योजना के माध्यम से महिलाओं को नियमित आर्थिक सहायता उपलब्ध कराकर उन्हें परिवार की आवश्यकताओं में अधिक सक्रिय भूमिका निभाने का अवसर मिल रहा है। प्रीति बैगा जैसी महिलाओं के अनुभव बताते हैं कि नियमित आर्थिक सहयोग दैनिक जीवन की आवश्यक जरूरतों को पूरा करने में उपयोगी साबित हो रहा है।

    राज्य सरकार की योजनाओं से ग्रामीण परिवारों को मिल रहा संबल

    मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पात्र हितग्राहियों तक पहुंचाने पर जोर दिया जा रहा है। महतारी वंदन योजना और पीडीएस जैसी योजनाओं के माध्यम से महिलाओं तथा जरूरतमंद परिवारों को आर्थिक एवं खाद्य सुरक्षा का सहयोग मिल रहा है। इन योजनाओं का लाभ विशेष रूप से ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों के लिए उपयोगी साबित हो रहा है।

    मुख्यमंत्री के प्रति व्यक्त किया आभार

    मती प्रीति सुजान बैगा ने कहा कि महतारी वंदन योजना से मिलने वाली राशि उनके परिवार की रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने में उपयोगी साबित हो रही है। उन्होंने राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं के लिए मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद दिया। प्रीति का कहना है कि नियमित आर्थिक सहायता से उन्हें अपने परिवार की आवश्यकताओं को बेहतर ढंग से पूरा करने में सहयोग मिल रहा है।

  • धमतरी के 97 हजार से अधिक विद्यार्थियों ने रंगों और शब्दों में उकेरी ‘मेरे सपनों के भारत’ की स्वर्णिम तस्वीर

    धमतरी के 97 हजार से अधिक विद्यार्थियों ने रंगों और शब्दों में उकेरी ‘मेरे सपनों के भारत’ की स्वर्णिम तस्वीर

    रायपुर

     सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत जिले के विकासखंड स्तर पर आयोजित दो दिवसीय ‘मेरे सपनों का भारत’ विषयक चित्रकला एवं भाषण प्रतियोगिता में स्कूली विद्यार्थियों का अभूतपूर्व उत्साह देखने को मिला। 1,483 विद्यालयों के लगभग 97,754 विद्यार्थियों ने अपनी रचनात्मक कला और ओजस्वी विचारों के माध्यम से एक शिक्षित, आत्मनिर्भर, हरित और तकनीकी रूप से सक्षम भारत का खाका प्रस्तुत किया।
           
    ​प्रतियोगिता का मुख्य उद्देश्य बच्चों में राष्ट्र निर्माण, सामाजिक उत्तरदायित्व, नेतृत्व क्षमता और रचनात्मक सोच को बढ़ावा देना रहा। अभियान की मूल भावना 'सेवा, सहभागिता और सर्वांगीण विकास' को केंद्र में रखते हुए आयोजित इस कार्यक्रम ने जिले में जनभागीदारी का एक नया कीर्तिमान स्थापित किया।

    ​60 हजार से अधिक बच्चों ने चित्रों से दिए सामाजिक संदेश
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    चित्रकला प्रतियोगिता में 1,483 विद्यालयों के 60,608 विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया। कैनवास और कागजों पर रंगों के जरिए बच्चों ने केवल कला का प्रदर्शन नहीं किया, बल्कि आधुनिक शिक्षा, हरित व स्वच्छ पर्यावरण, डिजिटल तकनीक, उन्नत कृषि, महिला सशक्तिकरण और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं की अपनी परिकल्पना को जीवंत कर दिया। चित्रों में औद्योगिक प्रगति के साथ-साथ प्रकृति के संरक्षण और मानवीय संवेदनाओं का सुंदर संतुलन दिखाई दिया।

    ​ओजस्वी भाषणों में झलकी राष्ट्र निर्माण की प्रतिबद्धता
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    इसी क्रम में भाषण प्रतियोगिता में 37,146 विद्यार्थियों ने भाग लेकर अपने विचारों को तार्किक एवं प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। विद्यार्थियों ने राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका, नागरिक कर्तव्यों, विज्ञान व तकनीक के उपयोग और सामाजिक समरसता जैसे गंभीर विषयों पर विचार व्यक्त किए। विद्यार्थियों का मानना था कि देश का स्वर्णिम भविष्य केवल सरकारी योजनाओं से नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक के सक्रिय योगदान और संकल्पों से निर्मित होता है।
       
    ​भविष्य की नींव और सशक्त भावी पीढ़ी
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    सेवा संकल्प अभियान से विद्यार्थियों का यह जुड़ाव आने वाले समय के सशक्त भारत की दिशा तय करता है। धमतरी जिले के हजारों बच्चों की यह सक्रिय भागीदारी यह स्पष्ट संदेश देती है कि भारत का उज्ज्वल भविष्य बड़े सपनों के साथ-साथ उन्हें पूरा करने के लिए आज लिए गए छोटे-छोटे संकल्पों से साकार होगा

  • हॉक की उड़ान, दिलों में अरमान, आसमान में तिरंगा बना तो गूंजा जय हिंदुस्तान

    हॉक की उड़ान, दिलों में अरमान, आसमान में तिरंगा बना तो गूंजा जय हिंदुस्तान

    मेरठ

    रविवार की सुबह लगभग साढे़ बजे आसमान में सबसे पहले विमानों की गूंजती गर्जना सुनाई दी… फिर देखते ही देखते नौ विमान एक साथ नजर आए और हजारों निगाहें वहीं ठहर गईं। पलक झपकते विमान नीचे आए, तेजी से पलटे और फिर आसमान की ऊंचाई में पहुंच गए। कुछ क्षण बाद धुएं की लकीरों ने आसमान पर तिरंगा उकेर दिया। करीब 100 फीट की ऊंचाई पर विमानों ने दिल की आकृति बनाई तो न्यू इंटीग्रेटेड टाउनशिप तालियों और जय हिंद के नारों से गूंज उठी। भारतीय वायुसेना की सूर्यकिरण एयरोबेटिक टीम के एयर शो का रविवार को दूसरा दिन था। सेवा संकल्प अभियान के तहत आयोजित एयर शो ने प्रदेश में युवाओं को राष्ट्रनिर्माण, अनुशासन और विकसित भारत के संकल्प से जोड़ने की योगी सरकार की पहल को भी नई ऊर्जा दी। करतबों के बीच मैदान लगातार तालियों और ‘भारत माता की जय’, ‘जय हिंद’ के नारों से गूंजता रहा।

    पांच मीटर के फासले पर क्रास हुए विमान

    सेवा संकल्प अभियान के तहत आयोजित एयर शो के दूसरे दिन शनिवार की तुलना में कई गुना अधिक भीड़ थी। वायुसेना ने लगभग 30 मिनट तक रोमांच और शौर्य से भरा हवाई प्रदर्शन किया। हर करतब के साथ भारत माता की जय और जय हिंद के नारे वातावरण में गूंजते रहे। हिंडन एयरबेस से उड़ान भरकर आए हॉक एमके-132 विमानों ने ऐसा तालमेल दिखाया कि दर्शकों की आंखें कुछ देर के लिए जैसे आसमान पर जम गईं। कई बार दो विमान एक-दूसरे से बेहद कम दूरी पर साथ उड़ते दिखाई दिए। कभी विमान तेजी से नीचे आते और उसी रफ्तार में ऊपर उठ जाते तो कभी दो विमान आमने-सामने से क्रास होते हुए नजर आए। यह दृश्य आते ही मैदान में मौजूद लोगों के मुंह से अनायास चीख निकल गई और अगले ही पल तालियों की गड़गड़ाहट सुनाई देने लगी।

    बच्चों और युवाओं में एयर शो का अलग ही उत्साह दिखाई दिया। कोई हाथ से विमानों की दिशा बताता रहा तो कोई मोबाइल कैमरा आसमान की ओर किए रहा। बच्चों ने कहा कि विमान इतनी तेजी से कलाबाजी कर रहे थे कि आंखें हटाने का मन ही नहीं हुआ। कई बच्चों ने इसे पहली बार प्रत्यक्ष देखा और कहा कि प्रदर्शन ने उन्हें वायुसेना के बारे में जानने तथा देश के लिए कुछ करने की प्रेरणा दी।

    तीन दशक से शौर्य दिखा रही सूर्यकिरण: रक्षा राज्य मंत्री
    दूसरे दिन एयरशो कार्यक्रम के मुख्य अतिथि केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ रहे। उन्होंने कहा कि सूर्यकिरण एयरोबेटिक टीम करीब 30 वर्षों से देश-दुनिया के अलग-अलग स्थानों पर अपने प्रदर्शन से भारतीय वायुसेना की क्षमता का परिचय दे रही है। उन्होंने कहा कि आसमान में दिखने वाला यह प्रदर्शन केवल रोमांच नहीं, बल्कि साहस, पराक्रम, धैर्य और अनुशासन का परिचय है। ऐसे आयोजन युवाओं को सेना और वायुसेना से जुड़कर राष्ट्रसेवा करने के लिए प्रेरित करते हैं।

    राज्यसभा सांसद डा. लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने कहा कि मेरठ में सूर्यकिरण का प्रदर्शन युवाओं के लिए उत्साह बढ़ाने वाला अवसर रहा। उन्होंने कहा कि सेना के जवान कठिनतम परिस्थितियों में देश की सीमाओं की रक्षा करते हैं और वायुसेना के पायलट आसमान में जिस कौशल का प्रदर्शन करते हैं, उससे भारतीय सैन्य शक्ति का एक अलग आयाम सामने आता है। इस तरह के कार्यक्रम युवाओं को सेना में जाने के लिए प्रेरणा देते हैं।

    राज्य मंत्री डा. सोमेंद्र तोमर ने कहा कि सेना प्रत्येक भारतीय के लिए सम्मान का विषय है। मेरठ क्रांति की धरती है और यहां सेना के प्रति लोगों का जुड़ाव हमेशा दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि युवा देश का भविष्य हैं और विकसित भारत के निर्माण में उनकी भागीदारी महत्वपूर्ण है।
    इस दौरान विधानपरिषद सदस्य धर्मेंद्र भारद्वाज, विधानपरिषद सदस्य अश्वनी त्यागी, डीआईजी कलानिधि नैथानी, जिलाधिकारी डॉ़ वीके सिंह, सीडीओ नुपूर गोयल, एसएसपी बीबीजीटीएस मूर्ति, एडीएम सिटी ब्रजेश कुमार, जिला सूचना अधिकारी सुमित कुमार समेत अन्य विभागों के अधिकारी और कर्मचारी तथा भारी संख्या में आम जनमानस  मौजूद रहे।

    दूसरे दिन भी मेरठ के तीन पायलटों का जलवा

    सूर्यकिरण के इस प्रदर्शन में मेरठ से जुड़े तीन पायलटों की भी भूमिका रही। स्क्वाड्रन लीडर अमन गोयल और स्क्वाड्रन लीडर राहुल सिंह ने विमानों को उड़ाया, जबकि स्क्वाड्रन लीडर शरद गोयल ने जमीन से प्रदर्शन के संचालन की कमान संभाली। स्थानीय पायलटों की मौजूदगी की जानकारी मिलते ही दर्शकों का उत्साह और बढ़ गया।

    रास्ते में रुककर भी देखा शो, बाद में दो किमी तक जाम

    एयर शो देखने के लिए सुबह से ही शहर और आसपास के क्षेत्रों से लोगों का पहुंचना शुरू हो गया था। परिवारों के साथ बड़ी संख्या में बच्चे और युवा पहुंचे। प्रशासन ने सुरक्षा और यातायात के लिए अतिरिक्त पुलिस बल लगाया था। इसके बावजूद कार्यक्रम खत्म होने के बाद वाहनों का दबाव अचानक बढ़ गया। आसपास की सड़कों पर करीब दो किलोमीटर तक वाहनों की कतार लग गई। कई लोग कार्यक्रम स्थल तक पहुंच ही नहीं सके और रास्ते में खड़े होकर आसमान में करतब देखते रहे। शो की यादें मोबाइल में कैद कर लौट रहे लोगों की राह कुछ पल के जाम ने जरूर रोक दी, लेकिन चेहरों पर एयर शो का रोमांच देर तक बना रहा।

    हर उम्र के चेहरे पर दिखाई दिया रोमांच

    हर उम्र के लोगों पर एयर शो का रोमांच दिखाई दिया। सबसे ज्यादा बच्चे रोमांचित नजर आए। विमान की गर्जना सुनते ही बच्चे आसमान की ओर उंगली उठाकर एक-दूसरे को विमान दिखाते रहे। जैसे ही दो विमान बेहद कम दूरी से आमने-सामने क्रास हुए, कई बच्चों के मुंह से एक साथ ‘ओह…’ निकल पड़ा। अगले ही पल तालियों की गड़गड़ाहट सुनाई देने लगी। छात्र अविरल ने उत्साहित होकर कहा, जब दोनों विमान एक-दूसरे की तरफ आए तो लगा अब क्या होगा, लेकिन पायलट ने इतनी तेजी से विमान मोड़ा कि हम देखते ही रह गए।

    छात्रा अनन्या ने कहा, मैं एक भी करतब मिस नहीं करना चाहती थी। विमान आते ही मोबाइल ऊपर कर देती थी। जब तिरंगा बना तो सच में बहुत अच्छा लगा, उस समय वीडियो बनाना भी भूल गई और बस आसमान देखती रह गई। सौरभ ने कहा, पहले विमान सिर्फ टीवी और वीडियो में देखे थे, लेकिन आज सामने से इतनी ऊंचाई पर उड़ते देखा तो लगा जैसे कोई फिल्म चल रही हो। सबसे ज्यादा मजा तब आया जब सारे विमान एक साथ घूमे।