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  • सरकार की ‘बिजली बिल समाधान योजना’

    सरकार की ‘बिजली बिल समाधान योजना’

    सरकार की 'बिजली बिल समाधान योजना'

    धमतरी के विशाल परिवार के लिए बनी नई सुबह, बकाया मुक्त जीवन की ओर बढ़ता कदम

    ​रायपुर

    ​राज्य शासन की जनकल्याणकारी नीतियां किस प्रकार जमीनी स्तर पर आम नागरिकों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही हैं, इसकी एक प्रेरणादायक मिसाल धमतरी जिले में देखने को मिल रही है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में संचालित सेवा संकल्प अभियान के तहत लागू ‘मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना-2026’ से राज्य भर के हजारों आर्थिक रूप से कमजोर एवं बकाया बिजली बिल से परेशान परिवारों को बड़ी राहत मिल रही है। राज्य सरकार की इस संवेदनशील पहल का मुख्य उद्देश्य उपभोक्ताओं को बढ़ते विद्युत बकाया के बोझ से मुक्त कर उन्हें पुनः नियमित भुगतान की मुख्यधारा में जोड़ना है।
           ​धमतरी निवासी श्री बी. एस. विशाल के परिवार के लिए भी बढ़ता हुआ बिजली बिल लंबे समय से एक बड़ी मानसिक और आर्थिक चिंता का कारण बना हुआ था। सीमित पारिवारिक आय के कारण समय पर बिल का भुगतान संभव नहीं हो पा रहा था, जिससे बकाया राशि में लगातार बढ़ोतरी हो रही थी। इसी दौरान जब परिवार को राज्य सरकार की इस जनहितकारी समाधान योजना की जानकारी मिली, तो उनके पुत्र श्री डेनियल विशाल ने तत्परता दिखाते हुए आवेदन प्रक्रिया पूरी की। विभागीय सहयोग और सरल व्यवस्था के चलते विशाल परिवार को शीघ्र ही योजना का प्रत्यक्ष लाभ मिल गया।
           ​योजना के तहत परिवार को बकाया मूल राशि में पर्याप्त छूट के साथ-साथ अधिभार यानी सरचार्ज की शत-प्रतिशत माफी मिली। इसके साथ ही शेष राशि को आसान किस्तों में जमा करने की सुविधा मिलने से विशाल परिवार पर से आर्थिक तनाव का बोझ हमेशा के लिए समाप्त हो गया। अब वे पुनः नियमित रूप से बिजली बिल का भुगतान करने की स्थिति में आ गए हैं। योजना का लाभ मिलने पर हितग्राही श्री डेनियल विशाल ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री के प्रति आभार जताया और इस योजना को आम जनता के लिए अत्यंत उपयोगी बताया।
             ​धमतरी जिले में भी इस योजना की प्रगति काफी उल्लेखनीय रही है। जिले में अब तक 4,652 पात्र हितग्राहियों की पहचान की जा चुकी है, जिनमें से 4,115 उपभोक्ता ऑफलाइन आवेदन प्रक्रिया में शामिल हो चुके हैं और 537 उपभोक्ताओं को प्रत्यक्ष रूप से बकाया मुक्ति का लाभ प्रदान किया जा चुका है। यह आंकड़े स्पष्ट करते हैं कि योजना तेजी से आम जनता तक पहुंच रही है और लोगों को वास्तविक राहत प्रदान कर रही है।
             ​इस योजना के तहत बीपीएल, घरेलू तथा कृषि श्रेणी के उपभोक्ताओं को विशेष राहत दी जा रही है। जहां गरीबी रेखा से नीचे जीवन-यापन करने वाले बीपीएल उपभोक्ताओं को बकाया मूल राशि पर 75 प्रतिशत तक की छूट मिल रही है, वहीं घरेलू और कृषि श्रेणी के उपभोक्ताओं को 50 प्रतिशत तक की राहत दी जा रही है। इसके अतिरिक्त सभी पात्र श्रेणियों के लिए सरचार्ज पूरी तरह माफ किया जा रहा है। उपभोक्ता मात्र 10 प्रतिशत की न्यूनतम राशि जमा कर शेष बकाया को निर्धारित अवधि में आसान किस्तों में चुका सकते हैं।
          ​उपभोक्ताओं के व्यापक हित और उत्साह को देखते हुए छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी ने योजना की अवधि को बढ़ाकर 30 सितंबर 2026 कर दिया है। विद्युत विभाग द्वारा लगातार शिविरों और जागरूकता अभियानों के जरिए अधिक से अधिक लोगों को इससे जोड़ा जा रहा है। मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना न केवल आर्थिक राहत प्रदान कर रही है, बल्कि लोगों को एक नई शुरुआत का अवसर देते हुए राज्य सरकार की पारदर्शी, सुगम और संवेदनशील सुशासन की प्रतिबद्धता को पूरी सार्थकता के साथ दर्शा रही है।

  • योगी सरकार का पुलिस इन्फ्रास्ट्रक्चर मजूबत करने पर जोर, 18.41 करोड़ रुपये के विकास कार्यों को मंजूरी

    योगी सरकार का पुलिस इन्फ्रास्ट्रक्चर मजूबत करने पर जोर, 18.41 करोड़ रुपये के विकास कार्यों को मंजूरी

    लखनऊ। योगी सरकार ने प्रदेश में पुलिस विभाग के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाते हुए विभिन्न जिलों में पुलिस के अनावासीय भवनों के निर्माण और जरूरी सुविधाओं के विकास के लिए 18.41 करोड़ रुपये की प्रशासकीय एवं वित्तीय स्वीकृति प्रदान की है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में स्वीकृत यह पूरी धनराशि संबंधित निर्माण कार्यों पर खर्च की जाएगी। योगी सरकार ने कुल 18 करोड़ 41 लाख 3 हजार रुपये की स्वीकृति दी हैं। 

    मथुरा में पुलिस लाइन से लेकर चौकी तक काम
    मथुरा की पुलिस लाइन परिसर में पानी की निकासी के लिए नाला और 50 मीटर बाउंड्रीवाल समेत अन्य निर्माण कार्यों के लिए 2.08 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। वहीं मथुरा के थाना बलदेव के अंतर्गत पुलिस चौकी बरौली के अनावासीय भवनों के निर्माण पर 1.25 करोड़ रुपये खर्च होंगे। मथुरा के दोनों कार्यों की कार्यदायी संस्था आवास एवं विकास परिषद व सीएंडडीएस जल निगम निर्धारित की गई है। 

    बागपत, प्रतापगढ़ और सुल्तानपुर में नए भवन
    बागपत के थाना छपरौली परिसर में 32 क्षमता वाले हॉस्टल/बैरक और एक विवेचना कक्ष के निर्माण के लिए 1.76 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। प्रतापगढ़ में क्षेत्राधिकारी रानीगंज कार्यालय के निर्माण के लिए 89.59 लाख रुपये की मंजूरी मिली है। सुल्तानपुर के थाना कादीपुर और कोतवाली नगर में 48-48 क्षमता के हॉस्टल/बैरक व एक-एक विवेचना कक्ष के निर्माण के लिए क्रमशः 2.89 करोड़ और 2.84 करोड़ रुपये स्वीकृत हुए हैं। इन दोनों कार्यों की कार्यदायी संस्था उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम है। 

    मुरादाबाद, फतेहपुर, गाजियाबाद और अलीगढ़ को भी बजट
    मुरादाबाद के थाना कोतवाली नगर में 48 क्षमता वाले हॉस्टल/बैरक और एक विवेचना कक्ष के लिए 2.70 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। फतेहपुर की 12वीं वाहिनी पीएसी में 200 जवानों के लिए बहुउद्देशीय हॉल के निर्माण पर 2.39 करोड़ रुपये खर्च होंगे। गाजियाबाद की रिजर्व पुलिस लाइन में जर्जर विद्युत तारों को बदलने के लिए 1.04 करोड़ रुपये और अलीगढ़ पुलिस लाइन में जीपी स्टोर के सामान के लिए दो हॉल बनाने के लिए 57.69 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इन कार्यों की कार्यदायी संस्था उत्तर प्रदेश पुलिस आवास निगम लिमिटेड रहेगी। यह सभी निर्माण कार्य गुणवत्ता के साथ तय समयसीमा में पूरे किए करने के भी निर्देश दिए गए हैं। साथ ही स्वीकृत धनराशि का उपयोग 31 मार्च 2027 तक करना होगा।

  • पीआईबी भोपाल के नेतृत्व में जम्मू पहुंचे पत्रकारों के अध्ययन दल ने जम्मू की पीआईबी निदेशक सुनेहा जलाली से की भेंट

    पीआईबी भोपाल के नेतृत्व में जम्मू पहुंचे पत्रकारों के अध्ययन दल ने जम्मू की पीआईबी निदेशक सुनेहा जलाली से की भेंट

    जम्मू। पीआईबी भोपाल के नेतृत्व में जम्मू की छह दिवसीय यात्रा पर पहुंचे पत्रकारों के अध्ययन दल ने आज जम्मू की पीआईबी निदेशक सुनेहा जलाली से भेंट की। मध्य प्रदेश के पत्रकारों का स्वागत करते हुए सु नेहा जलाली ने बताया कि वर्तमान में जम्मू क्षेत्र में कई विकास परीयोजनाएं चल रही हैं। धारा 370 के रद्द होने के बाद से यहां की विकास योजनाओं में गुणात्मक बदलाव और तेजी आई है। जम्मू एयरपोर्ट का विस्तार किया जा रहा है, वहीं कई राष्ट्रीय राजमार्गों का निर्माण और  चौडीकरण हो रहा है। उन्होंने अध्ययन दल को बताया कि वह आने वाले दिनों में जम्मू क्षेत्र की कई विकास योजनाओं और सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत से रूबरू होंगे। इस मौके पर वरिष्ठ पत्रकार ओम प्रकाश शर्मा भी उपस्थित थे, जिनका स्वागत पत्र सूचना कार्यालय, भोपाल द्वारा किया गया। पत्र सूचना कार्यालय, भोपाल के उपनिदेशक शारिक नूर ने सुनेहा जलाली, मीडिया एवं संचार अधिकारी जाकिर मलिक और मुशर्रफ वाणी को स्मृति चिन्ह भेंट किए।

  • जाली दस्तावेजों से CISF में भर्ती, राजस्थान से आरोपी गिरफ्तार

    जाली दस्तावेजों से CISF में भर्ती, राजस्थान से आरोपी गिरफ्तार

    दंतेवाड़ा.

    छत्तीसगढ़ की दंतेवाड़ा पुलिस ने एक ऐसे आरोपी को गिरफ्तार किया है, जो फर्जी दस्तावेजों के जरिए जिले का निवास और आय प्रमाण पत्र हासिल कर CISF में भर्ती हुआ था। अब पुलिस इस फर्जीवाड़े में शामिल अन्य आरोपियों की तलाश कर रही है।

    दरअसल, सिटी कोतवाली पुलिस ने पुलिस अधीक्षक चंद्र मोहन सिंह (भा.पु.से.) के निर्देश में और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक जितेंद्र खूंटे (रा.पु.से.) के साथ एसडीओपी दंतेवाड़ा आकांक्षा ठाकुर (रा.पु.से.) के मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश के रायबरेली निवासी सत्यम दीक्षित को राजस्थान के देवली से गिरफ्तार किया है। आरोपी पर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर दंतेवाड़ा जिले का निवास और आय प्रमाण पत्र हासिल कर उसे CISF भर्ती में इस्तेमाल करने का आरोप है।

    जानिए कैसे हुआ मामले का खुलासा
    पुलिस के मुताबिक, आरोपी इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर CISF में भर्ती हुआ था और वर्तमान में राजस्थान के देवली में नौकरी कर रहा था। मामले की विवेचना के दौरान दस्तावेजों को लेकर संदेह सामने आया, जिसके बाद राजस्व अधिकारियों और तहसील कार्यालय से संबंधित प्रमाण पत्रों का सत्यापन कराया गया। सत्यापन के दौरान प्रमाण पत्रों के लिए प्रस्तुत किए गए दस्तावेज संदिग्ध और फर्जी पाए जाने संबंधी महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए।

    राजस्थान से पकड़ा गया आरोपी
    इसके बाद दंतेवाड़ा पुलिस ने आरोपी की तलाश शुरू की। आरोपी के राजस्थान में देवली में होने की जानकारी मिलने पर पुलिस टीम वहां पहुंची और सत्यम दीक्षित को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद आरोपी को विधिसम्मत प्रक्रिया के तहत न्यायालय के समक्ष पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया।

    अन्य लोगों की भूमिका की जांच में जुटी पुलिस
    पुलिस अब इस मामले में फर्जी दस्तावेज तैयार कराने और प्रमाण पत्र हासिल करने में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है। जांच में किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता सामने आने पर उसके खिलाफ भी वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

    आम नागरिकों से पुलिस की अपील
    दंतेवाड़ा पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि सरकारी नौकरी अथवा किसी शासकीय लाभ के लिए फर्जी दस्तावेजों का उपयोग न करें। ऐसे मामलों में संलिप्त व्यक्तियों के विरुद्ध विधि अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

  • ‘2027 में सपा को अपनी हार साफ दिख रही’… दानिश आजाद अंसारी का अखिलेश पर तीखा हमला

    ‘2027 में सपा को अपनी हार साफ दिख रही’… दानिश आजाद अंसारी का अखिलेश पर तीखा हमला

    ‘2027 में सपा को अपनी हार साफ दिख रही’… दानिश आजाद अंसारी का अखिलेश पर तीखा हमला

    ‘झूठ और भ्रम फैलाना सपा का प्राइमरी एजेंडा’… दानिश आजाद अंसारी ने साधा निशाना

    ‘2012 से 2017 तक अपराध बढ़े, तब कहां थे सपा नेता?’… दानिश आजाद अंसारी का सवाल

    ‘यूपी को बदनाम करने के लिए अपराध बढ़वा रही सपा’… दानिश आजाद अंसारी का गंभीर आरोप

    लखनऊ,
    समाजवादी पार्टी पर हमला बोलते हुए योगी सरकार के मंत्री दानिश आजाद अंसारी ने कहा कि सपा बौखला गई है, क्योंकि उसे 2027 के विधानसभा चुनाव में अपनी हार साफ और स्पष्ट दिखाई दे रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए सिर्फ झूठ और भ्रम फैलाना आज समाजवादी पार्टी का प्राथमिक एजेंडा बन गया है।

    ‘2012 से 2017 तक अपराधों के समय कहां थे सपा नेता?’

    दानिश आजाद अंसारी ने सपा पर सवाल उठाते हुए कहा कि पार्टी पहले इस बात का जवाब दे कि 2012 से 2017 के बीच उत्तर प्रदेश में अपराधों का ग्राफ बढ़ रहा था और महिलाओं के खिलाफ अपराध हो रहे थे, तब उसके नेता कहां थे?

    उन्होंने कहा कि उस समय अपराधियों के हौसले इतने बुलंद थे कि उत्तर प्रदेश में दिनदहाड़े लूट-खसोट, चोरी और दूसरी आपराधिक घटनाएं हुआ करती थीं। दानिश आजाद ने सवाल किया कि तब समाजवादी पार्टी को उत्तर प्रदेश की भलाई की याद क्यों नहीं आई?

    ‘योगी के नेतृत्व में यूपी की इमेज बेहतर हो रही’

    मंत्री ने कहा कि आज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में सरकार उत्तर प्रदेश के विकास के लिए काम कर रही है और प्रदेश की छवि बेहतर हो रही है। उन्होंने कहा कि इसी वजह से समाजवादी पार्टी के नेता बौखलाए हुए हैं।

    दानिश आजाद अंसारी ने सपा की प्रेस कॉन्फ्रेंस को लेकर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि पार्टी के नेता रिपोर्टरों का अपमान करने का काम कर रहे हैं।

    ‘यूपी को बदनाम करने के लिए अपराध बढ़वा रही सपा’

    दानिश आजाद अंसारी ने समाजवादी पार्टी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वह अपने कार्यकर्ताओं के माध्यम से आम और गरीब लोगों पर जानबूझकर अत्याचार करा रही है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश को बदनाम करने के लिए जानबूझकर आपराधिक घटनाएं बढ़वाने की कोशिश की जा रही है।

    मंत्री ने कहा कि समाजवादी पार्टी का यह “चाल-चरित्र” अब नहीं चलेगा। उन्होंने दावा किया कि जनता समाजवादी पार्टी की असलियत जानती है और उसके किसी भी बहकावे में आने वाली नहीं है।

  • दिव्यांग दंपत्तियों को आर्थिक संबल दे रही योगी सरकार की विवाह प्रोत्साहन योजना

    दिव्यांग दंपत्तियों को आर्थिक संबल दे रही योगी सरकार की विवाह प्रोत्साहन योजना

    लखनऊ। योगी सरकार दिव्यांगजनों को सामाजिक एवं आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और उन्हें सम्मानजनक जीवन प्रदान करने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। इसी क्रम में शादी-विवाह प्रोत्साहन पुरस्कार योजना के तहत दिव्यांग दंपत्तियों को आर्थिक सहायता दी जा रही है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में अब तक योजना के अंतर्गत 18 दिव्यांग दंपत्तियों को लाभान्वित किया गया है। योजना के लिए 2.64 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जिसके सापेक्ष 4.55 लाख रुपये खर्च किए जा चुके हैं। 

    सरकार की यह पहल दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर बनाने के साथ उनके वैवाहिक जीवन को आर्थिक संबल प्रदान कर रही है। ऑनलाइन संचालित योजना के माध्यम से पात्र लाभार्थियों तक सहायता पहुंचाने की प्रक्रिया में पारदर्शिता और सुगमता सुनिश्चित की जा रही है। योजना के तहत न्यूनतम 40 प्रतिशत दिव्यांगता वाले दिव्यांग दंपत्तियों को उनकी दिव्यांगता की स्थिति के आधार पर 15 हजार से 35 हजार रुपये तक की सहायता दी जाती है। योजना के अंतर्गत यदि दंपत्ति में युवक दिव्यांग है तो 15 हजार रुपये, युवती दिव्यांग है तो 20 हजार रुपये तथा युवक और युवती दोनों दिव्यांग हैं तो 35 हजार रुपये की धनराशि प्रोत्साहन स्वरूप प्रदान की जाती है। योजना का संचालन ऑनलाइन किया जा रहा है और लाभार्थियों को पीएफएमएस के माध्यम से ई-पेमेंट द्वारा सीधे लाभान्वित किया जाता है।

    अबतक 6698 दिव्यांग दंपत्तियों को मिला लाभ
    योगी सरकार की इस संवेदनशील पहल का लाभ बड़ी संख्या में दिव्यांग दंपत्तियों तक पहुंच रहा है। वित्तीय वर्ष 2017-18 से 2025-26 तक कुल 6698 दिव्यांग दंपत्तियों को योजना के तहत लाभान्वित किया गया है। अकेले वित्तीय वर्ष 2025-26 में 805 दिव्यांग दंपत्तियों को आर्थिक प्रोत्साहन प्रदान किया गया।

    दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर बनाने में सहायक है योजना
    दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के उप निदेशक डॉ. अमित कुमार राय ने कहा कि शादी-विवाह प्रोत्साहन पुरस्कार योजना दिव्यांगजनों को सामाजिक और आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। सरकार का उद्देश्य दिव्यांगजनों को सम्मानजनक जीवन के साथ उनके वैवाहिक जीवन में भी आर्थिक संबल उपलब्ध कराना है। डॉ. राय ने कहा कि योजना से बड़ी संख्या में दिव्यांग दंपत्तियों को लाभ मिल रहा है।

  • नोएल टाटा ने चंद्रशेखरन की नियुक्ति पर उठाए सवाल, फैसले को दे सकते हैं चुनौती

    नोएल टाटा ने चंद्रशेखरन की नियुक्ति पर उठाए सवाल, फैसले को दे सकते हैं चुनौती

    मुंबई 

    फिर से एन चंद्रशेखरन की नियुक्ति और नोएल टाटा के विरोध के बाद टाटा ट्रस्‍ट और टाटा संस के बीच विवाद साफ तौर पर दिखने लगा है. टाटा ग्रुप के बाकी सदस्‍यों ने एन चंद्रशेखरन को दोबारा से नियुक्‍त किया है, जबकि नोएल टाटा ने उनके विपक्ष में वोटिंग की है यानी कि 4:1 की वोटिंग से एन चंद्रशेखरन को दोबारा से चेयरमैन बनाने की मंजूरी मिली है। 

    इस बीच, ब्‍लूमबर्ग ने बताया है कि टाटा ट्रस्‍ट और  टाटा संस के बीच कानूनी लड़ाई हो सकती है. नोएल टाटा कोर्ट में इस फैसले को चुनौती दे सकते हैं. दोनों खेमा वकीलों को जुटाने में जुटा हुआ है। 

    टाटा ट्रस्‍ट का कहना है कि एन चंद्रशेखरन को टाटा संस के अध्यक्ष के रूप में फिर से नियुक्त करने का प्रस्ताव कानूनी रूप से अमान्य है. टाटा ट्रस्‍ट का तर्क है कि इसे ट्रस्ट द्वारा नामित दोनों निदेशकों का अनिवार्य समर्थन नहीं मिला है। 

    टाटा ट्रस्‍ट का क्‍या है तर्क?
    टाटा ट्रस्‍ट ने आगे कहा कि 4:1 का कुल मतदान गलत था, क्योंकि इसके दो नामांकित व्यक्तियों में से एक ने प्रस्ताव का विरोध किया था, जिससे कंपनी के आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन के तहत एक अलग शर्त पूरी नहीं हुई थी. टाटा ट्रस्ट्स के पास टाटा संस का लगभग 66 फीसदी मालिकाना हक है और इसके बोर्ड में दो चुने हुए डायरेक्‍टर हैं. ट्रस्ट्स के अनुसार, दोनों के बीच बहुमत का मतलब है कि दोनों को प्रस्ताव का समर्थन करना होगा। 

    ट्रस्ट ने इस दावे को भी खारिज कर दिया कि मतदान से बोर्ड में गतिरोध पैदा हो गया था और कहा कि चेयरमैन की वोटिंग इस आवश्यकता को रद्द नहीं कर सकता है. ट्रस्‍ट ने कहा कि चंद्रशेखर के दोबारा चेयमैन बनने के प्रस्‍ताव को शुरू से ही रद्द किया गया है। 

    टाटा ट्रस्‍ट का यह बयान टाटा संस बोर्ड की ओर से 17 सितंबर को 4:1 की वोटिंग से चंद्रशेखरन को ग्रुप की होल्डिंग कंपनी के चेयरमन के तौर पर चुने जाने के बाद आया है. टाटा ट्रस्ट्स के अध्यक्ष और टाटा संस के डायरेक्‍टर नोएल टाटा ने प्रस्ताव के खिलाफ मतदान किया और इसकी वैधता को चुनौती दी। 

    टाटा ट्रस्‍ट ने बताया क्‍यों गलत है ये वोटिंग? 
    इस विवाद के केंद्र में टाटा संस के नियमों से संबंधित कंपनी के कॉन्‍ट्रैक्‍ट हैं, जिनमें कंपनी को संचालित करने वाले नियम शामिल हैं. टाटा ट्रस्ट्स के अनुसार, बोर्ड के फैसले केवल कुल वोटों की गिनती के आधार पर तय नहीं किए जा सकते. इसके लिए ट्रस्ट्स द्वारा चुने हुए डायरेक्‍टर के बहुमत का पॉजिटिव रिस्‍पॉन्‍स भी जरूरी है। 

    बयान में कहा गया है कि टाटा संस के आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन में बोर्ड के किसी भी फैसले को केवल डायरेक्‍टर की संख्या पर छोड़ने की अनुमति नहीं है. इसमें तर्क दिया गया कि चूंकि ट्रस्ट द्वारा नामित दो व्यक्तियों में से एक ने चंद्रशेखरन के दोबारा नियुक्ति का विरोध किया, इसलिए प्रस्ताव को मंजूरी नहीं दी जा सकती है। 

    ट्रस्ट ने तर्क दिया कि यह शर्त बोर्ड के पूरी वोटिंग से अलग थी. इसलिए 4:1 के रिजल्‍ट से प्रस्ताव वैध नहीं हो जाता. उन्होंने कहा कि कोई शर्त या तो पूरी होती है, या नहीं. इस मामले में शर्त पूरी नहीं हुई। 

    'कोई गतिरोध नहीं था'
    टाटा ट्रस्ट्स ने इस सुझाव को भी खारिज कर दिया कि प्रस्ताव के प्रति उसके विरोध ने एक गतिरोध पैदा कर दिया है जो कंपनी को कमजोर कर सकता है. बयान में आगे कहा गया कि फाइनल वोटिंग चेयरमैन को तब दी जाती है, जब बोर्ड में सदस्‍यों की संख्‍या बराबर हो. ट्रस्टों ने तर्क दिया कि इस मामले में इसका उपयोग नहीं किया जा सकता क्योंकि समग्र बोर्ड स्तर पर कोई बराबरी नहीं थी. इन सभी तर्कों के साथ टाटा ट्रस्‍ट का कहना है कि चंद्रशेखरन की नियुक्‍ति को सही नहीं ठहराया जा सकता है। 

  • वोटर लिस्ट विवाद में सोनिया गांधी को झटका, सेशन कोर्ट ने आदेश रद्द किया

    वोटर लिस्ट विवाद में सोनिया गांधी को झटका, सेशन कोर्ट ने आदेश रद्द किया

    नई दिल्ली

    दिल्ली की एक अदालत ने कांग्रेस नेता सोनिया गांधी के मतदाता सूची में नाम शामिल होने से जुड़े मामले में मजिस्ट्रेट का पुराना आदेश रद्द कर दिया है। इस मामले में आरोप लगाया गया था कि सोनिया गांधी का नाम 1983 में भारतीय नागरिकता मिलने से करीब तीन साल पहले ही वोटर लिस्ट में दर्ज कर दिया गया था। इसे लेकर वकील विकास त्रिपाठी ने शिकायत दर्ज कर जांच की मांग की थी। मजिस्ट्रेट ने 11 सितंबर 2025 को इस शिकायत पर जांच से इनकार कर दिया था। इसके खिलाफ त्रिपाठी ने अदालत में याचिका दायर की थी।

    स्पेशल जज विशाल गोगने ने मजिस्ट्रेट के आदेश को सही प्रक्रिया के तहत नहीं दिया गया आदेश बताया। अदालत ने कहा कि मजिस्ट्रेट को पहले पुलिस अधिकारी की बात सुननी चाहिए थी और संबंधित थाने से मामले की स्थिति की रिपोर्ट भी मांगनी चाहिए थी। अदालत के मुताबिक, ऐसा नहीं किया गया। साथ ही मजिस्ट्रेट ने यह भी साफ नहीं किया कि शिकायत मिलने के बाद पुलिस को प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया जाना चाहिए था या मामले में कानून के तहत कोई दूसरी कार्रवाई की जानी चाहिए थी।

    अदालत ने कहा कि मजिस्ट्रेट ने इस बात पर ध्यान देने के बजाय कि शिकायत में किसी अपराध की जानकारी मिलती है या नहीं, सोनिया गांधी की नागरिकता के मुद्दे पर ज्यादा ध्यान दिया। अदालत के मुताबिक, सबसे पहले यह देखना जरूरी था कि शिकायत में ऐसा कोई मामला बनता है या नहीं, जिसमें पुलिस जांच की जरूरत हो। इस मामले में मजिस्ट्रेट ने इस मुख्य सवाल पर उचित तरीके से विचार नहीं किया।

    कोर्ट ने अब मामले को वापस मजिस्ट्रेट के पास भेज दिया है। मजिस्ट्रेट को दोनों पक्षों की दलीलें नए सिरे से सुननी होंगी और उसके बाद कानून के मुताबिक नया आदेश देना होगा। मामले की अगली सुनवाई 29 सितंबर को होगी। अदालत के इस फैसले का मतलब यह नहीं है कि सोनिया गांधी के खिलाफ लगाए गए आरोप साबित हो गए हैं। फिलहाल कोर्ट ने केवल पुराने आदेश को रद्द करते हुए मामले पर दोबारा विचार करने का निर्देश दिया है।

  • उत्पादन से मूल्य संवर्धन तक : उद्यानिकी को नई ऊंचाई देने की तैयारी, किसानों की आय बढ़ाने पर नीति संवाद में मंथन

    उत्पादन से मूल्य संवर्धन तक : उद्यानिकी को नई ऊंचाई देने की तैयारी, किसानों की आय बढ़ाने पर नीति संवाद में मंथन

    उत्पादन से मूल्य संवर्धन तक : उद्यानिकी को नई ऊंचाई देने की तैयारी, किसानों की आय बढ़ाने पर नीति संवाद में मंथन

    भोपाल 
    मध्यप्रदेश में उद्यानिकी क्षेत्र को केवल उत्पादन तक सीमित रखने के बजाय संग्रहण, प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन, ब्रांडिंग, बाजार संपर्क और निर्यात से जोड़कर मजबूत मूल्य श्रृंखला विकसित करने की दिशा में राज्य नीति आयोग ने व्यापक नीति संवाद आयोजित किया। भोपाल के एमपीटी होटल पलाश रेजीडेंसी स्थित विमर्श सभागार में आयोजित एक दिवसीय “Strengthening Horticulture Value Chains in Madhya Pradesh” संवाद में शासन, कृषि एवं उद्यानिकी क्षेत्र के वरिष्ठ अधिकारियों, नीति विशेषज्ञों, कृषक उत्पादक संगठनों (FPO), वित्तीय संस्थानों, उद्योग प्रतिनिधियों और तकनीकी संस्थाओं ने किसानों को उत्पादन का बेहतर मूल्य दिलाने तथा राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक उनकी पहुंच बढ़ाने के उपायों पर मंथन किया।

    कार्यक्रम का आरंभ “समृद्ध मध्यप्रदेश@2047” पर आधारित लघु फिल्म के प्रदर्शन से हुआ। उद्घाटन सत्र में मध्यप्रदेश राज्य नीति आयोग के मुख्य कार्यपालन अधिकारी स्वरौचिष सोमवंशी, योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग के सचिव श्रीमन शुक्ला, अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान के उपाध्यक्ष प्रो. राजीव दीक्षित तथा कृषि उत्पादन आयुक्त एवं अपर मुख्य सचिव के.सी. गुप्ता ने उद्यानिकी क्षेत्र की संभावनाओं और आगामी नीति की प्राथमिकताओं पर विचार रखे।

    अब लक्ष्य अधिक उत्पादन नहीं, अधिक मूल्य किसानों तक पहुंचाना

    राज्य नीति आयोग के मुख्य कार्यपालन अधिकारी स्वरौचिष सोमवंशी ने कहा कि मध्यप्रदेश में उद्यानिकी का विस्तार उल्लेखनीय स्तर तक पहुंच चुका है। अब अगले चरण में उत्पादन बढ़ाने के साथ यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि उत्पाद से बनने वाले अधिकतम मूल्य का लाभ किसान तक पहुंचे। उन्होंने बताया कि वर्ष 2024-25 में प्रदेश में लगभग 13.26 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में 259.86 लाख मीट्रिक टन सब्जियों तथा लगभग 4.80 लाख हेक्टेयर में 102.07 लाख मीट्रिक टन फलों का उत्पादन हुआ। पिछले पांच वर्षों के औसत वार्षिक उत्पादन में केला 23.24 लाख मीट्रिक टन, आम 8.92 लाख मीट्रिक टन और संतरा 22.07 लाख मीट्रिक टन रहा है।

    उन्होंने कहा कि कृषकों के संगठन, मजबूत शीत श्रृंखला, आधुनिक प्रसंस्करण, ब्रांडिंग तथा विभिन्न योजनाओं और वित्तीय साधनों के बेहतर समन्वय से उद्यानिकी उत्पादों की वास्तविक आर्थिक क्षमता का उपयोग किया जा सकता है।

    मालवा सहित विभिन्न क्षेत्रों की विशिष्ट फसलों को मिले बाजार

    योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग के सचिव श्रीमन शुक्ला ने कहा कि उद्यानिकी मध्यप्रदेश की कृषि अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। प्रदेश के विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों, विशेषकर मालवा क्षेत्र में कई विशिष्ट उद्यानिकी फसलों के लिए प्राकृतिक अनुकूलता उपलब्ध है। आवश्यकता इस बात की है कि इन फसलों को केवल खेत से मंडी तक पहुंचाने के बजाय प्रसंस्करण, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और बाजार से जोड़कर मूल्य श्रृंखला का हिस्सा बनाया जाए।

    उन्होंने कहा कि उत्पादन आधारित व्यवस्था से मूल्य श्रृंखला आधारित व्यवस्था की ओर बढ़ने से कटाई के बाद तत्काल बिक्री का दबाव कम होगा और किसानों को बेहतर मूल्य प्राप्त करने के अवसर बढ़ेंगे। उन्होंने जिला-स्तरीय आंकड़ों, FPO की क्षमता और फसल समूहों के आधार पर सार्वजनिक एवं निजी निवेश को प्राथमिकता देने की आवश्यकता बताई।

    शोध, तकनीक और उद्योग के समन्वय पर जोर

    प्रो. राजीव दीक्षित ने कहा कि खेत से बाजार तक मौजूद कमियों को दूर करने के लिए सुदृढ़ नीति अनुसंधान, तकनीकी परीक्षण और संस्थागत क्षमता निर्माण जरूरी है। उन्होंने उद्यानिकी क्षेत्र से जुड़े सभी पक्षों को साझा मंच पर लाने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान ने उद्यानिकी क्षेत्र से जुड़े नौ विशेषज्ञ संस्थानों के साथ सहभागिता स्थापित की है। आगे फसल एवं विषय-विशेष आधारित सत्रों के माध्यम से क्षेत्रीय चुनौतियों और नए अवसरों पर कार्य किया जाएगा।

    कुल कृषि क्षेत्र का 9 प्रतिशत, राष्ट्रीय उद्यानिकी क्षेत्र में 16 प्रतिशत हिस्सेदारी

    कृषि उत्पादन आयुक्त एवं अपर मुख्य सचिव के.सी. गुप्ता ने कहा कि उद्यानिकी को पारंपरिक कृषि से आगे बढ़ाकर उच्च मूल्य आधारित कृषि और प्रसंस्करण से जोड़ना प्रदेश के लिए महत्वपूर्ण अवसर है। उन्होंने बताया कि उद्यानिकी प्रदेश के कुल कृषि क्षेत्र का लगभग 9 प्रतिशत है, जबकि राष्ट्रीय उद्यानिकी क्षेत्र में मध्यप्रदेश का योगदान लगभग 16 प्रतिशत है।

    उन्होंने शोध संस्थानों, नीति विशेषज्ञों और उद्योग जगत से जिला-वार चुनौतियों की पहचान कर स्पष्ट कार्ययोजना तैयार करने का आह्वान किया। उन्होंने गुणवत्तापूर्ण बीज एवं रोपण सामग्री, उच्च तकनीक नर्सरी, बीज प्रक्षेत्रों के उन्नयन और समूह आधारित प्रसंस्करण संरचना के विस्तार को महत्वपूर्ण प्राथमिकताओं के रूप में रेखांकित किया।

    28.60 लाख हेक्टेयर से 438.05 लाख मीट्रिक टन उद्यानिकी उत्पादन

    नीति संवाद में बताया गया कि मध्यप्रदेश वर्तमान में कुल उद्यानिकी उत्पादन के मामले में देश के अग्रणी राज्यों में है। प्रदेश में लगभग 28.60 लाख हेक्टेयर क्षेत्र से 438.05 लाख मीट्रिक टन वार्षिक उद्यानिकी उत्पादन हो रहा है। ऐसे में उत्पादन के बाद की व्यवस्थाओं को मजबूत करना किसानों की आय और बाजार प्रतिस्पर्धा दोनों के लिए महत्वपूर्ण है।

    चर्चा में शीत भंडारण, पैक हाउस, ग्रेडिंग-सॉर्टिंग, प्राथमिक प्रसंस्करण, FPO की क्षमता, गुणवत्ता प्रमाणीकरण, ट्रेसबिलिटी और निर्यात मानकों से संबंधित मुद्दों पर विस्तार से विचार किया गया। वैश्विक बाजार की आवश्यकताओं के अनुरूप उत्पाद की गुणवत्ता और निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया।

    मंडी स्तर पर ग्रेडिंग से लेकर सौर प्रसंस्करण तक आए सुझाव

    दिनभर चली चर्चा में छंटाई, ग्रेडिंग और गुणवत्ता आधारित मूल्य निर्धारण को मंडी स्तर पर बढ़ावा देने, कृषि अवसंरचना कोष से संबंधित प्रकरणों के समाधान के लिए विभागीय समन्वय मजबूत करने तथा उद्यानिकी कार्यालयों और FPO तक डिजिटल सहायता पहुंचाने के सुझाव सामने आए। इसके साथ ही उच्च मूल्य वाली मसाला फसलों के लिए सहायता प्रावधानों की समीक्षा तथा कम लागत वाली शीत परिवहन और सौर आधारित प्रसंस्करण तकनीकों को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया गया।

    नीति संवाद का उद्देश्य प्राथमिक फसल मूल्य श्रृंखलाओं की पहचान, शासन-FPO-तकनीकी संस्थानों-निजी क्षेत्र की भूमिकाओं को स्पष्ट करना तथा योजनाओं के बेहतर समन्वय के माध्यम से राज्य की उद्यानिकी नीति और आगामी बजट प्रक्रिया के लिए क्रियान्वयन योग्य सुझाव तैयार करना रहा।

    समापन अवसर पर मध्यप्रदेश राज्य नीति आयोग की सलाहकार डॉ. आकांक्षा चंद ने दिनभर हुई चर्चा और प्रमुख सुझावों का सार प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि संवाद से प्राप्त नीतिगत अनुशंसाओं को राज्य शासन के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा, ताकि नीति निर्माण और बजट संबंधी प्रक्रिया में उनका समुचित उपयोग किया जा सके। कार्यक्रम के अंत में आयोग की प्रशासनिक अधिकारी श्रीमती पूर्णिमा शर्मा ने आभार व्यक्त किया।

     

  • नगरी के पंडरवाही में घर-घर नल से बह रही खुशहाली

    नगरी के पंडरवाही में घर-घर नल से बह रही खुशहाली

    सेवा का संकल्प, विकास की धार

    नगरी के पंडरवाही में घर-घर नल से बह रही खुशहाली

    ​रायपुर

           जब सुबह की शुरुआत पानी जुटाने की चिंता से न होकर एक नए आत्मविश्वास और सुविधा के साथ हो, तो समझ लेना चाहिए कि विकास ज़मीन पर उतर चुका है। धमतरी जिले के नगरी विकासखंड स्थित पंडरवाही गांव में आज यह सुखद बदलाव हर घर की देहरी पर साफ़ महसूस किया जा सकता है। अंगीरा ऋषि पर्वत की मनमोहक वादियों और बालका नदी के प्राकृतिक आंचल में बसे इस गांव में कभी पानी के लिए मीलों पैदल चलने और घंटों इंतज़ार करने की मजबूरी थी। लेकिन आज 'सेवा संकल्प अभियान' और जल जीवन मिशन के सशक्त संयोजन ने यहाँ की तस्वीर पूरी तरह बदल दी है। गांव के 94 परिवारों के घरों तक नल कनेक्शन पहुँचने से अब स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल ग्रामीणों की दिनचर्या का एक सहज और सम्मानजनक हिस्सा बन गया है।
            ​पंडरवाही में पहले प्राकृतिक जलस्रोत उपलब्ध होने के बावजूद, विशेषकर गर्मी के दिनों में, पानी का प्रबंध करना एक गंभीर चुनौती हुआ करता था। इसका सबसे बड़ा खामियाजा महिलाओं और बच्चों को भुगतना पड़ता था, जिनकी सुबह और शाम का बहुमूल्य समय भारी बर्तन ढोने और पानी की कतारों में ही बीत जाता था। गांव की निवासी सुपेन बाई और सुशीला बाई बताती हैं कि अब घर-आंगन में ही नल लग जाने से उनकी रोजमर्रा की जिंदगी बेहद आसान हो गई है। पानी लाने में जो श्रम और समय नष्ट होता था, अब उसका उपयोग वे अपने परिवार की देखभाल, बच्चों की पढ़ाई और स्व-सहायता समूहों के माध्यम से आय बढ़ाने वाली गतिविधियों में कर रही हैं। इसके साथ ही, पानी भरने की जिम्मेदारी से मुक्त होकर बच्चे भी अब नियमित रूप से स्कूल जा पा रहे हैं, जिससे उनके सुनहरे भविष्य की नींव मजबूत हो रही है।
            ​यहाँ यह योजना केवल नल कनेक्शन देने तक सीमित नहीं रही, बल्कि जलापूर्ति को नियमित और सुचारू बनाए रखने के लिए एक पारदर्शी और मजबूत व्यवस्था भी तैयार की गई है। स्थानीय पंप ऑपरेटर चुमन पटेल निर्धारित समय पर मोटर चलाकर ओवरहेड टैंक भरते हैं और जलापूर्ति की हर जानकारी 'मेरी पंचायत' ऐप पर दर्ज करते हैं। इसके अलावा, पाइपलाइन या मोटर में किसी भी तरह की तकनीकी खराबी आने पर उसके तुरंत निवारण के लिए ग्रामीणों को सीधे संपर्क की सुविधा दी गई है, जो प्रशासनिक सजगता और जन-भागीदारी की एक मिसाल पेश करता है।
          ​घर-घर नल से जल पहुँचने का सीधा प्रभाव गांव की स्वच्छता और लोगों के स्वास्थ्य पर भी साफ़ दिखाई दे रहा है। नियमित जल उपलब्धता से व्यक्तिगत स्वच्छता, घरेलू साफ़-सफाई और बीमारियों से बचाव में अभूतपूर्व सुधार हुआ है। पंडरवाही की यह सफलता दर्शाती है कि सरकारी योजनाओं की असली उपलब्धि केवल आंकड़ों में नहीं, बल्कि लोगों के जीवन में आए गुणात्मक सुधार में निहित है। आज पंडरवाही के घरों में नल से बहती पानी की धार केवल प्यास बुझाने का माध्यम नहीं, बल्कि बदली हुई दिनचर्या, बचे हुए समय और छत्तीसगढ़ में सुशासन के एक नए और बेहतर कल का प्रतीक बन चुकी है।