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  • क्या लौटेगी Ambassador? हिंदुस्तान मोटर्स ने उत्तरपारा प्लांट को लेकर बढ़ाई हलचल

    क्या लौटेगी Ambassador? हिंदुस्तान मोटर्स ने उत्तरपारा प्लांट को लेकर बढ़ाई हलचल

    कलकत्ता

    हिंदुस्तान मोटर्स व्हीकल मैन्युफैक्चरिंग में वापसी करने की तैयारी में है. एक वक्त था जब हिंदुस्तान मोटर्स की एंबेसडर का भारतीय बाजार में दबदबा था. ये कार 'पावर' की पहचान हुआ करती थी. कोई बड़ा नेता हो या फिर किसी महकमे का बड़ा अधिकारी एंबेसडर ही उनकी सवारी हुआ करती थी. लेकिन वक्त के साथ इस कार की रफ्तार थम गई।  

    अब ऐसी चर्चाएं हैं कि कंपनी इस कार को वापस मार्केट में उतारने की तैयारी में जुटी हुई है. रिपोर्ट्स की मानें, तो कंपनी पश्चिम बंगाल के उत्तरपारा में व्हीकल मैन्युफैक्चरिंग की शुरुआत करना चाहती है. इस बार कंपनी का फोकस इलेक्ट्रिक व्हीकल पर होगा। 

    सीकेए बिरला ग्रुप ने इस संबंध में पश्चिम बंगाल सरकार से संपर्क भी किया है. इस संबंध में राज्य सरकार ने फिलहाल कोई जवाब नहीं दिया है. हिंदुस्तान मोटर्स ने 2014 में अपने ऑपरेशन को बंद कर दिया था. वहीं पश्चिम बंगाल के पास लगभग दो दशक बाद ऑटोमोबाइल इकोसिस्टम में वापसी करने का एक और मौका होगा। 

    जॉइंट वेंचर में होगा प्लांट
    2008 में टाटा नैनो प्रोजेक्ट के सिंगूर से बाहर होने के बाद राज्य को ऑटोमोबाइल सेक्टर से कोई बड़ा निवेश मिला नहीं है. वहीं सीकेए बिरला ग्रुप अभी भी ऑटोमोटिव कंपोनेंट इंडस्ट्री में बना हुआ है. रिपोर्ट्स की मानें तो हिंदुस्तान मोटर्स का ये ईवी प्लांट किसी अमेरिकी या यूरोपियन कंपनी के साथ जॉइंट वेंचर हो सकता है। 

    इस खबर के आने के बाद एंबेसडर की वापसी की चर्चा होने लगी है. हालांकि, ये चर्चा ही है फिलहाल. इस संबंध में कोई भी ठोस जानकारी सामने नहीं आई है. एंबेसडर की वापसी मुश्किल इसलिए भी है क्योंकि हिंदुस्तान मोटर्स के पास इस नाम को इस्तेमाल करने का अधिकार नहीं है। 

    क्यों मुश्किल है एंबेसडर की वापसीय़
    2017 में हिंदुस्तान मोटर्स ने 80 करोड़ रुपये में इस नाम का ट्रेडमार्क प्यूजो (Peugeot SA) ग्रुप को बेच दिया था. इसका मतलब है कि हिंदुस्तान मोटर्स सीधे इस नाम का इस्तेमाल नहीं कर सकती है. सोशल मीडिया पर आपको एंबेसडर ईवी के कई रेंडर दिख जाएंगे. लेकिन इनमें से कोई भी असली नहीं है. अगर हिंदुस्तान मोटर्स ऑटोमोबाइल सेक्टर में वापसी करता भी है, तो इसका नाम एंबेसडर नहीं होगा। 

    वैसे ये पहला मौका नहीं है जब हिंदुस्तान मोटर्स ने इसकी शुरुआत की है. इससे पहले भी कंपनी ने एक यूरोपियन कंपनी के साथ एमओयू साइन किया था. लेकिन कंपनी को उत्तरपारा में प्रोडक्शन शुरू करने की मंजूरी नहीं मिलने के बाद वो मामला ठंडा पड़ गया था। 

     

  • PM मोदी के विजन से गांवों तक पहुंची आवास की सौगात, बदली शांति बाई की जिंदगी

    PM मोदी के विजन से गांवों तक पहुंची आवास की सौगात, बदली शांति बाई की जिंदगी

    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विजन से गांवों तक पहुंची आवास की सौगात, शांति बाई का बदला जीवन

    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में जनकल्याणकारी योजनाओं से ग्रामीण परिवारों को मिल रहा सुरक्षा और सम्मान

    ग्राम पंचायत धनौली की शांति बाई को आवास के साथ विधवा पेंशन से मिला आर्थिक संबल

    रायपुर,
    गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के विकासखंड गौरेला की ग्राम पंचायत धनौली निवासी श्रीमती शांति बाई के लिए पक्का घर केवल एक मकान नहीं, बल्कि सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन की नई शुरुआत है। कभी मिट्टी के कच्चे घर में बारिश के दिनों की चिंता के बीच जीवन बिताने वाली शांति बाई आज अपने पक्के और सुरक्षित आशियाने में सुकून के साथ जीवन व्यतीत कर रही हैं।

    प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के अंतर्गत शांति बाई के परिवार को पक्का आवास उपलब्ध हुआ। प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण का उद्देश्य ग्रामीण परिवारों को बुनियादी सुविधाओं से युक्त पक्का आवास उपलब्ध कराना है। छत्तीसगढ़ में भी केंद्र और राज्य स्तर की योजनाओं के माध्यम से पात्र हितग्राहियों तक विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।

    शांति बाई के लिए बदली जिंदगी की तस्वीर

    शांति बाई बताती हैं कि पहले उनका परिवार कच्चे मकान में रहता था। बारिश का मौसम शुरू होते ही घर की सुरक्षा और परिवार की चिंता बढ़ जाती थी। घर के आसपास कीचड़ और पानी जमा होने से रोजमर्रा के काम प्रभावित होते थे। कच्चे घर में रहने के दौरान हर बारिश एक नई परेशानी लेकर आती थी।

    प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पक्का घर मिलने के बाद उनकी जिंदगी में यह स्थिति बदल गई है। मजबूत दीवारों और सुरक्षित छत वाले नए घर ने परिवार को मौसम की चिंता से काफी राहत दी है। अपने नए आशियाने को देखकर शांति बाई के चेहरे पर संतोष और खुशी साफ दिखाई देती है।

    प्रधानमंत्री के ‘सबका साथ, सबका विकास’ के विजन से जुड़ा प्रयास

    शांति बाई के जीवन में आया यह बदलाव केंद्र सरकार की ग्रामीण आवास संबंधी योजनाओं के उस व्यापक उद्देश्य से जुड़ा है, जिसके तहत पात्र ग्रामीण परिवारों को आवासीय सुरक्षा उपलब्ध कराने पर जोर दिया जाता है। उनके मामले में आवास की सुविधा के साथ सामाजिक सुरक्षा के रूप में विधवा पेंशन का लाभ भी मिल रहा है, जिससे उन्हें नियमित आर्थिक सहायता प्राप्त हो रही है।

    शांति बाई कहती हैं कि पक्का घर मिलने से परिवार को सुरक्षा और सुविधा मिली है। पेंशन की सहायता से घर के जरूरी खर्चों में भी मदद मिलती है। उनके अनुसार आवास और पेंशन, दोनों का लाभ उनके लिए जीवन को अधिक सुरक्षित बनाने वाला सहयोग साबित हुआ है।

    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में योजनाओं के क्रियान्वयन पर जोर

    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार केंद्र एवं राज्य की जनकल्याणकारी योजनाओं को पात्र हितग्राहियों तक पहुंचाने पर जोर दे रही है। ग्रामीण परिवारों के जीवन में आवास, सामाजिक सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं का विस्तार इसी समग्र कल्याणकारी दृष्टिकोण का हिस्सा है। शांति बाई का अनुभव इस बात का उदाहरण है कि किसी परिवार के लिए पक्का घर मिलने से केवल रहने की जगह नहीं बदलती, बल्कि सुरक्षा, सुविधा और भविष्य को लेकर विश्वास भी मजबूत होता है।

    अब बारिश में घर की चिंता नहीं रहती

    शांति बाई अपने अनुभव साझा करते हुए कहती हैं कि पहले बारिश के दिनों में कच्चे घर को लेकर चिंता बनी रहती थी। अब पक्का घर मिलने के बाद परिवार सुरक्षित महसूस करता है। वे आवास योजना का लाभ मिलने और पेंशन से आर्थिक सहायता प्राप्त होने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करती हैं।

    शांति बाई की कहानी ग्रामीण क्षेत्र में सरकारी योजनाओं के माध्यम से जीवन में आने वाले बदलाव की एक व्यक्तिगत मिसाल है। पक्का आवास उनके परिवार को मौसम की कठिनाइयों से राहत देने के साथ सुरक्षित जीवन का आधार उपलब्ध करा रहा है, वहीं विधवा पेंशन उन्हें आर्थिक सहायता प्रदान कर रही है। पक्का घर, सुरक्षित जीवन और सामाजिक सुरक्षा, शांति बाई के जीवन में इन सुविधाओं का साथ उनके लिए नई उम्मीद और संतोष का आधार बना है।

  • भोपाल में 27 सितंबर को मुख्यमंत्री-स्टार्टअप संवाद, नए आइडिया पर मंथन

    भोपाल में 27 सितंबर को मुख्यमंत्री-स्टार्टअप संवाद, नए आइडिया पर मंथन

    मुख्यमंत्री-स्टार्टअप संवाद 27 सितम्बर को भोपाल में

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव स्टार्टअप संचालकों से होंगे रूबरू-नए आइडिया पर होगी चर्चा

    भोपाल 

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव रविवार 27 सितम्बर 2026 को आरसीवीपी नरोन्हा अकादमी ऑफ एडमिनिस्ट्रेशन, भोपाल में मुख्यमंत्री स्टार्टअप संवाद के तहत युवाओं से संवाद करेंगे। कार्यक्रम सुबह 9 बजे से प्रारंभ होगा। संवाद में प्रदेश से लगभग 200 स्टार्टअप संचालक सम्मिलित होंगे।

    एमएसएमई आयुक्त श्री कुमार पुरषोत्तम ने मंगलवार को वी सी के माध्यम से प्रदेश के सभी जिलों के अधिकारियों से अपने जिले के नव उद्यमियों को संवाद में सहभागिता करवाने के लिए निर्देश दिए हैं। उन्होंने कार्यक्रम की तैयारियों के संबंध में भी वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बिंदुवार समीक्षा की। स्टार्टअप संवाद में मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रदेश के युवा, नवाचारी एवं उभरते हुए स्टार्टअप उद्यमियों से सीधे संवाद करेंगे।

    यह संवाद प्रदेश में विकसित हो रहे स्टार्टअप इकोसिस्टम, युवाओं की उद्यमशील सोच, नवाचार तथा रोजगार सृजन की संभावनाओं को समझने और उन्हें प्रोत्साहित करने का महत्वपूर्ण मंच होगा। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. यादव के साथ स्टार्टअप संस्थापकों को अपने अनुभव, उपलब्धियाँ, चुनौतियाँ एवं सुझाव साझा करने का अवसर मिलेगा।

    एमएसएमई विभाग ने स्टार्टअप संचालकों के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन फॉर्म भी जारी कर सहभागिता सुनिश्चित करने का आग्रह किया है।

     

  • छत्तीसगढ़ में 13.96 लाख महिलाएं बनीं लखपति दीदी, लक्ष्य से 179% आगे

    छत्तीसगढ़ में 13.96 लाख महिलाएं बनीं लखपति दीदी, लक्ष्य से 179% आगे

    छत्तीसगढ़ में 13.96 लाख महिलाएं बनीं लखपति दीदी

    लखपति महिला पहल की राज्य स्तरीय स्टीयरिंग समिति की तृतीय बैठक संपन्न

    लक्ष्य के 179 प्रतिशत महिलाएं लखपति दीदी बन हुईं आत्मनिर्भर

    रायपुर
     पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अंतर्गत छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ द्वारा संचालित लखपति महिला पहल को प्रदेश में उल्लेखनीय सफलता मिली है। भारत सरकार द्वारा वर्ष 2023-26 के लिए छत्तीसगढ़ को 7.82 लाख ग्रामीण महिलाओं को लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। इसके विरुद्ध अब तक प्रदेश की 13.96 लाख ग्रामीण महिलाओं को लखपति दीदी की श्रेणी में लाकर आत्मनिर्भर बनाया गया है। यह निर्धारित लक्ष्य का 179 प्रतिशत है।

           लखपति महिला पहल की राज्य स्तरीय स्टीयरिंग समिति की तृतीय बैठक मंगलवार को नवा रायपुर स्थित महानदी भवन में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के सचिव श्री भीम सिंह की अध्यक्षता में संपन्न हुई। बैठक में राज्य के 27 विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे। छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ के मिशन संचालक श्री अश्वनी देवांगन ने लखपति महिला पहल के अंतर्गत प्रदेश में संचालित गतिविधियों और अब तक हुई प्रगति की विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की।

    विभागीय अभिसरण से महिलाओं की आय बढ़ाने पर जोर
           बैठक में विभिन्न विभागों के साथ अभिसरण के माध्यम से स्व-सहायता समूहों से जुड़ी ग्रामीण महिलाओं की आय में वृद्धि करने तथा उन्हें स्थायी आजीविका के अवसरों से जोड़ने पर विस्तृत चर्चा हुई। महिलाओं को विभिन्न आर्थिक गतिविधियों, स्वरोजगार और आजीविका के स्थायी साधनों से जोड़कर उनकी वार्षिक आय में वृद्धि सुनिश्चित करने के प्रयासों को और गति देने पर भी विचार-विमर्श किया गया।

    महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल
           लखपति महिला पहल का उद्देश्य ग्रामीण स्व-सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को विविध आजीविका गतिविधियों से जोड़कर उनकी आय में निरंतर वृद्धि करना और उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है। बैठक में इस दिशा में विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष जोर दिया गया। इस अवसर पर पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग तथा छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ के अधिकारी-कर्मचारी भी उपस्थित रहे।

  • NO PUC NO Fuel: 1 अक्टूबर से बिना वैध PUC नहीं मिलेगा पेट्रोल-डीजल

    NO PUC NO Fuel: 1 अक्टूबर से बिना वैध PUC नहीं मिलेगा पेट्रोल-डीजल

     नई दिल्ली
    No Valid PUCC No Fuel Rule: अगर आप दिल्ली-एनसीआर में रहते हैं और आपका आना-जाना गाजियाबाद-दिल्ली के बीच होता रहता है तो ये ख़बर आपके लिए बेहद जरूरी है. गाजियाबाद में वाहन चालकों के लिए एक अक्टूबर से फ्यूल खरीदने के नियम में बड़ा बदलाव होने जा रहा है. अब बिना वैलिड पॉल्यूशन अंडरकंट्रोल सर्टिफिकेट (PUCC) वाले वाहनों को पेट्रोल और डीजल नहीं दिया जाएगा. जिला पूर्ति विभाग ने इसकी तैयारी शुरू कर दी है। 

    वाहन मालिकों से कहा गया है कि वे 30 सितंबर से पहले अपने वाहनों के प्रदूषण प्रमाणपत्र की वैधता जांच लें और प्रमाणपत्र समाप्त हो चुका है या जल्द समाप्त होने वाला है तो समय रहते उसे रिन्यू करा लें. जिला पूर्ति अधिकारी अमित कुमार तिवारी ने बताया कि एक अक्टूबर से व्यवस्था लागू होने के बाद पेट्रोल पंप पर फ्यूल देने से पहले वाहन के प्रदूषण प्रमाणपत्र की वैधता की जांच की जाएगी। 

    इसके लिए जिले के पेट्रोल पंपों पर विशेष ऐप की व्यवस्था की गई है. वाहन का नंबर स्कैन या दर्ज करने के बाद ऐप के माध्यम से तत्काल पता चल सकेगा कि संबंधित वाहन का प्रदूषण प्रमाणपत्र वैध है या नहीं. वैध प्रमाणपत्र होने पर ही फ्यूल दिया जाएगा.  उन्होंने बताया कि विभाग की ओर से फिलहाल व्यवस्था को लेकर पेट्रोल पंपों पर परीक्षण भी किया जा रहा है, ताकि एक अक्टूबर से इसे लागू करने में तकनीकी दिक्कत न आए. पेट्रोल पंप संचालकों को भी निर्देश दिए गए हैं कि निर्धारित तिथि से बिना वैध प्रदूषण प्रमाणपत्र वाले वाहनों को ईंधन उपलब्ध न कराया जाए। 

    वाहन चालकों को पहले से जानकारी देने पर जोर
    नई व्यवस्था को लेकर वाहन चालकों के बीच जागरूकता बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है. अधिकारियों का कहना है कि वाहन मालिक आखिरी समय का इंतजार करने के बजाय 30 सितंबर तक अपने दस्तावेज जांच लें. खासतौर पर ऐसे वाहन जिनका PUCC पहले ही समाप्त हो चुका है या उसकी अवधि खत्म होने वाली है, वे समय रहते प्रमाणपत्र बनवा लें। 

    हालांकि, ट्रायल के दौरान यह भी सामने आया कि कई वाहन चालकों को अभी तक इस व्यवस्था की जानकारी नहीं है. कुछ वाहन मालिकों ने प्रमाणपत्र की अनिवार्यता और फ्यूल लेने से पहले उसकी जांच को लेकर जानकारी की कमी की बात कही. वहीं, कुछ वाहन चालकों ने प्रदूषण जांच को जरूरी बताते हुए व्यवस्था का समर्थन भी किया. दूसरी ओर, इसे लागू करने के तरीके को लेकर यह सवाल भी उठ रहे हैं कि आपात स्थिति में फ्यूल की जरूरत पड़ने पर क्या होगा और पेट्रोल पंपों पर जांच के कारण भीड़ या अव्यवस्था की स्थिति न बने, इसके लिए क्या व्यवस्था होगी। 

    जिला पूर्ति अधिकारी अमित कुमार तिवारी ने स्पष्ट किया कि बिना वैलिड PUCC वाहन चलाने पर केवल पेट्रोल-डीजल मिलने में परेशानी नहीं होगी, बल्कि नियमों के तहत चालान की कार्रवाई भी की जा सकती है. इसके लिए संबंधित स्तर पर आवश्यक व्यवस्था की जा रही है. विभाग का कहना है कि नई व्यवस्था का उद्देश्य वाहन चालकों को परेशान करना नहीं, बल्कि वाहनों से होने वाले प्रदूषण पर नियंत्रण के साथ लोगों को समय से प्रदूषण प्रमाणपत्र बनवाने के लिए प्रेरित करना है। 

  • रूसी तेल पर भारत को ‘सजा’ से पहले US को चेतावनी, जेपी मॉर्गन CEO का बयान

    रूसी तेल पर भारत को ‘सजा’ से पहले US को चेतावनी, जेपी मॉर्गन CEO का बयान

    मुंबई
    अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस पर नए प्रतिबंधों से जुड़े कानून पर हस्ताक्षर कर दिए हैं. इस कानून के तहत रूस से तेल और गैस खरीदने वाले बड़े देशों पर 100 फीसदी तक टैरिफ लगाने का अधिकार अमेरिकी प्रशासन को मिला है. भारत और चीन भी इसकी जद में आ सकते हैं. इसी बीच जेपी मॉर्गन के CEO जेमी डिमोन ने अमेरिका से भारत को लेकर सावधानी बरतने की अपील की है। 

    मुंबई में जेपी मॉर्गन इंडिया इन्वेस्टर कॉन्फ्रेंस के दौरान बातचीत में डिमोन ने कहा कि अमेरिका को पहले यह समझना चाहिए कि भारतीय रिफाइनरियां रूसी कच्चे तेल का इस्तेमाल किस तरह करती हैं. उन्होंने कहा कि ऐसे फैसले लेने से पहले भारत और दुनिया के ऑयल मार्केट पर पड़ने वाले असर को समझना जरूरी है। 

    डिमोन बोले- तेल पर टैरिफ लगाना सही तरीका नहीं
    जेमी डिमोन ने रूसी तेल पर टैरिफ लगाने के तरीके पर भी सवाल उठाया. उन्होंने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि तेल पर किसी तरह का टैरिफ लगाया जाना चाहिए. उनके मुताबिक, रूस पर दबाव बनाने के लिए उठाए जा रहे कदमों के बीच अमेरिका को यह देखना चाहिए कि कहीं इसका नुकसान भारत और दुनिया के ऑयल मार्केट को तो नहीं हो रहा। 

    डिमोन ने कहा कि अगर भारत रूसी तेल नहीं खरीदेगा तो उसे कहीं और से तेल खरीदना पड़ेगा. लेकिन हर तरह का कच्चा तेल एक जैसा नहीं होता. अलग-अलग रिफाइनरियां खास तरह के क्रूड को प्रोसेस करने के हिसाब से डिजाइन की जाती हैं. ऐसे में रूसी तेल की जगह किसी दूसरे देश से आने वाला क्रूड हर रिफाइनरी के लिए सही हो, यह जरूरी नहीं है। 

    भारत के लिए रूसी तेल बदलना आसान नहीं
    भारत दुनिया के बड़े क्रूड ऑयल इंपोर्टर्स में शामिल है और रूसी तेल उसकी सप्लाई का एक बड़ा हिस्सा है. डिमोन के मुताबिक, रूसी सप्लाई में किसी तरह की रुकावट सिर्फ भारत तक सीमित नहीं रहेगी. इससे इंटरनेशनल ऑयल मार्केट में सप्लाई प्रभावित हो सकती है और कीमतें बढ़ने का दबाव बन सकता है। 

    डिमोन ने कहा कि अमेरिका को यूक्रेन की मदद के लिए और कदम उठाने चाहिए, लेकिन रूस के ऊर्जा कारोबार पर कार्रवाई करते समय इसके व्यापक असर को भी ध्यान में रखना चाहिए. उन्होंने अमेरिका और भारत के बीच इस मुद्दे पर बातचीत की जरूरत पर भी जोर दिया। 

    भारत बोला- लोगों की एनर्जी सिक्योरिटी सबसे पहले
    भारत ने रूसी तेल खरीद को अपनी एनर्जी सिक्योरिटी से जोड़कर इसका बचाव किया है. अमेरिका में भारतीय राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने कहा है कि भारत की एनर्जी पॉलिसी 'पीपल फर्स्ट' के नजरिए पर आधारित है. उन्होंने कहा कि भारत के फैसले तेल की उपलब्धता, कीमत, बाजार की हालत और कारोबारी व्यवहार्यता को ध्यान में रखकर लिए जाते हैं। 

    भारत अपनी जरूरत का 85 फीसदी से ज्यादा कच्चा तेल आयात करता है. ऐसे में ग्लोबल ऑयल मार्केट में कीमत और सप्लाई में बदलाव का सीधा असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। 

    अगस्त में 16.5 फीसदी घटा रूसी तेल आयात
    रॉयटर्स के टैंकर डेटा के मुताबिक, भारत ने अगस्त में करीब 21 लाख बैरल प्रतिदिन रूसी कच्चा तेल आयात किया. यह जुलाई के मुकाबले 16.5 फीसदी कम था. अगस्त में भारत के कुल क्रूड इंपोर्ट में रूसी तेल की हिस्सेदारी करीब 47 फीसदी रही। 

    भारत ने अगस्त में कुल करीब 44.4 लाख बैरल प्रतिदिन तेल आयात किया, जो जुलाई से करीब 8.8 फीसदी कम था. ऐसे में रूसी तेल पर संभावित अमेरिकी टैरिफ का मुद्दा अब भारत-अमेरिका आर्थिक रिश्तों के लिए भी अहम हो गया है। 

    डिमोन ने दोनों देशों से रुके हुए ट्रेड एग्रीमेंट को पूरा करने के लिए बातचीत जारी रखने की अपील की. उन्होंने कहा कि कारोबार के लिए स्थिरता और नियमों में भरोसा बेहद जरूरी है। 

     

  • उज्जैन सिंहस्थ मेला क्षेत्र में बनेंगी 50 किमी सीमेंट सड़कें, बिछेगी सीवरेज लाइन

    उज्जैन सिंहस्थ मेला क्षेत्र में बनेंगी 50 किमी सीमेंट सड़कें, बिछेगी सीवरेज लाइन

     उज्जैन
     उज्जैन में सिंहस्थ मेला क्षेत्र में 50 किमी लंबी सीमेंट की सड़क बनाने का काम शुरू हो गया है। उज्जैन विकास प्राधिकरण (यूडीए) 600 करोड़ रुपये की लागत से इनका निर्माण करवा रहा है। इसके लिए दो कंपनियों को ठेका दिया गया है। सड़कें बनाने की समय सीमा जुलाई 2027 तय की गई है।

    सिंहस्थ मेला क्षेत्र में यह सड़कें करीब 24 मीटर चौड़ी रहेंगी। मेला क्षेत्र में कुछ ऐसे क्षेत्र भी हैं जहां अभी फसल लगी हुई है। ऐसे में इन इलाकों में अभी सड़क बनाने का काम शुरू नहीं हो पाया है। उज्जैन विकास प्राधिकरण द्वारा 20 किसानों को 9 करोड़ रुपये का मुआवजा देकर जमीन की रजिस्ट्री भी करवाई गई है।

    वहीं अन्य किसानों से भी जमीन को लेकर बात जारी है। जिन जमीनों पर फसल लगी है उसकी कटाई खत्म होने के बाद वहां सड़क का निर्माण शुरू हो जाएगा।

    सड़क के साथ पेयजल और सीवरेज की भी होगी व्यवस्था
    उज्जैन में सिंहस्थ क्षेत्र में सड़कों के साथ पेयजल और सीवरेज की व्यवस्था भी की जाएगी। इसके लिए 1300 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। वहीं सिंहस्थ क्षेत्र में किसानों से जमीन अधिग्रहण के लिए यूडीए करीब 450 करोड़ रुपये खर्च करेगा। सिंहस्थ क्षेत्र में सीवरेज निर्माण को लेकर पहले विरोध भी हुआ था।

    खजूर वाली मस्जिद से अब्दालपुरा, जीवाजीगंज थाने होते हुए गणेश चौक तक करीब 730 मीटर लंबी सड़क को 15 मीटर चौड़ा किया जाएगा। इस काम पर लगभग 9.80 करोड़ रुपए खर्च होंगे।

    सोमवार से सड़क की सीमा तय करने के लिए नपती और मार्किंग का काम शुरू कर दिया गया है।

    इस सड़क चौड़ीकरण से कुल 272 भवन प्रभावित होंगे। नगर निगम की टीम ने सोमवार को मौके पर पहुंचकर सड़क की नपती की और तय सीमा के हिसाब से भवनों को चिन्हित करना शुरू किया। मार्किंग के जरिए यह तय किया जा रहा है कि सड़क चौड़ीकरण में कौन से भवन आएंगे।

    नगर निगम आयुक्त अभिलाष मिश्रा के निर्देश पर भवन निरीक्षक शिवम गुप्ता और निगम की टीम ने सड़क का निरीक्षण किया। टीम ने सड़क की सीमा के हिसाब से नपती की और प्रभावित होने वाले भवनों से जुड़ी जरूरी जानकारी भी जुटाई।

    नगर निगम के मुताबिक, खजूर वाली मस्जिद से गणेश चौक तक का रास्ता शहर के मुख्य और व्यस्त रास्तों में से एक है। सिंहस्थ के दौरान उज्जैन में श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ेगी, जिससे यातायात का दबाव भी बढ़ेगा।

    इसी को देखते हुए इस रास्ते को 15 मीटर चौड़ा करने की योजना बनाई गई है। नपती और सर्वे का काम पूरा होने के बाद नियमों के हिसाब से आगे की कार्रवाई की जाएगी।

     

  • चीनी निवेश वाली ऑटो कंपनियों को PLI का लाभ दे सकती है सरकार, बड़ा अपडेट

    चीनी निवेश वाली ऑटो कंपनियों को PLI का लाभ दे सकती है सरकार, बड़ा अपडेट

     नई दिल्‍ली
    सरकार चीन निवेश वाली कंपनियों को सपोर्ट दे सकती है. अधिकारियों के मुताबिक, सरकार चीनी निवेश वाली ऑटोमोबाइल और ऑटो कंपोनेंट कंपनियों से प्रोडक्‍ट-लिंक इनसेंटिव (PLI) योजना के तहत आवेदन पर विचार कर सकती है. इससे JSW एमजी मोटर इंडिया और टाटा ऑटोकोम्प सिस्टम्स की दो साझेदारियों समेत कई कारोबारों को लाभ मिल सकता है। 

    द इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, एक सीनियर अधिकारी ने बताया कि डायरेक्‍ट विदेशी निवेश (FDI) की मंजूरी प्राप्त मौजूदा पीएलआई आवेदनों पर विचार किया जाएगा. हालांकि, PLI योजना के तहत नए आवेदनों के लिए कोई नई विंडो नहीं खोली जा रही है। 

    भारत में MG ब्रांड के यात्री वाहन बेचने वाली JSW MG मोटर इंडिया, JSW ग्रुप और चीन की SAIC मोटर का संयुक्त कारोबार है. टाटा ऑटोकोम्प सिस्टम्स के चीनी कंपनियों के साथ दो कारोबार हैं. प्रेस्टोलाइट इलेक्ट्रिक बीजिंग के साथ साझेदारी में बनी टैको प्रेस्टोलाइट, इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए इलेक्ट्रिक ड्राइवट्रेन और ट्रैक्शन मोटर्स का डिजाइन और निर्माण करती है. एयर इंटरनेशनल शंघाई कंपनी के साथ साझेदारी में बनी टैको एयर इंटरनेशनल, ऑटोमोटिव एयर कंडीशनिंग सिस्टम का निर्माण करती है। 

    भारत-चीन संबंधों में सुधार
    यह फैसला ऐसे समय आया है जब जून 2020 में गलवान घाटी की झड़पों के बाद सालों के तनाव के बाद भारत-चीन संबंधों में सुधार हुआ है. इस महीने की शुरुआत में, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए भारत आए थे और उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक की थी। 

    दोनों देशों ने मंत्रिस्तरीय और आधिकारिक स्तर पर आदान-प्रदान बढ़ाया है और सीधी उड़ानें फिर से शुरू करने पर सहमति जताई है. भारत ने चीनी निवेश से जुड़े डायरेक्‍ट विदेशी निवेश प्रस्तावों की मंजूरी में तेजी लाने के लिए नए गाइडलाइन जारी किए हैं। 

    इस चीनी निवेश पर मिली थी मंजूरी
    चीनी डायरेक्‍ट निवेश प्रस्तावों की लंबित मंजूरी के कारण कुछ पीएलआई आवेदनों की प्रक्रिया में देरी हुई थी. अधिकारी ने बताया कि डिक्सन टेक्नोलॉजीज के एक चीनी साझेदार के साथ इलेक्ट्रॉनिक घटकों के लिए किए गए उद्यम सहित कुछ आवेदनों को पीएलआई लाभों के लिए पहले ही मंजूरी मिल चुकी है. ऑटो पीएलआई योजना को सितंबर 2021 में ₹25,938 करोड़ के बजट आवंटन के साथ मंजूरी दी गई थी. प्रोत्साहन राशि अन्य मानदंडों के साथ-साथ उत्पादन में बढ़ोतरी, निवेश और घरेलू से जुड़ी हुई है। 

  • इस रविवार खुले रहेंगे बैंक, सरकार ने क्यों लिया बड़ा फैसला?

    इस रविवार खुले रहेंगे बैंक, सरकार ने क्यों लिया बड़ा फैसला?

    नई दिल्ली

    वैसे तो रविवार को साप्ताहिक अवकाश की वजह से बैंक बंद रहते हैं लेकिन इस बार ऐसा नहीं होगा। दरअसल, 28 से 30 सितंबर तक प्रस्तावित तीन दिन की देशव्यापी हड़ताल से पहले रविवार को बैंक खुले रहेंगे। सरकार ने बैंकिंग सेवाओं में रुकावट को कम करने के लिए यह कदम उठाया है। इसके तहत, सभी सरकारी बैंक और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक रविवार, 27 सितंबर को खुले रहेंगे और सामान्य रूप से काम करेंगे।

    वित्त मंत्रालय का बयान
    वित्त मंत्रालय ने 23 सितंबर को एक बयान में कहा कि यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) की प्रस्तावित हड़ताल 26 और 27 सितंबर के वीकेंड के बाद हो रही है, जिससे ग्राहकों को लंबे समय तक परेशानी हो सकती थी। इसी को ध्यान में रखकर फैसला लिय गया है। मंत्रालय ने बयान में कहा, " आम लोगों की बैंकिंग से जुड़ी जरूरी जरूरतें लंबे समय तक प्रभावित न हों इसलिए सभी सरकारी और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक रविवार, 27 सितंबर, 2026 को सामान्य रूप से काम करेंगे।"

    UFBU और सरकार के बीच नहीं हुई सुलह
    बीते मंगलवार को यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस और सरकार के बीच बैठक हुई थी लेकिन पॉजिटिव नतीजे नहीं आए। मंगलवार को उप-मुख्य श्रम आयुक्त के सामने हुई सुलह बैठक के बाद यूएफबीयू ने एक बयान में कहा, ''वित्तीय सेवा विभाग (डीएफएस), इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (आईबीए) और बैंक प्रबंधन की हड़ताल टालने की अपील का जवाब देते हुए, हमने उन्हें बताया कि अगर पांच-दिन के कामकाज की हमारी मांग को लागू करने की दिशा में कोई ठोस और सकारात्मक प्रगति होती है, तो यूएफबीयू उस पर विचार करेगा।''

    बयान में कहा गया कि ऐसा न होने पर यह संगठन 28, 29 और 30 सितंबर को प्रस्तावित हड़ताल पर आगे बढ़ने के लिए मजबूर होगा। UFBU की बात करें तो यह यूनियन बैंकिंग कर्मचारियों के 90 प्रतिशत हिस्से का प्रतिनिधित्व करने का दावा करता है। यह 5-दिन की बैंकिंग सेवा के साथ कई अन्य मांग भी कर रहा है।

    इस बीच, भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई), सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, केनरा बैंक, यूनियन बैंक, पंजाब नेशनल बैंक और दूसरे सार्वजनिक बैंकों ने अपने-अपने कर्मचारियों से हड़ताल से दूर रहने की अपील की है। वहीं, ग्राहकों के लिए सोशल मीडिया या मैसेज और मेल के माध्यम से एडवाइजरी जारी की गई है। इसमें कहा गया है कि हड़ताल की आशंका के मद्देनजर ग्राहकों को अपने कामकाज उससे पहले ही निपटा लेने चाहिए। साथ ही, उन्हें एटीएम, यूपीआई, मोबाइल बैंकिंग और इंटरनेट बैंकिंग के इस्तेमाल के लिए भी प्रोत्साहित किया गया है।

    11 सितंबर को भी थी हड़ताल
    इससे पहले 11 सितंबर को इन्हीं मांगों को लेकर यूएफबीयू के बैनर तले 7 संगठनों ने एक दिन की हड़ताल की थी। हड़ताल की वजह से सरकारी बैंकों में कामकाज पूरी तरह ठप हो गया था जबकि निजी बैंकों में कम असर देखने को मिला था। निजी बैंकों के कर्मचारियों में कर्मचारी संघों के सदस्यों की संख्या कम होने के कारण उन पर हड़ताल का प्रभाव कम दिखा। यूएफबीयू संगठन में एआईबीईए (अखिल भारतीय बैंक कर्मचारी संघ), एआईबीओसी (अखिल भारतीय बैंक अधिकारी परिसंघ), एनसीबीई (राष्ट्रीय बैंक कर्मचारी परिसंघ), एआईबीओए (अखिल भारतीय बैंक कर्मचारी संघ), बीईएफआई (भारतीय बैंक कर्मचारी महासंघ), आईएनबीईएफ (भारतीय राष्ट्रीय बैंक कर्मचारी महासंघ) और आईएनबीओसी (भारतीय राष्ट्रीय बैंक अधिकारी कांग्रेस) शामिल हैं।

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    इंदौर मेट्रो की पहली अंडरग्राउंड खुदाई शुरू, 1000 टन की TBM से बनेगी सुरंग

    इंदौर
     प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में मेट्रो के एलिवेटेड कॉरिडोर के बाद अब मेट्रो रेल प्रशासन ने अपनी पहली भूमिगत मेट्रो निर्माण की दिशा में ऐतिहासिक कदम बढ़ाया. मंगलवार को शहर के एयरपोर्ट स्थित साइट पर टनल बोरिंग मशीन की मदद से भूमिगत टनल निर्माण का कार्य शुरु हुआ है. यह इंदौर शहर के इतिहास में पहली बार है, जब टनल बोरिंग मशीन ने भूमिगत होकर टनल निर्माण का कार्य शुरू किया है। 

    निर्माण कार्य संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों को सख्त निर्देश
    मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड के प्रबंध संचालक एस. कृष्ण चैतन्य ने परियोजना से जुड़े सभी अधिकारियों, इंजीनियरों, तकनीकी टीम को आगामी टनल निर्माण कार्यों में सुरक्षा, गुणवत्ता एवं निर्धारित तकनीकी मानकों का सर्वोच्च प्राथमिकता के साथ पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। 

    उन्नत तकनीक से टनल निर्माण
    इंदौर में अंडरग्राउंड तरल की खुदाई के विरोध के चलते भूमिगत निर्माण के दौरान आमजन और आसपास की संरचनाओं की सुरक्षा के लिए व्यापक तैयारियां की गई हैं. मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन के प्रबंध संचालक चैतन्य ने बताया, " जमीन और भवनों की स्थिति पर लगातार निगरानी रखने के लिए विस्तृत इंस्ट्रूमेंटेशन स्क्रीम तैयार की गई है। 

    उन्होंने आगे बताया, "इसके अंतर्गत लगाए जाने वाले सेंसर जमीन और भवनों में होने वाले अत्यंत मामूली बदलाव की भी जानकारी विशेषज्ञों को उपलब्ध कराएंगे. इससे आवश्यकता होने पर समय रहते उचित निर्णय लिया जा सकेगा. इस प्रकार सुरंग निर्माण के दौरान आमजन की सुरक्षा, भवनों की संरचनात्मक सुरक्षा और जमीन की स्थिरता की निरंतर निगरानी सुनिश्चित की जाएगी। 

    कैसे काम करती है टीबीएम नर्मदा?
    टीबीएम नर्मदा, अर्थ प्रेशर बैलेंस (ईपीबी) मिक्स शील्डतकनीक पर आधारित है. मशीन के आगे बढ़ने के साथ प्री-कास्ट कंक्रीट रिंग्स स्थापित होती जाती हैं. निर्धारित अलाइनमेंट पर सटीक संचालन, गैस मॉनिटरिंग सिस्टम, आपात स्थिति में वन सेकेंड इमरजेंसी स्टॉप, 24×7 कंट्रोल रूम मॉनिटरिंग जैसी तकनीकी व्यवस्थाएं टनल निर्माण की सुरक्षा एवं निगरानी सुनिश्चित करती हैं। 

    नर्मदा मशीन का कटिंग व्हील 6.65 मीटर व्यास का है और कुल लंबाई लगभग 102 मीटर है. इस मशीन ने 25 अप्रैल 2026 को थाईलैंड में Factory Acceptance Test (FAT) सफलतापूर्वक पूरा किया. इसके बाद इसे इंदौर लाया गया और साइट पर सावधानीपूर्वक असेंबल करने के पश्चात एयरपोर्ट स्टेशन से लॉन्च किया गया है. सतह से लगभग 20 मीटर तक की गहराई में यह मशीन एयरपोर्ट स्टेशन से भूमिगत टनल का निर्माण करेगी।