Author: Admin

  • स्वास्थ्य सुरक्षा से जनकल्याण की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा छत्तीसगढ़ : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

    स्वास्थ्य सुरक्षा से जनकल्याण की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा छत्तीसगढ़ : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

    “स्वास्थ्य सुरक्षा से जनकल्याण” की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा छत्तीसगढ़ : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

    आयुष्मान भारत योजना के प्रभावी क्रियान्वयन में छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय स्तर पर मिला प्रतिष्ठित सम्मान

    पोर्टेबिलिटी क्लेम्स के निराकरण में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने किया सम्मानित

    मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य विभाग को दी बधाई, कहा – प्रदेश के प्रत्येक परिवार तक गुणवत्तापूर्ण और निःशुल्क स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना हमारा लक्ष्य

    इलाज के अभाव में किसी जरूरतमंद परिवार की उम्मीद न टूटे, यही हमारी प्राथमिकता : स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल

    दूसरे राज्यों में उपचार लेने वाले छत्तीसगढ़ के हितग्राहियों के लिए पोर्टेबिलिटी सुविधा बन रही बड़ा संबल

    रायपुर 
     आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB-PMJAY) के प्रभावी क्रियान्वयन और हितग्राहियों को बेहतर स्वास्थ्य सुरक्षा उपलब्ध कराने की दिशा में छत्तीसगढ़ ने राष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। पोर्टेबिलिटी क्लेम्स के समयबद्ध एवं प्रभावी निराकरण में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित सम्मान प्रदान किया गया है।

    भारत सरकार के राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (NHA) द्वारा आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के आठ वर्ष तथा आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM) के पांच वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर आज विज्ञान भवन, नई दिल्ली में आयोजित “आरोग्य मंथन 2026” में छत्तीसगढ़ को यह सम्मान प्रदान किया गया। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने छत्तीसगढ़ को पोर्टेबिलिटी क्लेम्स के निराकरण में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए सम्मानित किया। छत्तीसगढ़ की ओर से आयुष्मान भारत योजना के राज्य नोडल अधिकारी डॉ. धर्मेंद्र गहवई ने यह पुरस्कार ग्रहण किया।

    इस उपलब्धि पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने स्वास्थ्य विभाग की पूरी टीम को बधाई देते हुए कहा कि राज्य सरकार का संकल्प है कि प्रदेश के किसी भी पात्र नागरिक को आर्थिक कठिनाई के कारण उपचार से वंचित न होना पड़े। बीमारी के समय परिवार को उपचार के साथ आर्थिक सुरक्षा का भरोसा मिले, इसी उद्देश्य से प्रदेश में आयुष्मान भारत योजना को प्रभावी ढंग से क्रियान्वित किया जा रहा है।

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में आयुष्मान भारत योजना ने देश के करोड़ों जरूरतमंद परिवारों को स्वास्थ्य सुरक्षा का मजबूत भरोसा दिया है। छत्तीसगढ़ में भी इस योजना के माध्यम से पात्र परिवारों को गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराने के लिए स्वास्थ्य सेवाओं और प्रशासनिक व्यवस्थाओं को लगातार सुदृढ़ किया जा रहा१ है।

    प्रदेश से बाहर भी उपचार की चिंता नहीं, पोर्टेबिलिटी बनी स्वास्थ्य सुरक्षा का मजबूत आधार

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आयुष्मान भारत योजना की पोर्टेबिलिटी सुविधा विशेष रूप से उन नागरिकों के लिए महत्वपूर्ण है, जिन्हें रोजगार, कामकाज अथवा अन्य कारणों से अपने गृह राज्य से बाहर रहना पड़ता है या बेहतर उपचार के लिए दूसरे राज्य जाना पड़ता है। इस व्यवस्था के माध्यम से पात्र हितग्राही देश के अन्य राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों में योजना से संबद्ध अस्पतालों में कैशलेस उपचार प्राप्त कर सकते हैं।

    उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के जो हितग्राही दूसरे राज्यों में उपचार लेते हैं, उन्हें भी योजना का लाभ सहजता से मिले और उनके क्लेम का निराकरण समय पर हो, इसके लिए राज्य सरकार लगातार व्यवस्था को मजबूत कर रही है। पोर्टेबिलिटी क्लेम्स के निराकरण में मिला राष्ट्रीय सम्मान इसी दिशा में किए जा रहे प्रयासों का परिणाम है।

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर मिली यह उपलब्धि स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों, चिकित्सकों, अस्पतालों और योजना के क्रियान्वयन से जुड़े सभी लोगों के सामूहिक प्रयास का परिणाम है। यह सम्मान हमें स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुलभ, प्रभावी और हितग्राही-केंद्रित बनाने की प्रेरणा देगा।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि “स्वास्थ्य सुरक्षा से जनकल्याण” के संकल्प के साथ छत्तीसगढ़ आगे बढ़ रहा है। हमारा प्रयास है कि गंभीर बीमारी किसी परिवार के लिए आर्थिक संकट का कारण न बने और जरूरत के समय प्रत्येक पात्र नागरिक को समय पर गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध हो।

    क्लेम प्रोसेसिंग और तकनीकी निगरानी पर विशेष ध्यान

    प्रदेश में पोर्टेबिलिटी क्लेम्स के समयबद्ध निराकरण के लिए क्लेम प्रोसेसिंग व्यवस्था, तकनीकी निगरानी, संबद्ध अस्पतालों के साथ समन्वय और लंबित प्रकरणों के निराकरण पर लगातार विशेष ध्यान दिया जा रहा है। प्रशासनिक एवं तकनीकी प्रक्रियाओं को इस प्रकार सुदृढ़ किया जा रहा है कि उपचार प्राप्त करने वाले हितग्राहियों को योजना का लाभ लेने में अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।

    राष्ट्रीय स्तर पर प्राप्त यह सम्मान इस बात को भी रेखांकित करता है कि छत्तीसगढ़ में आयुष्मान भारत योजना के संचालन के लिए विकसित की गई व्यवस्थाएं लाभार्थी-केंद्रित स्वास्थ्य सेवा वितरण को मजबूत करने में प्रभावी भूमिका निभा रही हैं।

    हर पात्र परिवार तक पहुंचे आयुष्मान भारत का लाभ : स्वास्थ्य मंत्री जायसवाल

    स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना में छत्तीसगढ़ को मिला राष्ट्रीय सम्मान पूरे प्रदेश के लिए गौरव का विषय है। यह उपलब्धि प्रदेश में योजना के प्रभावी, पारदर्शी और लाभार्थी-केंद्रित क्रियान्वयन के लिए किए जा रहे सामूहिक प्रयासों को रेखांकित करती है।

    जायसवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के मार्गदर्शन में स्वास्थ्य विभाग का निरंतर प्रयास है कि आयुष्मान भारत योजना का लाभ प्रदेश के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। राज्य सरकार स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने के साथ उनकी गुणवत्ता को भी लगातार बेहतर कर रही है।

    उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि अधिकारियों, कर्मचारियों, चिकित्सकों, अस्पतालों और योजना के क्रियान्वयन से जुड़े सभी हितधारकों के समन्वित प्रयासों का परिणाम है। आने वाले समय में क्लेम प्रोसेसिंग की गुणवत्ता, पारदर्शिता और समयबद्धता को और मजबूत किया जाएगा। राज्य सरकार का लक्ष्य प्रत्येक पात्र परिवार को गुणवत्तापूर्ण, निःशुल्क, समयबद्ध और सम्मानजनक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है।

    देशभर में पोर्टेबिलिटी से लाखों हितग्राहियों को मिला उपचार

    राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के अनुसार आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना देश के सभी 36 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों में लागू है। योजना की पोर्टेबिलिटी सुविधा ने लाभार्थियों के लिए राज्य की सीमाओं से परे भी स्वास्थ्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

    30 जून 2026 तक पोर्टेबिलिटी सुविधा के अंतर्गत देशभर में 29.05 लाख अंतर-राज्यीय अस्पताल प्रवेश अधिकृत किए गए हैं, जिनसे संबंधित अधिकृत राशि 8,383.97 करोड़ रुपये से अधिक है। यह व्यवस्था विशेष रूप से प्रवासी श्रमिकों, रोजगार के लिए दूसरे राज्यों में रहने वाले नागरिकों और गृह राज्य से बाहर उपचार की आवश्यकता वाले परिवारों के लिए उपयोगी साबित हो रही है।

    डिजिटल तकनीक से और मजबूत होगा स्वास्थ्य सेवा तंत्र

    “आरोग्य मंथन 2026” में स्वास्थ्य आश्वासन और डिजिटल हेल्थ के अगले चरण को लेकर भी विस्तृत विचार-विमर्श किया गया। कार्यक्रम में विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया।

    इस दौरान क्लेम प्रोसेसिंग को अधिक तकनीक-सक्षम बनाने, डिजिटल हेल्थ इकोसिस्टम को मजबूत करने तथा स्वास्थ्य डेटा के सुरक्षित एवं जिम्मेदार उपयोग से संबंधित नई पहलों पर चर्चा हुई। आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना और आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ, पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित बनाने की दिशा में भविष्य की कार्ययोजना पर भी विचार-विमर्श किया गया।

  • मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने मदकूद्वीप के प्राचीन मंदिरों में की पूजा-अर्चना

    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने मदकूद्वीप के प्राचीन मंदिरों में की पूजा-अर्चना

    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने मदकूद्वीप के प्राचीन मंदिरों में की पूजा-अर्चना

    कन्या पूजन कर कन्या भोज में हुए शामिल, प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि की कामना की

    मंदिर संग्रहालय का किया अवलोकन, मदकूद्वीप की समृद्ध ऐतिहासिक एवं आध्यात्मिक विरासत से हुए रूबरू

    रायपुर 
     मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज मुंगेली जिले के पथरिया विकासखंड स्थित ऐतिहासिक एवं आध्यात्मिक स्थल हरिहर क्षेत्र केदार मदकूद्वीप पहुंचकर प्राचीन रामाश्रय एवं गणेश मंदिर में विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। मुख्यमंत्री ने भगवान से छत्तीसगढ़ की निरंतर प्रगति तथा प्रदेशवासियों के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और खुशहाली की कामना की।

    मुख्यमंत्री साय ने मंदिर परिसर में आयोजित कन्या पूजन में श्रद्धापूर्वक कन्याओं का पूजन कर उनका आशीर्वाद लिया। इसके पश्चात वे कन्या भोज में शामिल हुए और प्रसाद ग्रहण किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सनातन संस्कृति में कन्याओं को शक्ति का स्वरूप माना गया है। कन्या पूजन हमारी समृद्ध परंपरा में मातृशक्ति के प्रति श्रद्धा, सम्मान और कृतज्ञता की अभिव्यक्ति है।

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की धरती प्राचीन धार्मिक परंपराओं, पुरातात्विक धरोहरों और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से परिपूर्ण है। मदकूद्वीप भी प्रदेश की ऐसी ही महत्वपूर्ण धरोहरों में शामिल है, जहां इतिहास, आस्था और प्रकृति का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। ऐसे ऐतिहासिक और आध्यात्मिक स्थल हमारी गौरवशाली विरासत से नई पीढ़ी को परिचित कराने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं।

    इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने पुरातत्व विभाग द्वारा स्थापित मंदिर संग्रहालय का भी अवलोकन किया। उन्होंने संग्रहालय में संरक्षित पुरातात्विक धरोहरों एवं ऐतिहासिक अवशेषों के संबंध में जानकारी ली और मदकूद्वीप के ऐतिहासिक, पुरातात्विक एवं आध्यात्मिक महत्व से रूबरू हुए।

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की प्राचीन विरासत और सांस्कृतिक पहचान का संरक्षण एवं संवर्धन अत्यंत महत्वपूर्ण है। हमारी ऐतिहासिक और धार्मिक धरोहरें केवल अतीत की स्मृतियां नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को अपनी संस्कृति और परंपराओं से जोड़ने वाली अमूल्य निधि हैं।

    इस अवसर पर केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य राज्यमंत्री तोखन साहू, उप मुख्यमंत्री अरुण साव, पूर्व राज्यपाल रमेश बैस, खाद्य मंत्री दयाल दास बघेल, उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन, विधायक धरमलाल कौशिक, विधायक अमर अग्रवाल, विधायक सुशांत शुक्ला एवं विधायक पुन्नू लाल मोहले, क्रेडा के अध्यक्ष भूपेंद्र सवन्नी सहित अन्य जनप्रतिनिधि, अधिकारी और बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे।

  • उप मुख्यमंत्री  राजेन्द्र शुक्ल ने बण्डा की दयोदय गौशाला में किया वृक्षारोपण, गौवंश को खिलाया चारा एवं गुड़ के लड्डू

    उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने बण्डा की दयोदय गौशाला में किया वृक्षारोपण, गौवंश को खिलाया चारा एवं गुड़ के लड्डू

    भोपाल 

     उप मुख्यमंत्री एवं जिले के प्रभारी मंत्री  राजेन्द्र शुक्ल ने बण्डा स्थित दयोदय गौशाला पहुंचकर गौसेवा की। उन्होंने सर्वप्रथम गौशाला परिसर में वृक्षारोपण किया। सेवा संकल्प यात्रा के यात्रियों ने भी गौशाला परिसर में पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया तथा पौधों के संरक्षण का संकल्प लिया। इसके पश्चात उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने गौशाला में गौवंश को चारा एवं गुड़ के लड्डू खिलाए। इस दौरान उन्होंने गौशाला परिसर का अवलोकन भी किया तथा गौसेवा से जुड़े कार्यों की जानकारी ली।

    उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने गौशाला में उपस्थित गौसेवकों एवं संबंधितों से चर्चा की। उन्होंने गौवंश के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए किए जा रहे कार्यों की जानकारी ली। इस अवसर पर दमोह सांसद  राहुल सिंह लोधी, बण्डा विधायक  वीरेन्द्र सिंह लोधी, मती रानी कुशवाहा, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी  जगदीश कुमार गोमे, डिप्टी कलेक्टर सु मोना दांगी सहित अन्य जनप्रतिनिधि, अधिकारी एवं गौसेवक उपस्थित रहे।

  • सेवा मेरा योगदान’ अभियान के तहत जल स्रोतों की साफ-सफाई

    सेवा मेरा योगदान’ अभियान के तहत जल स्रोतों की साफ-सफाई

    सेवा मेरा योगदान’ अभियान के तहत जल स्रोतों की साफ-सफाई

    नदी घाटों एवं जलाशयों को स्वच्छ रखने जनभागीदारी से चला विशेष अभियान

    रायपुर
    सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत वन विभाग धमतरी वनमंडल द्वारा शुरू किए गए ‘सेवा मेरा योगदान’ अभियान के तहत आज 25 सितंबर को जिले के विभिन्न महत्वपूर्ण जल स्रोतों एवं नदी घाटों में विशेष स्वच्छता एवं जनजागरूकता अभियान चलाया गया। अभियान का उद्देश्य जल स्रोतों के संरक्षण, नदी घाटों की स्वच्छता तथा आमजन में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करना रहा।

    वन विभाग द्वारा अभियान की शुरुआत 23 सितंबर 2026 को पौधरोपण कार्यक्रम के साथ की गई थी। इसी क्रम में आज फुटहामुड़ा जलाशय, नरहरा जलप्रपात कोटरवाही, महानदी उद्गम स्थल फरसियां, नगरी स्थित महामाई मंदिर तथा गणेश घाट सिंहावा में जल स्रोतों एवं नदी घाटों की साफ-सफाई की गई।

    अभियान के दौरान नदी घाटों और जल स्रोतों के आसपास फेंकी गई प्लास्टिक बोतलें, कूड़ा-कचरा एवं अन्य अपशिष्ट सामग्री को हटाकर संबंधित स्थलों की सफाई की गई। साथ ही स्थानीय ग्रामीणों एवं आम नागरिकों को जल स्रोतों और नदी घाटों में कचरा नहीं फेंकने के लिए जागरूक किया गया। वन विभाग की टीम ने लोगों से जल स्रोतों को स्वच्छ एवं प्रदूषणमुक्त रखने में सक्रिय सहभागिता निभाने का आह्वान किया।

    अभियान के दौरान संबंधित स्थलों पर पौधरोपण भी किया गया। इसके माध्यम से जल संरक्षण के साथ-साथ हरियाली, पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता का संदेश आमजन तक पहुंचाया गया। अधिकारियों ने कहा कि जल स्रोत केवल पेयजल एवं सिंचाई का आधार ही नहीं, बल्कि प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र के महत्वपूर्ण अंग हैं। इनके संरक्षण के लिए प्रशासनिक प्रयासों के साथ जनभागीदारी भी आवश्यक है।

    ‘सेवा मेरा योगदान’ अभियान के माध्यम से वन विभाग द्वारा स्वच्छता, जल संरक्षण और पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन का स्वरूप देने का प्रयास किया जा रहा है। अभियान में स्थानीय जनप्रतिनिधियों एवं ग्रामीणों की सहभागिता से लोगों को अपने आसपास के जल स्रोतों और प्राकृतिक स्थलों को स्वच्छ रखने के लिए प्रेरित किया गया।

    अभियान में श्री संजय रौतिया, उपवनमंडलाधिकारी नगरी, श्री बी.के. लकड़ा, संलग्नाधिकारी, श्री अभिनव शर्मा, प्रशिक्षु सहायक वन संरक्षक एवं वन परिक्षेत्र अधिकारी बिरगुड़ी, श्री संदीप कुमार सोम, वन परिक्षेत्र अधिकारी नगरी उत्पादन, श्री के.पी. जोशी, वन परिक्षेत्र अधिकारी नगरी, श्री ओमकार सिन्हा, वन परिक्षेत्र अधिकारी केरेगांव, श्री सत्य नारायण प्रधान, वन परिक्षेत्र अधिकारी धमतरी, डिप्टी रेंजर श्री मंशा राम साहू, श्री राकेश तिवारी, श्री उमेश सिंह, वनरक्षक श्री प्रेमलाल निषाद, श्री दुलेश्वर मार्कण्डेय, श्री कुलेश्वर बघेल, श्री अमित पटेल सहित वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी एवं अन्य स्टाफ उपस्थित थे।

    वन विभाग ने आम नागरिकों से अपील की कि नदी घाटों, जलाशयों, जलप्रपातों एवं अन्य प्राकृतिक स्थलों पर प्लास्टिक एवं कचरा न फेंकें और स्वच्छता बनाए रखने में अपना योगदान दें। स्वच्छ जल स्रोत, स्वच्छ पर्यावरण और हरित धमतरी के लक्ष्य को जनसहभागिता से साकार करने का संदेश अभियान के माध्यम से दिया गया।

  • राज्यमंत्री दिलीप जायसवाल ने सेवा संकल्प अभियान के तहत नुक्कड़ नाटक में की सहभागिता

    राज्यमंत्री दिलीप जायसवाल ने सेवा संकल्प अभियान के तहत नुक्कड़ नाटक में की सहभागिता

    अनूपपुर
     सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत बिजुरी के हनुमान मंदिर चौराहा में नुक्कड़ नाटक कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में मध्यप्रदेश शासन के कुटीर एवं ग्रामोद्योग राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दिलीप जायसवाल ने सहभागिता की। नुक्कड़ नाटक के माध्यम से सेवा संकल्प अभियान के उद्देश्यों, सेवा भावना और जनभागीदारी के महत्व को प्रभावी एवं रोचक ढंग से प्रस्तुत किया गया। कलाकारों ने विभिन्न प्रसंगों के माध्यम से समाज में आपसी सहयोग, जरूरतमंदों की सहायता, स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण तथा सामाजिक दायित्वों के प्रति जागरूकता का संदेश दिया। इस अवसर पर राज्यमंत्री दिलीप जायसवाल ने कहा कि सेवा का भाव समाज को जोड़ने और सकारात्मक बदलाव लाने का माध्यम है। सेवा संकल्प अभियान के माध्यम से प्रत्येक व्यक्ति को समाजहित में अपनी भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। सामूहिक सहभागिता से सेवा कार्यों को और व्यापक बनाया जा सकता है।
    राज्यमंत्री जायसवाल ने नुक्कड़ नाटक की प्रस्तुति का अवलोकन करते हुए कलाकारों का उत्साहवर्धन किया। उन्होंने अभियान के अंतर्गत किए जा रहे जनजागरूकता कार्यक्रमों की सराहना की। कार्यक्रम में स्थानीय नागरिकों एवं जनप्रतिनिधियों ने भी सहभागिता की। नुक्कड़ नाटक के माध्यम से आमजन को सेवा कार्यों से जुड़ने और समाजहित में अपना योगदान देने का संदेश दिया गया।
    इस अवसर पर नगर पालिका बिजुरी की अध्यक्ष श्रीमती सहबीन पनिका सहित अन्य जनप्रतिनिधि आम नागरिक उपस्थित रहे।

  • ट्रिपल  आईटी भोपाल में  कोडर आर्मी के संस्थापक रोहित नेगी एवं सह संस्थापक आदित्य टंडन का छात्रों के साथ विशेष सत्र आयोजित।

    ट्रिपल आईटी भोपाल में कोडर आर्मी के संस्थापक रोहित नेगी एवं सह संस्थापक आदित्य टंडन का छात्रों के साथ विशेष सत्र आयोजित।

    भोपाल

    HackerRank कैंपस क्रू ने भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान, भोपाल (IIIT भोपाल) के प्रशिक्षण एवं प्लेसमेंट प्रकोष्ठ (TnP सेल) के सहयोग से "RE.MARKS 2.0" नामक वक्ता कार्यक्रम का आयोजन मैनिट भोपाल के सिविल सभागार में किया गया।

    ट्रिपल आईटी भोपाल के निदेशक प्रोफेसर आशुतोष  कुमार सिंह ने छात्रों को बताया कि रोहित नेगी और आदित्य टंडन जैसे युवा कोडिंग प्रतिभाओं को शामिल करते हुए इस तरह के सत्र भविष्य में भी आयोजित किए जाते रहेंगे, जिसका उद्देश्य छात्रों को अपने कौशल निखारने और उद्योग जगत के लिए तैयार बनाने में मदद करना है।प्रो. सिंह ने कहा कि आज का युवा अपने यूथ आइकन से प्रेरित हो उनको ही सुनना चाहता है।आज के प्रतिस्पर्धी आई टी जगत में युवाओं को सही दिशा निर्देश मिलना नितांत आवश्यक है। ट्रिपल आई तो भोपाल जो राष्ट्रीय महत्व का संस्थान है उसका निदेशक होने के नाते मेरी यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है कि राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा से चयनित होकर आया छात्र भीड़ में न खोकर अपनी प्रतिभा के दम पर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराकर अपने संस्थान का नाम ऊंचा करे।छात्रों के सर्वांगीण विकास हेतु मै हर संभव प्रयास करूंगा।आज का सत्र भी इसी की एक कड़ी है।आशा है छात्र रोहित नेगी एवं आदित्य टंडन के अनुभव से अपनी कोडिंग स्किल एवं अपनी स्किल्स का विकास करेंगे।

     ऐंकर अलख मिश्रा और रिया द्विवेदी ने मंच संभाला और कार्यक्रम की औपचारिक शुरुआत की।

    इसके कुछ समय बाद, मुख्य अतिथियों रोहित नेगी (संस्थापक, Coder Army) और आदित्य टंडन (सह-संस्थापक, Coder Army) का जोरदार तालियों के साथ स्वागत किया गया और डॉ. दीप जोशी ने उन्हें पुष्प गुच्छ से सम्मानित किया। डॉ. दीप जोशी ने भी छात्रों को संबोधित करते हुए महत्वपूर्ण बातें साझा कीं और उद्योग जगत के लिए तैयार बने रहने हेतु निरंतर सीखते रहने और व्यावहारिक कौशल पर बल दिया।
    वक्ताओं ने हल्के-फुल्के परिहास के साथ बातचीत शुरू करते हुए अपने संघर्ष और सफलता की कहानी साझा की — किस तरह उन्होंने कोडिंग सीखनी शुरू की, कैसे वे मित्र बने, और अंततः कैसे उन्होंने मिलकर Coder Army की स्थापना की। इसके बाद उन्होंने छात्रों के प्रश्नों के लिए मंच खोला और अपने वास्तविक अनुभवों के आधार पर वर्तमान कंप्यूटर विज्ञान क्षेत्र से जुड़े प्रश्नों के उत्तर दिए।

    छात्रों के साथ साझा की गई कुछ प्रमुख बातें:

    आदित्य टंडन: "अगर कोई तकनीक आपको भविष्य को लेकर डराती है, तो उसे सीख लीजिए। वह इसलिए डरावनी लगती है क्योंकि वह अनजानी है।"
    रोहित नेगी: "श्रेष्ठ बनने के लिए सबसे बुद्धिमान होना ज़रूरी नहीं है।"
    रोहित नेगी: "यह कभी केवल कोड के बारे में नहीं होता। यह विपणन, प्रस्तुति और उपयोगकर्ता के बारे में होता है। यह हमेशा से उपयोगकर्ता के बारे में ही रहा है।"

    रोहित नेगी: "वह जोखिम उठाइए। यही वह तत्व है जो संसार के सर्वश्रेष्ठ लोगों को शेष सबसे अलग करता है।"

    वक्ताओं ने इस विषय पर चर्चा की कि कोई परियोजना विकास से बाज़ार तक वास्तव में कैसे पहुंचती है, उद्योग में आगे बढ़ने के लिए किस मानसिकता की आवश्यकता होती है, किसी उम्मीदवार को नियुक्ति योग्य क्या बनाता है, और आज के तकनीकी परिदृश्य में वास्तव में क्या महत्व रखता है। नवोदित कंपनियों और बड़ी उत्पाद कंपनियों, दोनों में अपने अनुभव के आधार पर उन्होंने छात्रों को दोनों की वास्तविकताओं से अवगत कराया।
    रोहित नेगी ने डेटा संरचना एवं एल्गोरिदम (DSA) के महत्व पर भी प्रकाश डाला और इससे जुड़े कई भ्रमों को दूर करते हुए छात्रों को स्पष्ट रूप से बताया कि उन्हें किस पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए और किससे बचना चाहिए। आदित्य टंडन ने बताया कि आज के युग में, जो तेज़ी से कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) से प्रभावित हो रहा है, एक सर्वसामान्यज्ञ और विशेषज्ञ दोनों बनना कितना आवश्यक है।
    सर्वश्रेष्ठ प्रश्न पूछने वाले छात्रों को मंच पर आमंत्रित किया गया और मुख्य अतिथियों रोहित नेगी तथा आदित्य टंडन द्वारा उन्हें उपहार भेंट किए गए। इसके तुरंत बाद, 15 सितंबर को आयोजित BCC (बेस्ट कोडर कॉन्टेस्ट)के विजेताओं को भी टी  एंड पी सेल के फैकल्टी इंचार्ज डॉ. दीप जोशी और टी पी ओ, डॉ. अजय वास्तव द्वारा मुख्य अतिथियों की उपस्थिति में पुरस्कृत किया गया।

    समापन विचार एवं आभार प्रदर्शन ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट ऑफिसर डॉ. अजय वास्तव के संक्षिप्त संबोधन से हुई, जिन्होंने आयोजन की भव्यता और गुणवत्ता के बारे में बात की और टी एंड पी सेल के निरंतर प्रयासों से अवगत कराते हुए भविष्य में ऐसे और आयोजनों का वादा किया।उन्होंने अतिथियों का आभार व्यक्त करते हुए उनके समय और ज्ञान के लिए धन्यवाद दिया। डॉ. अजय वास्तव ने कार्यक्रम का समापन करते हुए कहा, "हम अक्सर तकनीकी बातों, शिक्षा और उद्योग के बारे में चर्चा करते हैं, लेकिन आज हमें एक ऐसे विषय पर चर्चा करने का अवसर मिला जिस पर अक्सर ध्यान नहीं दिया जाता — नौकरी मिलने के बाद क्या होता है और आप इन परिस्थितियों में कैसे आगे बढ़ सकते हैं।"

    उन्होंने कहा जिस बेबाकी से काडर आर्मी के रोहित नेगी और आदित्य टंडन ने छात्रों के सवालों के जवाब दिये उससे हर छात्र प्रभावित हुआ है और यही वजह है कि उनको सुनने और अपने सवालों के जवाब के लिए छात्र 4 घंटे आराम से बैठ कर उनको सुनते रहे।
    इन समापन विचारों के साथ कार्यक्रम का सफलतापूर्वक समापन हुआ।

  • प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की किसान हितैषी सोच से खेती को मिला आर्थिक संबल

    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की किसान हितैषी सोच से खेती को मिला आर्थिक संबल

    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की किसान हितैषी सोच से खेती को मिला आर्थिक संबल

    पीएम किसान सम्मान निधि की सहायता से एवन सिंह और नरेश यादव ने संजोए बेहतर खेती के सपने

    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में योजनाओं का किसानों तक पहुँचा लाभ

    रायपुर,
     खेत की मिट्टी से जुड़ा किसान जब अपनी फसल के लिए समय पर बीज और खाद की व्यवस्था कर पाता है, तो उसके भीतर खेती को लेकर भरोसा और बढ़ जाता है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में संचालित प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना ने देश के किसानों को इसी तरह का आर्थिक सहारा देने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। योजना के तहत पात्र किसान परिवारों को प्रतिवर्ष ₹6,000 की सहायता तीन समान किस्तों में सीधे बैंक खातों में दी जाती है।

    गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के ग्राम पंचायत सारबहरा के किसान एवन सिंह और नरेश यादव भी इस योजना से लाभान्वित हो रहे हैं। इनके लिए किसान सम्मान निधि की राशि केवल बैंक खाते में आने वाली रकम नहीं, बल्कि खेती के जरूरी समय पर मिलने वाला ऐसा सहारा है, जो कृषि कार्यों की तैयारी को आसान बनाता है।

    समय पर मिली सहायता, खेती की तैयारी में बनी ताकत

    ग्राम पंचायत सारबहरा निवासी किसान एवन सिंह मेहनत और लगन से खेती करते हैं। वे बताते हैं कि योजना से प्राप्त राशि का उपयोग वे बीज, उर्वरक और खेती से जुड़े अन्य जरूरी कार्यों में करते हैं।

    एवन सिंह के लिए यह सहायता खेती के मौसम में आने वाले खर्चों को संभालने में उपयोगी साबित होती है। उनका कहना है कि जब कृषि कार्य के लिए जरूरी सामग्री समय पर उपलब्ध हो जाती है, तो खेती की तैयारी बेहतर ढंग से की जा सकती है। इससे किसान का समय बचता है और खेती के प्रति उसका भरोसा भी मजबूत होता है।

    छोटे खर्चों में बड़ी राहत, खेती में बढ़ा आत्मविश्वास

    इसी ग्राम पंचायत के किसान नरेश यादव लगभग 4 एकड़ भूमि में खेती करते हैं। वे भी प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के लाभार्थी हैं। नरेश बताते हैं कि खेती में बीज, खाद और अन्य कृषि सामग्री के लिए समय-समय पर राशि की आवश्यकता होती है। ऐसे समय में सम्मान निधि से मिलने वाली सहायता किसानों के लिए राहत का काम करती है।

    उनका कहना है कि योजना से मिलने वाली आर्थिक सहायता ने किसानों के आत्मविश्वास को बढ़ाया है। किसान अब कृषि की तैयारी पहले से बेहतर ढंग से कर पा रहे हैं और अपनी खेती को अधिक व्यवस्थित बनाने की दिशा में प्रयास कर रहे हैं।

    किसान की जरूरत को समझने वाली सोच

    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की किसान-केंद्रित सोच का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि खेती के मौसम में किसानों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए उन्हें प्रत्यक्ष आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाए। PM-KISAN इसी उद्देश्य से किसानों को आय सहायता प्रदान करने वाली केंद्र सरकार की योजना है।

    सारबहरा के एवन सिंह और नरेश यादव की कहानी इस बात को सामने लाती है कि जब किसान को समय पर आर्थिक सहयोग मिलता है, तो वह अपनी कृषि जरूरतों को अधिक सहजता से पूरा कर सकता है। किसान के खाते में सीधे पहुंचने वाली सहायता उसे अपनी प्राथमिकताओं के अनुसार राशि का उपयोग करने की सुविधा देती है। PM-KISAN में लाभ सीधे बैंक खाते में हस्तांतरित किए जाने का प्रावधान है।

    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में किसानों तक पहुंच रहा योजनाओं का लाभ

    छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में केंद्र और राज्य सरकार की किसान हितैषी योजनाओं का लाभ पात्र किसानों तक पहुंचाने पर जोर दिया जा रहा है। किसानों के लिए योजनाओं की जानकारी, पात्रता और लाभ प्राप्त करने की प्रक्रिया को गांवों तक पहुंचाने से कृषि क्षेत्र में सरकारी सहायता का प्रभाव अधिक प्रत्यक्ष रूप से दिखाई दे रहा है।

    एवन सिंह और नरेश यादव जैसे किसानों के अनुभव बताते हैं कि योजनाओं का वास्तविक महत्व तब सामने आता है, जब उनका लाभ सही समय पर किसान तक पहुंचे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की किसान हितैषी पहल और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में योजनाओं के क्रियान्वयन का उद्देश्य किसानों को खेती के लिए आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराना है।

    किसानों के सपनों को मिल रहा आर्थिक आधार

    एवन सिंह और नरेश यादव की कहानी केवल दो किसानों की कहानी नहीं है, बल्कि यह उस बदलाव की तस्वीर है, जिसमें किसान को खेती के जरूरी खर्चों के लिए समय पर मिलने वाली सहायता से अपने निर्णय अधिक आत्मविश्वास के साथ लेने का अवसर मिलता है।

    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के किसान हितैषी विजन और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में योजनाओं का लाभ गांव और खेत तक पहुंचने से किसानों के आत्मविश्वास को नया आधार मिल रहा है। खेतों में मेहनत करने वाले किसानों के लिए यह आर्थिक सहयोग बेहतर कृषि, मजबूत परिवार और उज्ज्वल भविष्य की उम्मीद को और मजबूत कर रहा है।

  • सेवा की कहानी : पोषण पुनर्वास केंद्र से लौट रही बच्चों के चेहरे की मुस्कान

    सेवा की कहानी : पोषण पुनर्वास केंद्र से लौट रही बच्चों के चेहरे की मुस्कान

    विशेष लेख

    सेवा की कहानी : पोषण पुनर्वास केंद्र से लौट रही बच्चों के चेहरे की मुस्कान

    कुपोषण की पीड़ा से स्वस्थ और खुशहाल बचपन की ओर बढ़ रहे बच्चे

    बढ़ता वजन सिर्फ तराजू पर बढ़ती संख्या नहीं, लौटती ताकत, मुस्कान और बचपन की कहानी है

    रायपुर, 
     बचपन यानी खेलना, दौड़ना, हंसना, सीखना और सपने देखना। लेकिन जब कोई बच्चा कुपोषण की गिरफ्त में आता है तो कमजोरी उसके शरीर के साथ उसके सामान्य बचपन को भी प्रभावित करने लगती है। ऐसे बच्चों को समय पर उपचार और पोषण देकर स्वस्थ जीवन की ओर वापस लाने में पोषण पुनर्वास केंद्र महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

    सेवा संकल्प अभियान के बीच सरगुजा जिले के शासकीय रघुनाथ जिला चिकित्सालय, अम्बिकापुर में संचालित पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) से सामने आ रही बच्चों की कहानियां इसी बदलाव की तस्वीर पेश करती हैं। यहां कुपोषित बच्चों को चिकित्सकीय देखभाल और पोषण पुनर्वास के साथ माता-पिता को भी बच्चे के खान-पान और देखभाल से जुड़ी आवश्यक जानकारी दी जा रही है।

    यहां किसी बच्चे का बढ़ता हुआ वजन महज तराजू पर बदलता आंकड़ा नहीं है। उसके पीछे बच्चे की बेहतर होती पोषण स्थिति, माता-पिता की उम्मीद और स्वास्थ्यकर्मियों की सतत देखभाल जुड़ी है। यह उस बचपन को वापस पाने की कोशिश है, जिसे कुपोषण ने कमजोर कर दिया था।

    कुपोषण केवल कम वजन की समस्या नहीं

    कुपोषण को केवल बच्चे के दुबले या कमजोर दिखाई देने तक सीमित करके नहीं देखा जा सकता। गंभीर कुपोषण बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता और वृद्धि-विकास को प्रभावित कर सकता है। लंबे समय तक पर्याप्त पोषण नहीं मिलने का असर बच्चे के शारीरिक विकास के साथ सीखने और सामान्य गतिविधियों में उसकी भागीदारी पर भी पड़ सकता है।

    यही कारण है कि कुपोषण की समय पर पहचान और उपचार महत्वपूर्ण है। बच्चे को उचित पोषण और चिकित्सकीय देखभाल देकर स्वस्थ वृद्धि की दिशा में आगे बढ़ाना उसके वर्तमान स्वास्थ्य के साथ भविष्य में निवेश भी है।

    जहां उपचार के साथ लौटता है बचपन

    पोषण पुनर्वास केंद्र गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों के उपचार और पोषण पुनर्वास की महत्वपूर्ण व्यवस्था है। यहां बच्चे की स्वास्थ्य एवं पोषण स्थिति की निगरानी, आवश्यक चिकित्सकीय देखभाल और पोषणयुक्त आहार उपलब्ध कराने के साथ माता-पिता को बच्चे की देखभाल तथा खान-पान से जुड़ी जानकारी भी दी जाती है।

    इस व्यवस्था का उद्देश्य केवल बच्चे का वजन बढ़ाना नहीं, बल्कि उसे स्वस्थ वृद्धि की दिशा में आगे बढ़ाना और परिवार को ऐसी जानकारी देना भी है जिससे घर लौटने के बाद बच्चे के पोषण का बेहतर ध्यान रखा जा सके।

    20 बिस्तरों का केंद्र, सैकड़ों बच्चों के लिए उम्मीद

    शासकीय रघुनाथ जिला चिकित्सालय, अम्बिकापुर में संचालित 20 बिस्तरों वाला पोषण पुनर्वास केंद्र कुपोषित बच्चों और उनके परिवारों के लिए उम्मीद का केंद्र बन रहा है।

    वर्ष 2021-22 में यहां 189 बच्चों के उपचार के साथ दर्ज दर 73 प्रतिशत थी। अप्रैल से सितम्बर 2026 की अवधि में 248 बच्चों के उपचार के साथ यह दर बढ़कर 88 प्रतिशत दर्ज की गई है।

    इन आंकड़ों के पीछे उन परिवारों की अनेक कहानियां हैं जो अपने कमजोर बच्चे को लेकर चिंता के साथ केंद्र पहुंचे और उपचार एवं पोषण पुनर्वास के बाद बेहतर स्वास्थ्य की उम्मीद लेकर घर लौटे।

    शिवाशी, रश्मि, प्रतीक और युवराज के बढ़ते वजन में दिखी उम्मीद

    केंद्र में उपचार प्राप्त करने वाले बच्चों के रिकॉर्ड इस बदलाव को और स्पष्ट करते हैं। शिवाशी का वजन 7.6 किलोग्राम से बढ़कर 8.840 किलोग्राम, रश्मि का 9.3 किलोग्राम से 10.720 किलोग्राम, प्रतीक का 8.5 किलोग्राम से 9.370 किलोग्राम तथा युवराज का वजन 12 किलोग्राम से बढ़कर 13.980 किलोग्राम दर्ज किया गया।

    ये आंकड़े केवल वजन में आए बदलाव को नहीं बताते, बल्कि उपचार और पोषण पुनर्वास के बाद बेहतर वृद्धि की दिशा में बच्चों के बढ़ते कदमों की तस्वीर भी प्रस्तुत करते हैं।

    हर बच्चे की स्वास्थ्य स्थिति अलग होती है और केवल वजन बढ़ने के आधार पर संपूर्ण स्वास्थ्य का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। इसके बावजूद नियमित निगरानी में वजन और वृद्धि में सुधार बच्चे की पोषण स्थिति का आकलन करने के महत्वपूर्ण संकेतकों में शामिल हैं।

    बढ़ता वजन यानी लौटती उम्मीद

    कुपोषण से कमजोर बच्चा कई बार अपनी उम्र के दूसरे बच्चों की तरह सामान्य गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी नहीं कर पाता। बीमारी और कमजोरी परिवार की चिंता भी बढ़ाती है।

    ऐसे में उपचार और उचित पोषण के बाद जब बच्चे की स्थिति में सुधार दिखाई देता है, तो यह पूरे परिवार के लिए राहत लेकर आता है। माता-पिता के लिए बच्चे का स्वस्थ होना किसी आंकड़े से कहीं अधिक मायने रखता है।

    इसीलिए पोषण पुनर्वास केंद्र में किसी बच्चे का बढ़ता वजन केवल तराजू पर बढ़ती संख्या नहीं है। वह बच्चे की बेहतर होती पोषण स्थिति के साथ परिवार में लौटती उम्मीद की कहानी भी है।

    अस्पताल से घर तक जारी रहती है सुपोषण की यात्रा

    एनआरसी में उपचार पूरा होना महत्वपूर्ण पड़ाव है, लेकिन बच्चे को कुपोषण से दूर रखने की जिम्मेदारी इसके बाद भी जारी रहती है। घर लौटने के बाद उम्र के अनुसार पर्याप्त और विविध आहार, स्वच्छता, बीमारी के दौरान उचित देखभाल तथा बच्चे की वृद्धि की नियमित निगरानी महत्वपूर्ण होती है।

    इसलिए एनआरसी में माता-पिता को बच्चे के पोषण और देखभाल से संबंधित व्यवहार की जानकारी देना उपचार प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उद्देश्य यह है कि परिवार स्वयं भी बच्चे की पोषण स्थिति को बेहतर बनाए रखने में सक्रिय भागीदारी करे।

    स्वास्थ्य विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग सहित संबंधित अमले का समन्वय इस व्यवस्था को और मजबूत बनाता है। एक ओर स्वास्थ्य संस्थानों में उपचार एवं पोषण पुनर्वास और दूसरी ओर समुदाय स्तर पर आंगनबाड़ी एवं स्वास्थ्य सेवाओं के माध्यम से निगरानी और मार्गदर्शन—दोनों मिलकर कुपोषण के विरुद्ध प्रभावी व्यवस्था तैयार करते हैं।

    स्वस्थ बच्चा यानी स्वस्थ भविष्य की मजबूत नींव

    बच्चे के जीवन के शुरुआती वर्ष उसके शारीरिक और मानसिक विकास के लिए महत्वपूर्ण होते हैं। पर्याप्त पोषण मिलने पर बच्चा स्वस्थ वृद्धि की दिशा में आगे बढ़ता है, अधिक सक्रिय रह सकता है और सीखने तथा सामाजिक गतिविधियों में बेहतर भागीदारी कर सकता है।

    इसलिए किसी बच्चे को कुपोषण से बाहर निकालने का प्रयास केवल वर्तमान बीमारी या कमजोरी का उपचार नहीं है। यह उसके बेहतर बचपन और भविष्य को मजबूत करने की दिशा में किया गया निवेश भी है। स्वस्थ और सुपोषित बच्चे ही स्वस्थ समाज और मजबूत मानव संसाधन की नींव बनते हैं।

    कुपोषण से लड़ाई अस्पताल से घर की थाली तक

    कुपोषण से मुकाबला केवल अस्पताल के बिस्तर पर नहीं किया जा सकता। इसकी सफलता बच्चे की घर की थाली, माता-पिता की जागरूकता, आंगनबाड़ी की निगरानी, स्वास्थ्यकर्मियों की सलाह और समय पर उपचार की संयुक्त व्यवस्था पर निर्भर करती है।

    पोषण पुनर्वास केंद्र की वास्तविक सफलता भी इसी में है कि उपचार के बाद बच्चा बेहतर पोषण स्थिति के साथ घर लौटे और परिवार उन व्यवहारों को अपनाए जो उसे स्वस्थ बनाए रखने में मदद करें।

    अम्बिकापुर के एनआरसी में बच्चों के उपचार और पोषण पुनर्वास के साथ परिवारों को जागरूक करने का प्रयास इसी सोच को आगे बढ़ा रहा है।

    हर बच्चे को मिले स्वस्थ बचपन का अवसर

    कुपोषण किसी बच्चे की पहचान नहीं है। यह ऐसी स्वास्थ्य एवं पोषण संबंधी स्थिति है, जिसकी समय पर पहचान, उपचार और निरंतर देखभाल से बच्चे को स्वस्थ वृद्धि की राह पर आगे बढ़ाने का प्रयास किया जा सकता है।

    सेवा संकल्प अभियान के बीच अम्बिकापुर के पोषण पुनर्वास केंद्र की ये कहानियां बताती हैं कि सेवा का सबसे मानवीय रूप तब दिखाई देता है, जब कमजोर बच्चे के स्वास्थ्य में सुधार आता है और परिवार के चेहरे पर चिंता की जगह उम्मीद लौटती है।

    20 बिस्तरों वाला यह केंद्र इसलिए केवल एक स्वास्थ्य सुविधा नहीं है। यहां उपचार पाने वाला हर बच्चा कुपोषण से सुपोषण, कमजोरी से बेहतर स्वास्थ्य और मुश्किलों से खुशहाल बचपन की ओर बढ़ती एक नई कहानी है।

    और जब किसी बच्चे का वजन बढ़ता है, उसकी सक्रियता लौटती है और परिवार उसे फिर स्वस्थ होते देखता है, तब सेवा का वास्तविक अर्थ सामने आता है— बढ़ता वजन सिर्फ तराजू पर बढ़ती संख्या नहीं, बल्कि लौटती ताकत, मुस्कान और बचपन की कहानी है।

  • छत्तीसगढ़ हॉकी लीग में 6 टीमें लेंगी हिस्सा, 28-29 सितंबर को ट्रायल

    छत्तीसगढ़ हॉकी लीग में 6 टीमें लेंगी हिस्सा, 28-29 सितंबर को ट्रायल

    रायपुर.

    रायपुर में होने वाले छत्तीसगढ़ हॉकी लीग के पहले सीजन के टीमों के चयन के लिए खेल एवं युवा कल्याण विभाग ने प्रक्रिया शुरू कर दी है। टीमों के लिए सरदार वल्लभ भाई पटेल अंतरराष्ट्रीय हॉकी स्टेडियम के पिच-1 में 28 और 29 सितम्बर को खिलाड़ियों का चयन ट्रायल आयोजित किया जाएगा।

    चयन ट्रायल के सुचारू आयोजन, आवश्यक समन्वय एवं तकनीकी सहायता के लिए विभाग ने तीन अधिकारियों की टीम बनाई है। चयन ट्रायल के लिए आवश्यक तकनीकी एवं आयोजन संबंधी कार्यवाही छत्तीसगढ़ हॉकी संघ द्वारा निर्धारित नियमों एवं मापदंडों के अनुसार की जाएगी। खेल एवं युवा कल्याण विभाग की संचालक आकांक्षा शिक्षा खलखो ने छत्तीसगढ़ हॉकी संघ को परिपत्र जारी कर खिलाड़ियों के चयन ट्रायल के लिए जरूरी प्रक्रिया पूरी करने को कहा गया है। विभाग ने निर्धारित तिथियों एवं समय पर चयन ट्रायल के आयोजन के साथ ही ट्रायल प्रारंभ होने के पहले चयन पूर्व मानदंडों और चयन प्रक्रिया का लिखित विवरण उपलब्ध कराने को कहा है। विभाग ने चयन प्रक्रिया पारदर्शी और निर्धारित मानदंडों के अनुरूप संपादित कर चयनित 6 टीमों की सूची एवं चयन प्रक्रिया से संबंधित प्रतिवेदन खेल संचालनालय को उपलब्ध कराने को कहा है।

    इन अधिकारियों को मिली जिम्मेदारी
    खिलाड़ियों के चयन के लिए होने वाले ट्रायल को सुव्यवस्थित तरीके से संचालित करने के लिए खेल एवं युवा कल्याण विभाग ने आवश्यक तकनीकी और आयोजन संबंधी व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी तीन अधिकारियों को सौंपी है। इनमें खेल अधिकारी दीनू प्रसाद पटेल, रायपुर में हॉकी की वरिष्ठ प्रशिक्षक रश्मि संध्या एक्का और बिलासपुर में वरिष्ठ हॉकी प्रशिक्षक राकेश टोप्पो शामिल हैं।

    राज्य के विभिन्न क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करते उतरेंगी 6 टीमें
    छत्तीसगढ़ हॉकी लीग के पहले सीजन में राज्य के विभिन्न क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करने वाली छह टीमें मैदान में उतरेंगी। इनमें राजधानी रॉयल्स, चित्रकूट चैलेंजर्स, संस्कारधानी स्ट्राइकर्स, चक्रधर चैंपियंस, न्यायधानी नाइट्स और मैनपाट टाइटन्स शामिल हैं। इन टीमों में खेलने वाले खिलाड़ियों के चयन के लिए ट्रायल 28-29 सितम्बर को रायपुर के सरदार वल्लभ भाई पटेल अंतरराष्ट्रीय हॉकी स्टेडियम के पिच-1 में सवेरे 9 बजे से आयोजित किए जा रहे हैं।

  • खेल के मैदान से स्वरोजगार की ओर—पुष्पेन्द्र के ‘एक्सट्रीम फिटनेस हब’ से 600 युवाओं को मिल रही सेहत की नई दिशा

    खेल के मैदान से स्वरोजगार की ओर—पुष्पेन्द्र के ‘एक्सट्रीम फिटनेस हब’ से 600 युवाओं को मिल रही सेहत की नई दिशा

    खेल के मैदान से स्वरोजगार की ओर—पुष्पेन्द्र के 'एक्सट्रीम फिटनेस हब' से 600 युवाओं को मिल रही सेहत की नई दिशा

    ​रायपुर

           ​दृढ़ इच्छाशक्ति, सही मार्गदर्शन और शासकीय योजनाओं का सहारा मिले तो दूरस्थ क्षेत्रों के युवाओं के सपने भी उड़ान भर सकते हैं। नारायणपुर जिले के पुष्पेन्द्र शर्मा की कहानी इसका जीवंत उदाहरण है। कभी मैदान पर युवाओं को क्रिकेट की बारीकियां सिखाने वाले पुष्पेन्द्र आज 'एक्सट्रीम फिटनेस हब' के जरिए जिले के 600 से अधिक युवाओं और नागरिकों को स्वास्थ्य एवं फिटनेस की सुविधा दे रहे हैं।
        
    ​क्रिकेट कोचिंग से हुई शुरुआत

         पुष्पेन्द्र शर्मा का सफर क्रिकेट कोचिंग से शुरू हुआ था। वे स्थानीय क्रिकेट क्लब में बतौर कोच बच्चों और युवाओं को प्रशिक्षित कर अंडर-19 स्तर तक तैयार करते थे। खिलाड़ियों के साथ काम करते हुए उन्होंने महसूस किया कि खेल कौशल को निखारने के लिए बेहतर शारीरिक फिटनेस और नियमित व्यायाम बेहद जरूरी है। नारायणपुर में अत्याधुनिक जिम और फिटनेस सेंटर की कमी उन्हें हमेशा खलती थी।

    ​वित्तीय संकट और जिला उद्योग केंद्र का सहारा

          नारायणपुर में एक सर्वसुविधायुक्त फिटनेस सेंटर खोलने का विचार तो पुष्पेन्द्र के मन में आ गया, लेकिन सीमित आर्थिक संसाधन सबसे बड़ी बाधा थे। इस मोड़ पर उन्होंने जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र, नारायणपुर से संपर्क किया। विभाग के अधिकारियों ने उनकी कार्ययोजना को समझा और प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) के तहत ऋण का प्रकरण तैयार कर स्वीकृति हेतु बैंक भेजा।

    ​5 लाख की लागत से साकार हुआ सपना

           योजना के तहत केनरा बैंक से प्राप्त वित्तीय सहायता से पुष्पेन्द्र का सपना साकार हुआ। कुल 5 लाख रुपये की लागत से नारायणपुर के बंगलापारा में 'एक्सट्रीम फिटनेस हब' की नींव रखी गई। इस प्रोजेक्ट में 90 प्रतिशत राशि बैंक ऋण से और शेष 10 प्रतिशत राशि पुष्पेन्द्र की अपनी पूंजी से जुटाई गई।

    ​600 से अधिक सदस्य ले रहे लाभ

           शुरुआत में एक व्यावसायिक पहल के रूप में शुरू हुआ यह सेंटर आज नारायणपुर के युवाओं और नागरिकों के लिए सेहत का केंद्र बन चुका है। वर्तमान में यहाँ 600 से अधिक पंजीकृत सदस्य नियमित रूप से व्यायाम और फिटनेस प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं।

    ​स्वरोजगार से समाज सेवा की मिसाल

          पुष्पेन्द्र शर्मा बताते हैं कि नारायणपुर जैसे क्षेत्र में सीमित पूंजी के साथ जिम शुरू करना आसान नहीं था। शासकीय योजना, अधिकारियों के मार्गदर्शन और केनरा बैंक से मिली वित्तीय सहायता ने मेरे विचार को धरातल पर उतारा।
    ​'सेवा संकल्प अभियान' के तहत पुष्पेन्द्र शर्मा की यह यात्रा यह साबित करती है कि अगर सही दिशा में कदम बढ़ाए जाएं, तो सरकारी योजनाएं न केवल एक व्यक्ति को आत्मनिर्भर बनाती हैं, बल्कि पूरे समाज के लिए सकारात्मक बदलाव का माध्यम भी बनती हैं।