अंबाला
अंबाला से सटे करधान गांव में शामलात जमीन की नियमों को ताक पर रखकर रजिस्ट्रियां करने के मामले में अब एक वरिष्ठ आइएएस समेत कई तहसीलदारों के खिलाफ विजिलेंस अब मुकदमा दर्ज करने की तैयारी कर रही है। करीब छह साल पुराने मामले में जांच पूरी होने के बावजूद लेटलतीफी होती रही। मामले में सीनियर अधिकारियों के लिप्त होने के संकेत मिलने के कारण विजिलेंस को मुकदमा दर्ज करने की हरी झंडी मिलने में देरी हुई। इस मामले की जांच पूरी होने के बावजूद फाइल मुख्य सचिव और विजिलेंस कार्यालय में घूमती रही। इस फाइल पर बार-बार आपत्तियां लगाईं, जिसको विजिलेंस ने दूर कर दिया है और अब मुकदमा दर्ज करने की हरी झंडी मिल गई है। इस गड़बड़झाले की जांच एडीसी स्तर के अधिकारी कर चुके हैं और अपनी जांच रिपोर्ट में स्पष्ट संकेत दे चुके हैं कि इस मामले में अधिकारियों की संलिप्तता से इंकार नहीं किया जा सकता।

किसी भी कर्मचारी या अधिकारी का नाम सार्वजनिक नहीं किया गया
हालांकि जांच रिपोर्ट में किसी भी कर्मचारी या अधिकारी के नाम को सार्वजनिक नहीं किया गया था, लेकिन विजिलेंस ने जांच कर तहसील और डीसी कार्यालय से पत्राचार किया। इस पत्राचार में अंबाला के डीसी एवं मंडल कमिश्नर रहे वरिष्ठ आइएएस अधिकारी का नाम सामने आया। बता दें कि सन 2010 से 2014 तक शामलात जमीन की रजिस्ट्रियों का खेल अंबाला में चलता रहा। करीब 30 रजिस्ट्रियां की गईं।

कलेक्टर एवं डीसी के पास विचाराधीन था मामला
यह मामला शामलात जमीन से जुड़ा होने के कारण जिले के कलेक्टर एवं डीसी के पास विचाराधीन था। फाइनल किया थाना कि शामलात जमीन की हिस्सेदारी की जानी है या नहीं। इसके बावजूद रजिस्ट्रियां कर दी गईं। बेशकीमती जमीन एक-एक कर आगे से आगे बिकती रही। इसी बीच मामले की जांच एडीसी स्तर के अधिकारी ने की, जिसमें स्पष्ट हो गया कि मामला कलेक्टर कोर्ट में विचाराधीन होने के बावजूद रजिस्ट्रियां कर दी गईं। उस समय के डीसी रहे आइएएस अधिकारी पर विभागीय तलवार लटक गई, लेकिन अधिकारी के रसूख के चलते विजिलेंस की कार्रवाई धीमी हो गई।

प्रदेश के गृह मंत्री अनिल विज ने भी विजिलेंस के अधिकारियों से इस प्रकरण पर जवाब तलब किया तो बताया गया कि मामले की जांच पूरी कर मुख्य सचिव कार्यालय भेज दी गई है। बावजूद इसके मुख्य सचिव कार्यालय से कोई न कोई आपत्ति लगती रही। पिछले दिनों विजिलेंस के महानिदेशक शत्रुजीत कपूर ने भी विजिलेंस में दर्ज और विचाराधीन चल रहे मामलों की समीक्षा की, जिसमें यह मामला भी सुर्खियों में आया। इस मामले को दर्ज करने के तत्काल आदेश दिए गए, जिसके बाद ठंडे बस्ते में पड़ी फाइलें हिलनी शुरू हो गईं।

यह है 13ए
अगर पंचायत के पास सामूहिक उपयाेग के बाद जगह बचती है, तो इस्तेमाल के पहले के मालिक अपनी भूमि को लेने के लिए हिस्सा मुताबिक तकसीम का केस कलेक्टर एवं डीसी की कोर्ट में डाल सकते हैं। डीसी के पास भूमि तकसीम कर रजिस्ट्री कराने की शक्तियां प्रदान थी। लेकिन रजिस्ट़्री उसी के नाम होगी, जो इस्तेमाल से पहले भूमि का हिस्सेदार रहा हो अन्यथा यह गैरकानूनी माना जाएगा। इसके लिए लंबी प्रक्रिया के बाद तय होता कि जमीन के हिस्से होंगे, तो किस-किस के नाम। करधान की शामलात जमीन का मामला भी कलेक्टर के पास ही विचाराधीन था, लेकिन बाद में नियम ताक पर रखकर रजिस्ट्रियां कर दी गईं।