नई दिल्ली
राजधानी में मंकीपाक्स का पहला मामला सामने आने के बाद केंद्र सरकार का स्वास्थ्य विभाग बीमारी के रोकथाम के अभियान में जुट गया है। स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय ने केंद्र सरकार के आरएमएल, सफदरजंग अस्पताल और लेडी हार्डिंग मेडिकल कालेज से जुड़ अस्पतालों में अलर्ट जारी किया है। महानिदेशालय ने इन अस्पतालों को मंकीपाक्स के इलाज के लिए तैयार रहने को कहा है।अस्पतालों में कोरोना के इलाज के लिए आरक्षित ज्यादातर बेड खाली हैं। इसमें से ही कुछ बेड मंकीपाक्स के मरीजों के लिए आरक्षित किए जाएंगे। आरएमएल अस्पताल के चिकित्सा निदेशक डा. बीएल शेरवाल ने कहा कि मंकीपाक्स के लिए आइसोलेशन वार्ड बनाया जाएगा।

लेडी हार्डिंग मेडिकल कालेज के निदेशक डा. रामचंद्र ने कहा कि अस्पताल में मंकीपाक्स के इलाज की सुविधा दी जाएगी। कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले लोग रहें सतर्कडा. रामचंद्र ने कहा कि चिकेनपाक्स की अपेक्षा मंकीपाक्स की बीमारी अधिक दिन तक रहती है। इसमें बुखार के साथ शरीर में दर्द अधिक होता है और गर्दन के पास लिम्फ नोड्स में सूजन के कारण गांठ बन जाती है। कमजोर प्रतिरोधक क्षमता व पहले से किसी बीमारी से पीड़ित लोगों को इसका संक्रमण होने पर थोड़ी परेशानी हो सकती है। जिन्हें पहले से कोई बीमारी नहीं है, वे संक्रमित होने पर जल्दी ठीक हो जाएंगे। बच्चों को चिकेनपाक्स अधिक होता है। इसलिए बच्चों व कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों को अधिक सतर्क रहने की जरूरत है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) द्वारा मंकीपाक्स को स्वास्थ्य इमरजेंसी घोषित करने के बाद इसका पहला मामला दिल्ली में भी सामने आया है। अब मंकीपाक्स के मामलों की निगरानी बढ़ जाएगी। मंकीपाक्स से बहुत बड़ा खतरा नहीं है, क्योंकि यह कोई नई बीमारी नहीं, बल्कि 50 साल पुरानी है, जो जानवरों से इंसान में पहुंची। बंदर, गिलहरी के अलावा कई जानवर इसके संवाहक होते हैं। पहली बार वर्ष 1970 में अफ्रीकी देश कांगो में यह बीमारी इंसान में पाई गई थी। इसके बाद से कई बार इस बीमारी का प्रकोप मध्य व पश्चिमी अफ्रीकी देशों में हो चुका है। अमेरिका में करीब 20 साल पहले पहले बड़े स्तर पर इसका संक्रमण हुआ था। इसके अलावा भी कई देशों में इस बीमारी का प्रकोप हो चुका है। यह डीएनए वायरस है। इसलिए इसका कोरोना की तरह बार-बार म्युटेशन नहीं होता। कोरोना की तरह फैलाव की आशंका बहुत कम है और रोकथाम करना आसान है।